G20 Summit 2025: वैश्विक नेतृत्व, भारत की निर्णायक भूमिका और बदलते विश्व की नई दिशा — विशेष रिपोर्ट

प्रस्तावना

दुनिया तेजी से बदल रही है—भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु संकट, आर्थिक अनिश्चितता, तकनीकी क्रांति और डिजिटल परिवर्तन के बीच आज यह आवश्यक है कि वैश्विक मंच एक मजबूत रणनीति तय करे। इसी कारण G20 Summit 2025 इस बार खास मायने रखता है। दुनिया की 85% GDP, 75% वैश्विक व्यापार और 60% जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाला यह मंच अब पहले की तुलना में कहीं अधिक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। taazanews24x7.com

दक्षिण अफ्रीका में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका न सिर्फ अहम रही, बल्कि कई वैश्विक मुद्दों पर भारत ने मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया—खासतौर पर डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर, क्लाइमेट फाइनेंस, मल्टीलेटरल बैंकिंग सुधार, और ग्लोबल साउथ की आवाज़ के रूप में।

1. G20 क्या है और क्यों यह सम्मेलन ऐतिहासिक माना जा रहा है?

G20 यानी “Group of Twenty”—19 देशों + यूरोपीय संघ।
इसका उद्देश्य सिर्फ आर्थिक नीतियाँ तय करना नहीं, बल्कि दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों का सामूहिक समाधान ढूंढना है।

इस बार का G20 Summit तीन कारणों से विशिष्ट रहा—

वैश्विक आर्थिक मंदी की चेतावनी

IMF की रिपोर्ट ने बताया है कि G20 देशों की मध्यावधि वृद्धि 2009 की आर्थिक मंदी के बाद सबसे कमजोर हो सकती है।
इसलिए इस बार के फैसले सिर्फ औपचारिकता नहीं—बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के “भविष्य का खाका” हैं।

जलवायु संकट पहले से कहीं अधिक गंभीर

जलवायु परिवर्तन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं—
यह आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा का भी संकट बन चुका है।
इस बार क्लाइमेट फाइनेंस और ग्रीन ट्रांज़िशन G20 का मुख्य केंद्र रहा।

ग्लोबल साउथ की भूमिका को पहली बार प्रमुखता

पिछले एक दशक से विकासशील देशों की आवाज़ लगातार दब रही थी।
भारत ने इस मंच पर “ग्लोबल साउथ की वकालत” को वैश्विक एजेंडा का केंद्र बना दिया।

2. सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे—क्या बदला, क्या नया और क्या निर्णायक है

2.1 वैश्विक अर्थव्यवस्था और आर्थिक सुधार

G20 नेताओं ने स्पष्ट रूप से माना कि दुनिया एक मल्टी-क्राइसिस मोमेंट (multi-crisis moment) में है।
इसलिए तीन बड़े निर्णय लिए गए—

वैश्विक निवेश रोजगार वृद्धि के लिए संयुक्त आर्थिक ढांचा

भारत ने SMEs, डिजिटल व्यापार और स्टार्टअप सहयोग के नए मॉडल की मांग उठाई, जिसे कई देशों ने समर्थन दिया।

IMF और वर्ल्ड बैंक में सुधार पर सहमति

भारतीय प्रस्ताव—

  • “जस्ट रिप्रेजेंटेशन मॉडल”
  • विकासशील देशों को अधिक वोटिंग अधिकार
  • कर्ज संकट झेल रहे देशों को राहत सहायता

इससे भविष्य में वैश्विक वित्तीय ढांचा अधिक न्यायसंगत बनेगा।

2.2 जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय रणनीति

यह G20 Summit “Green Transition Summit” भी कहा जा सकता है।

मुख्य फैसले—

क्लाइमेट फाइनेंस में ऐतिहासिक बढ़ोतरी

विकसित देशों ने 100 बिलियन डॉलर से अधिक सहायता देने पर सहमति जताई।

हरित हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा पर अंतरराष्ट्रीय गठबंधन

भारत की नेतृत्व वाली “ग्रीन हाइड्रोजन एलायंस” को समर्थन मिला।

LiFE Movement को वैश्विक मॉडल के रूप में अपनाने पर चर्चा

यह भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है।

2.3 डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर—भारत का मॉडल, दुनिया के लिए समाधान

भारत ने इस बार G20 में सबसे महत्वपूर्ण योगदान DPI को बताया।
जैसे—

  • UPI
  • आधार
  • डिजिटल हेल्थ मिशन
  • डिजिटल लॉकर
  • ई-गवर्नेंस मॉडल

G20 ने Global DPI Repository को मंजूरी दी,

जहाँ देश अपनी टेक्नोलॉजी साझा कर सकेंगे।
इसे “भारत का डिजिटल उपहार” भी कहा गया है।

.4 खाद्य सुरक्षा और कृषि नवाचार

जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य संकट बढ़ रहा है।
G20 ने—

  • जलवायु-रोधी कृषि तकनीक
  • खाद्य भंडारण सहयोग
  • सप्लाई चेन सुरक्षा
  • बायोफ्यूल सहयोग

जैसे प्रस्तावों पर सहमति दी।

विशेष रूप से, भारत के “ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस” को 30+ देशों का समर्थन मिला।

भारत की रणनीतिक भूमिका: वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व
• वसुधैव कुटुम्बकम (Vasudhaiva Kutumbakam) — “संसार एक परिवार है” — की विचारधारा भारत की G20 नीतियों की पृष्ठभूमि है।
• सम्मेलन में भारत न्यायसंगत ग्लोबल शासन (equitable global governance) की दिशा में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है।
• डिजिटल सार्वजनिक आधार और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत की पहल, विकासशील देशों को फायदा पहुंचा सकती है और ग्लोबल साउथ को सशक्त कर सकती है।
• भारत अपने LiFE आंदोलन, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में नेतृत्व और अन्य देशों के साथ तकनीकी साझेदारी के माध्यम से G20 में “ग्रीन और डिजिटल” एजेंडे को आगे बढ़ा रहा है।
• इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की मांग पर भारत की गंभीरता G20 के निर्णयों में अधिक वैश्विक न्याय की दिशा में इशारा कर रही है।

G20 में विश्व नेता के रूप में उभरता भारत

भारत की तीन बड़ी उपलब्धियाँ—

ग्लोबल साउथ का नेतृत्व

भारत ने कहा—
“ग्लोबल साउथ सिर्फ प्रतिभागी नहीं, बल्कि भविष्य का निर्णायक है।”

यह बयान G20 की दिशा बदलने वाला साबित हुआ।

डिजिटल भारत मॉडल की वैश्विक पहचान UPI और डिजिटल सार्वजनिक ढांचे की सफलता ने भारत को “Digital Global Leader” की श्रेणी में ला दिया।

जलवायु और हरित ऊर्जा में सक्रिय नेतृत्व

ISA, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, Global Biofuel Alliance—
ये तीनों भारत की अगुवाई में चल रहे महत्वपूर्ण मंच अब G20 के प्रमुख स्तंभ बन चुकी हैं।

संस्थागत सुधार की जटिलता

  • IMF, वर्ल्ड बैंक जैसे बैंकों में “वोटिंग अधिकारों” को बदलना आसान नहीं है — यह लंबे और कठिन      राजनीतिक संघर्ष का विषय है।
  • नई और पुरानी शक्तियों के बीच संतुलन बैठाना, विशेष रूप से विकासशील आर्थिक और उभरती ताकतों के लिए, एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती होगी।

4. सम्मेलन की चुनौतियाँ—क्या रहा अधूरा और किन क्षेत्रों में कठिनाई बनी रहेगी?

आर्थिक असमानता

वैश्विक उत्तर (developed countries) और दक्षिण (developing countries) के बीच अंतर अब भी गहरा है।

क्लाइमेट फाइनेंस पर भरोसे की कमी

कई देश वादे करते हैं, पर अमल में कमी रहती है।

भू-राजनीतिक तनाव

अमेरिका-चीन तनाव
यूरोप-रूस संकट
मध्य पूर्व का अस्थिर वातावरण
इन मुद्दों ने कई नीतियों पर आम सहमति को कठिन बना दिया।

5. G20 Summit का प्रभाव—दुनिया के आने वाले दशक का रोडमैप क्या है?

डिजिटल शासन अब वैश्विक मानक बनेगा

भारत का मॉडल दुनिया भर में लागू होने जा रहा है।

हरित ऊर्जा नए वैश्विक निवेश का केंद्र बनेगी

मल्टीलेटरल बैंकिंग में बड़ा सुधार होगा

ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ेगी

मानव-केंद्रित विकास (Human-centric growth) नई प्राथमिकता बनेगी

6. निष्कर्ष

2025 का G20 Summit एक साधारण सम्मेलन नहीं—
यह एक ऐसा मोड़ है जिसने
दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और डिजिटल भविष्य का नया खाका तैयार किया है।

भारत की भूमिका इस सम्मेलन में निर्णायक रही—

  • डिजिटल नेतृत्व
  • हरित ऊर्जा
  • वैश्विक दक्षिण का प्रतिनिधित्व
  • और आर्थिक सुधारों की मजबूत मांग

आने वाले वर्षों में दुनिया जिस दिशा में बढ़ेगी,
उसकी मूल रूपरेखा इस G20 Summit में तय हो चुकी है।

साथ ही यह G20 सम्मेलन सिर्फ एक पारंपरिक आर्थिक शिखर सम्मेलन ही नहीं है बल्कि यह वैश्विक साझेदारी, हरित और डिजिटल संक्रमण, और विश्वसनीय, न्यायसंगत वैश्विक शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। भारत, एक उभरती शक्ति और “ग्लोबल साउथ” की आवाज़ के रूप में, इस मंच पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

हालांकि चुनौतियाँ सीमित नहीं हैं, लेकिन अगर भागीदार देश मिलकर ठोस और व्यावहारिक कदम उठाते हैं, तो यह सम्मेलन न केवल वैश्विक आर्थिक मामलों में बल्कि पर्यावरण, सामाजिक समावेशन और संस्थागत न्याय में भी एक नया अध्याय खोल सकता है।समय की मांग है कि G20 केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उन विचारों को धरातल पर उतारे जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थिर और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित कर सकें।

Leave a Comment