नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने गुरुवार को रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। अपने भाषण में Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कहा कि देश में लोगों को अपनी बात कहने से रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब लोग चुप बैठने वाले नहीं हैं।
Rahul Gandhi ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस का काम केवल चुनाव लड़ना नहीं है, बल्कि देश के लोगों की आवाज को मजबूत करना भी है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि “हम इनको पागल कर देंगे।” Rahul Gandhi ने यह टिप्पणी सरकार पर विपक्ष के लगातार दबाव और जनता के सवालों के संदर्भ में की। taazanews24x7.com
Rahul Gandhi के भाषण में सबसे ज्यादा क्या रहा चर्चा में?
Rahul Gandhi का पूरा भाषण कई राजनीतिक मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमता रहा। उन्होंने एक तरफ लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की, तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उनके भाषण में सबसे ज्यादा चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणी की रही। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री रात में नहीं सोते और विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठाकर दबाव बनाए रखेगा।
इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि “हम इनको पागल कर देंगे।” Rahul Gandhi का यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें उन्होंने सीधे प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की राजनीतिक शैली पर निशाना साधा।
हालांकि इस बयान को Rahul Gandhi के पूरे भाषण के संदर्भ में देखना जरूरी है। उन्होंने इसे किसी व्यक्तिगत विवाद के बजाय सरकार के खिलाफ विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई और जनता की आवाज से जोड़कर पेश किया।
‘देश में लोगों को बोलने से रोका जा रहा’
Rahul Gandhi ने अपने भाषण में सबसे ज्यादा जोर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोगों को अपनी बात रखने से रोका जा रहा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को अब समझ में आने लगा है कि देश के लोग चुप रहने वाले नहीं हैं। उनके मुताबिक, जब जनता अपने सवाल पूछती है और सरकार से जवाब मांगती है तो विपक्ष की जिम्मेदारी उन सवालों को मजबूती से उठाने की है।
Rahul Gandhi ने छात्रों के प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि युवाओं को भी अपनी बात कहने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने ऐसे लोगों और परिवारों का जिक्र किया जो अपनी समस्याओं को लेकर सरकार तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका कहना था कि लोकतंत्र में असहमति को दबाना समाधान नहीं हो सकता। अगर किसी व्यक्ति की राय सरकार या विपक्ष से अलग है तो उसके साथ राजनीतिक और वैचारिक बहस की जानी चाहिए।
यही वजह रही कि Rahul Gandhi ने अपने भाषण में “आवाज” और “अभिव्यक्ति” को बार-बार केंद्र में रखा।

RSS पर हमला, लेकिन बोलने के अधिकार की रक्षा की बात
राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर भी काफी तीखा बयान दिया। उन्होंने RSS की विचारधारा और संगठन के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी का कहना था कि वह RSS की विचारधारा से सहमत नहीं हैं, लेकिन अगर कभी RSS की आवाज दबाने की कोशिश की जाएगी तो वह उसके बोलने के अधिकार की रक्षा करेंगे।
राजनीतिक रूप से राहुल गांधी का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और RSS के बीच वैचारिक मतभेद लंबे समय से सार्वजनिक रहे हैं। ऐसे में RSS के विचारों का विरोध करते हुए उसके अभिव्यक्ति के अधिकार की बात करना राहुल गांधी के भाषण का अलग पहलू रहा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब केवल अपनी पसंद के लोगों को बोलने की आजादी देना नहीं है। लोकतंत्र में उस व्यक्ति के अधिकार की भी रक्षा करनी होगी जिसकी विचारधारा से आप सहमत नहीं हैं।
राहुल गांधी ने इसी संदर्भ में कहा कि अगर कोई व्यक्ति ऐसी बात करता है जिससे आप सहमत नहीं हैं तो उसका जवाब दिया जा सकता है, लेकिन उसे बोलने से रोकना लोकतांत्रिक तरीका नहीं है।
RSS के ‘कॉरपोरेटाइजेशन’ का लगाया आरोप
राहुल गांधी ने RSS के बदलते स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS में बड़े कारोबारी और बड़ी पूंजी का प्रभाव बढ़ गया है।
अपने भाषण में उन्होंने पुराने दौर और मौजूदा दौर के RSS के बीच अंतर बताने की कोशिश की। राहुल गांधी के मुताबिक, पहले RSS से छोटे कारोबारी और समाज के अलग-अलग वर्ग जुड़े हुए थे, लेकिन अब संगठन में बड़े आर्थिक हितों का प्रभाव बढ़ गया है।
उन्होंने नोटबंदी और GST का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने दावा किया कि इन दोनों आर्थिक फैसलों का सबसे ज्यादा असर छोटे व्यापारियों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा।
कांग्रेस लंबे समय से नोटबंदी और GST को लेकर मोदी सरकार पर हमला करती रही है। राहुल गांधी ने एक बार फिर इन्हीं मुद्दों को उठाकर सरकार की आर्थिक नीतियों को छोटे कारोबारियों के नजरिए से घेरने की कोशिश की।
हालांकि RSS और सरकार के बारे में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। इन मुद्दों पर बीजेपी या RSS का पक्ष अलग हो सकता है और किसी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए दोनों पक्षों के बयानों को देखना जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी पर ‘गले लगाना ही विदेश नीति’ वाला तंज
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे “गले लगाना ही विदेश नीति” बन गया है।
राहुल गांधी ने इस टिप्पणी के जरिए प्रधानमंत्री मोदी की विदेशी नेताओं के साथ व्यक्तिगत कूटनीति और मुलाकातों पर निशाना साधा।
अपने भाषण के दौरान उन्होंने मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित को गले लगाकर भी अपनी बात को समझाने की कोशिश की।
राहुल गांधी का तर्क था कि विदेश नीति केवल व्यक्तिगत संबंधों और मुलाकातों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारत को अपनी रणनीतिक ताकत और राष्ट्रीय हितों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय फैसले लेने चाहिए।
यह मुद्दा राहुल गांधी के राजनीतिक भाषणों में लगातार महत्वपूर्ण रहा है। वह कई मौकों पर मोदी सरकार की विदेश नीति को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और चीन, पाकिस्तान तथा अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर सरकार से जवाब मांगते रहे हैं।
इंदिरा गांधी का जिक्र, बोले- भारत के पास बड़ा मौका
विदेश नीति की चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र किया।
उन्होंने अपने बचपन की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वह करीब 12 वर्ष के थे, तब इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के साथ अमेरिका गए थे।
राहुल गांधी के मुताबिक, उस समय इंदिरा गांधी ने विदेश नीति को लेकर एक अलग दृष्टिकोण रखा था। उनका कहना था कि भारत का प्रधानमंत्री विदेश यात्रा केवल दोस्ती करने के लिए नहीं करता, बल्कि देश के हितों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाता है।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर भारत आज अपनी ताकत को पहचानता और देश के पास इंदिरा गांधी जैसा मजबूत नेतृत्व होता तो अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां भारत के लिए बहुत बड़ा अवसर बन सकती थीं।
उन्होंने ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान के संदर्भ में मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र किया और आरोप लगाया कि भारत को जिस भूमिका में होना चाहिए था, वहां दूसरे देश आगे निकल गए।
राहुल गांधी की यह टिप्पणी उनकी विदेश नीति की आलोचना का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
पाकिस्तान को लेकर भी सरकार पर सवाल
राहुल गांधी ने अपने भाषण में पाकिस्तान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में भारत को अपनी रणनीतिक स्थिति का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करना चाहिए।
उनका आरोप था कि भारत के पास वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका था, लेकिन पाकिस्तान बीच में आ गया।
राहुल गांधी के मुताबिक, भारत को अपनी विदेश नीति में राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखना चाहिए। उन्होंने सरकार पर यह आरोप लगाने की कोशिश की कि मौजूदा विदेश नीति का लाभ भारत को उस स्तर पर नहीं मिल रहा है, जिसकी उम्मीद की जा सकती थी।
विदेश नीति पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मतभेद लंबे समय से रहे हैं। बीजेपी जहां मोदी सरकार की विदेश नीति को भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका से जोड़ती है, वहीं कांग्रेस कई मुद्दों पर सरकार की रणनीति को लेकर सवाल उठाती रही है।
चीन और अरुणाचल प्रदेश का मुद्दा भी उठा
राहुल गांधी ने चीन को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि चीन ने कुछ इलाकों में भारतीय सेना की पेट्रोलिंग रोक दी है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री कार्यालय से मिलने वाली जानकारी का भी जिक्र किया।
उन्होंने रक्षा और गृह मंत्रालय की भूमिका को लेकर सवाल उठाए और सरकार से चीन के साथ सीमा विवाद पर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।
हालांकि सीमा और सैन्य गतिविधियों से जुड़े मामलों में आधिकारिक सरकारी बयान और सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। राहुल गांधी द्वारा मंच से किए गए दावों को उसी राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
चीन का मुद्दा भारत की राजनीति में बेहद संवेदनशील रहा है। इसलिए विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों और सरकार की ओर से दिए गए जवाबों के बीच तथ्यात्मक अंतर को समझना जरूरी होगा।

अमित शाह पर भी राहुल गांधी का निशाना
राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी कटाक्ष किया।
उन्होंने अमित शाह के राजनीतिक कद और सरकार में उनकी भूमिका पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि सत्ता पक्ष अब विपक्ष की बढ़ती सक्रियता को महसूस कर रहा है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में अमित शाह को लेकर चाणक्य और सरदार पटेल जैसे संदर्भों का इस्तेमाल किया। उनका अंदाज पूरी तरह राजनीतिक और व्यंग्यात्मक रहा।
राहुल गांधी के इस बयान का उद्देश्य साफ तौर पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर राजनीतिक दबाव बनाने का था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अमित शाह बीजेपी के सबसे प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, इसलिए कांग्रेस की ओर से उन पर हमला पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
‘PM मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते?’
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि पहले उन्हें लगता था कि प्रधानमंत्री का प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करना किसी तरह की रणनीति या मार्केटिंग का हिस्सा है। लेकिन बाद में उन्हें इसकी वजह समझ में आने का दावा किया।
राहुल गांधी लंबे समय से प्रधानमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री को पत्रकारों के सीधे सवालों का जवाब देना चाहिए।
यह मुद्दा कांग्रेस और बीजेपी के बीच लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। कांग्रेस इसे जवाबदेही और पारदर्शिता से जोड़ती है, जबकि प्रधानमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रमों, भाषणों और मीडिया संवादों को लेकर बीजेपी अलग दृष्टिकोण रखती है।
राहुल गांधी बोले- ‘लोग अब चुप नहीं रहेंगे’
राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक बात को बार-बार दोहराया कि देश के लोग अब चुप नहीं रहने वाले हैं।
उनका कहना था कि सरकार को यह समझ में आ चुका है कि लोग सवाल पूछ रहे हैं। विपक्ष की भूमिका इन सवालों को और मजबूत तरीके से सामने लाने की है।
राहुल गांधी के मुताबिक, कांग्रेस का काम केवल सत्ता में आने की कोशिश करना नहीं है। पार्टी को जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और उन्हें राजनीतिक मंच पर उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी, छोटे कारोबार, किसानों, छात्रों और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
इसी विचार के साथ उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी को लोकतंत्र की बुनियाद बताया।
राहुल गांधी के भाषण का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश
राहुल गांधी के भाषण को अगर पूरे राजनीतिक संदर्भ में देखें तो इसमें तीन स्पष्ट संदेश दिखाई देते हैं।
पहला—सरकार पर लगातार दबाव। राहुल गांधी ने संकेत दिया कि कांग्रेस केंद्र सरकार को हर मुद्दे पर घेरने की कोशिश करेगी।
दूसरा—जनता की आवाज का मुद्दा। कांग्रेस खुद को उन लोगों की आवाज के रूप में पेश करना चाहती है जो सरकार के खिलाफ सवाल उठाना चाहते हैं।
तीसरा—मोदी सरकार की नीतियों पर सीधा हमला। विदेश नीति से लेकर GST, नोटबंदी और चीन तक राहुल गांधी ने कई मुद्दों को एक साथ उठाया।
इस तरह उनका भाषण केवल प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक हमला नहीं था, बल्कि कांग्रेस की वैकल्पिक राजनीतिक सोच को सामने रखने की कोशिश भी थी।
क्यों महत्वपूर्ण है राहुल गांधी का यह बयान?
राहुल गांधी का यह भाषण ऐसे समय आया है जब भारतीय राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव लगातार तेज है।
“हम इनको पागल कर देंगे” जैसी टिप्पणी राजनीतिक रूप से काफी आक्रामक है। इससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब सरकार के खिलाफ अपनी राजनीतिक भाषा को और ज्यादा सीधा रखना चाहती है।
लेकिन राहुल गांधी के भाषण में सिर्फ आक्रामक बयान ही नहीं थे। उन्होंने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी जोर दिया।
RSS को लेकर उनका बयान इसका उदाहरण है। उन्होंने RSS की विचारधारा की आलोचना की, लेकिन साथ ही कहा कि उसके बोलने के अधिकार को खत्म नहीं किया जाना चाहिए।
यह विरोध और अभिव्यक्ति के अधिकार के बीच संतुलन की उनकी राजनीतिक दलील थी।
बीजेपी और RSS की प्रतिक्रिया पर नजर
राहुल गांधी के इस भाषण के बाद बीजेपी और RSS की ओर से प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणियों पर बीजेपी पलटवार कर सकती है।
वहीं RSS को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी संगठन की ओर से जवाब आने की संभावना राजनीतिक बहस को और तेज कर सकती है।
भारतीय राजनीति में ऐसे बयानों का असर सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहता। सोशल मीडिया, टीवी डिबेट और चुनावी मंचों पर भी इन मुद्दों को लेकर बहस देखने को मिलती है।
इसलिए राहुल गांधी का यह भाषण आने वाले दिनों में कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी का एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
निष्कर्ष: राहुल गांधी ने साफ किया अपना राजनीतिक एजेंडा
राहुल गांधी के रचनात्मक कांग्रेस राष्ट्रीय सम्मेलन के भाषण में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस का आक्रामक रुख साफ दिखाई दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर सीधे हमले से लेकर RSS की भूमिका, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, GST, नोटबंदी, चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति तक उन्होंने कई मुद्दों को अपने भाषण का हिस्सा बनाया।
उनका सबसे चर्चित बयान “हम इनको पागल कर देंगे” रहा, लेकिन भाषण का वास्तविक केंद्र इससे कहीं बड़ा था। राहुल गांधी ने जनता की आवाज, असहमति और लोकतांत्रिक अधिकारों को कांग्रेस की राजनीति से जोड़ने की कोशिश की।
विदेश नीति पर प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हुए उन्होंने इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया और कहा कि भारत को अपनी ताकत पहचानकर दुनिया में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। वहीं चीन और पाकिस्तान के मुद्दे पर उन्होंने सरकार से अधिक स्पष्ट जवाब की मांग की।
कुल मिलाकर राहुल गांधी का यह भाषण कांग्रेस की उस रणनीति को सामने लाता है जिसमें पार्टी मोदी सरकार को सिर्फ राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर चुनौती देना चाहती है।
अब इस भाषण पर बीजेपी और RSS की प्रतिक्रिया क्या होती है और राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सरकार किस तरह अपना पक्ष रखती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि राहुल गांधी ने अपने इस संबोधन के जरिए राजनीतिक बहस का तापमान बढ़ा दिया है।
इनको हम पागल कर देंगे…
— Vikas Bansal (@INCBANSAL) August 13, 2026
आजकल नरेंद्र मोदी रात में सोते नहीं हैं। इसके कई कारण हैं- कुछ obvious हैं, कुछ hidden।
अमित शाह को चाणक्य और न जाने क्या-क्या कहा जाता था, लेकिन वो गायब हो गए, वो भाग गए और 20 दिन तक संसद में नहीं आ पाए।
अब इस सरकार को समझ आ गया है कि ये देश अपने… pic.twitter.com/cUGG2lMNUY