नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अहम अपडेट सामने आया है। सरकार ने PM E-DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को मिलने वाली सब्सिडी की अवधि को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। इसका सीधा मतलब है कि पात्र इलेक्ट्रिक बाइक और स्कूटर खरीदने वाले ग्राहकों को अब इस सरकारी प्रोत्साहन का फायदा पहले की तय समयसीमा के मुकाबले ज्यादा लंबे समय तक मिल सकता है। taazanews24x7.com
हालांकि यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। सब्सिडी की अवधि बढ़ने के साथ इसकी रकम पुरानी दर पर वापस नहीं आई है। मौजूदा व्यवस्था में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए इंसेंटिव ₹2,500 प्रति kWh बैटरी क्षमता है और इसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन है। साथ ही पात्र वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख तय है। यानी महंगी इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटर खरीदने वाले हर ग्राहक को ₹5,000 की पूरी सब्सिडी मिलेगी, ऐसा जरूरी नहीं है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री लगातार बढ़ रही है और पेट्रोल की बढ़ती लागत के बीच ग्राहक इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक को एक व्यावहारिक विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं। PM E-DRIVE का उद्देश्य भी यही है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि ज्यादा से ज्यादा ग्राहक इसे अपनाएं।
PM E-DRIVE सब्सिडी में क्या बदला?
PM E-DRIVE योजना सितंबर 2024 में शुरू की गई थी। इसका मकसद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ाना, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण के पूरे इकोसिस्टम को बढ़ावा देना है। योजना में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, ई-बस, ई-ट्रक, ई-एंबुलेंस और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे अलग-अलग हिस्से शामिल हैं।
शुरुआत में PM E-DRIVE की कुल अवधि 31 मार्च 2026 तक रखी गई थी। बाद में सरकार ने योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया। हालांकि उस समय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए सब्सिडी की समयसीमा अलग रखी गई थी। मार्च 2026 के संशोधन में ई-2W के लिए सब्सिडी की पात्रता को 31 जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया था।
अब अगस्त 2026 में सामने आए ताजा अपडेट के मुताबिक इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स को दोबारा लंबी अवधि की सब्सिडी विंडो में शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस सेगमेंट के लिए फंड आवंटन भी बढ़ाया गया है और पात्र ई-2W को 31 मार्च 2028 तक इंसेंटिव का लाभ मिल सकेगा।

कितनी मिलेगी सब्सिडी?
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। नई व्यवस्था में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर सब्सिडी की दर ₹2,500 प्रति kWh है।
लेकिन सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन रखी है। इसके अलावा इंसेंटिव वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। नियम के अनुसार निर्धारित kWh आधारित राशि या एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत में से जो कम होगा, वही लागू होगा।
उदाहरण के लिए किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर में 2 kWh की बैटरी है तो ₹2,500 प्रति kWh के हिसाब से इंसेंटिव ₹5,000 बनेगा। यदि बैटरी क्षमता 1.5 kWh है तो गणना के हिसाब से इंसेंटिव ₹3,750 होगा।
इसका मतलब साफ है कि ₹5,000 अधिकतम सब्सिडी है, फिक्स सब्सिडी नहीं।
आसान भाषा में समझिए
- 1 kWh बैटरी = ₹2,500 तक इंसेंटिव
- 1.5 kWh बैटरी = ₹3,750 तक इंसेंटिव
- 2 kWh या उससे ज्यादा = अधिकतम ₹5,000 तक इंसेंटिव
- वाहन की अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत = ₹1.5 लाख
- इंसेंटिव एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15% की सीमा से भी बंधा है।
यानी केवल यह देखकर इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए कि सरकार ₹5,000 की सब्सिडी दे रही है। वास्तविक लाभ मॉडल की बैटरी क्षमता, एक्स-फैक्ट्री कीमत और उस मॉडल की योजना के तहत पात्रता पर निर्भर करेगा।
₹1.5 लाख वाली कीमत का क्या मतलब है?
यहां कई ग्राहकों को अक्सर भ्रम होता है कि ₹1.5 लाख की सीमा ऑन-रोड कीमत है। ऐसा नहीं है।
PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए अधिकतम एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख रखी गई है। इसलिए ग्राहक को वाहन की ऑन-रोड कीमत नहीं, बल्कि पात्रता तय करते समय एक्स-फैक्ट्री कीमत देखनी होगी।
उदाहरण के तौर पर अगर किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर की एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.45 लाख है, लेकिन रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और अन्य शुल्क जोड़ने के बाद उसकी ऑन-रोड कीमत ₹1.60 लाख हो जाती है, तो केवल ऑन-रोड कीमत ₹1.5 लाख से ऊपर जाने की वजह से उसे अपात्र नहीं माना जाएगा।
लेकिन यदि वाहन की पात्र एक्स-फैक्ट्री कीमत ही ₹1.5 लाख की सीमा से ऊपर है, तो PM E-DRIVE के तहत उसका इंसेंटिव मिलना संभव नहीं होगा।
यही वजह है कि इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदते समय केवल विज्ञापन में लिखी कीमत देखने के बजाय डीलर से एक्स-फैक्ट्री कीमत और PM E-DRIVE पात्रता की पुष्टि करना बेहतर है।
पहले कितनी मिलती थी सब्सिडी?
PM E-DRIVE के शुरुआती चरण में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के लिए इंसेंटिव ज्यादा था।
वित्त वर्ष 2024-25 में पात्र ई-2W के लिए इंसेंटिव ₹5,000 प्रति kWh तक था और अधिकतम सीमा ₹10,000 प्रति वाहन रखी गई थी। इसके बाद 1 अप्रैल 2025 से इसे घटाकर ₹2,500 प्रति kWh कर दिया गया और अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन कर दी गई।
यानी सरकार ने सब्सिडी को पूरी तरह खत्म करने के बजाय धीरे-धीरे कम किया है। अब नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव इसकी अवधि से जुड़ा है—ग्राहकों को कम दर पर ही सही, लेकिन लंबी अवधि तक सरकारी प्रोत्साहन मिलने का रास्ता खुला है।
इसे सरकार की EV नीति में एक तरह के संक्रमण चरण के रूप में भी देखा जा सकता है। शुरुआती दौर में ज्यादा इंसेंटिव देकर मांग पैदा करना और बाद में इंसेंटिव कम करते हुए बाजार को धीरे-धीरे अपने दम पर खड़ा करना इसका हिस्सा हो सकता है।
सरकार ने सब्सिडी क्यों घटाई?
इलेक्ट्रिक वाहन बाजार के शुरुआती दौर में सबसे बड़ी चुनौती थी कीमत। पेट्रोल स्कूटर की तुलना में इलेक्ट्रिक स्कूटर की शुरुआती कीमत कई मामलों में ज्यादा थी। बैटरी की लागत इसका बड़ा कारण रही है।
सरकार ने इसी अंतर को कम करने के लिए मांग आधारित इंसेंटिव का इस्तेमाल किया। इससे ग्राहक को खरीदारी के समय कीमत में राहत मिली और कंपनियों को भी EV बाजार में निवेश बढ़ाने का प्रोत्साहन मिला।
लेकिन जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री बढ़ी, सरकार ने प्रति वाहन मिलने वाला प्रोत्साहन कम किया। मार्च 2026 के आधिकारिक संशोधन में भी ई-2W के लिए ₹2,500 प्रति kWh और अधिकतम ₹5,000 की सीमा दर्ज है।
अब सरकार का फोकस केवल सब्सिडी के सहारे बिक्री बढ़ाने पर नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, बैटरी टेक्नोलॉजी, स्थानीय उत्पादन और चार्जिंग नेटवर्क को मजबूत करना भी PM E-DRIVE के बड़े उद्देश्यों में शामिल है।

किन लोगों को मिलेगा PM E-DRIVE का फायदा?
इस योजना की खास बात यह है कि पात्र इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर केवल व्यावसायिक इस्तेमाल तक सीमित नहीं हैं। आधिकारिक PM E-DRIVE जानकारी के मुताबिक निजी या कॉरपोरेट स्वामित्व वाले पंजीकृत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स भी योजना के तहत पात्र हो सकते हैं।
इसका मतलब है कि अगर कोई आम ग्राहक अपने निजी इस्तेमाल के लिए पात्र इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदता है, तो वह भी योजना के नियमों के मुताबिक इंसेंटिव का लाभ उठा सकता है।
हालांकि हर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर अपने आप सब्सिडी के लिए पात्र नहीं हो जाता। वाहन को योजना की तकनीकी और मॉडल संबंधी शर्तों को पूरा करना जरूरी है। PM E-DRIVE पोर्टल पर पात्र मॉडलों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
क्या हर इलेक्ट्रिक बाइक पर ₹5,000 मिलेगा?
नहीं।
यह बात खरीदारों को खास तौर पर समझनी चाहिए। सरकार ने अधिकतम इंसेंटिव ₹5,000 रखा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर पात्र बाइक या स्कूटर की कीमत से सीधे ₹5,000 घट जाएंगे।
इंसेंटिव बैटरी क्षमता के आधार पर तय होता है। उदाहरण के लिए 1.5 kWh बैटरी वाले पात्र वाहन के लिए गणना ₹3,750 बनती है, जबकि 2 kWh या उससे ज्यादा बैटरी वाले वाहन के लिए ₹5,000 की अधिकतम सीमा लागू हो सकती है।
इसके साथ एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत की शर्त भी लागू होती है। इसलिए अंतिम रकम मॉडल के हिसाब से अलग हो सकती है।
सब्सिडी ग्राहक के हाथ में नकद नहीं आती
PM E-DRIVE की प्रक्रिया सामान्य कैश सब्सिडी जैसी नहीं है। योजना में ई-वाउचर और आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।
PM E-DRIVE के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक खरीद के समय ग्राहक का आधार ऑथेंटिकेशन किया जाता है और ई-वाउचर प्रक्रिया के जरिए इंसेंटिव को वाहन की खरीद से जोड़ा जाता है।
सरकार के अनुसार पात्र खरीदार को मिलने वाला इंसेंटिव खरीद मूल्य में अग्रिम कमी के रूप में दिया जाता है और बाद में संबंधित OEM को मंत्रालय की ओर से इसकी प्रतिपूर्ति की जाती है।
इसलिए ग्राहक के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि खरीदारी के समय बिल और डीलर द्वारा दिए गए दस्तावेजों में इंसेंटिव की जानकारी सही तरीके से दर्ज हो।

एक व्यक्ति कितने EV पर सब्सिडी ले सकता है?
PM E-DRIVE FAQ के मुताबिक किसी व्यक्ति को एक विशिष्ट श्रेणी में एक ही इलेक्ट्रिक वाहन पर इंसेंटिव मिल सकता है। इसके लिए आधार से जुड़ी मोबाइल नंबर आधारित पहचान और ऑथेंटिकेशन की जरूरत होती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी पैसा वास्तविक खरीदार तक पहुंचे और एक ही व्यक्ति बार-बार समान श्रेणी के वाहनों पर इंसेंटिव का दावा न कर सके।
इसलिए यदि कोई ग्राहक पहले ही उसी श्रेणी के वाहन पर PM E-DRIVE इंसेंटिव ले चुका है, तो दूसरी खरीदारी के समय पात्रता की स्थिति अलग हो सकती है।
कौन-से इलेक्ट्रिक स्कूटर और बाइक पात्र हैं?
यहां मॉडल की पात्रता महत्वपूर्ण हो जाती है। PM E-DRIVE पोर्टल पर OEM और मॉडल के आधार पर वाहन की जानकारी दी जाती है। पोर्टल पर अलग-अलग कंपनियों के मॉडल, वैरिएंट, वाहन कैटेगरी और वैधता की जानकारी दिखाई जाती है।
इसलिए केवल यह देखकर कि कोई वाहन इलेक्ट्रिक है और उसकी कीमत ₹1.5 लाख से कम है, यह मान लेना सही नहीं होगा कि उस पर सब्सिडी मिल जाएगी।
खरीदारी से पहले ग्राहक को तीन चीजें जरूर जांचनी चाहिए—
- वाहन PM E-DRIVE के तहत अप्रूव्ड मॉडल है या नहीं।
- उसकी पात्र एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख की सीमा के अंदर है या नहीं।
- खरीदारी और रजिस्ट्रेशन उस समयावधि में हो रहा है या नहीं जिसमें मॉडल के लिए इंसेंटिव उपलब्ध है।
2028 तक सब्सिडी का मतलब क्या है?
यहां भी एक जरूरी सावधानी है। 31 मार्च 2028 तक योजना की अवधि बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार बिना किसी सीमा के हर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदार को सब्सिडी देती रहेगी।
PM E-DRIVE एक fund-limited scheme है। आधिकारिक नियमों के अनुसार यदि योजना या किसी संबंधित हिस्से के लिए निर्धारित फंड पहले ही खत्म हो जाता है, तो संबंधित घटक को समयसीमा से पहले बंद किया जा सकता है और आगे के दावे स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
यानी ग्राहक के लिए ‘2028 तक सब्सिडी’ को एक गारंटीड खुली खिड़की की तरह देखना सही नहीं होगा। उपलब्ध फंड, पात्र वाहनों की संख्या और सरकारी संशोधनों के आधार पर स्थिति बदल सकती है।
EV खरीदने वालों के लिए इसका क्या असर होगा?
इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा उन ग्राहकों को हो सकता है जो इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने का मन बना रहे हैं लेकिन तुरंत खरीदारी नहीं करना चाहते।
पहले सब्सिडी की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता थी। अब लंबी अवधि की विंडो मिलने से ग्राहक को थोड़ा ज्यादा समय मिल सकता है। कंपनियों के लिए भी यह सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे पात्र इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की कीमत पर सरकारी इंसेंटिव का तत्व बना रहता है।
लेकिन दूसरी तरफ ₹5,000 की अधिकतम सब्सिडी इतनी बड़ी रकम नहीं है कि सिर्फ इसके लिए कोई ग्राहक वाहन खरीदने का फैसला कर ले। इलेक्ट्रिक स्कूटर की वास्तविक लागत तय करते समय बैटरी क्षमता, रेंज, चार्जिंग समय, सर्विस नेटवर्क, बैटरी वारंटी और रीसेल वैल्यू जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।
EMPS-2024 से PM E-DRIVE तक कैसे पहुंची योजना?
इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की सरकारी कोशिश PM E-DRIVE से पहले भी चल रही थी। Electric Mobility Promotion Scheme 2024 यानी EMPS-2024 को 1 अप्रैल 2024 से 30 सितंबर 2024 के बीच लागू किया गया था।
बाद में EMPS-2024 के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर से जुड़े खर्च और वाहन संख्या को PM E-DRIVE के तहत समाहित कर दिया गया। PM E-DRIVE आधिकारिक रूप से 29 सितंबर 2024 को अधिसूचित हुआ।
इसलिए आज जब इलेक्ट्रिक वाहन सब्सिडी की बात होती है तो EMPS-2024 और PM E-DRIVE को एक ही चीज मानना सही नहीं होगा। EMPS-2024 पहले की सीमित अवधि वाली योजना थी, जबकि PM E-DRIVE इसके बाद लागू की गई व्यापक योजना है।
क्या 2028 तक EV सस्ते होते रहेंगे?
सरकारी सब्सिडी का उद्देश्य EV की शुरुआती खरीद लागत कम करना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर साल इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत लगातार घटेगी।
असल कीमत पर बैटरी की लागत, कच्चे माल की कीमत, उत्पादन लागत, GST, कंपनी की कीमत नीति और बाजार में प्रतिस्पर्धा जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।
इसलिए किसी ग्राहक को केवल PM E-DRIVE की सब्सिडी देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि 2028 में इलेक्ट्रिक स्कूटर आज की तुलना में निश्चित रूप से सस्ता होगा।
हां, लंबी अवधि की नीति कंपनियों को निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए ज्यादा स्पष्टता दे सकती है। यदि उत्पादन का पैमाना बढ़ता है और बैटरी लागत घटती है तो लंबे समय में इसका फायदा ग्राहकों तक पहुंच सकता है।

खरीदारी से पहले इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप अगले कुछ महीनों में इलेक्ट्रिक बाइक या स्कूटर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल ‘₹5,000 सब्सिडी’ सुनकर बुकिंग न करें।
डीलर से लिखित या बिल में यह स्पष्ट कराएं कि आपका चुना हुआ मॉडल PM E-DRIVE के तहत पात्र है। साथ ही एक्स-फैक्ट्री कीमत, बैटरी क्षमता और लागू इंसेंटिव की राशि की पुष्टि करें।
इसके अलावा यह भी देखें कि कंपनी द्वारा बताई गई कीमत में PM E-DRIVE इंसेंटिव पहले से शामिल है या नहीं। कई बार विज्ञापन में ‘सब्सिडी के बाद कीमत’ और वास्तविक एक्स-शोरूम कीमत को अलग-अलग दिखाया जाता है। ऐसे में ग्राहक को कुल भुगतान और डिस्काउंट की पूरी गणना समझनी चाहिए।

निष्कर्ष: सब्सिडी कम, लेकिन समय ज्यादा
PM E-DRIVE के तहत इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने वालों के लिए ताजा बदलाव को सीधे तौर पर ‘सब्सिडी बढ़ गई’ कहना सही नहीं होगा। असल कहानी थोड़ी अलग है।
सरकार ने सब्सिडी की अवधि बढ़ाने के साथ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के लिए अधिकतम ₹5,000 के इंसेंटिव की व्यवस्था को आगे बढ़ाया है। मौजूदा दर ₹2,500 प्रति kWh है और पात्र वाहन की एक्स-फैक्ट्री कीमत ₹1.5 लाख तक होनी चाहिए। इंसेंटिव पर 15 प्रतिशत एक्स-फैक्ट्री कीमत की सीमा भी लागू है।
इससे उन ग्राहकों को राहत मिल सकती है जो इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं और सब्सिडी खत्म होने की वजह से फैसला टाल रहे थे। हालांकि ग्राहक को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि योजना फंड-लिमिटेड है और पात्र मॉडल, फंड उपलब्धता तथा सरकारी नियमों की जांच खरीदारी के समय जरूरी है।
कुल मिलाकर सरकार का संकेत साफ है—EV बाजार को अब केवल बड़ी सब्सिडी देकर नहीं, बल्कि लंबी अवधि की नीति, उत्पादन क्षमता और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के पूरे इकोसिस्टम के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आम ग्राहक के लिए इसका फायदा तभी वास्तविक होगा जब वह खरीदारी से पहले अपने चुने हुए मॉडल की PM E-DRIVE पात्रता और बिल में मिलने वाले वास्तविक इंसेंटिव की ठीक से जांच करे।
#AwaazStory | सरकार ने PM E-Drive स्कीम की अवधि बढ़ाई
— CNBC-AWAAZ (@CNBC_Awaaz) August 11, 2026
31 मार्च 2028 तक जारी रहेगी PM E-Drive स्कीम
स्कीम के तहत टू-व्हीलर्स EV को सब्सिडी जारी रहेगी
टू-व्हीलर्स EV के लिए ₹2,767 करोड़ का प्रावधान
पूरी डिटेल बता रहे हैं संवाददाता रोहन सिंह। @rohan18april #PMEDriveScheme… pic.twitter.com/kCUJQMmpUs