Iran संकट अपने निर्णायक मोड़ पर: 30 से अधिक शहरों में उबाल, बदलीं विरोध की मांगें, दर्जनों मौतों की आशंका और Trump का ‘Make Iran Great Again’ संदेश

तेहरान | वॉशिंगटन | तेल अवीव | विशेष अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट

IRAN इस समय केवल सड़कों पर उमड़ रहे विरोध प्रदर्शनों का सामना नहीं कर रहा, बल्कि वह इतिहास के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ आर्थिक विफलता, राजनीतिक असंतोष और वैश्विक शक्ति संघर्ष एक-दूसरे में गहराई से उलझ चुके हैं। नौवें दिन में प्रवेश कर चुके विरोध प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन न तो अचानक पैदा हुआ है और न ही इसे कुछ रियायतों से शांत किया जा सकता है। taazanews24x7.com

सरकारी सूत्रों, स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश के 30 से अधिक शहरों और कस्बों में किसी न किसी रूप में विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं। तेहरान से लेकर मशहद, इस्फहान, शीराज़, तबरीज़, करमानशाह और अहवाज़ तक हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। कई इलाकों में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बावजूद सड़कों पर आक्रोश थमता नजर नहीं आ रहा।

आंदोलन का बदला चरित्र: अब सिर्फ महंगाई नहीं, सत्ता पर सवाल

शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, बेरोज़गारी और गिरती जीवन-स्तर तक सीमित था। ईरानी रियाल की ऐतिहासिक गिरावट, बढ़ती खाद्य कीमतें और रोज़गार के घटते अवसर आम जनता को सड़कों पर ले आए थे। लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, नारों की भाषा बदलती चली गई

अब प्रदर्शनकारियों की मांगें कहीं अधिक राजनीतिक और बुनियादी हो चुकी हैं—

  • सरकार की जवाबदेही
  • प्रशासनिक पारदर्शिता
  • नागरिक अधिकारों की रक्षा
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

विश्लेषकों का कहना है कि यही बदलाव ईरानी नेतृत्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। जब कोई आंदोलन आर्थिक मांगों से आगे बढ़कर सिस्टम की वैधता पर सवाल उठाने लगता है, तो वह सत्ता के लिए अस्तित्व का संकट बन जाता है।

विरोध का भौगोलिक विस्तार: एक शहर नहीं, पूरा देश

मौजूदा आंदोलन की सबसे अहम विशेषता इसका व्यापक भौगोलिक फैलाव है। यह विरोध—

  • राजधानी तेहरान के उत्तरी और मध्य इलाकों
  • धार्मिक शहर मशहद
  • औद्योगिक हब इस्फहान
  • सांस्कृतिक केंद्र शीराज़
  • कुर्द बहुल पश्चिमी प्रांतों
  • और दक्षिणी तेल-समृद्ध क्षेत्र अहवाज़

तक फैल चुका है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, 30–35 स्थानों पर एक साथ विरोध होना इस बात का संकेत है कि असंतोष अब केवल शहरी मध्यम वर्ग तक सीमित नहीं रहा। इसमें मजदूर, छात्र, बेरोज़गार युवा, शिक्षक और छोटे व्यापारी बड़ी संख्या में शामिल हो चुके हैं।

मौतों और गिरफ्तारियों पर धुंध और डर

ईरानी सरकार ने अब तक किसी बड़े आधिकारिक आंकड़े की पुष्टि नहीं की है, लेकिन—

  • स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों
  • निर्वासित ईरानी कार्यकर्ताओं
  • और विदेशी मीडिया रिपोर्टों

के अनुसार, दर्जनों लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।

रिपोर्टों के मुताबिक मौतें—

  • सुरक्षा बलों के साथ झड़प
  • भीड़ को तितर-बितर करने की कार्रवाई
  • और कुछ मामलों में हिरासत के दौरान

हुई हैं। सरकार द्वारा इंटरनेट और मीडिया पर लगाए गए सख्त नियंत्रण के चलते स्वतंत्र पुष्टि कठिन बनी हुई है, जिससे भय और अफवाहों का माहौल और गहरा गया है।

तेहरान की सड़कों पर तनावपूर्ण हालात

सरकार की रणनीति: नियंत्रण या संवाद?

हालात पर काबू पाने के लिए ईरानी नेतृत्व ने—

  • सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई
  • संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट की गति कम की
  • विदेशी पत्रकारों की गतिविधियों पर रोक लगाई

लेकिन इन कदमों का असर उल्टा पड़ता दिखाई दे रहा है। कई जगहों पर युवाओं का गुस्सा और भड़क गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार समस्याओं के समाधान की बजाय असहमति को दबाने में लगी है।

कमजोर अर्थव्यवस्था: संकट की असली जड़

IRAN की मौजूदा हालत को समझने के लिए उसकी अर्थव्यवस्था पर नजर डालना अनिवार्य है।

अमेरिकी प्रतिबंधों का असर—

  • तेल निर्यात में भारी गिरावट
  • अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम से कटाव
  • विदेशी मुद्रा और डॉलर की भारी कमी

सरकार बार-बार कहती रही है कि प्रतिबंध ही सारी समस्याओं की जड़ हैं, लेकिन जनता का मानना है कि आंतरिक भ्रष्टाचार, नीति विफलता और संसाधनों का गलत वितरण भी उतने ही जिम्मेदार हैं।

TRUMP की चेतावनी और अमेरिकी TRAVEL ADVISORY

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति DONALD TRUMP ने IRAN को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा—

“IRAN में जारी अस्थिरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह पूरे मध्य पूर्व को आग में झोंक सकती है।”

इसके तुरंत बाद अमेरिका ने IRAN के लिए TRAVEL ADVISORY जारी कर अपने नागरिकों से यात्रा से बचने की अपील की।

इस फैसले का असर—

  • विदेशी निवेश
  • पर्यटन उद्योग
  • और अंतरराष्ट्रीय व्यापार

पर साफ दिखाई देने लगा है।

परमाणु कार्यक्रम: अंतरराष्ट्रीय टकराव का केंद्र

IRAN का परमाणु कार्यक्रम एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में है। अमेरिका और ISRAEL का आरोप है कि—

  • IRAN परमाणु हथियार बनाने की क्षमता के करीब पहुंच चुका है
  • बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को तेजी से उन्नत कर रहा है

IRAN इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि उसका कार्यक्रम ऊर्जा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए है, लेकिन भरोसे की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।

NETANYAHU–TRUMP की साझा चेतावनी

ISRAEL के प्रधानमंत्री BENJAMIN NETANYAHU और DONALD TRUMP दोनों ने एक सुर में कहा है—

“IRAN को परमाणु हथियार और लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”

ISRAEL का मानना है कि यदि IRAN परमाणु शक्ति बन गया, तो पूरे मध्य पूर्व का शक्ति संतुलन बदल जाएगा और उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

VENEZUELA उदाहरण और IRAN की बढ़ती चिंता

VENEZUELA में हालिया अमेरिकी हस्तक्षेप और मादुरो से जुड़े घटनाक्रम ने IRAN को और चौकन्ना कर दिया है। ईरानी नेतृत्व को आशंका है कि—

  • अमेरिका आंतरिक असंतोष को बाहरी समर्थन दे सकता है
  • सत्ता परिवर्तन की रणनीति अपनाई जा सकती है

इसी संदर्भ में TRUMP को ‘Make Iran Great Again’ लिखी टोपी के साथ देखे जाने को केवल प्रतीकात्मक घटना नहीं माना जा रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार—

  • यह एक वैचारिक संदेश था
  • IRAN की मौजूदा सरकार पर सीधा राजनीतिक हमला
  • और संभावित सत्ता परिवर्तन का संकेत

IRAN ने इसे खुले हस्तक्षेप और उकसावे के रूप में लिया है।

IRAN परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ISRAEL की चेतावनी

सरकार की सबसे बड़ी दुविधा

ईरानी नेतृत्व इस वक्त दो कठिन विकल्पों के बीच फंसा है—

अगर सख्ती अपनाई गई—

  • अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ेगी
  • नए प्रतिबंध लग सकते हैं
  • मानवाधिकार मुद्दे और गहराएंगे

अगर नरमी दिखाई गई—

  • सत्ता की पकड़ कमजोर पड़ सकती है
  • विरोध और तेज हो सकता है

यही असमंजस संकट को लंबा खींच रहा है।

वैश्विक असर: तेल बाजार से कूटनीति तक

IRAN में जारी अस्थिरता का असर—

  • कच्चे तेल की कीमतों
  • वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
  • और ऊर्जा सुरक्षा

पर पड़ रहा है। रूस, चीन और यूरोपीय देश भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि IRAN में अस्थिरता पूरे मध्य पूर्व को प्रभावित कर सकती है।

आने वाले हफ्ते क्यों अहम?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगले कुछ सप्ताह निर्णायक साबित होंगे—

  • क्या सरकार आर्थिक राहत की घोषणा करेगी?
  • क्या परमाणु वार्ता फिर से शुरू होगी?
  • क्या अमेरिका और ISRAEL दबाव और बढ़ाएंगे?

इन सवालों के जवाब केवल IRAN ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता की दिशा तय करेंगे।

निष्कर्ष: IRAN केवल एक देश नहीं, एक चेतावनी

IRAN में जारी यह संकट दिखाता है कि जब आर्थिक दबाव, राजनीतिक असंतोष और वैश्विक टकराव एक साथ आते हैं, तो किसी भी देश की स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।

30 से अधिक जगहों पर फैले विरोध और दर्जनों मौतों की आशंका इस बात का स्पष्ट संकेत है कि ईरानी जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक और ठोस बदलाव चाहती है।

अब पूरी दुनिया की निगाहें इसी सवाल पर टिकी हैं—
IRAN संवाद का रास्ता चुनेगा, या टकराव की आग और भड़केगी?

FAQ:

Q1. IRAN में विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं?

IRAN में विरोध प्रदर्शन महंगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक संकट और सरकारी जवाबदेही की कमी के कारण शुरू हुए, जो अब राजनीतिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मांग तक पहुंच चुके हैं।

Q2. IRAN में विरोध कितने शहरों में फैला है?

रिपोर्ट्स के अनुसार IRAN के 30 से अधिक शहरों और कस्बों में विरोध प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं, जिनमें तेहरान, मशहद, इस्फहान और अहवाज़ शामिल हैं।

Q3. IRAN विरोध में कितने लोगों की मौत हुई है?

सरकारी आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन स्वतंत्र मानवाधिकार संगठनों के अनुसार दर्जनों लोगों की मौत होने की आशंका है और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया है।

Q4. TRUMP का ‘Make Iran Great Again’ बयान क्यों चर्चा में है?

VENEZUELA के मादुरो प्रकरण के बाद DONALD TRUMP को ‘Make Iran Great Again’ टोपी पहने देखा गया, जिसे IRAN में सत्ता परिवर्तन के संकेत और खुले हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।

Q5. IRAN का परमाणु कार्यक्रम क्यों विवाद में है?

अमेरिका और ISRAEL का आरोप है कि IRAN परमाणु हथियार विकसित करने के करीब है, जबकि IRAN दावा करता है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

Q6. IRAN संकट का वैश्विक असर क्या है?

इस संकट का असर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व की कूटनीति पर पड़ रहा है।

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