नई दिल्ली, 13 अप्रैल 2026 — देश की राजनीति और सामाजिक परिदृश्य में एक ऐतिहासिक मोड़ उस समय दर्ज हुआ जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘Nari Shakti Vandan’ Sammelan को संबोधित किया। यह सम्मेलन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भारत में महिलाओं की भूमिका, अधिकार और नेतृत्व क्षमता को नए सिरे से परिभाषित करने का मंच बन गया। taazanews24x7.com
प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय आया है जब ‘Nari Shakti Vandan अधिनियम’ को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। यह अधिनियम महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।

महिलाओं की शक्ति को मिला राष्ट्रीय मंच
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत महिलाओं के योगदान को नमन करते हुए की। उन्होंने कहा कि भारत की आधी आबादी केवल विकास की भागीदार नहीं, बल्कि विकास की अगुआ है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की भारतीय महिला केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह स्टार्टअप, विज्ञान, रक्षा, राजनीति और खेल जैसे हर क्षेत्र में नई पहचान बना रही है।
“आज की नारी केवल सशक्त नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की दिशा तय कर रही है।”
यह बयान सिर्फ एक भावनात्मक अपील नहीं था, बल्कि बदलते भारत की सच्चाई को दर्शाता है।
‘Nari Shakti Vandan अधिनियम’: क्या है खास?
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का मील का पत्थर बताया। इस अधिनियम के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करने का प्रावधान है।
मुख्य विशेषताएं:
- संसद और विधानसभा में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित
- अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं के लिए भी विशेष आरक्षण
- राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कानून केवल सीटों का आरक्षण नहीं है, बल्कि यह भारत के भविष्य को संतुलित और समावेशी बनाने का संकल्प है।

नए भारत की नई उद्यमी महिलाएं
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने उन महिलाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया जो छोटे शहरों और गांवों से निकलकर नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही हैं।
उन्होंने कहा कि:
- मुद्रा योजना
- स्टार्टअप इंडिया
- डिजिटल इंडिया
जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है।
आज लाखों महिलाएं:
- ऑनलाइन बिजनेस चला रही हैं
- हस्तशिल्प और कृषि आधारित उद्योगों में आगे बढ़ रही हैं
- टेक्नोलॉजी आधारित स्टार्टअप शुरू कर रही हैं
प्रधानमंत्री ने इसे “नए भारत की आर्थिक रीढ़” बताया।
राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में अब वह दौर आ गया है जब महिलाएं केवल वोटर नहीं, बल्कि नीति-निर्माता भी बन रही हैं।
उन्होंने पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का जिक्र किया और कहा कि:
- लाखों महिला सरपंच आज गांवों का नेतृत्व कर रही हैं
- कई राज्यों में महिला मुख्यमंत्री सफलतापूर्वक शासन चला चुकी हैं
- संसद में महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है
उन्होंने विश्वास जताया कि ‘Nari Shakti Vandan अधिनियम’ लागू होने के बाद यह संख्या और तेजी से बढ़ेगी।
सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम
प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं का सशक्तिकरण केवल कानून बनाने से नहीं होगा, बल्कि समाज की सोच बदलने से होगा।
उन्होंने कहा:
- बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है
- महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना होगा
- परिवार और समाज में समान अवसर देना होगा
उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन बन चुका है।
विपक्ष पर अप्रत्यक्ष निशाना
अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशकों तक महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा बना रहा, लेकिन अब इसे जमीन पर उतारा गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि:
“जो काम वर्षों तक टलता रहा, उसे हमारी सरकार ने पूरा करने का साहस दिखाया है।”
महिला सशक्तिकरण और अर्थव्यवस्था
प्रधानमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को देश की आर्थिक प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो पूरा देश आगे बढ़ता है।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि:
- महिला श्रम भागीदारी बढ़ने से GDP में वृद्धि होती है
- महिला उद्यमिता से रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं
- वित्तीय समावेशन से गरीबी कम होती है
डिजिटल युग में महिलाओं की भूमिका
प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया की सफलता का श्रेय भी बड़ी संख्या में महिलाओं को दिया। उन्होंने कहा कि:
- ग्रामीण महिलाएं डिजिटल भुगतान अपना रही हैं
- ऑनलाइन शिक्षा और स्किल ट्रेनिंग से महिलाएं नई क्षमताएं विकसित कर रही हैं
- सोशल मीडिया के माध्यम से महिलाएं अपनी आवाज बुलंद कर रही हैं
सम्मेलन का व्यापक प्रभाव
‘नारी शक्ति वंदन’ सम्मेलन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक अभियान की शुरुआत है।
इस सम्मेलन के जरिए सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि:
- महिलाओं को अब प्रतीक्षा नहीं, बल्कि नेतृत्व मिलेगा
- नीति निर्माण में उनकी भूमिका और मजबूत होगी
- भारत का भविष्य महिलाओं की भागीदारी से तय होगा
विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
उनके अनुसार:
- इससे राजनीति में विविधता बढ़ेगी
- निर्णय प्रक्रिया अधिक संतुलित होगी
- महिलाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि, इस पहल के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं:
- सामाजिक मानसिकता में बदलाव
- राजनीतिक दलों की आंतरिक संरचना
- महिलाओं को पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण
लेकिन प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि देश इन चुनौतियों को पार कर लेगा।
निष्कर्ष: एक नए युग की शुरुआत
‘Nari Shakti Vandan’ सम्मेलन और इससे जुड़ा अधिनियम भारत में महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi का यह संदेश स्पष्ट है कि अब भारत का विकास महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा।
यह पहल केवल महिलाओं के अधिकारों की बात नहीं करती, बल्कि यह पूरे समाज के संतुलित और समावेशी विकास का रोडमैप प्रस्तुत करती है।
आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऐतिहासिक कदम किस तरह भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे को बदलता है। लेकिन इतना तय है कि ‘नारी शक्ति वंदन’ अब एक नारा नहीं, बल्कि भारत के भविष्य की दिशा बन चुका है।
#Watch | प्रधानमंत्री @narendramodi नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि, "आज हमारी बेटियां नए-नए बिजनेस में अपनी पहचान बना रही है। मुद्रा योजना में 60% से ज्यादा लोनस महिलाओं ने लिए हैं। देश की स्टार्टअप रिवॉल्यूशन को भी… pic.twitter.com/ztwtyaD9lg
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) April 13, 2026