मुंबई के शेयर बाजार में नतीजों का सीज़न हर साल आता है, लेकिन कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनके आंकड़े सिर्फ “रिजल्ट” नहीं होते—वे एक सोच, एक मॉडल और एक अनुशासन की कहानी होते हैं। Avenue Supermarts Limited यानी D-Mart उन्हीं में से एक है। taazanews24x7.com
वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के नतीजों में कंपनी ने 656 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया है—करीब 19.7% की बढ़त। पहली नज़र में यह एक ठोस कॉरपोरेट अपडेट लगता है, लेकिन जब आप इस आंकड़े के पीछे की परतें खोलते हैं, तो यह साफ दिखता है कि यह सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि वर्षों की अनुशासित रणनीति का नतीजा है।

सिर्फ मुनाफा नहीं, एक पैटर्न है
D-Mart के साथ दिलचस्प बात यह है कि इसके नतीजे “सरप्राइज” नहीं देते—वे “कंसिस्टेंसी” दिखाते हैं।
जब कई रिटेल कंपनियां कभी तेज़ी तो कभी गिरावट का सामना करती हैं, वहीं Avenue Supermarts Limited लगातार एक संतुलित ग्रोथ दिखाती रही है।
यहां सवाल उठता है—ऐसा कैसे?
जवाब है—फोकस।
कंपनी ने अपने मॉडल को कभी भी जरूरत से ज्यादा जटिल नहीं बनाया।
D-Mart का असली खेल: सादगी में ताकत
अगर आप किसी D-Mart स्टोर में जाते हैं, तो पहली नज़र में यह किसी “ग्लैमरस” रिटेल स्पेस जैसा नहीं लगता।
न बहुत सजावट, न महंगे डिस्प्ले, न ही आक्रामक मार्केटिंग।
लेकिन यहीं इसकी असली ताकत छिपी है।
- कम कीमत
- तेज़ टर्नओवर
- सीमित खर्च
D-Mart का पूरा मॉडल इस बात पर टिका है कि ग्राहक को रोज़मर्रा का सामान सस्ता मिले—और वह बार-बार लौटकर आए।
राधाकिशन दमानी: जो दिखते कम हैं, समझते ज्यादा हैं
Radhakishan Damani भारतीय कॉरपोरेट दुनिया के उन दुर्लभ नामों में हैं जो सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन असर गहरा छोड़ते हैं।
उन्होंने कभी “हाइप” पर भरोसा नहीं किया।
उनका तरीका हमेशा अलग रहा—
धीरे चलो, लेकिन गिरो मत।
दमानी पहले शेयर बाजार के निवेशक रहे हैं, और यही अनुभव उन्होंने D-Mart में लगाया।
जहां बाकी कंपनियां विस्तार के पीछे भागती हैं, वहीं दमानी पहले यह देखते हैं कि हर स्टोर अपने आप में मजबूत हो।
सिर्फ मुनाफा नहीं, एक पैटर्न है
D-Mart के साथ दिलचस्प बात यह है कि इसके नतीजे “सरप्राइज” नहीं देते—वे “कंसिस्टेंसी” दिखाते हैं।
जब कई रिटेल कंपनियां कभी तेज़ी तो कभी गिरावट का सामना करती हैं, वहीं Avenue Supermarts Limited लगातार एक संतुलित ग्रोथ दिखाती रही है।
यहां सवाल उठता है—ऐसा कैसे?
जवाब है—फोकस।
कंपनी ने अपने मॉडल को कभी भी जरूरत से ज्यादा जटिल नहीं बनाया।
D-Mart का असली खेल: सादगी में ताकत
अगर आप किसी D-Mart स्टोर में जाते हैं, तो पहली नज़र में यह किसी “ग्लैमरस” रिटेल स्पेस जैसा नहीं लगता।
न बहुत सजावट, न महंगे डिस्प्ले, न ही आक्रामक मार्केटिंग।
लेकिन यहीं इसकी असली ताकत छिपी है।
- कम कीमत
- तेज़ टर्नओवर
- सीमित खर्च
D-Mart का पूरा मॉडल इस बात पर टिका है कि ग्राहक को रोज़मर्रा का सामान सस्ता मिले—और वह बार-बार लौटकर आए।
राधाकिशन दमानी: जो दिखते कम हैं, समझते ज्यादा हैं
Radhakishan Damani भारतीय कॉरपोरेट दुनिया के उन दुर्लभ नामों में हैं जो सुर्खियों से दूर रहते हैं, लेकिन असर गहरा छोड़ते हैं।
उन्होंने कभी “हाइप” पर भरोसा नहीं किया।
उनका तरीका हमेशा अलग रहा—
धीरे चलो, लेकिन गिरो मत।
दमानी पहले शेयर बाजार के निवेशक रहे हैं, और यही अनुभव उन्होंने D-Mart में लगाया।
जहां बाकी कंपनियां विस्तार के पीछे भागती हैं, वहीं दमानी पहले यह देखते हैं कि हर स्टोर अपने आप में मजबूत हो।

एक दिलचस्प तुलना: स्थिरता बनाम उतार-चढ़ाव
हाल ही में एक तुलना काफी चर्चा में रही—
जहां Radhakishan Damani ने सालों में अपनी संपत्ति बनाई, वहीं Mark Zuckerberg ने एक ही दिन में भारी नुकसान झेला।
यह तुलना किसी को बेहतर या खराब साबित करने के लिए नहीं है, बल्कि यह समझने के लिए है कि अलग-अलग सेक्टर कैसे काम करते हैं।
- टेक सेक्टर: तेज़ ग्रोथ, लेकिन उच्च जोखिम
- रिटेल (D-Mart जैसा): धीमी ग्रोथ, लेकिन स्थिरता
यही वजह है कि निवेशक दोनों तरह के विकल्पों को अलग नजरिए से देखते हैं।
बाजार के दबाव के बावजूद कैसे टिकता है D-Mart?
आज के समय में रिटेल सेक्टर आसान नहीं है।
महंगाई, सप्लाई चेन, ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा—हर तरफ दबाव है।
इसके बावजूद D-Mart का मॉडल इसलिए टिकता है क्योंकि:
- यह कर्ज पर निर्भर नहीं है
- रियल एस्टेट में इसका मजबूत आधार है
- ऑपरेशन बेहद नियंत्रित हैं
कंपनी अपने ज्यादातर स्टोर्स खुद की जमीन पर बनाती है, जिससे किराये का दबाव कम होता है—और यही लंबी अवधि में बड़ा फायदा देता है।

ई-कॉमर्स का दबाव: असली खतरा या सिर्फ शोर?
Amazon, Flipkart और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव के बीच यह सवाल बार-बार उठता है—क्या D-Mart पीछे रह जाएगा?
लेकिन D-Mart ने इस चुनौती को अलग तरीके से लिया है।
इसने:
- ऑनलाइन को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया
- लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर भी नहीं हुआ
यानी कंपनी ने “संतुलन” बनाए रखा—जो आज के दौर में सबसे कठिन काम है।
निवेशकों के लिए बड़ा संकेत
D-Mart के नतीजे सिर्फ कंपनी के लिए नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए भी एक मैसेज हैं।
आज जब बाजार में तेजी और गिरावट दोनों तेज़ी से आते हैं, तब यह कंपनी याद दिलाती है कि:
- स्थिर कंपनियां लंबी दौड़ जीतती हैं
- जोखिम को समझना जरूरी है
- हर चमकती चीज सोना नहीं होती
आगे की राह: चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं
यह मान लेना गलत होगा कि D-Mart के लिए सब कुछ आसान है।
आने वाले समय में:
- प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी
- ग्राहक की अपेक्षाएं बदलेंगी
- डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी होगा
लेकिन कंपनी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह जल्दबाजी में फैसले नहीं लेती।
एक गहरी समझ: क्यों D-Mart सिर्फ कंपनी नहीं, एक केस स्टडी है
अगर बिजनेस स्कूल में “सस्टेनेबल ग्रोथ” पढ़ाई जाती है, तो D-Mart उसका जीता-जागता उदाहरण है।
यह हमें सिखाता है कि:
- हर सफलता तेज़ नहीं होती
- हर विस्तार जरूरी नहीं होता
- हर ट्रेंड का पीछा करना समझदारी नहीं है
कभी-कभी सबसे सही रणनीति होती है—
जो काम कर रहा है, उसे बेहतर तरीके से करते रहना।
निष्कर्ष: शांति से खेलना, लेकिन जीतना
Avenue Supermarts Limited के Q4 नतीजे एक बार फिर यह साबित करते हैं कि बिजनेस में सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
Radhakishan Damani की रणनीति आज के दौर में और भी प्रासंगिक हो गई है—जहां हर कोई तेजी से आगे बढ़ना चाहता है, वहां स्थिरता ही असली ताकत बनती जा रही है।
और जब आप इसे Mark Zuckerberg जैसे उदाहरणों के साथ देखते हैं, तो यह साफ हो जाता है कि:
बाजार में दो तरह के खिलाड़ी होते हैं—एक जो तेजी से जीतते हैं, और दूसरे जो लंबे समय तक टिकते हैं।
D-Mart ने दूसरा रास्ता चुना है—और फिलहाल, यह रास्ता ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है।