Save and Protect Aravalli Hills: अरावली पहाड़ियों को बचाने की लड़ाई क्यों भारत के अस्तित्व से जुड़ चुकी है

भारत की धरती पर अगर कोई पर्वत श्रृंखला समय, प्रकृति और सभ्यता तीनों की साक्षी रही है, तो वह है Aravalli पर्वतमाला। करोड़ों साल पुरानी यह पहाड़ियाँ आज अपने जीवन की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। कभी उत्तर भारत की जलवायु को संतुलित रखने वाली, रेगिस्तान को रोकने वाली और जंगलों से आच्छादित ARAVALLI आज अवैध खनन, रियल एस्टेट के लालच और प्रशासनिक लापरवाही के कारण तेजी से खत्म होती जा रही है।

इसी गंभीर संकट ने Save and Protect Aravalli Hills को एक पर्यावरणीय अभियान से आगे बढ़ाकर एक राष्ट्रीय ज़रूरत बना दिया है। taazanews24x7.com

Aravalli पर्वतमाला का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व

ARAVALLI को दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में गिना जाता है। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि यह श्रृंखला हिमालय से भी कहीं अधिक पुरानी है। प्राचीन काल में यही पहाड़ियाँ उत्तर भारत की जलवायु, वन्यजीव और जलस्रोतों का आधार हुआ करती थीं।

राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में ARAVALLI वर्षा जल को रोककर भूजल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके जंगल कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वायु प्रदूषण को कम करते हैं।

Aravalli पर्वतमाला: भारत की सबसे पुरानी प्राकृतिक विरासत

Aravalli पर्वत श्रृंखला लगभग 800 किलोमीटर में फैली हुई है, जो गुजरात से शुरू होकर राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक जाती है। भूवैज्ञानिक मानते हैं कि इसकी उम्र 3 अरब वर्ष तक हो सकती है, जो इसे दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल करती है।

Aravalli केवल पहाड़ों का समूह नहीं है, बल्कि यह:

  • उत्तर भारत की जलवायु प्रणाली की रीढ़
  • थार रेगिस्तान के विस्तार को रोकने वाली ढाल
  • वर्षा जल संचयन का प्राकृतिक माध्यम
  • जैव विविधता और वन्यजीवों का सुरक्षित घर

दिल्ली-एनसीआर जैसे अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्र में ARAVALLI को प्राकृतिक ऑक्सीजन बेल्ट माना जाता है।

Aravalli का पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता

Aravalli क्षेत्र में पाए जाने वाले जंगल केवल हरियाली नहीं हैं, बल्कि एक पूरा जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र हैं। यहाँ:

  • तेंदुआ
  • सियार
  • लोमड़ी
  • नीलगाय
  • सैकड़ों पक्षी प्रजातियाँ
  • औषधीय पौधे

पाए जाते हैं। ये जंगल मिट्टी के कटाव को रोकते हैं और वर्षा जल को जमीन में समाहित कर भूजल स्तर को बनाए रखते हैं।

Save Aravalli Hills आंदोलन क्यों ज़रूरी हो गया है?

पिछले दो दशकों में ARAVALLI क्षेत्र में बड़े पैमाने पर:

  • अवैध पत्थर खनन
  • रियल एस्टेट प्रोजेक्ट
  • फार्महाउस और रिसॉर्ट्स
  • औद्योगिक विस्तार

जैसी गतिविधियाँ तेज़ी से बढ़ी हैं। इससे न केवल पहाड़ कट रहे हैं, बल्कि आसपास का पारिस्थितिकी तंत्र भी नष्ट हो रहा है। Save Aravalli Hills अभियान इसी विनाश के खिलाफ आवाज़ उठाने के लिए शुरू हुआ।

Aravalli आज संकट में क्यों है?

पिछले 20–25 वर्षों में Aravalli क्षेत्र में जिस तरह की गतिविधियाँ हुई हैं, उन्होंने पर्यावरण संतुलन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विकास के नाम पर यहाँ जो हुआ, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह सच में विकास है या प्रकृति का विनाश।

1. अवैध खनन: सबसे बड़ा खतरा

पत्थर, ग्रेवल और खनिजों के लिए बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया गया। कई जगहों पर पहाड़ों को विस्फोट से उड़ा दिया गया, जिससे भू-संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया।

2. रियल एस्टेट और फार्महाउस कल्चर

दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में ARAVALLI के जंगल लक्जरी फार्महाउस, रिसॉर्ट और कॉलोनियों के चक्कर में साफ़ हो गए।

3. बेकाबू शहरीकरण

आबादी तेजी से बढ़ी और उसी हिसाब से चीज़ें चाहिए थीं, तो ARAVALLI धीरे-धीरे कंक्रीट का जंगल बनता गया।

4. प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता

कानून होने के बावजूद उनका सही क्रियान्वयन नहीं हुआ। कई मामलों में राजनीतिक संरक्षण ने अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दिया।

ARAVALLI के नष्ट होने से पर्यावरण पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव

रेगिस्तान बनने का खतरा

ARAVALLI थार रेगिस्तान को रोकने वाली आखिरी प्राकृतिक दीवार है। इसके कमजोर होने से हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मरुस्थलीकरण का खतरा बढ़ गया है।

भूजल स्तर में भारी गिरावट

ARAVALLI वर्षा जल को रोककर धरती में समाहित करती है। इसके नष्ट होने से:

  • कुएँ सूख रहे हैं
  • हैंडपंप जवाब दे रहे हैं
  • शहरों में पानी का संकट गहराता जा रहा है

वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर

ARAVALLI के जंगल धूल और प्रदूषक कणों को रोकते हैं। इनके कटने से दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण जानलेवा स्तर तक पहुँच गया है।

वन्यजीवों का विस्थापन और संघर्ष

जंगल खत्म होने से जानवर आबादी वाले इलाकों में आ रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है।

ARAVALLI और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के दौर में ARAVALLI की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह पर्वतमाला:

  • तापमान को संतुलित रखती है
  • हीटवेव के प्रभाव को कम करती है
  • कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करती है

ARAVALLI का कमजोर होना जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और तेज कर सकता है।

कानून और न्यायपालिका: इरादे सही, अमल कमजोर

सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कई बार ARAVALLI क्षेत्र में खनन पर रोक लगाई है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और वन संरक्षण कानून भी मौजूद हैं।

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि:

  • निगरानी तंत्र कमजोर है
  • दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती
  • नियमों का पालन चुनिंदा मामलों तक सीमित रहता है

यही वजह है कि Protect Aravalli Hills आज भी एक चुनौती बना हुआ है।

विकास बनाम पर्यावरण: भ्रम या सच्चाई?

विकास के नाम पर ARAVALLI को जिस तरह नुकसान पहुँचाया गया, उसने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या बिना पर्यावरण के विकास संभव है?

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • जल्दी का मुनाफा अक्सर बाद में भारी पड़ता है।
  • सही तरक्की वही है जो हमेशा बनी रहे।
  • पर्यावरण को बचाना तरक्की में रुकावट नहीं है, बल्कि ये तो उसकी नींव है।

ARAVALLI की पहाड़ियों को बचाने में हम क्या कर सकते हैं: लोगों का रोल

ARAVALLI को बचाने का काम सिर्फ़ सरकार का नहीं है।

हम क्या कर सकते हैं:

  • अगर कहीं अवैध खनन हो रहा है, तो उसकी शिकायत करो।
  • पर्यावरण बचाने वाली संस्थाओं के साथ जुड़ो।
  • सोशल मीडिया पर लोगों को बताओ।
  • अपने इलाके के नेताओं से सवाल करो कि वो क्या कर रहे हैं।
  • चुनाव में पर्यावरण को मुद्दा बनाओ।

आजकल के युवा इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे ये और भी मज़बूत हो रहा है।

अगर ARAVALLI को बचा लिया तो क्या फायदे होंगे:

  • पानी की किल्लत कम होगी।
  • हवा साफ होगी।
  • तरह-तरह के जीव-जंतु बने रहेंगे।
  • मौसम में जो बदलाव हो रहे हैं, उनका असर कम होगा।
  • हमारी आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहेगा।

आने वाली पीढ़ी का सवाल

ARAVALLI सिर्फ़ आज की बात नहीं है। ये आने वाली पीढ़ी का हक है। अगर हमने इसे आज खो दिया, तो बाद में:

  • पानी के लिए लड़ाइयां होंगी।
  • हवा ज़हरीली हो जाएगी।
  • जिंदगी जीना मुश्किल हो जाएगा।

इतिहास हमें ऐसे लोगों के तौर पर याद रखेगा जिन्होंने चेतावनी को अनसुना कर दिया।

आखिर में: अभी भी वक़्त है, पर बहुत कम

ARAVALLI को बचाना अब कोई चॉइस नहीं, ये जरूरी है। सरकार, प्रशासन, समाज और लोगों को मिलकर ईमानदारी से काम करना होगा।

ARAVALLI को बचाने का मतलब है:

  • पानी बचाना
  • हवा बचाना
  • जिंदगी बचाना
  • भविष्य सुरक्षित करना

अगर अब भी हमने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।

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