नई दिल्ली, 6 नवंबर 2025:
IBM ने हजारों कर्मचारियों को निकाला नौकरी से: दुनिया की सबसे पुरानी और भरोसेमंद तकनीकी कंपनियों में गिनी जाने वाली आईबीएम (IBM) इन दिनों सुर्खियों के केंद्र में है। कंपनी ने हाल ही में हजारों कर्मचारियों की छंटनी (Mass Layoffs) की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि यह छंटनी सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं, बल्कि भारत, यूरोप और एशिया के अन्य हिस्सों में भी की गई है। taazanews24x7.com
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका इतिहास के सबसे लंबे आर्थिक शटडाउन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में मंदी से गुजर रहा है।
IBM की बड़ी घोषणा: हजारों कर्मचारी बेरोजगार
आईबीएम ने अपने वित्तीय पुनर्गठन (Restructuring) के हिस्से के रूप में यह कदम उठाया है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि “यह फैसला लागत कम करने और नए एआई (AI) आधारित मॉडल पर काम करने की योजना का हिस्सा है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार छंटनी का आंकड़ा 10,000 से अधिक कर्मचारियों तक पहुंच सकता है। इनमें कई ऐसे अनुभवी कर्मचारी भी शामिल हैं जो कंपनी के साथ 15 से 20 साल से जुड़े थे।
कई कर्मचारियों को एक साधारण ईमेल या वर्चुअल मीटिंग के ज़रिए सूचित किया गया कि “उनकी सेवाएं अब आवश्यक नहीं हैं।”
एक कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर लिखा —
“आईबीएम ने हमें सिखाया कि टेक्नोलॉजी बदलती है, लेकिन इंसानियत भी अब सॉफ्टवेयर अपडेट की तरह हटा दी जाती है।”
अमेरिका में आर्थिक सुस्ती और तकनीकी संकट
अमेरिका में इस समय सबसे लंबा सरकारी शटडाउन जारी है। आर्थिक गतिविधियों में मंदी, निवेश में कमी और टेक सेक्टर में गिरती मांग ने बड़ी कंपनियों को झकझोर दिया है।
आईबीएम के साथ-साथ गूगल, मेटा, अमेज़न और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियाँ भी बीते एक साल में भारी छंटनी कर चुकी हैं।
आईबीएम की वित्तीय रिपोर्ट बताती है कि कंपनी को पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है।
क्लाउड कंप्यूटिंग, कंसल्टिंग सर्विस और हार्डवेयर सेगमेंट में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई।
इसके अलावा, डॉलर की अस्थिरता और बढ़ते ऑपरेटिंग कॉस्ट ने कंपनी को और कठिन स्थिति में डाल दिया है।
Ai और Automation के युग में घटते रोजगार
आईबीएम के सीईओ अरविंद कृष्णा ने कुछ महीने पहले ही कहा था कि आने वाले वर्षों में कंपनी ऐसे कई पदों को खत्म करेगी जिन्हें “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मशीन लर्निंग (Machine Learning)” द्वारा संभाला जा सकता है।
अब वही बात हकीकत बनती दिख रही है।
कई विभागों में अब एआई आधारित चैटबॉट, कोडिंग असिस्टेंट, और डेटा एनालिसिस टूल्स मानव कर्मचारियों की जगह ले रहे हैं।
कंपनी का तर्क है कि इससे लागत घटेगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी, लेकिन इसका परिणाम हजारों नौकरियों के खत्म होने के रूप में सामने आया है।
टेक विशेषज्ञों का कहना है — “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उत्पादकता तो बढ़ेगी, लेकिन अगर इंसानों के लिए काम ही नहीं रहेगा तो यह विकास नहीं, संकट है।”

भारत पर भी पड़ेगा बड़ा असर
आईबीएम का भारत में काफी बड़ा ऑपरेशन है। बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, नोएडा और गुरुग्राम में कंपनी के हजारों कर्मचारी काम करते हैं।
आंतरिक सूत्रों के अनुसार, कंपनी भारत में भी 1,500 से 2,000 कर्मचारियों को निकालने की तैयारी में है।
हालांकि IBM इंडिया ने इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन कई कर्मचारियों ने LinkedIn पर अपने अनुभव साझा किए हैं।
कई लोगों ने बताया कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के एक्सेस ब्लॉक कर दिया गया और अगले दिन HR से ईमेल प्राप्त हुआ जिसमें लिखा था कि “आपकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जाती हैं।”
सोशल मीडिया पर गुस्सा और भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे X (पूर्व ट्विटर) और LinkedIn पर #IBMLayoffs, #TechCrisis और #JobLoss2025 जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
कर्मचारी कंपनी पर “मानवता भूलने और लाभ को सर्वोपरि रखने” का आरोप लगा रहे हैं।
एक पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने पोस्ट किया —
“मैंने IBM में अपने जीवन के 14 साल दिए, लेकिन जब एआई ने मेरा काम संभाल लिया, मुझे एक ईमेल से घर भेज दिया गया।”
दूसरे यूज़र ने लिखा —
“हम मशीनों के युग में जी रहे हैं। इंसानों की भावनाएं अब कंपनी की एक्सेल शीट में नहीं गिनी जातीं।”
कंपनी की सफाई: “यह भविष्य की दिशा में कदम है”
आईबीएम ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
“हम बदलते बिजनेस मॉडल और नई तकनीकों के अनुरूप खुद को पुनर्गठित कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य एआई-समर्थित भविष्य के लिए कंपनी को तैयार करना है।”
कंपनी के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि यह निर्णय “दीर्घकालिक विकास रणनीति” का हिस्सा है, जिससे कंपनी आने वाले वर्षों में प्रतिस्पर्धा में बनी रह सकेगी।
हालांकि, इंडस्ट्री विश्लेषकों का कहना है कि आईबीएम अपने घटते मुनाफे और निवेशकों के दबाव में यह कदम उठा रही है।
टेक इंडस्ट्री में छंटनी की लहर
पिछले दो वर्षों में टेक सेक्टर में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है।
Google, Amazon, Meta, Microsoft और अब IBM — सभी ने लागत कटौती (Cost Cutting) के नाम पर लाखों कर्मचारियों को निकाला है।
2024-25 के बीच दुनिया भर में लगभग 5 लाख से अधिक टेक प्रोफेशनल्स अपनी नौकरियाँ खो चुके हैं।
इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि एआई और ऑटोमेशन आने वाले दशक में नौकरी के स्वरूप को पूरी तरह बदल देंगे।

विशेषज्ञों की राय: “अब स्किल अपग्रेडेशन ही सुरक्षा कवच”
टेक विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय “अपस्किलिंग और रीस्किलिंग” का है।
जो कर्मचारी नई तकनीकों — जैसे एआई, डेटा एनालिटिक्स, क्लाउड सिक्योरिटी, साइबर डिफेंस आदि — में महारत हासिल करेंगे, वे इस बदलाव से सुरक्षित रह सकते हैं।
आईटी एनालिस्ट मनीष अरोड़ा कहते हैं —
“आज के दौर में सिर्फ कोडिंग या सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट स्किल्स पर्याप्त नहीं हैं। अब हर पेशेवर को टेक्नोलॉजी के साथ मानवीय संवेदना और रणनीतिक सोच जोड़नी होगी।”
सरकारों और कंपनियों की नई जिम्मेदारी
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रवृत्ति ऐसे ही जारी रही, तो आने वाले 5 वर्षों में विश्वभर में करोड़ों नौकरियाँखत्म हो सकती हैं।
इसलिए ज़रूरी है कि सरकारें एआई के इस्तेमाल को लेकर नए श्रम कानून (AI Employment Policy) बनाएं।
यूरोप में पहले ही एआई विनियमन (AI Regulation) पर चर्चा चल रही है, जबकि भारत में भी नीति आयोग इस दिशा में विचार कर रहा है।
अगर समय रहते कंपनियों पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो बेरोज़गारी का संकट और गहरा सकता है।
भावनात्मक और सामाजिक प्रभाव
आईबीएम जैसी वैश्विक कंपनी में नौकरी खोना सिर्फ आर्थिक झटका नहीं होता, यह भावनात्मक और मानसिक आघात भी होता है।
कई कर्मचारियों ने बताया कि अचानक नौकरी जाने से उनका आत्मविश्वास और परिवार की स्थिरता दोनों पर असर पड़ा है।
सोशल एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक एक संस्था से जुड़ाव रखने वाले कर्मचारियों के लिए यह बदलाव बेहद कठिन होता है।
उनकी पहचान, सामाजिक स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य सभी प्रभावित होते हैं।
तकनीक बनाम इंसान: एक कठिन सवाल
आईबीएम की यह छंटनी हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या तकनीकी विकास मानव विकास से आगे निकल गया है?
क्या कंपनियाँ अब सिर्फ “प्रॉफिट मशीन” बन गई हैं, जिनमें इंसान की जगह नहीं रही?
टेक्नोलॉजी का उद्देश्य हमेशा इंसान के जीवन को आसान बनाना था, लेकिन जब वही तकनीक इंसान की रोज़ी-रोटी छीनने लगे, तो यह चिंता का विषय बन जाता है।
भविष्य की दिशा: संतुलन ही समाधान
कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एआई का इस्तेमाल पूरी तरह रोकना संभव नहीं है।
लेकिन इसके उपयोग में संतुलन और मानवीय दृष्टिकोण लाना अनिवार्य है।
अगर कंपनियाँ केवल लागत घटाने पर ध्यान देंगी, तो समाज में असमानता और बेरोजगारी दोनों बढ़ेंगी।
दूसरी ओर, अगर एआई को कर्मचारियों के सहयोगी के रूप में इस्तेमाल किया जाए, तो यह उत्पादकता और नवाचार दोनों को बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष: तकनीक और मानवता का साथ ज़रूरी
आईबीएम की छंटनी सिर्फ एक कॉर्पोरेट खबर नहीं है — यह आधुनिक समाज के लिए चेतावनी है।
यह दिखाती है कि कैसे तकनीकी क्रांति का फायदा अगर सीमित लोगों तक रहेगा, तो उसका परिणाम सामाजिक अस्थिरता के रूप में सामने आएगा।
भविष्य उन्हीं कंपनियों का होगा जो “मानवता और तकनीक” के बीच संतुलन स्थापित कर पाएँगी।
आईबीएम जैसे ब्रांड्स को यह याद रखना होगा कि उनका असली निवेश सिर्फ मशीनों में नहीं, बल्कि उन इंसानों में है जिन्होंने दशकों तक इसे महान बनाया।
