Groww Share Price Crash: ₹4750 करोड़ की Block Deal से टूटा शेयर, 400 करोड़ शेयर अनलॉक होने से बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब ऑनलाइन ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Groww की पैरेंट कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही शेयर करीब 7 फीसदी तक टूट गया और निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ गई। इसकी सबसे बड़ी वजह रही करीब ₹4750 करोड़ की संभावित ब्लॉक डील और IPO लॉक-इन पीरियड का खत्म होना। बाजार में चर्चा है कि बड़े विदेशी निवेशक (FII) अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही कंपनी के करोड़ों शेयर अनलॉक हो गए हैं, जिससे सप्लाई बढ़ने और शेयर पर दबाव आने की आशंका मजबूत हो गई है। यही कारण है कि शेयर में अचानक बिकवाली का दबाव देखने को मिला। taazanews24x7.com

आखिर क्या है पूरा मामला?

करीब छह महीने पहले शेयर बाजार में लिस्ट हुई ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेंस गैराज वेंचर्स ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। लिस्टिंग के बाद से स्टॉक में करीब 43 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली। लेकिन अब वही शेयर अचानक बड़ी गिरावट का सामना कर रहा है।

दरअसल बाजार में खबर आई कि कंपनी में एक बड़ा ब्लॉक डील ट्रांजैक्शन होने वाला है, जिसकी कुल वैल्यू करीब ₹4750 करोड़ बताई जा रही है। यह सौदा स्क्रीन बेस्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाएगा। ऐसे सौदों में आमतौर पर बड़े निवेशक अपनी हिस्सेदारी संस्थागत खरीदारों को बेचते हैं।

सूत्रों के मुताबिक यह ब्लॉक डील मौजूदा बाजार भाव से लगभग 8.5 फीसदी डिस्काउंट पर हो सकती है। यही कारण है कि शेयर पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया।

IPO लॉक-इन खत्म होने का असर

ब्लॉक डील के अलावा दूसरी बड़ी वजह IPO लॉक-इन पीरियड का खत्म होना है। बाजार में अनुमान लगाया जा रहा है कि लगभग 400 करोड़ शेयर अब ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए हैं। जब किसी कंपनी का लॉक-इन पीरियड खत्म होता है तो शुरुआती निवेशकों, प्रमोटर्स या प्री-IPO शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर बेचने की अनुमति मिल जाती है।

ऐसे में बाजार में सप्लाई अचानक बढ़ जाती है और निवेशकों को डर रहता है कि बड़े निवेशक भारी मात्रा में शेयर बेच सकते हैं। यही डर मंगलवार को ग्रो के शेयर में दिखाई दिया।

क्यों डर गए निवेशक?

स्टॉक मार्केट में निवेशकों का व्यवहार अक्सर भविष्य की आशंकाओं पर आधारित होता है। जब किसी शेयर में बड़ी ब्लॉक डील या भारी अनलॉकिंग की खबर आती है तो छोटे निवेशक घबराकर बिकवाली शुरू कर देते हैं।

ग्रो के मामले में भी यही देखने को मिला। निवेशकों को लगा कि अगर बड़े संस्थागत निवेशक हिस्सेदारी बेच रहे हैं तो आने वाले समय में शेयर में और दबाव आ सकता है। इसी वजह से ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में ही भारी बिकवाली शुरू हो गई।

क्या है Block Deal?

ब्लॉक डील शेयर बाजार में होने वाला ऐसा बड़ा ट्रांजैक्शन होता है जिसमें एक तय संख्या से ज्यादा शेयर एक ही सौदे में खरीदे या बेचे जाते हैं। यह आमतौर पर बड़े निवेशकों, विदेशी संस्थानों, प्राइवेट इक्विटी फर्मों या प्रमोटर्स के बीच होता है।

इन सौदों का असर सीधे शेयर की कीमत पर पड़ता है क्योंकि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में आते हैं। अगर डील डिस्काउंट पर होती है तो मौजूदा शेयर प्राइस पर भी दबाव आ जाता है।

क्या Groww के बिजनेस में कोई दिक्कत है?

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के बिजनेस मॉडल को लेकर फिलहाल कोई बड़ी नकारात्मक खबर नहीं है। ग्रो लगातार भारत के तेजी से बढ़ते निवेश प्लेटफॉर्म्स में शामिल है। कंपनी ने पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों नए निवेशकों को जोड़ा है और खासकर युवाओं के बीच इसकी मजबूत पकड़ बनी हुई है।

डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर कंपनी ने म्यूचुअल फंड, स्टॉक ट्रेडिंग, SIP और अन्य फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में तेजी से विस्तार किया है। यही वजह है कि लिस्टिंग के बाद शेयर में अच्छी तेजी देखने को मिली थी।

लेकिन शेयर बाजार में सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि शेयर सप्लाई और निवेशकों की रणनीति भी कीमतों को प्रभावित करती है। फिलहाल ग्रो के शेयर में वही स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

विदेशी निवेशकों की क्या रणनीति?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती निवेशक और विदेशी फंड अक्सर लिस्टिंग के कुछ समय बाद मुनाफावसूली करते हैं। अगर किसी शेयर ने कम समय में अच्छा रिटर्न दिया हो तो निवेशक हिस्सेदारी बेचकर लाभ बुक करना पसंद करते हैं।

ग्रो के शेयर में भी पिछले छह महीनों में शानदार तेजी आई थी। ऐसे में अब बड़े निवेशकों द्वारा आंशिक एग्जिट लेना बाजार के लिए बहुत चौंकाने वाली बात नहीं मानी जा रही।

हालांकि निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि ब्लॉक डील में खरीदार कौन हैं। अगर मजबूत संस्थागत निवेशक शेयर खरीदते हैं तो इससे बाजार का भरोसा वापस लौट सकता है।

खुदरा निवेशकों को क्या करना चाहिए?

शेयर में आई तेज गिरावट के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक घबराकर फैसला लेना सही रणनीति नहीं है।

अगर किसी निवेशक का नजरिया लंबी अवधि का है और उसे कंपनी के बिजनेस मॉडल पर भरोसा है, तो केवल ब्लॉक डील या लॉक-इन खत्म होने के कारण जल्दबाजी में फैसला लेना नुकसानदायक हो सकता है।

हालांकि अल्पकालिक तौर पर शेयर में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है क्योंकि बाजार अभी इस खबर को पचा रहा है।

बाजार विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

विश्लेषकों के अनुसार किसी भी IPO के बाद लॉक-इन खत्म होना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन जब इसके साथ बड़ी ब्लॉक डील की खबर जुड़ जाती है तो दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कुछ ट्रेडिंग सेशंस में शेयर की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि:

  • ब्लॉक डील किस भाव पर होती है
  • कौन निवेशक हिस्सेदारी बेच रहे हैं
  • खरीदार कितने मजबूत हैं
  • बाजार का ओवरऑल सेंटीमेंट कैसा रहता है

अगर मजबूत घरेलू संस्थागत निवेशक या बड़े फंड इसमें हिस्सेदारी लेते हैं तो शेयर में रिकवरी भी देखने को मिल सकती है।

क्या IPO निवेशकों के लिए खतरे की घंटी?

ग्रो का मामला उन निवेशकों के लिए भी अहम है जो हाल के IPO में निवेश कर रहे हैं। अक्सर लिस्टिंग के शुरुआती महीनों में शेयर तेजी दिखाते हैं, लेकिन लॉक-इन खत्म होने के बाद अचानक दबाव देखने को मिलता है।

ऐसे में निवेशकों को सिर्फ तेजी देखकर निवेश करने के बजाय कंपनी की वैल्यूएशन, शेयर सप्लाई और संस्थागत निवेशकों की रणनीति पर भी नजर रखनी चाहिए।

आने वाले दिनों में क्या रहेगा फोकस?

अब बाजार की नजर ब्लॉक डील के अंतिम आंकड़ों पर रहेगी। अगर ₹4750 करोड़ की डील सफलतापूर्वक पूरी होती है तो यह हाल के समय की बड़ी सेकेंडरी मार्केट डील्स में शामिल हो सकती है।

इसके अलावा निवेशक यह भी देखेंगे कि शेयर में गिरावट के बाद खरीदारी लौटती है या नहीं। क्योंकि कई बार बड़ी गिरावट के बाद वैल्यू बायर्स भी एक्टिव हो जाते हैं।

निष्कर्ष

Groww के शेयर में आई 7 फीसदी गिरावट ने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ₹4750 करोड़ की संभावित ब्लॉक डील, 400 करोड़ शेयरों का अनलॉक होना और बड़े निवेशकों की बिकवाली की आशंका फिलहाल शेयर पर भारी पड़ रही है।

हालांकि कंपनी के बिजनेस मॉडल को लेकर कोई बड़ी नकारात्मक खबर नहीं है, लेकिन बाजार में सप्लाई बढ़ने का डर निवेशकों को सतर्क बना रहा है। आने वाले दिनों में ब्लॉक डील के खरीदार और बाजार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि शेयर में स्थिरता लौटती है या दबाव और बढ़ता है।

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