नई दिल्ली: जब दुनिया भर के निवेशक शेयर बाजार की नई ऊंचाइयों का जश्न मना रहे हैं, तब एक शख्स लगातार खतरे की घंटी बजा रहा है। वह नाम है Robert Kiyosaki। अपनी चर्चित किताब Rich Dad Poor Dad से वित्तीय दुनिया में अलग पहचान बनाने वाले कियोसाकी ने एक बार फिर दावा किया है कि दुनिया एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है। उनका कहना है कि शेयर बाजार में भारी गिरावट आ सकती है, डॉलर कमजोर हो सकता है और ऐसे समय में सोना तथा चांदी ही निवेशकों की असली सुरक्षा बनेंगे। taazanews24x7.com
Robert Kiyosaki की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दुनिया की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। अमेरिका का बढ़ता कर्ज, चीन की सुस्त होती अर्थव्यवस्था, यूरोप की विकास संबंधी चिंताएं और लगातार बदलता वैश्विक राजनीतिक माहौल निवेशकों को असमंजस में डाल रहा है। ऐसे माहौल में कियोसाकी की भविष्यवाणियां फिर चर्चा का विषय बन गई हैं।

हर बार संकट की बात क्यों करते हैं कियोसाकी?
Robert Kiyosaki को करीब से देखने वाले जानते हैं कि वे पारंपरिक आर्थिक सोच के आलोचक रहे हैं। उनका मानना है कि दुनिया की वित्तीय व्यवस्था वास्तविक संपत्ति के बजाय कर्ज और कागजी मुद्रा पर खड़ी है। यही कारण है कि वे वर्षों से लोगों को केवल वेतन, बैंक जमा और शेयर बाजार पर निर्भर न रहने की सलाह देते रहे हैं।
उनका तर्क है कि पिछले दो दशकों में दुनिया ने आर्थिक विकास से ज्यादा कर्ज का विस्तार देखा है। सरकारें लगातार उधार लेकर खर्च बढ़ा रही हैं। कंपनियां विस्तार के लिए कर्ज ले रही हैं और आम लोग भी ऋण आधारित जीवनशैली अपनाते जा रहे हैं।
Robert Kiyosaki कहते हैं कि जब पूरा सिस्टम कर्ज पर टिका हो तो किसी भी समय बड़ा झटका पूरी व्यवस्था को हिला सकता है। यही वजह है कि वे वर्तमान आर्थिक माहौल को लेकर लगातार चिंतित दिखाई देते हैं।
क्या दुनिया एक नए वित्तीय संकट की ओर बढ़ रही है?
यह सवाल केवल कियोसाकी ही नहीं उठा रहे। दुनिया के कई बड़े आर्थिक संस्थान भी धीमी वैश्विक वृद्धि को लेकर चिंता जता चुके हैं। हालांकि कोई भी संस्था फिलहाल बड़े वित्तीय पतन की भविष्यवाणी नहीं कर रही, लेकिन जोखिमों से इनकार भी नहीं किया जा रहा।
अमेरिका में महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आई है। चीन की अर्थव्यवस्था पहले जैसी तेजी नहीं दिखा रही। यूरोप ऊर्जा और उत्पादन लागत की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में वैश्विक विकास दर पर दबाव बना हुआ है।
Robert Kiyosaki का मानना है कि यह केवल धीमी आर्थिक वृद्धि का मामला नहीं है बल्कि वित्तीय व्यवस्था की बुनियादी कमजोरी का संकेत है। उनके अनुसार अगर किसी बड़े आर्थिक झटके ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया तो शेयर बाजारों में भारी बिकवाली देखने को मिल सकती है।
शेयर बाजार की तेजी पर उठ रहे सवाल
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई प्रमुख शेयर बाजारों ने रिकॉर्ड स्तर बनाए हैं। टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त तेजी आई है और निवेशकों की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ है।
लेकिन कियोसाकी इस तेजी को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। उनका कहना है कि बाजार की वर्तमान ऊंचाई का बड़ा हिस्सा सस्ती नकदी और निवेशकों की उम्मीदों पर आधारित है। यदि आर्थिक परिस्थितियां खराब होती हैं तो यही उम्मीदें अचानक डर में बदल सकती हैं।
इतिहास भी यही बताता है। 2008 के वित्तीय संकट से पहले भी निवेशकों को लग रहा था कि बाजार लगातार ऊपर जाएगा। लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई थी। करोड़ों लोगों की संपत्ति मिट गई और दुनिया ने सबसे बड़े वित्तीय संकटों में से एक का सामना किया।
Robert Kiyosaki का दावा है कि अगला संकट उससे भी बड़ा हो सकता है क्योंकि आज वैश्विक कर्ज का स्तर पहले की तुलना में कहीं अधिक है।
डॉलर को लेकर क्यों चिंतित हैं कियोसाकी?
Robert Kiyosaki का सबसे चर्चित तर्क अमेरिकी डॉलर को लेकर है। वे बार-बार कहते हैं कि डॉलर की ताकत अब पहले जैसी नहीं रही।
उनका मानना है कि जब भी अर्थव्यवस्था में समस्या आती है, सरकारें और केंद्रीय बैंक अधिक मुद्रा छापकर स्थिति को संभालने की कोशिश करते हैं। इससे अल्पकाल में राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में मुद्रा की वास्तविक कीमत घटती है।
Robert Kiyosaki के अनुसार यदि दुनिया का भरोसा धीरे-धीरे डॉलर से कम होता है तो इसका असर वैश्विक वित्तीय व्यवस्था पर पड़ेगा। वे इसे आने वाले वर्षों का सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं।
हालांकि कई अर्थशास्त्री इस राय से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका तर्क है कि डॉलर अभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। फिर भी यह सच है कि कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं।

संकट में सोना क्यों बन जाता है सबसे बड़ा सहारा?
आर्थिक इतिहास का अध्ययन करने पर एक बात बार-बार सामने आती है—जब भी अनिश्चितता बढ़ती है, सोने की मांग बढ़ जाती है।
1970 के दशक की महंगाई, 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट और कोविड महामारी के दौरान भी निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया था। इसका कारण साफ है। सोना ऐसी संपत्ति है जिसकी आपूर्ति सीमित है और जिसे कोई सरकार अपनी इच्छा से नहीं बना सकती।
Robert Kiyosaki का कहना है कि जब कागजी संपत्तियों पर भरोसा कमजोर पड़ता है, तब निवेशक वास्तविक संपत्तियों की तरफ जाते हैं। सोना उसी श्रेणी में आता है।
दुनिया के कई केंद्रीय बैंक भी पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। इसे कई विशेषज्ञ वैश्विक अनिश्चितताओं के खिलाफ सुरक्षा कवच के रूप में देखते हैं।
लेकिन इस बार सोने से ज्यादा चर्चा चांदी की
Robert Kiyosaki की सबसे बड़ी भविष्यवाणी सोने को लेकर नहीं बल्कि चांदी को लेकर है।
उनका मानना है कि चांदी आने वाले वर्षों में सोने से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। उन्होंने यहां तक कहा है कि चांदी की कीमत 200 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है।
यह दावा सुनने में भले ही साहसिक लगे, लेकिन इसके पीछे कुछ मजबूत कारण हैं। चांदी केवल निवेश की धातु नहीं है। यह आधुनिक उद्योग की भी महत्वपूर्ण जरूरत बन चुकी है।
मोबाइल फोन, कंप्यूटर, मेडिकल उपकरण, सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहन—इन सभी में चांदी का उपयोग होता है। तकनीक जितनी आगे बढ़ रही है, चांदी की जरूरत भी उतनी बढ़ रही है।

ग्रीन एनर्जी का युग और चांदी की बढ़ती मांग
आज दुनिया कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों पर अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है।
सोलर पैनल बनाने में चांदी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में भी इसका उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रीन एनर्जी सेक्टर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो चांदी की मांग अगले दशक में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है।
दूसरी तरफ चांदी का उत्पादन मांग की तुलना में उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा। यदि यह अंतर बढ़ता है तो कीमतों पर दबाव स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर रहेगा।
यही वजह है कि कियोसाकी चांदी को भविष्य का बड़ा अवसर मानते हैं।
क्या केवल सोना-चांदी खरीदना ही समाधान है?
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है। क्या निवेशकों को अपने सारे पैसे निकालकर सोना और चांदी खरीद लेनी चाहिए?
ज्यादातर वित्तीय विशेषज्ञ इसका जवाब “नहीं” में देंगे।
किसी भी निवेश रणनीति का आधार संतुलन होना चाहिए। शेयर, बॉन्ड, सोना, चांदी, रियल एस्टेट और नकदी—सभी की अपनी भूमिका होती है।
यदि कोई निवेशक केवल एक ही संपत्ति पर दांव लगाता है तो उसका जोखिम बढ़ जाता है। यही कारण है कि पेशेवर सलाहकार हमेशा विविधीकृत पोर्टफोलियो की सलाह देते हैं।
Robert Kiyosaki की चेतावनी को भी इसी नजरिए से समझने की जरूरत है। उनका मुख्य संदेश यह नहीं है कि लोग केवल सोना खरीदें, बल्कि यह है कि लोग अपनी संपत्ति को केवल कागजी परिसंपत्तियों तक सीमित न रखें।
वित्तीय शिक्षा ही असली संपत्ति
Robert Kiyosaki की सबसे बड़ी पहचान एक निवेशक नहीं बल्कि वित्तीय शिक्षक के रूप में है।
वे वर्षों से कहते आ रहे हैं कि स्कूल और कॉलेज लोगों को नौकरी करना सिखाते हैं, लेकिन पैसे को समझना नहीं सिखाते। यही वजह है कि लाखों लोग अच्छी आय होने के बावजूद आर्थिक रूप से संघर्ष करते रहते हैं।
Robert Kiyosaki का मानना है कि वित्तीय शिक्षा किसी भी निवेश से अधिक महत्वपूर्ण है। यदि व्यक्ति को यह समझ है कि पैसा कैसे काम करता है, बाजार कैसे चलते हैं और जोखिम को कैसे संभालना है, तो वह किसी भी परिस्थिति में बेहतर फैसले ले सकता है।
आज जब आर्थिक माहौल तेजी से बदल रहा है, यह सलाह पहले से ज्यादा प्रासंगिक नजर आती है।

निष्कर्ष: डर नहीं, तैयारी का समय
Robert Kiyosaki की भविष्यवाणियां हमेशा विवादों में रहती हैं। कई बार उनके अनुमान सही साबित हुए हैं, तो कई बार बाजार ने उनकी उम्मीदों के विपरीत प्रदर्शन किया है। लेकिन उनकी बातों को पूरी तरह नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है।
दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। कर्ज का बोझ बढ़ रहा है, भू-राजनीतिक तनाव लगातार बने हुए हैं और निवेशकों के सामने नए जोखिम खड़े हो रहे हैं।
ऐसे समय में सबसे जरूरी है कि निवेशक घबराएं नहीं, बल्कि तैयारी करें। वित्तीय शिक्षा प्राप्त करें, अपने निवेश को विविध बनाएं, जोखिम को समझें और दीर्घकालिक सोच अपनाएं।
सोना और चांदी भविष्य में कितनी तेजी दिखाएंगे, यह कोई निश्चित रूप से नहीं कह सकता। लेकिन इतना जरूर है कि आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सुरक्षित परिसंपत्तियों का महत्व बढ़ जाता है।
रॉबर्ट कियोसाकी की चेतावनी को डर फैलाने वाली भविष्यवाणी के बजाय एक संकेत की तरह देखा जाना चाहिए—संकेत इस बात का कि आने वाले समय में केवल वही निवेशक सफल होंगे जो जानकारी, धैर्य और समझदारी के साथ फैसले लेंगे। यही असली वित्तीय सुरक्षा है और शायद यही वह संदेश है जिसे कियोसाकी वर्षों से दुनिया को समझाने की कोशिश कर रहे हैं।
रॉबर्ट कियोसाकी की चेतावनी, बाजार में इस समर सीजन में ऐतिहासिक गिरावट की आशंका; जानें ऐतिहासिक गिरावट से पहले क्या खरीदें?#Sharemarket #RobertKiyosaki #Tips #Investment @vishwamohansing pic.twitter.com/7GPGKYQS1Z
— ET Now Swadesh (@ETNowSwadesh) June 3, 2025