गूगल मैप ने नोएडा को बनाया और भी “ईको-फ्रेंडली”: स्मार्ट टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी हरियाली और सुविधा

नोएडा, 13 नवंबर 2025:
भारत की सबसे तेज़ी से विकसित होती सिटी नोएडा (Noida) अब तकनीक के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम उठा रही है। इस पहल को और मज़बूती मिली है गूगल मैप (Google Map) के नए ईको-फ्रेंडली फीचर्स (Eco-Friendly Features) से, जिन्हें हाल ही में नोएडा में लॉन्च किया गया है।

गूगल की यह पहल न केवल नागरिकों के लिए नेविगेशन को आसान बनाएगी, बल्कि शहर को “ग्रीन सिटी” के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेगी।
अब गूगल मैप केवल रास्ता दिखाने वाला ऐप नहीं, बल्कि एक “ग्रीन ट्रैवल गाइड” के रूप में उभर रहा है जो नागरिकों को ईंधन बचाने, प्रदूषण घटाने और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनने के लिए प्रेरित करेगा। taazanews24x7.com

 “ग्रीन रूट” फीचर से घटेगा ईंधन खर्च और प्रदूषण

गूगल ने नोएडा समेत देश के कई प्रमुख शहरों में ग्रीन रूट (Green Route)” नामक एक नई सुविधा शुरू की है।
इस फीचर का उद्देश्य है – उपयोगकर्ताओं को ऐसे रास्तों की जानकारी देना जिनसे कम ईंधन खर्च हो, कम ट्रैफिक जाम मिले, और कम कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emission) हो।

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति नोएडा सेक्टर 18 से नोएडा सेक्टर 62 की ओर यात्रा करता है, तो गूगल अब उसे दो विकल्प देगा –

  1. सबसे तेज़ (Fastest Route)
  2. पर्यावरण के अनुकूल “ग्रीन रूट” (Eco-Friendly Route)

उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार किसी भी विकल्प को चुन सकते हैं।
गूगल का दावा है कि यदि नागरिक नियमित रूप से ग्रीन रूट का उपयोग करने लगें, तो इससे प्रति वर्ष लगभग 10 लाख लीटर ईंधन की बचत हो सकती है और वायु प्रदूषण में भी 5% तक की कमी आएगी।

साइकिल और ई-रिक्शा मार्गों की जानकारी भी अब गूगल मैप पर

नोएडा प्रशासन ने गूगल इंडिया के साथ मिलकर शहर के कई हिस्सों में साइकिल ट्रैक्स, ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक बस रूट्स को गूगल मैप में जोड़ने का निर्णय लिया है।

नोएडा सेक्टर 137, 142, 150 और 93B जैसे इलाकों में अब गूगल मैप उपयोगकर्ता साइकिल रूट्स और उनके सुरक्षित लेन की जानकारी पा सकते हैं।
यह कदम उन लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा जो सस्टेनेबल ट्रैवल (Sustainable Travel) को बढ़ावा देना चाहते हैं।

गूगल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार,

“हम मानते हैं कि शहर की स्मार्टनेस सिर्फ तकनीक से नहीं, बल्कि नागरिकों के पर्यावरणीय दृष्टिकोण से तय होती है। नोएडा में हमने ऐसी जानकारी जोड़ना शुरू की है जो लोगों को ग्रीन मूवमेंट से जोड़ती है।”

स्मार्ट सिटी मिशन के साथ तालमेल में

नोएडा पहले से ही भारत सरकार के स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission) का हिस्सा है।
यहां पर हर साल लाखों की संख्या में नए निवासी बसते हैं, और साथ ही ट्रैफिक व प्रदूषण की चुनौतियाँ भी बढ़ती जा रही हैं।

गूगल की यह नई तकनीक इस मिशन को और मजबूती दे रही है।
स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, क्लीन एनर्जी और डिजिटल नेविगेशन का यह मिश्रण शहर को “ग्रीन स्मार्ट सिटी” बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

नोएडा प्राधिकरण की सीईओ ने कहा –

“गूगल की ग्रीन टेक्नोलॉजी के साथ हमारी साझेदारी नोएडा को देश का पहला डिजिटल-ईको सिटी मॉडल बनाने की दिशा में मदद करेगी।”

ईवी चार्जिंग स्टेशन अब गूगल मैप पर लाइव

नोएडा में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए गूगल ने EV Charging Stations Locator फीचर जोड़ा है।

अब उपयोगकर्ता गूगल मैप पर देख सकते हैं:

  • नजदीकी चार्जिंग स्टेशन
  • चार्जिंग की उपलब्धता
  • अनुमानित चार्जिंग समय
  • चार्जिंग की कीमत

यह फीचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी होगा जो नोएडा से दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, या गुरुग्राम तक रोजाना यात्रा करते हैं।
गूगल का कहना है कि यह सेवा आने वाले महीनों में भारत के अन्य शहरों में भी शुरू की जाएगी।

रियल टाइम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) की जानकारी

अब गूगल मैप पर नोएडा के अलग-अलग इलाकों का रियल टाइम AQI डेटा (Air Quality Index) भी देखा जा सकेगा।
यह जानकारी सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) और नोएडा एनवायरनमेंट डिपार्टमेंट से सिंक की जाएगी।

इससे उपयोगकर्ता यह तय कर सकेंगे कि किसी क्षेत्र की हवा कितनी साफ है और किस रूट से सफर करना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर रहेगा।
इस सुविधा से खासकर स्कूल बस ड्राइवर, ऑफिस कम्यूटर और डिलीवरी पार्टनर्स को बड़ा फायदा मिलेगा।

स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से घटेगा जाम

गूगल मैप का यह ईको अपडेट AI-पावर्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़ा हुआ है।
अब मैप रियल टाइम डेटा के आधार पर ट्रैफिक के उतार-चढ़ाव का अनुमान लगाकर ड्राइवरों को वैकल्पिक रास्ते सुझाएगा।
नोएडा में यह सिस्टम सेक्टर 62, 63, 16, 18 और फिल्म सिटी जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में पहले चरण में लागू किया गया है।

इससे सड़क जाम में 10–15 मिनट तक की बचत होने की उम्मीद है।
साथ ही, यह तकनीक वायु प्रदूषण को घटाने में भी योगदान देगी क्योंकि वाहन कम समय तक ट्रैफिक में रुकेंगे।

नोएडा की ग्रीन पॉलिसी को मिलेगा समर्थन

नोएडा प्राधिकरण ने पहले ही 2024 में “ग्रीन नोएडा मिशन” की घोषणा की थी, जिसके तहत शहर को अगले पांच वर्षों में पूरी तरह कार्बन-न्यूट्रल सिटी बनाने का लक्ष्य है।
गूगल की यह पहल उसी मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

नोएडा में अब तक:

  • 1200 से अधिक EV चार्जिंग स्टेशन
  • 45 किमी लंबे साइकिल ट्रैक्स
  • 200 से अधिक स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल
    स्थापित किए जा चुके हैं।

इन सबका डिजिटल इंटीग्रेशन अब गूगल मैप के ज़रिए आम नागरिकों तक पहुँच रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबिलिटी का मेल ही भविष्य है।
दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता लंबे समय से चिंता का विषय रही है।
अगर नोएडा जैसे शहर इस दिशा में गंभीर प्रयास करें, तो प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. निधि गुप्ता कहती हैं –

“अगर नोएडा में 25% लोग भी ग्रीन रूट और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को अपनाएं, तो शहर का प्रदूषण स्तर सालभर में 15% तक घट सकता है। गूगल की पहल इस बदलाव की शुरुआत है।”

नागरिकों की प्रतिक्रिया

नोएडा के निवासियों ने गूगल मैप के इन नए फीचर्स को लेकर उत्साह जताया है।
सेक्टर 77 निवासी और आईटी प्रोफेशनल सौरभ मिश्रा बताते हैं –

“पहले ट्रैफिक में आधा घंटा बर्बाद होता था। अब गूगल ग्रीन रूट दिखाता है जो न सिर्फ जल्दी पहुँचाता है बल्कि कम पेट्रोल भी खर्च होता है।”

वहीं ई-रिक्शा चालक राजेश कुमार कहते हैं –

“अब हमें चार्जिंग स्टेशन ढूंढने की दिक्कत नहीं होती। गूगल मैप बता देता है कि पास में कौन-सा स्टेशन खाली है।”

टेक्नोलॉजी और डेटा सुरक्षा

गूगल ने स्पष्ट किया है कि इस नई प्रणाली में उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी सुरक्षित रहेगी।
ग्रीन रूट डेटा पूरी तरह से एनोनिमस (Anonymous) रहेगा और केवल सामान्य ट्रैफिक पैटर्न पर आधारित होगा।

नोएडा के आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भविष्य में AI Traffic Prediction Model के रूप में विकसित किया जा सकता है जो प्रदूषण की संभावना का पूर्वानुमान भी देगा।

नोएडा के लिए भविष्य की योजना

आने वाले समय में गूगल और नोएडा प्राधिकरण मिलकर निम्न योजनाओं पर काम कर रहे हैं –

  1. EV Ride-Sharing Integration: ऐप में ओला/उबर जैसी सेवाओं के साथ EV विकल्प जोड़ना।
  2. Solar Parking Locator: सोलर-चार्जिंग सक्षम पार्किंग क्षेत्रों की पहचान।
  3. Noise Pollution Mapping: हॉर्न फ्री जोन को मैप पर दिखाना।
  4. Smart Waste Management Route: कचरा संग्रहण वाहनों के लिए कम ट्रैफिक वाले मार्ग।

इन योजनाओं के ज़रिए नोएडा एक पूर्ण स्मार्ट और सस्टेनेबल अर्बन मॉडल बनने की ओर अग्रसर है।

निष्कर्ष

नोएडा में गूगल मैप का ईको-फ्रेंडली अपडेट केवल एक तकनीकी परिवर्तन नहीं है —
यह एक हरित क्रांति (Green Revolution) की शुरुआत है।
जहां टेक्नोलॉजी और पर्यावरण साथ-साथ चल रहे हैं, वहीं नागरिकों को भी जिम्मेदारी से यात्रा करने की प्रेरणा दी जा रही है।

यह पहल भविष्य में न सिर्फ नोएडा, बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) को एक हरित, स्वच्छ और स्मार्ट सिटी मॉडल के रूप में स्थापित कर सकती है।

अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो यह पूरे भारत के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा कि स्मार्ट टेक्नोलॉजी से भी पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।

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