नई दिल्ली/इस्लामाबाद— 3 जनवरी को पाकिस्तान वायुसेना (PAF) ने स्वदेशी रूप से विकसित AIR-LAUNCHED CRUISE MISSILE ‘TAIMOOR’ (ALCM) के “सफल उड़ान परीक्षण” का दावा किया। इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इसे देश की एयरोस्पेस और रक्षा क्षमताओं के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह मिसाइल 600 किलोमीटर तक के लक्ष्य पर सटीक प्रहार में सक्षम है। लेकिन इस दावे के साथ जारी किए गए वीडियो और तकनीकी संकेतों ने सोशल मीडिया से लेकर रक्षा विशेषज्ञों तक के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या परीक्षण वाकई सफल था, क्या मिसाइल अपने घोषित लक्ष्य तक पहुंच पाई, और क्या ‘TAIMOOR’ किसी विदेशी—खासकर इजरायली—डिज़ाइन की नकल है? taazanews24x7.com

TAIMOOR क्या है?—PAF का आधिकारिक दावा
पाकिस्तान के अनुसार, ‘TAIMOOR’ एक AIR-LAUNCHED CRUISE MISSILE है, जिसे फाइटर जेट से दागा जा सकता है। ISPR के दावे के मुताबिक:
- रेंज: लगभग 600 किमी
- प्लेटफॉर्म: PAF के लड़ाकू विमान
- भूमिका: स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक—यानी दुश्मन की AIR डिफेंस रेंज से बाहर रहकर हमला
- तकनीक: सटीकता बढ़ाने के लिए आधुनिक गाइडेंस सिस्टम (GPS/INS/TERCOM जैसी क्षमताओं का संकेत)
PAF का कहना है कि यह मिसाइल “रीजनल डिटरेंस” को मज़बूत करेगी और दक्षिण एशिया में शक्ति-संतुलन को नया आयाम देगी।
वीडियो में खुली ‘पोल’?—टेस्ट की फुटेज पर विवाद
ISPR द्वारा जारी वीडियो के कुछ ही घंटों बाद ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) समुदाय और रक्षा विश्लेषकों ने फुटेज को फ्रेम-बाय-फ्रेम खंगालना शुरू कर दिया। विवाद के प्रमुख बिंदु इस प्रकार उभरे:
- टारगेट मिस होने का आरोप:
वीडियो में अंतिम क्षणों में विस्फोट और लक्ष्य की पुष्टि को लेकर स्पष्टता नहीं दिखती। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि “हिट कन्फर्मेशन” वाला शॉट अस्पष्ट है, जिससे मिसाइल के लक्ष्य तक पहुंचने पर संदेह पैदा होता है। - कट्स और एडिटिंग:
फुटेज में अचानक कट्स, अलग-अलग एंगल्स और समयरेखाओं का मेल दिखाई देता है। आलोचकों के मुताबिक, यह “एंड-टू-एंड ट्रैकिंग” की कमी को छिपाने का प्रयास हो सकता है। - टेलीमेट्री डेटा का अभाव:
किसी भी मिसाइल टेस्ट में टेलीमेट्री—स्पीड, ऊंचाई, मार्ग—महत्वपूर्ण होती है। वीडियो/ब्रीफिंग में इनका सार्वजनिक खुलासा नहीं हुआ, जिससे संदेह और बढ़ा।
PAF समर्थक खेमे का तर्क है कि सुरक्षा कारणों से हर तकनीकी विवरण सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। वहीं आलोचक कहते हैं कि सफलता का दावा करने के लिए विश्वसनीय दृश्य/डेटा प्रमाण जरूरी होते हैं।

इजरायली मिसाइल की ‘कॉपी’ का आरोप—कितना दम?
सबसे तीखा आरोप यह है कि ‘TAIMOOR’ का डिज़ाइन इजरायल की कुछ AIR-लॉन्च्ड क्रूज मिसाइलों से मिलता-जुलता है। सोशल मीडिया पर तुलना करते हुए कुछ विश्लेषकों ने:
- AIR फ्रेम शेप,
- इंटेक डिज़ाइन,
- विंग कॉन्फ़िगरेशन
जैसी समानताओं की ओर इशारा किया। हालांकि रक्षा जगत में यह भी एक सच्चाई है कि क्रूज मिसाइलों के डिज़ाइन अक्सर समान एयरोडायनामिक सीमाओं के भीतर विकसित होते हैं, जिससे “दिखने में समानता” अपने आप आ सकती है।
यहां निर्णायक प्रश्न यह है कि क्या समानता केवल कॉन्सेप्ट लेवल की है या टेक्नोलॉजी ट्रांसफर/रिवर्स इंजीनियरिंग का ठोस सबूत मौजूद है। फिलहाल सार्वजनिक डोमेन में ऐसा कोई दस्तावेज़ी प्रमाण नहीं है, जो सीधे तौर पर “कॉपी” होने की पुष्टि करे। फिर भी, पारदर्शिता की कमी इन आरोपों को हवा देती है।
‘सफल’ या ‘आंशिक’ परीक्षण?—तकनीकी नजरिया
रक्षा परीक्षणों में “सफलता” का अर्थ हमेशा परफेक्ट हिट नहीं होता। कई बार परीक्षण चरणबद्ध होते हैं:
- सेपरेशन टेस्ट: विमान से सुरक्षित अलगाव
- प्रोपल्शन टेस्ट: इंजन का स्थिर संचालन
- नेविगेशन टेस्ट: मार्ग का पालन
- टर्मिनल फेज: लक्ष्य पर अंतिम मार्गदर्शन
संभव है कि ‘TAIMOOR’ का परीक्षण किसी मध्यवर्ती लक्ष्य (जैसे सेपरेशन/नेविगेशन) के लिए सफल रहा हो, लेकिन टर्मिनल हिट पर सवाल बने हों। ISPR ने जिस भाषा में “सफल” कहा, वह इसी व्याख्या के दायरे में आती है—लेकिन स्पष्टता न होने से विवाद बढ़ा।
600 किमी की रेंज—दक्षिण एशिया पर क्या असर?
यदि ‘TAIMOOR’ वास्तव में 600 किमी रेंज और विश्वसनीय सटीकता हासिल कर लेती है, तो इसके रणनीतिक निहितार्थ बड़े होंगे:
- स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता: PAF अपने विमानों को अपेक्षाकृत सुरक्षित दूरी पर रखकर हमले कर सकेगी।
- AIR डिफेंस पर दबाव: लंबी दूरी की ALCM से AIR डिफेंस नेटवर्क को चुनौती मिलती है।
- डिटरेंस डायनामिक्स: भारत-पाक शक्ति संतुलन में नई परत जुड़ती है।
हालांकि, रेंज का दावा तभी मायने रखता है जब रीलायबिलिटी, सटीकता और सीरियल प्रोडक्शन सिद्ध हों।
भारत-पाक AIR पावर: तुलना और संदर्भ
दक्षिण एशिया में AIR पावर केवल प्लेटफॉर्म की संख्या नहीं, बल्कि नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, ISR और लॉजिस्टिक्स का खेल है। भारत के पास पहले से ही विविध स्टैंड-ऑफ वेपन्स, AIR डिफेंस लेयर्स और सैटेलाइट-आधारित ISR मौजूद है। ऐसे में:
- ‘TAIMOOR’ एक नया तत्व जोड़ सकती है,
- लेकिन गेम-चेंजर तभी बनेगी जब यह बड़े पैमाने पर विश्वसनीय साबित हो।

घरेलू राजनीति और संदेश
पाकिस्तान में रक्षा परीक्षण अक्सर घरेलू संदेश भी देते हैं—आत्मनिर्भरता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा का भरोसा। आलोचकों का कहना है कि पब्लिक रिलेशन नैरेटिव और तकनीकी वास्तविकता के बीच अंतर रहता है। समर्थकों के अनुसार, हर देश शुरुआती चरणों में आलोचना झेलता है—महत्वपूर्ण यह है कि कार्यक्रम आगे बढ़े।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया—खामोशी क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि इस परीक्षण पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीमित प्रतिक्रिया दिखी। इसके कारण:
- ठोस तकनीकी डेटा का अभाव
- क्षेत्रीय स्तर पर पहले से मौजूद मिसाइल क्षमताएं
- वैश्विक ध्यान अन्य भू-राजनीतिक संकटों पर
यह खामोशी अपने आप में संकेत देती है कि दुनिया अभी ‘TAIMOOR’ को वेट-एंड-वॉच मोड में देख रही है।
आगे क्या?—असली परीक्षा बाकी
आने वाले महीनों में कुछ संकेत निर्णायक होंगे:
- पुनः परीक्षण और उसका पारदर्शी डेटा
- विभिन्न प्रोफाइल (लो-लेवल, टर्मिनल मैन्युवर)
- सीरियल प्रोडक्शन और यूनिट्स में इंडक्शन
- इंटरऑपरेबिलिटी—कमांड, कंट्रोल और ISR से एकीकरण
यदि ये चरण सफल रहते हैं, तो ‘TAIMOOR’ पर उठे सवाल धीरे-धीरे शांत हो सकते हैं। अन्यथा, यह परीक्षण दावों और विवादों तक सिमट कर रह जाएगा।
निष्कर्ष: दावा बड़ा, सबूत अभी अधूरे
‘TAIMOOR’ AIR-LAUNCHED CRUISE MISSILE को लेकर पाकिस्तान का दावा महत्वाकांक्षी है—600 किमी रेंज, स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक और क्षेत्रीय डिटरेंस। लेकिन जारी वीडियो, डेटा की कमी और डिज़ाइन समानता के आरोप इस दावे को फिलहाल कठघरे में खड़ा करते हैं। रक्षा तकनीक में अंतिम फैसला प्रोपेगैंडा नहीं, प्रदर्शन देता है।
दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिहाज़ से बेहतर यही होगा कि हर नई क्षमता पारदर्शिता, जिम्मेदारी और स्थिरता के साथ सामने आए—ताकि शक्ति संतुलन प्रतिस्पर्धा से नहीं, संतुलन से कायम रहे।
Pakistan 🇵🇰 Air Force has successfully conducted the flight test of the indigenously developed TAIMOOR Air Launched Cruise Missile, marking a major milestone in the advancement of Pakistan’s aerospace and defence capabilities.
— Defence Insider (@defence_insider) January 3, 2026
With a range of 600 kilometers, TAIMOOR is capable… pic.twitter.com/KeLx23LfdE