नई दिल्ली
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को छात्रों की हत्याओं के मामले में अंतर्राष्ट्रीय अपराध ट्राइब्यूनल (ICT) द्वारा सजा-ए-मौत सुनाए जाने के बाद देश में भारी तनाव फैल गया है। फैसले के तुरंत बाद ढाका, नारायणगंज और चिटगांव सहित कई इलाकों में हिंसक झड़पें भड़क उठीं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई भिड़ंत में 50 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
इतना ही नहीं, अदालत ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि शेख हसीना को 30 दिन के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। यदि वे ऐसा नहीं करतीं तो सरकार उन्हें “फरार दोषी” घोषित कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी। taazanews24x7.com
ये न्यायिक फैसला बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर भूकंप ला चुका है। शेख हसीना को दोषी ठहराने के साथ ही अदालत ने उस समय के पुलिस महानिदेशक को भी दोषी पाया, लेकिन उन्हें केवल 5 साल की कैद की सजा मिली—जिस पर विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने सवाल खड़े किए हैं।
फैसले पर देशभर में उबाल — हिंसा, आगजनी और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन
अदालत के निर्णय के बाद ढाका विश्वविद्यालय, राजशाही और सिलहट में छात्रों तथा आम नागरिकों ने विरोध मार्च निकाले। कई जगह पुलिस को भीड़ काबू करने के लिए आंसू गैस और रबर बुलेट का सहारा लेना पड़ा।
विरोध प्रदर्शन इतने उग्र थे कि ढाका के कुछ इलाकों में हालात काबू करने के लिए सेना को भी तैनात करना पड़ा।
गवाहों के अनुसार, कुछ जगह प्रदर्शनकारियों ने वाहनों में आग लगा दी और पुलिस चौकियों पर पथराव किया। दूसरी ओर, सरकार समर्थक समूहों ने फैसले के समर्थन में रैलियां निकालकर कहा कि “न्याय हुआ है”।
अस्पतालों के रिकॉर्ड के अनुसार, अब तक 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
शेख हसीना पर आरोप — छात्रों की हत्याओं का मामला क्या था?
यह मामला लगभग एक दशक पुराना है, जब राजधानी ढाका में बड़े पैमाने पर छात्र आंदोलन हुआ था। उस समय छात्रों पर गोली चलाने और दमनात्मक कार्रवाई की अनुमति देने का आरोप तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना पर लगा था।
ICT कोर्ट ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि:
- आदेश की जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री कार्यालय के पास थी
- कार्रवाई में 20 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे गए
- पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया
- सरकार ने बाद में भी जिम्मेदार अफसरों पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की
इसी आधार पर अदालत ने हसीना को “प्रधान जिम्मेदार” मानते हुए सजा-ए-मौत सुनाई।
क्यों शेख हसीना को दी गई सजा-ए-मौत, जबकि पुलिस प्रमुख को सिर्फ 5 साल?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब गोली चलवाने का आदेश कथित रूप से पुलिस द्वारा लागू किया गया, तो पुलिस प्रमुख को सिर्फ 5 साल की सजा ही क्यों?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ICT का तर्क है कि:
- पुलिस प्रमुख “आदेश का पालन करने वाले अधिकारी” थे
- जबकि हसीना को “नीतिगत और राजनीतिक रूप से सबसे बड़े निर्णयकर्ता” के रूप में देखा गया
- इसलिए मुख्य दोष “राजनीतिक स्तर” पर माना गया
हालांकि विपक्ष इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” बता रहा है और कह रहा है कि यह फैसला निष्पक्ष नहीं है।
शेख हसीना — ‘आयरन लेडी’ का उदय, दो दशक की सत्ता और अब ऐतिहासिक पतन
1. संघर्ष भरा राजनीतिक सफर
शेख मुजीबुर्रहमान की बेटी होने के नाते हसीना बचपन से ही राजनीतिक माहौल में रहीं। परिवार के कई सदस्यों की हत्या के बाद वे वर्षों तक निर्वासन में रहीं। 1981 में वे देश लौटीं और राजनीति में सक्रिय हुईं।
2. बांग्लादेश की सबसे शक्तिशाली नेता
2009 से लेकर 2024 तक लगभग 15 वर्षों तक लगातार सत्ता में रहकर उन्होंने:
- ढाका के इंफ्रास्ट्रक्चर को बदल दिया
- पाकिस्तान से रिश्तों को पुनर्परिभाषित किया
- भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत की
- सत्ता पर अभूतपूर्व नियंत्रण स्थापित किया
उनकी नेतृत्व शैली को दृढ़ता के कारण “आयरन लेडी” कहा जाता था।
3. लेकिन विपक्ष ने लगाया तानाशाही का आरोप
हसीना की सरकार पर विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों की ओर से कई गंभीर आरोप भी लगे, जिनमें शामिल हैं:
- मीडिया की आज़ादी में हस्तक्षेप
- विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी
- चुनावी धांधली के आरोप
- पुलिस का दमन
छात्रों के आंदोलन पर कठोर कार्रवाई इन्हीं आरोपों का चरम माना गया।
4. अचानक पतन — न्यायालय से मौत की सजा
सत्ता से बाहर होने के बाद यह मामला फिर से सक्रिय हुआ और अब अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए देश की सबसे कड़ी सजा सुना दी।
विशेषज्ञ इसे “बांग्लादेश की राजनीति के इतिहास का सबसे बड़ा मोड़” बता रहे हैं।
30 दिन में सरेंडर — आगे क्या होगा?
ICT कोर्ट के आदेश के मुताबिक शेख हसीना को:
- 30 दिनों के भीतर अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा
- वे चाहें तो फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती हैं
- अपील के दौरान सजा पर रोक लगने की संभावना भी हो सकती है
लेकिन जानकार मानते हैं कि यह कानूनी लड़ाई आसान नहीं होगी।
यदि हसीना सरेंडर नहीं करतीं, तो:
- उन्हें “फरार घोषित” किया जाएगा
- उनके खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी हो सकता है
- सरकार उनकी संपत्तियों को भी जब्त कर सकती है
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया — पड़ोसी देशों की नजरें ढाका परभारत, अमेरिका और यूरोपीय संघ इस मामले को बेहद ध्यान से देख रहे हैं।
भारत की नज़रें क्यों महत्वपूर्ण?
शेख हसीना ने भारत के साथ संबंध मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी गिरफ्तारी या सजा का असर—
- सीमा सुरक्षा
- व्यापार
- पूर्वोत्तर भारत की कूटनीति
पर पड़ सकता है।
अमेरिका और यूरोप की चिंता
दोनों ही देश बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिरता और मानवाधिकारों को लेकर पिछले कुछ वर्षों से चिंता जता रहे थे।
अब यह सजा वहां की राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।
क्या यह फैसला राजनीतिक प्रतिशोध है?
विरोधी दलों का कहना है कि:
- हसीना के खिलाफ मामला राजनीतिक दुश्मनी के कारण दोबारा खोला गया
- उनके द्वारा पहले लिए गए कड़े फैसलों ने कई शक्तिशाली समूहों को नाराज़ किया
- नए शासन का उद्देश्य उन्हें राजनीतिक रूप से पूरी तरह खत्म करना है
दूसरी ओर, अदालत का दावा है कि उसने “साक्ष्यों के आधार” पर फैसला दिया है।
लेकिन बांग्लादेश की जनता अभी भी दो हिस्सों में बंटी हुई है।
एक वर्ग कहता है कि “न्याय हुआ”, तो दूसरा कहता है कि “लोकतंत्र की मौत हो गई”।
देश की सड़कों पर तनाव — क्या बांग्लादेश फिर से उथल-पुथल में फंस जाएगा?
बांग्लादेश पहले ही राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा था।
अब इस फैसले ने हालात को और विस्फोटक बना दिया है।
- कई जिलों में धारा 144 लागू
- इंटरनेट स्पीड धीमी
- ढाका विश्वविद्यालय बंद
- पुलिस और सेना की संयुक्त तैनाती
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति जल्द काबू में नहीं आई तो देश में बड़ी अस्थिरता देखी जा सकती है।
क्या हसीना की राजनीतिक विरासत अब समाप्त हो गई?
यह बड़ा सवाल है।
सज़ा-ए-मौत का फैसला
कानूनी रूप से यह हसीना की राजनीतिक यात्रा का अंत हो सकता है।
लेकिन समर्थकों का कहना है
“नेता जेल में जाएं या फांसी का सामना करें, विचारधारा खत्म नहीं होती।”
हसीना की पार्टी अवामी लीग अभी भी देश के कई हिस्सों में मजबूत है।
अगर हसीना के खिलाफ सहानुभूति लहर बनी, तो वे “राजनीतिक शहीद” के तौर पर भी उभर सकती हैं।
निष्कर्ष — बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक मोड़
शेख हसीना की सजा सिर्फ एक व्यक्ति या एक नेता का पतन नहीं है,
यह बांग्लादेश की राजनीति, लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक मोड़ है।
- क्या हसीना सरेंडर करेंगी?
- क्या सुप्रीम कोर्ट उनका फैसला पलटेगा?
- क्या हिंसा थमेगी?
- क्या देश नई राजनीतिक राह पर चलेगा?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में बांग्लादेश की दिशा तय करेंगे।
शेख हसीना को सज़ा-ए-मौत
— News18 India (@News18India) November 17, 2025
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