मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। Israel ने Iran पर बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया है। राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फाइटर जेट्स और लंबी दूरी की मिसाइलों के जरिए Iran के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस हमले के बाद दोनों देशों ने अपने-अपने हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक उड़ानों पर असर पड़ा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का बयान भी चर्चा में है। Donald Trump ने कहा कि “तेहरान को कभी परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा।” इससे यह संकेत मिलता है कि Iran के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। taazanews24x7.com
नीचे इस पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विश्लेषण, पृष्ठभूमि, संभावित असर और आगे की स्थिति पर नजर डालते हैं।

तेहरान में धमाके, कई ठिकानों पर एक साथ हमले
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात तेहरान में कई जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मिसाइलें उच्च सुरक्षा वाले इलाकों के पास गिरीं। Iran के सरकारी मीडिया ने शुरुआत में सीमित जानकारी दी, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया है।
सूत्रों के अनुसार, हमले में ड्रोन, फाइटर जेट्स और प्रिसिजन-गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। कई सैन्य अड्डों और एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, नुकसान की सटीक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
अमेरिका की भूमिका क्या है?
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि यह ऑपरेशन अमेरिका और Israel की साझा रणनीति का हिस्सा हो सकता है। हालांकि आधिकारिक रूप से अमेरिका ने सीधे सैन्य भागीदारी की पुष्टि नहीं की है।
पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने बयान में कहा कि Iran का परमाणु कार्यक्रम वैश्विक शांति के लिए खतरा है और “तेहरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा।” ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों में चिंता बढ़ी हुई है।

Israel की रणनीति: प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक?
Israel लंबे समय से यह कहता रहा है कि वह Iran को परमाणु शक्ति बनने से रोकने के लिए “प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक” का विकल्प खुला रखता है। Israel का आरोप है कि Iran गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इजरायली सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह हमला “रणनीतिक और सीमित” था, जिसका उद्देश्य केवल सैन्य ठिकानों और मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचाना था, न कि नागरिक इलाकों को।
खामेनेई के दफ्तर के पास मिसाइल?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मिसाइलें Iran के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के कार्यालय के पास गिरीं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। Iran ने इसे “दुश्मन का दुष्प्रचार” बताया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हवाई क्षेत्र बंद, उड़ानों पर असर
हमले के तुरंत बाद Iran और Israel दोनों ने अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए। इसके कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें डायवर्ट की गईं या रद्द कर दी गईं। मध्य पूर्व से यूरोप और एशिया की ओर जाने वाली उड़ानों पर इसका सीधा असर पड़ा है।
एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव लंबे समय तक जारी रहा, तो तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।
परमाणु कार्यक्रम: विवाद की जड़
Iran का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। 2015 में ईरान और विश्व शक्तियों के बीच परमाणु समझौता हुआ था, जिसे आधिकारिक तौर पर Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) कहा जाता है। इस समझौते के तहत Iran ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने की बात मानी थी, बदले में उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए गए थे।
लेकिन बाद में अमेरिका ने इस समझौते से खुद को अलग कर लिया, जिसके बाद से तनाव लगातार बढ़ता गया।

Iran की प्रतिक्रिया: “कड़ा जवाब देंगे”
ईरानी अधिकारियों ने हमले को “आक्रामक और अवैध” बताया है। सरकारी बयान में कहा गया है कि इस हमले का “समुचित और कड़ा जवाब” दिया जाएगा। Iran के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि Iran सीधे जवाबी हमला कर सकता है या फिर अपने क्षेत्रीय सहयोगी संगठनों के माध्यम से प्रतिक्रिया दे सकता है।
मध्य पूर्व में बढ़ता खतरा
मध्य पूर्व पहले से ही अस्थिरता से जूझ रहा है। Israel-Iran तनाव यदि पूर्ण युद्ध में बदलता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। खाड़ी देशों, लेबनान, सीरिया और इराक तक इसका प्रभाव फैल सकता है।
तेल की कीमतों में उछाल की संभावना जताई जा रही है। वैश्विक बाजारों में अस्थिरता देखी जा सकती है।
क्या होगा आगे?
1. सीमित जवाबी कार्रवाई
Iran प्रतीकात्मक या सीमित सैन्य प्रतिक्रिया दे सकता है।
2. कूटनीतिक दबाव
संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देश दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील कर सकते हैं।
3. व्यापक युद्ध का खतरा
यदि दोनों देशों के बीच सीधा संघर्ष बढ़ता है, तो यह क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।

वैश्विक प्रतिक्रिया
अमेरिका, यूरोपीय संघ और रूस समेत कई देशों ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाए जाने की संभावना है।
निष्कर्ष
Israel द्वारा Iran पर किया गया यह हमला मध्य पूर्व की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभुत्व और सुरक्षा चिंताओं के बीच यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बन चुका है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या यह तनाव सीमित सैन्य कार्रवाई तक रहेगा या फिर व्यापक संघर्ष का रूप लेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें तेहरान और तेल अवीव पर टिकी हैं।
⚡15 minutes of footage of Iran's missiles hitting Israel..💥💥 pic.twitter.com/KvXn7kR3GI
— Nadira Ali🇵🇸 (@Nadira_ali12) October 2, 2024