Netanyahu का मास्टरस्ट्रोक, Turkey-Pakistan की बेचैनी और दुनिया के नक्शे पर नए देश की आहट
मध्य-पूर्व और अफ्रीका की राजनीति में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो कि एक कूटनीतिक ऐलान ने एक साथ TURKEY, PAKISTAN, अरब देशों और अफ्रीकी यूनियन को असहज कर दिया हो। लेकिन Somaliland को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने का Israel का फैसला ठीक वैसा ही भूकंपीय झटका साबित हो रहा है।
Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने जैसे ही यह घोषणा की कि उनका देश रिपब्लिक ऑफ Somaliland को एक संप्रभु राष्ट्र मानता है, वैश्विक भू-राजनीति में हलचल तेज हो गई। इसे केवल एक नए देश की मान्यता नहीं, बल्कि Red Sea (लाल सागर) की जियो-स्ट्रैटेजी, TURKEY के अफ्रीकी प्रभाव, Iran-Huthi नेटवर्क और इस्लामिक दुनिया की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। taazanews24x7.com
यह फैसला उस समय आया है, जब Red Sea पहले से ही:
- Huthi हमलों
- समुद्री व्यापार पर खतरे
- America-Israel सुरक्षा गठबंधन
- और चीन-रूस की बढ़ती दिलचस्पी
के कारण वैश्विक टकराव का केंद्र बन चुका है।

330 साल की लड़ाई: आखिर Somaliland है क्या?
Somaliland कोई नया इलाका नहीं है, बल्कि इतिहास में इसकी पहचान SOMALIYA से भी पुरानी मानी जाती है।
औपनिवेशिक इतिहास
- Somaliland पहले ब्रिटिश सोमालिलैंड था
- 1960 में इसे स्वतंत्रता मिली
- कुछ ही दिनों बाद यह इटैलियन SOMALIYA के साथ मिल गया
लेकिन यह एकता कभी मजबूत नहीं हो सकी।
1991: निर्णायक मोड़
जब 1991 में SOMALIYA गृहयुद्ध में डूब गया, तब:
- राजधानी मोगादिशु अराजकता में चली गई
- आतंकी गुट, कबीलाई युद्ध और अकाल फैल गया
इसी दौरान Somaliland ने खुद को अलग और स्वतंत्र घोषित कर दिया।
आज की स्थिति
पिछले 30 वर्षों में Somaliland ने:
- लोकतांत्रिक चुनाव कराए
- अपना संविधान बनाया
- अलग मुद्रा और पासपोर्ट लागू किया
- सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया
जबकि Somaliya आज भी:
- आतंकी संगठन अल-शबाब से जूझ रहा है
- अंतरराष्ट्रीय सैनिकों पर निर्भर है
यही कारण है कि Somaliland खुद को “डि-फैक्टो स्टेट” कहता है।
Israel ने मान्यता अभी क्यों दी? असली वजहें
Israel का यह फैसला भावनात्मक नहीं, बल्कि ठंडी रणनीतिक गणना का नतीजा है।
Red Sea की जंग और Huthi खतरा
लाल सागर Israel के लिए:
- एशिया-यूरोप व्यापार मार्ग
- तेल और गैस सप्लाई
- सैन्य सुरक्षा की लाइफलाइन
है।
यमन में Iran समर्थित Huthi विद्रोही:
- इज़रायली जहाजों को निशाना बना रहे हैं
- बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को अस्थिर कर रहे हैं
ऐसे में Somaliland का बरबेरा पोर्ट:
- Red Sea के मुहाने पर स्थित
- नेवल बेस के लिए आदर्श
- खुफिया निगरानी का मजबूत केंद्र
बन सकता है।

तुर्की की अफ्रीकी महत्वाकांक्षा पर प्रहार
Turkey के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन बीते एक दशक से अफ्रीका में:
- सैन्य
- आर्थिक
- धार्मिक
प्रभाव बढ़ा रहे हैं।
Somaliya में Turkey का रोल:
- मोगादिशु में सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अड्डा
- पोर्ट और एयरपोर्ट का संचालन
- सेना को ट्रेनिंग
Somaliya, Turkey के लिए अफ्रीका का प्रवेश द्वार है।
Somaliland की मान्यता से:
- Somaliya कमजोर
- Turkey का निवेश जोखिम में
- एर्दोगन का “इस्लामिक लीडर” नैरेटिव प्रभावित
होता है।
Iran-Turkey-कतर धुरी को तोड़ने की कोशिश
Israel लंबे समय से:
- Iran
- उसके सहयोगी गुटों
को सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
Somaliland:
- Iran विरोधी रुख रखता है
- अरब लीग और Turkey से दूरी बनाए रखता है
इसलिए Israel के लिए नेचुरल पार्टनर बनता है।
Turkey क्यों बुरी तरह बौखलाया?
Turkey के लिए यह फैसला राजनयिक अपमान जैसा है।
Turkey की चिंता
- Somaliya की क्षेत्रीय अखंडता कमजोर
- अफ्रीका में Turkey की पकड़ ढीली
- Israel को Red Sea में एंट्री
Turkey के विदेश मंत्रालय ने कहा:
“यह फैसला अफ्रीका को अस्थिर करेगा और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।”
असल में एर्दोगन जानते हैं कि अगर Somaliland मान्यता प्राप्त कर लेता है, तो:
- Turkey की अफ्रीकी रणनीति ध्वस्त हो सकती है
- मुस्लिम दुनिया में उसका प्रभाव घट सकता है
PAKISTAN की बेचैनी की असली वजह
PAKISTAN ने भी इस फैसले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
PAKISTAN क्यों डरा हुआ है?
- अलगाववादी आंदोलनों की मिसाल
- मुस्लिम एकता की राजनीति कमजोर
- Turkey के साथ रणनीतिक साझेदारी
PAKISTAN को डर है कि:
- कश्मीर
- बलूचिस्तान
जैसे मुद्दों पर यह फैसला अंतरराष्ट्रीय बहस को जन्म दे सकता है।
अरब देशों का दोहरा रवैया
सऊदी अरब, मिस्र, जॉर्डन और कतर ने औपचारिक रूप से विरोध किया है, लेकिन:
- Huthi हमलों से परेशान
- Iran से खतरा
- Red Sea की सुरक्षा चिंता
के कारण वे पूरी तरह ISRAEL के खिलाफ भी नहीं जा पा रहे।
यही वजह है कि अरब दुनिया की प्रतिक्रिया संयमित और सतर्क दिख रही है।
क्या America और पश्चिमी देश साथ आएंगे?
फिलहाल America ने खुला समर्थन नहीं दिया है, लेकिन:
- ट्रंप युग में अब्राहम समझौते
- Israel-America रणनीतिक गठबंधन
को देखते हुए संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अगर:
- America
- ब्रिटेन
- फ्रांस
जैसे देश समर्थन देते हैं, तो Somaliland की मान्यता अपरिवर्तनीय हो सकती है।
भारत की रणनीतिक चुप्पी
भारत ने इस मुद्दे पर अब तक कोई बयान नहीं दिया है।
भारत की सोच:
- Israel भारत का करीबी रणनीतिक सहयोगी
- Red Sea भारत के व्यापार के लिए अहम
- Turkey-Pakistan से रिश्ते पहले से तनावपूर्ण
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत:
- जल्दबाजी नहीं करेगा
- लेकिन ISRAEL के फैसले को पूरी तरह नकारेगा भी नहीं
क्या सच में दुनिया को मिलेगा नया देश?
यह फैसला डोमिनो इफेक्ट पैदा कर सकता है।
संभावित असर:
- संयुक्त राष्ट्र में नई बहस
- अफ्रीकी यूनियन में मतभेद
- सीमाओं के पुनर्निर्धारण की मांग
लेकिन जोखिम भी हैं:
- Somaliya में हिंसा
- RED SEA में सैन्य तनाव
- TURKEY-ISRAEL टकराव
NETANYAHU का हाई-रिस्क, हाई-रिवार्ड दांव
NETANYAHU ने:
- सुरक्षा
- कूटनीति
- भू-राजनीति
तीनों मोर्चों पर बड़ा दांव खेला है।
अगर यह सफल हुआ तो:
- Israel Red Sea का सबसे अहम खिलाड़ी बनेगा
- Turkey की रणनीति कमजोर पड़ेगी
- Iran-Huthi नेटवर्क को बड़ा झटका लगेगा
लेकिन अगर असफल हुआ, तो:
- क्षेत्रीय संघर्ष
- अंतरराष्ट्रीय दबाव
- समुद्री टकराव
बढ़ सकता है।

निनिष्कर्ष: बदलती दुनिया का संकेत
Somaliland को मान्यता देना सिर्फ एक देश को पहचान देना नहीं है, बल्कि यह:
- 21वीं सदी की नई शक्ति राजनीति
- इस्लामिक दुनिया के भीतर दरार
- अफ्रीका के पुनर्गठन
का संकेत है।
अब सवाल यही है—
क्या एर्दोगन और Pakistan इस कूटनीतिक चाल का जवाब दे पाएंगे, या Netanyahu Red Sea की बाज़ी पूरी तरह अपने नाम कर लेंगे?
दुनिया की निगाहें अब हॉर्न ऑफ अफ्रीका पर हैं, जहां से आने वाला अगला कदम वैश्विक राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
After more than three decades of peaceful self-governance, constitutional order, and democratic practice, Somaliland has received its first formal international recognition as a sovereign and independent state.
— Presidency | Republic of Somaliland (@Presidencysl_) December 26, 2025
This development affirms an objective reality that has long existed.… pic.twitter.com/Kw0JrhfZKM