वॉशिंगटन/कोपेनहेगन।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और एक बार फिर सत्ता की ओर बढ़ते दिख रहे डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला देने वाला कदम उठाया है। GREENLAND और CANADA को अमेरिका का हिस्सा दिखाते हुए एक नया नक्शा सोशल मीडिया पर साझा कर ट्रंप ने न सिर्फ यूरोप, बल्कि नाटो और पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। तस्वीरों में ट्रंप GREENLAND पर अमेरिकी झंडा फहराते नजर आ रहे हैं, जबकि CANADA को भी अमेरिकी सीमा में दर्शाया गया है। taazanews24x7.com
यह कोई साधारण पोस्ट नहीं थी, बल्कि ट्रंप की उस आक्रामक विदेश नीति का खुला संकेत है, जिसमें वे साफ कह चुके हैं कि “ताकत के जरिए ही शांति कायम की जा सकती है।” फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और नाटो नेतृत्व इस घटनाक्रम के बाद असहज स्थिति में नजर आ रहे हैं।

GREENLAND क्यों बन गया ट्रंप की जिद का केंद्र?
GREENLAND कोई छोटा द्वीप नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जो रणनीतिक और भौगोलिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। यह डेनमार्क के अधीन स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन आर्कटिक सर्कल में इसकी स्थिति इसे वैश्विक शक्तियों के लिए बेहद संवेदनशील बनाती है।
1. आर्कटिक में बढ़ती महाशक्ति प्रतिस्पर्धा
आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के बीच दबदबा बढ़ाने की होड़ पहले से जारी है। बर्फ पिघलने के साथ नए समुद्री मार्ग और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच आसान हो रही है।
2. दुर्लभ खनिज और ऊर्जा संसाधन
GREENLAND में दुर्लभ पृथ्वी तत्व (Rare Earth Minerals), तेल, गैस और यूरेनियम जैसे संसाधनों की भारी संभावनाएं हैं, जो भविष्य की टेक्नोलॉजी और रक्षा उद्योग के लिए बेहद जरूरी हैं।
3. सैन्य और मिसाइल डिफेंस
अमेरिका पहले से ही GREENLAND में थ्यूल एयर बेस संचालित करता है। ट्रंप का मानना है कि अगर पूरा GREENLAND अमेरिका के नियंत्रण में हो, तो वैश्विक सुरक्षा को “अमेरिकी शर्तों” पर तय किया जा सकता है।
ट्रंप का दावा: ‘शांति की भाषा ताकत ही समझती है दुनिया’
अपने सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यूरोप दशकों से अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि अमेरिका अपने हितों के लिए “सीधे फैसले” ले।
ट्रंप ने लिखा,
“मुझे नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, इसलिए अब मैं खोखली शांति पर भरोसा नहीं करता। असली शांति ताकत से आती है, और वह ताकत सिर्फ अमेरिका के पास है।”
यह बयान नॉर्वे के प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी के बाद सामने आया, जिसने इस विवाद को और भड़का दिया।

CANADA को लेकर क्यों उठे सवाल?
ट्रंप के साझा किए गए नक्शे में CANADA को अमेरिका का हिस्सा दिखाया जाना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू रहा। CANADA न केवल अमेरिका का पड़ोसी और सहयोगी देश है, बल्कि नाटो का अहम सदस्य भी है।
ट्रंप समर्थकों की दलील
ट्रंप समर्थक सोशल मीडिया पर यह तर्क दे रहे हैं कि अमेरिका और CANADA की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और संस्कृति पहले से जुड़ी हुई हैं, इसलिए “एकीकृत उत्तर अमेरिका” भविष्य की जरूरत है।
CANADA की प्रतिक्रिया
हालांकि CANADA सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस नक्शे को “बेतुका और अस्वीकार्य” बताया है। ओटावा में राजनयिक हलकों में इसे अमेरिकी आंतरिक राजनीति का खतरनाक प्रचार करार दिया जा रहा है।
मैक्रों और मेलोनी क्यों हुए असहज?
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लंबे समय से यूरोप की “रणनीतिक स्वायत्तता” की बात करते रहे हैं। ट्रंप का यह आक्रामक रुख उनके उस सपने के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है।
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, जो वैचारिक रूप से ट्रंप के काफी करीब मानी जाती हैं, भी इस मुद्दे पर खुलकर समर्थन देने से बचती नजर आईं। कारण साफ है—यूरोप किसी भी कीमत पर अमेरिका की विस्तारवादी नीति को खुली छूट नहीं देना चाहता।
नाटो महासचिव से बातचीत का दावा
ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने नाटो महासचिव से इस मुद्दे पर बात की है और उन्हें यह समझाया है कि GREENLAND “सिर्फ डेनमार्क का नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी सुरक्षा ढांचे का हिस्सा” है।
हालांकि नाटो की ओर से कोई स्पष्ट समर्थन सामने नहीं आया है। नाटो सूत्रों का कहना है कि संगठन किसी भी सदस्य देश की संप्रभुता के खिलाफ नहीं जा सकता।

डेनमार्क और GREENLAND का कड़ा विरोध
डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा है कि GREENLAND “बेचने की वस्तु नहीं” है। GREENLAND की स्थानीय सरकार ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि वहां के लोग अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगे।
GREENLAND में पहले ही स्वतंत्रता को लेकर बहस चल रही है, लेकिन अमेरिका में विलय का विचार वहां के नागरिकों के लिए भी अस्वीकार्य माना जा रहा है।
क्या यह सिर्फ चुनावी रणनीति है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम पूरी तरह चुनावी रणनीति भी हो सकता है।
ट्रंप का कोर वोटर
अमेरिका में राष्ट्रवाद, सैन्य शक्ति और विस्तारवादी सोच रखने वाला वर्ग ट्रंप का मजबूत आधार है। GREENLAND और CANADA जैसे मुद्दे उठाकर ट्रंप खुद को “मजबूत नेता” के रूप में पेश कर रहे हैं।
मीडिया पर पकड़
ट्रंप जानते हैं कि ऐसे बयानों से वे वैश्विक सुर्खियों में आ जाएंगे, और यही उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत रही है।
वैश्विक राजनीति पर संभावित असर
- यूरोप-अमेरिका संबंधों में तनाव
- नाटो की एकता पर सवाल
- रूस और चीन को कूटनीतिक फायदा
- आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह बयानबाजी आगे बढ़ती है, तो आर्कटिक क्षेत्र अगला भू-राजनीतिक टकराव का केंद्र बन सकता है।
भारत की नजर से यह मामला क्यों अहम?
भारत सीधे तौर पर GREENLAND विवाद में शामिल नहीं है, लेकिन वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव का असर भारत की रणनीतिक नीति पर भी पड़ता है।
- अमेरिका का आक्रामक रुख
- रूस और चीन की प्रतिक्रिया
- वैश्विक व्यापार मार्गों में बदलाव
इन सभी का असर भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति पर पड़ सकता है।
क्या ट्रंप सच में पीछे हटेंगे?
अब तक के बयानों और पोस्ट से यह साफ है कि ट्रंप फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा है—
“ GREENLAND वैश्विक सुरक्षा की चाबी है, और अमेरिका उसे किसी भी कीमत पर सुरक्षित करेगा।”
हालांकि यह देखना बाकी है कि यह बयान सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले समय में कोई ठोस कूटनीतिक या सैन्य कदम भी देखने को मिलते हैं।
निष्कर्ष: नई दुनिया, नई राजनीति?
डोनाल्ड ट्रंप का GREENLAND और CANADA को लेकर दिया गया बयान केवल एक नक्शा साझा करने भर का मामला नहीं है। यह उस सोच का प्रतिबिंब है, जिसमें वैश्विक राजनीति को फिर से शक्ति और दबदबे की भाषा में परिभाषित किया जा रहा है।
मैक्रों, मेलोनी और नाटो की चुप्पी बताती है कि दुनिया इस बयान से असहज है, लेकिन अभी कोई खुला टकराव नहीं चाहता। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि ट्रंप की यह ‘सनक’ इतिहास में एक विवादित बयान बनकर रह जाती है या वैश्विक राजनीति की दिशा बदलने वाला मोड़ साबित होती है।
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— TV9 Bharatvarsh (@TV9Bharatvarsh) January 19, 2026