Balichistan ताजा खबर
Pakistan के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत Balochistan में एक बार फिर सुरक्षा हालात सुर्खियों में हैं। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने खुफिया सूचनाओं के आधार पर किए गए दो अलग-अलग सैन्य अभियानों (IBOs – Intelligence Based Operations) में कुल 41 सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराने का दावा किया है। ये ऑपरेशन हरनाई और पंजगुर जिलों में अंजाम दिए गए, जो लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों, अलगाववादी हिंसा और सुरक्षा चुनौतियों का केंद्र बने हुए हैं। taazanews24x7.com
पाकिस्तानी सेना और सरकारी सूत्रों के अनुसार, मारे गए सभी लोग ऐसे उग्रवादी गुटों से जुड़े थे, जो सुरक्षा बलों, सरकारी प्रतिष्ठानों और विकास परियोजनाओं को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे। इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में बलूचिस्तान में की गई सबसे बड़ी सैन्य सफलताओं में से एक माना जा रहा है।
कैसे अंजाम दिए गए ये ऑपरेशन?
हरनाई जिला: पहाड़ी इलाकों में मुठभेड़
हरनाई Balochistan का एक संवेदनशील जिला है, जहां दुर्गम पहाड़ी इलाकों और सीमित सड़क नेटवर्क के कारण सुरक्षा बलों को अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि एक सशस्त्र उग्रवादी समूह इलाके में छिपकर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है।
सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। उग्रवादियों ने खुद को घिरता देख सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई। सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन में कई उग्रवादी मारे गए और भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और संचार उपकरण बरामद किए गए।
पंजगुर जिला: लंबे समय से अशांत क्षेत्र
पंजगुर जिला पहले भी कई बार उग्रवादी हमलों और सुरक्षा बलों पर घात लगाकर किए गए हमलों के कारण चर्चा में रहा है। यहां के सीमावर्ती और दूरदराज इलाकों में उग्रवादी गुटों की मौजूदगी की खबरें लंबे समय से मिलती रही हैं।
दूसरा ऑपरेशन इसी जिले में किया गया, जहां सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर एक संदिग्ध ठिकाने को निशाना बनाया। मुठभेड़ कई घंटों तक चली और अंततः बड़ी संख्या में उग्रवादियों को मार गिराया गया। कुल मिलाकर दोनों अभियानों में 41 उग्रवादियों के मारे जाने की पुष्टि की गई।

सेना और सरकार का आधिकारिक रुख
पाकिस्तानी सेना के इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी थी। बयान में कहा गया कि मारे गए उग्रवादी लंबे समय से सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर हमलों में शामिल थे।
सरकार ने भी सुरक्षा बलों की कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि बलूचिस्तान में किसी भी तरह की हिंसा और आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि ऑपरेशन के दौरान नागरिकों को नुकसान से बचाने के लिए विशेष सावधानी बरती गई।
बलूचिस्तान: संघर्ष का इतिहास और पृष्ठभूमि
बलूचिस्तान पाकिस्तान का क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन आबादी के मामले में सबसे छोटा। यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों—जैसे गैस, खनिज और तटीय संपदा—से भरपूर है, इसके बावजूद यहां विकास की गति धीमी रही है।
असंतोष के मुख्य कारण
- राजनीतिक उपेक्षा का आरोप
- आर्थिक विकास की कमी
- स्थानीय संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण की भावना
- बेरोजगारी और शिक्षा की कमी
इन्हीं कारणों से समय-समय पर अलगाववादी और उग्रवादी आंदोलनों को बल मिलता रहा है।
सैन्य कार्रवाई बनाम राजनीतिक समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया सैन्य कार्रवाई भले ही सुरक्षा के लिहाज से अहम हो, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। कई राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि केवल सैन्य ताकत से बलूचिस्तान में स्थायी शांति नहीं लाई जा सकती।
उनके अनुसार, इसके लिए:
- राजनीतिक संवाद
- स्थानीय नेतृत्व को विश्वास में लेना
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश
- रोजगार के अवसर बढ़ाना
जैसे कदम भी उतने ही जरूरी हैं।
मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय नजरिया
हर बड़े सैन्य अभियान के बाद मानवाधिकार संगठनों की नजर भी बलूचिस्तान पर टिक जाती है। अतीत में कई बार जबरन गायब किए जाने, नागरिक हताहतों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए गए हैं।
हालिया ऑपरेशन के बाद भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से आतंकवाद के खिलाफ थी और इसमें मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ।
CPEC और रणनीतिक महत्व
बलूचिस्तान का महत्व केवल आंतरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) जैसी बड़ी परियोजनाएं इसी प्रांत से होकर गुजरती हैं। ग्वादर पोर्ट को क्षेत्रीय व्यापार का अहम केंद्र माना जाता है।
विश्लेषकों के मुताबिक, उग्रवादी गतिविधियों का एक उद्देश्य इन विकास परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाना भी हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानती है।

आगे क्या?
सुरक्षा बलों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी खुफिया-आधारित ऑपरेशन जारी रहेंगे। साथ ही सरकार ने विकास परियोजनाओं को तेज करने और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की बात दोहराई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सुरक्षा, विकास और राजनीतिक संवाद—तीनों मोर्चों पर संतुलित रणनीति अपनाई गई, तो बलूचिस्तान में हालात धीरे-धीरे सुधर सकते हैं।
निष्कर्ष
हरनाई और पंजगुर में हुए इन दो बड़े सैन्य अभियानों में 41 सशस्त्र उग्रवादियों के मारे जाने की घटना ने एक बार फिर बलूचिस्तान की जटिल और संवेदनशील स्थिति को सामने ला दिया है। जहां एक ओर सुरक्षा बल इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह बहस भी तेज है कि क्या केवल सैन्य कार्रवाई से दशकों पुरानी समस्याओं का समाधान संभव है।
बलूचिस्तान की स्थायी शांति के लिए सुरक्षा के साथ-साथ विश्वास, विकास और संवाद की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।
FAQ – बलूचिस्तान न्यूज:
Q1. बलूचिस्तान में हाल ही में क्या हुआ है?
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सुरक्षा बलों ने हरनाई और पंजगुर जिलों में दो अलग-अलग सैन्य अभियानों के दौरान 41 सशस्त्र उग्रवादियों को मार गिराने का दावा किया है।
Q2. ये सैन्य ऑपरेशन किन इलाकों में हुए?
ये ऑपरेशन बलूचिस्तान के हरनाई और पंजगुर जिलों में किए गए, जो लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों के लिए संवेदनशील माने जाते हैं।
Q3. कितने उग्रवादी मारे गए हैं?
पाकिस्तानी सेना के अनुसार, कुल 41 उग्रवादी इन दो अलग-अलग खुफिया-आधारित ऑपरेशनों में मारे गए हैं।
Q4. पाकिस्तान सेना ने यह कार्रवाई क्यों की?
सेना का कहना है कि मारे गए उग्रवादी सुरक्षा बलों, आम नागरिकों और विकास परियोजनाओं पर हमले की योजना बना रहे थे।
Q5. क्या इस ऑपरेशन में नागरिकों को नुकसान हुआ?
आधिकारिक बयान के अनुसार, इस ऑपरेशन में किसी भी नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।
Q6. बलूचिस्तान में उग्रवाद की समस्या क्यों है?
बलूचिस्तान में राजनीतिक असंतोष, आर्थिक पिछड़ापन, बेरोजगारी और संसाधनों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
Q7. क्या केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक संवाद और विकास योजनाएं भी जरूरी हैं।
Q8. CPEC का बलूचिस्तान से क्या संबंध है?
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) बलूचिस्तान से होकर गुजरता है, जिससे यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

🚨🇵🇰 BIG NEWS:
— Faisal Khan Achakzai (@FaisalKAchakzai) January 29, 2026
Pakistani Security Forces just hit hard in Shahban Valley near Quetta, Balochistan, taking out 30–35 Indian-backed BLA terrorists and injuring 15+ more. Area fully secured now, all thanks to precise intelligence and fearless operations
pic.twitter.com/OfzanMnJM4