Awarapan 2 Teaser: 18 साल बाद फिर लौटा ‘शिवम’, इमरान हाशमी की एक झलक ने जगा दी पुरानी यादें

मुंबई। कुछ फिल्मों की किस्मत बॉक्स ऑफिस तय करता है, जबकि कुछ फिल्मों का मुकाम वक्त तय करता है। साल 2007 में रिलीज हुई ‘Awarapan‘ दूसरी श्रेणी की फिल्म थी। रिलीज के समय यह बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल नहीं कर सकी, लेकिन जैसे-जैसे साल बीतते गए, इस फिल्म ने एक ऐसी पहचान बना ली, जो आज भी बरकरार है। इसकी वजह सिर्फ इमरान हाशमी की मौजूदगी नहीं थी, बल्कि वह अधूरा प्यार, भीतर तक उतर जाने वाला दर्द और ऐसी कहानी थी, जिससे दर्शकों ने खुद को जोड़ा। taazanews24x7.com

अब करीब 18 साल बाद जब ‘Awarapan 2’ का पहला टीजर सामने आया है, तो इसे सिर्फ एक नई फिल्म की घोषणा कहना शायद गलत होगा। यह उस कहानी की वापसी है, जिसका इंतजार दर्शक लंबे समय से कर रहे थे। यही वजह है कि टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा सिर्फ एक सवाल की होने लगी—क्या इमरान हाशमी एक बार फिर अपने करियर की सबसे यादगार फिल्मों में से एक को नया जीवन देने जा रहे हैं?

टीजर लंबा नहीं है, लेकिन इतना जरूर है कि यह दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाने में पूरी तरह सफल नजर आता है।

टीजर की शुरुआत से ही पुरानी ‘आवारापन’ की याद ताजा हो जाती है

करीब डेढ़ मिनट के इस टीजर में मेकर्स ने कहानी खोलने की जल्दबाजी नहीं दिखाई। इसके बजाय उन्होंने माहौल बनाने पर पूरा ध्यान दिया है। शुरुआत में कैमरा धीरे-धीरे आगे बढ़ता है और इमरान हाशमी की झलक सामने आती है। चेहरे पर उम्र का असर जरूर दिखता है, लेकिन आंखों में वही बेचैनी, वही खामोशी और वही दर्द दिखाई देता है जिसने ‘शिवम’ के किरदार को यादगार बनाया था।

टीजर के बीच में सुनाई देने वाला संवाद—”मेरा दर्द से पुराना रिश्ता है…”—सिर्फ एक लाइन नहीं, बल्कि पूरी फिल्म का भावनात्मक आधार लगता है। यह संवाद सुनते ही पहली फिल्म देखने वाले दर्शक सीधे 2007 की यादों में लौट जाते हैं।

यही इस टीजर की सबसे बड़ी ताकत है। यह सिर्फ नई कहानी बेचने की कोशिश नहीं करता, बल्कि पुरानी भावनाओं को फिर से जगा देता है।

इमरान हाशमी का बदला हुआ चेहरा, लेकिन वही पुरानी आत्मा

बीते कुछ वर्षों में इमरान हाशमी ने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। कभी खलनायक बने, कभी गंभीर भूमिकाओं में दिखाई दिए तो कभी एक्शन फिल्मों में नजर आए। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि दर्शकों का एक बड़ा वर्ग आज भी उन्हें उसी दौर के साथ जोड़कर देखता है, जब उनकी फिल्मों में दर्द, रोमांस, बेहतरीन संगीत और मजबूत कहानी साथ-साथ चलते थे।

‘Awarapan 2’ का टीजर देखकर यही महसूस होता है कि अभिनेता ने उसी भावनात्मक दुनिया में दोबारा कदम रखा है।

उनके चेहरे पर ज्यादा संवाद नहीं हैं, लेकिन कैमरा जैसे ही क्लोज-अप लेता है, आंखें काफी कुछ कह जाती हैं। यही वह अभिनय शैली है जिसने इमरान हाशमी को हमेशा भीड़ से अलग पहचान दिलाई।

आज जब हिंदी सिनेमा में बड़े एक्शन और वीएफएक्स का दौर चल रहा है, ऐसे समय में सिर्फ चेहरे के भावों से दर्शकों को बांध लेना आसान काम नहीं होता। टीजर में इमरान यही करते नजर आते हैं।

एक्शन इस बार बड़ा है, लेकिन कहानी अभी भी सबसे बड़ा हथियार लगती है

टीजर में गोलीबारी है, पीछा करने वाले दृश्य हैं, तेज रफ्तार एक्शन है और कई ऐसे फ्रेम हैं जो बताते हैं कि फिल्म का स्केल पहली ‘आवारापन’ से कहीं बड़ा होने वाला है।

लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इन सबके बावजूद टीजर सिर्फ एक्शन फिल्म जैसा एहसास नहीं देता।

हर दृश्य के पीछे एक उदासी दिखाई देती है। ऐसा लगता है जैसे मुख्य किरदार किसी मिशन पर नहीं, बल्कि अपने अतीत से लड़ रहा हो। यही बात इस टीजर को सामान्य कमर्शियल फिल्मों से अलग बनाती है।

आजकल रिलीज होने वाले अधिकांश टीजर पहले ही मिनट में पूरी फिल्म बेचने की कोशिश करते हैं। ‘Awarapan 2’ इसके ठीक उलट चलता है। यहां रहस्य को बचाकर रखा गया है। दर्शकों को जवाब नहीं, सवाल दिए गए हैं। और यही रणनीति शायद मेकर्स की सबसे बड़ी सफलता भी है।

क्यों आज भी ‘Awarapan’ को लोग भूल नहीं पाए हैं?

इस सवाल का जवाब सिर्फ फिल्म की कहानी में नहीं, बल्कि उसके प्रभाव में छिपा है।

जब ‘Awarapan’ रिलीज हुई थी, तब उसे वह सफलता नहीं मिली जिसकी उम्मीद की जा रही थी। लेकिन टीवी पर बार-बार प्रसारण, इंटरनेट और बाद में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने इस फिल्म को नई जिंदगी दी। धीरे-धीरे एक पूरी पीढ़ी ने इसे खोजा और फिर इसे अपनी पसंदीदा फिल्मों की सूची में शामिल कर लिया।

फिल्म का संगीत आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में मौजूद है। उसके संवाद आज भी सोशल मीडिया पर शेयर किए जाते हैं और ‘शिवम’ का किरदार आज भी इमरान हाशमी के सबसे मजबूत किरदारों में गिना जाता है।

यही कारण है कि सीक्वल की घोषणा को सिर्फ एक फिल्म का प्रमोशन नहीं, बल्कि एक कल्ट फिल्म की वापसी माना जा रहा है।

टीजर में क्या छिपा रहे हैं मेकर्स?

टीजर देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही पैदा होता है कि आखिर कहानी किस दिशा में जाएगी।

मेकर्स ने जानबूझकर कहानी से जुड़े लगभग सभी पत्ते अपने पास रखे हैं। न किसी नए किरदार को विस्तार से दिखाया गया है और न ही यह बताया गया है कि पहली फिल्म की घटनाओं से इसका संबंध किस तरह जुड़ता है।

यह रणनीति इसलिए भी असरदार लगती है क्योंकि आज सोशल मीडिया के दौर में फिल्म रिलीज होने से पहले ही लगभग पूरी कहानी सामने आ जाती है। लेकिन ‘Awarapan 2’ के टीजर में ऐसा कुछ नहीं है।

यही रहस्य दर्शकों को फिल्म के अगले अपडेट का इंतजार करने के लिए मजबूर करता है।

पहली झलक पर फैसला क्या कहता है?

अगर सिर्फ टीजर के आधार पर बात की जाए तो इतना जरूर कहा जा सकता है कि ‘Awarapan2’ ने शुरुआत सही दिशा में की है।

इसमें अनावश्यक शोर नहीं है, जरूरत से ज्यादा संवाद नहीं हैं और न ही जबरदस्ती का ग्लैमर दिखाने की कोशिश की गई है।

इसके बजाय पूरा फोकस माहौल बनाने, पुराने किरदार की वापसी का एहसास कराने और दर्शकों के भीतर उत्सुकता पैदा करने पर रखा गया है।

यही वजह है कि रिलीज के कुछ ही समय बाद यह टीजर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। जो लोग पहली फिल्म देख चुके हैं, उनके लिए यह पुरानी यादों का दरवाजा खोलता है, जबकि नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए यह एक रहस्यमयी एक्शन-ड्रामा की शुरुआत जैसा महसूस होता है।

पहली झलक उम्मीद जगाती है। अब असली परीक्षा फिल्म की कहानी, पटकथा और निर्देशन की होगी। अगर मेकर्स पहली फिल्म की भावनात्मक गहराई को बरकरार रखते हुए नई कहानी को मजबूत ढंग से पेश करने में सफल रहे, तो ‘Awarapan 2’ सिर्फ एक सीक्वल नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल हो सकती है, जिनका इंतजार वर्षों तक याद रखा जाता है।

क्या ‘Awarapan 2’ सिर्फ पुरानी यादों का फायदा उठाना चाहती है? टीजर देखकर ऐसा नहीं लगता

सीक्वल फिल्मों की सबसे बड़ी मुश्किल यही होती है कि वे अक्सर अपनी पहली फिल्म के बोझ तले दब जाती हैं। दर्शक हर सीन की तुलना पुरानी फिल्म से करने लगते हैं। कई बार मेकर्स भी इसी तुलना के डर से सुरक्षित रास्ता चुनते हैं और कहानी की जगह नॉस्टैल्जिया बेचने लगते हैं। लेकिन ‘आवारापन 2’ का टीजर कम से कम पहली झलक में यह गलती करता हुआ नहीं दिखता।

टीजर में कहीं भी यह कोशिश नजर नहीं आती कि पुरानी फिल्म के मशहूर दृश्यों को दोबारा दोहराकर तालियां बटोरी जाएं। इसके बजाय कैमरा एक ऐसे किरदार का पीछा करता है, जिसके चेहरे पर वक्त की थकान साफ दिखाई देती है। वह पहले से ज्यादा खामोश है, लेकिन उसकी आंखों में वही बेचैनी अब भी जिंदा है।

यहीं से एहसास होने लगता है कि फिल्म सिर्फ नाम नहीं, उस एहसास को भी वापस लाना चाहती है जिसने ‘Awarapan’ को सालों बाद कल्ट फिल्म बना दिया।

इमरान हाशमी का सबसे बड़ा हथियार आज भी उनका अभिनय है, स्टारडम नहीं

बीते कुछ सालों में हिंदी सिनेमा बदल गया है। बड़े सितारों की फिल्में भी अब सिर्फ नाम के दम पर नहीं चलतीं। दर्शक कहानी मांगते हैं और किरदारों में सच्चाई तलाशते हैं।

इमरान हाशमी शायद यह बात सबसे बेहतर समझते हैं। यही कारण है कि टीजर में कहीं भी उन्हें जरूरत से ज्यादा हीरोइक अंदाज में पेश नहीं किया गया। उनका किरदार अपनी खामोशी से असर छोड़ता है।

एक दृश्य में वह बिना कुछ बोले कैमरे की तरफ देखते हैं और कुछ सेकंड का वही शॉट पूरे टीजर के कई बड़े एक्शन सीक्वेंस पर भारी पड़ता है। यह वही इमरान हाशमी हैं जिन्हें दर्शकों ने ‘गैंगस्टर’, ‘जन्नत’ और ‘आवारापन’ में पसंद किया था—जहां अभिनय संवादों से नहीं, चेहरे के भावों से सामने आता था।

टीजर का सबसे समझदारी भरा फैसला—कहानी को छिपाकर रखना

आजकल ट्रेलर और टीजर कई बार पूरी फिल्म का सार बता देते हैं। रिलीज के बाद दर्शक सिर्फ उन दृश्यों को जोड़ते रहते हैं जो पहले ही दिखाए जा चुके होते हैं।

‘आवारापन 2’ ने इस जल्दबाजी से दूरी बनाई है।

टीजर खत्म होने के बाद दर्शक यह नहीं समझ पाता कि असली कहानी क्या है। बस इतना महसूस होता है कि कोई अधूरा हिसाब बाकी है और उसी की तलाश में यह सफर शुरू होगा।

यही रहस्य फिल्म के पक्ष में जाता है। दर्शक अनुमान लगाते हैं, बहस करते हैं और अगले अपडेट का इंतजार करते हैं। किसी भी टीजर की सफलता का पैमाना यही होता है।

संगीत की जिम्मेदारी इस बार पहले से कहीं ज्यादा बड़ी होगी

‘आवारापन’ की चर्चा उसके गानों के बिना पूरी नहीं हो सकती। फिल्म के गीत सिर्फ हिट नहीं हुए थे, उन्होंने कहानी को आगे बढ़ाया था। आज भी उन गानों का जिक्र होते ही फिल्म के दृश्य याद आने लगते हैं।

इस बार चुनौती और कठिन है।

दर्शक सिर्फ अच्छे गाने नहीं चाहते, बल्कि ऐसा संगीत चाहते हैं जो फिल्म की आत्मा बन सके। टीजर का बैकग्राउंड स्कोर उम्मीद जगाता है, लेकिन असली परीक्षा फिल्म के म्यूजिक एल्बम की होगी।

अगर संगीत कमजोर रहा तो पहली फिल्म से तुलना अपने आप शुरू हो जाएगी।

बॉक्स ऑफिस से पहले इम्तिहान दर्शकों की उम्मीदों का है

‘आवारापन 2’ का भविष्य पहले दिन के कलेक्शन से तय नहीं होगा। इस फिल्म का असली इम्तिहान उन दर्शकों के बीच है जिन्होंने पिछले 18 सालों में पहली फिल्म को बार-बार देखा है।

उन्हें सिर्फ एक नया पोस्टर या बड़ा एक्शन नहीं चाहिए। वे चाहते हैं कि फिल्म उन्हें फिर उसी भावनात्मक सफर पर ले जाए, जहां दर्द भी था, प्यार भी था और एक ऐसा नायक भी, जो अपनी कमियों के साथ याद रह गया।

यही वजह है कि इस फिल्म की चर्चा बॉक्स ऑफिस से पहले कहानी को लेकर ज्यादा हो रही है।

फैसला

‘आवारापन 2’ का टीजर देखकर किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि पहली झलक उम्मीद जगाती है।

इसमें शोर कम है, भरोसा ज्यादा दिखाई देता है। यह टीजर दर्शकों से ताली नहीं मांगता, बल्कि उनका ध्यान मांगता है। और शायद यही इसकी सबसे बड़ी कामयाबी भी है।

अब सारी निगाहें ट्रेलर पर टिकेंगी। अगर वहां भी यही संयम और कहानी का वही भाव बरकरार रहा, तो ‘आवारापन 2’ सिर्फ एक और सीक्वल नहीं रहेगी। यह उन फिल्मों में शामिल हो सकती है जो रिलीज के बाद नहीं, बल्कि समय के साथ अपनी असली पहचान बनाती हैं।

फिलहाल इतना तय है कि इमरान हाशमी ने सिर्फ वापसी का ऐलान नहीं किया है, बल्कि उस किरदार का दरवाजा फिर से खोल दिया है, जिसे दर्शकों ने कभी पूरी तरह अलविदा कहा ही नहीं था।

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