पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज का दिन बेहद तनावपूर्ण रहा। चुनाव आयोग (Election Commission) के राज्य कार्यालय के बाहर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) भारी संख्या में जमा होकर जोरदार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन अचानक नहीं, बल्कि पिछले कई दिनों से लगातार उठ रही आत्महत्याओं, कार्यस्थल पर दबाव, SIR प्रक्रिया में प्रताड़ना और तकनीकी परेशानियों के मुद्दों की तीव्रता का नतीजा है। taazanews24x7.com
स्थिति तब और गरम हो गई जब प्रदर्शन के बीच बीजेपी का प्रतिनिधि मंडल, जिसका नेतृत्व विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी कर रहे थे, आयोग से मिलने दफ्तर के अंदर गया। जैसे ही शुभेंदु अधिकारी बाहर निकले, नाराज BLO ने “गो बैक” के नारे लगाते हुए उनका घेराव किया।
कुल मिलाकर, कोलकाता की सड़कों पर आज प्रशासन, राजनीति और चुनाव प्रक्रिया के बीच जबरदस्त टकराव देखने को मिला।

BLO आखिर क्यों भड़के?—काम में दबाव, समय कम और ऐप की तकनीकी दिक्कतें
पश्चिम बंगाल में BLO लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं कि:
उन्हें बेहद कम समय में बेहद भारी चुनावी काम सौंपा जाता है।
SIR एप्लिकेशन बार-बार क्रैश होता है और तकनीकी रूप से बेहद कमजोर है।
उच्च अधिकारियों का दबाव और चेतावनियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
कुछ BLO मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं।
हाल के दिनों में BLO के कुछ कर्मचारियों की मौत ने उनके दुख और गुस्से को और खुलकर सामने ला दिया है। उनकी मांग है कि:
मृत BLO परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिलनी चाहिए।
काम का बोझ कम किया जाए और सही तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए।
SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और प्रताड़ना रोकी जाए।
चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर माहौल गरम—सैकड़ों BLO सड़क पर उतरे
आज सुबह से ही कोलकाता के चुनाव आयोग दफ्तर के बाहर सैकड़ों BLO जमा होने लगे। देखते ही देखते यह संख्या बढ़ती चली गई और सड़कें प्रदर्शनकारियों से भर गईं।
प्रदर्शनकारियों के हाथों में थे:
काले झंडे
मांगों से लिखे पोस्टर
“हम इंसान हैं, मशीन नहीं”, “BLO पर अत्याचार बंद करो”, “आत्महत्या रोको—काम का बोझ घटाओ” जैसे नारे लिखे बैनर
जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, धक्का-मुक्की और नारेबाजी तेज होती चली गई। सुरक्षा बलों को हालात संभालने के लिए दफ्तर के बाहर तैनात किया गया।

SIR प्रक्रिया पर सबसे ज्यादा गुस्सा—BLO बोले: हमसे मशीन जैसी उम्मीद न रखी जाए
BLO का कहना है कि SIR यानी Special Summary Revision के दौरान:
- हर घर जाकर वेरीफिकेशन
- मतदाता सूची में संशोधन
- नए नाम जोड़ना
- गलत जानकारियों की पुष्टि
- ऐप के जरिए तुरंत अपडेट
- समय सीमा बेहद कम
ऐसे में काम बेहद मानसिक दबाव वाला हो जाता है। BLO का आरोप है कि:
- “एप ठीक से काम नहीं करता, लेकिन गलती होने पर हमें ही डांट पड़ती है।”
- “ऊपर से लगातार कॉल, दबाव और धमकी मिलती है कि लक्ष्य हर हाल में पूरा करो।”
- “मानो हम इंसान नहीं, रोबोट हों।”
लगातार बढ़ती शिकायतों के बावजूद, सिस्टम में सुधार न होने पर आज यह दबाव बड़े विरोध के रूप में सामने आया।
शुभेंदु अधिकारी पहुंचे—प्रदर्शन के बीच ‘गो बैक’ के नारे
प्रदर्शन के बीच बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी अपने प्रतिनिधि दल के साथ चुनाव आयोग दफ्तर पहुंचे। उनका दावा है कि वे BLO की समस्याओं को अधिकारियों के सामने उठाने आए थे।
लेकिन जैसे ही वे बैठक से बाहर निकले:
- भीड़ ने उन्हें घेर लिया
- “गो बैक… गो बैक” के नारे लगाए
- कुछ लोगों ने उनसे सवाल भी किए कि विपक्ष के नेता होने के बावजूद BLO की परेशानी पर सरकार और आयोग के बीच ठोस समाधान क्यों नहीं निकला
अधिकारी ने कहा कि वे BLO के मुद्दों को विधानसभा में भी उठाएंगे, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उनके बयान से शांत नहीं हुआ।
SIR प्रक्रिया पर सबसे ज्यादा गुस्सा—BLO बोले: हमसे मशीन जैसी उम्मीद न रखी जाए
BLO का कहना है कि SIR यानी Special Summary Revision के दौरान:
- हर घर जाकर वेरीफिकेशन
- मतदाता सूची में संशोधन
- नए नाम जोड़ना
- गलत जानकारियों की पुष्टि
- ऐप के जरिए तुरंत अपडेट
- समय सीमा बेहद कम
ऐसे में काम बेहद मानसिक दबाव वाला हो जाता है। BLO का आरोप है कि:
- “एप ठीक से काम नहीं करता, लेकिन गलती होने पर हमें ही डांट पड़ती है।”
- “ऊपर से लगातार कॉल, दबाव और धमकी मिलती है कि लक्ष्य हर हाल में पूरा करो।”
- “मानो हम इंसान नहीं, रोबोट हों।”
लगातार बढ़ती शिकायतों के बावजूद, सिस्टम में सुधार न होने पर आज यह दबाव बड़े विरोध के रूप में सामने आया।
शुभेंदु अधिकारी पहुंचे—प्रदर्शन के बीच ‘गो बैक’ के नारे
प्रदर्शन के बीच बीजेपी के नेता शुभेंदु अधिकारी अपने प्रतिनिधि दल के साथ चुनाव आयोग दफ्तर पहुंचे। उनका दावा है कि वे BLO की समस्याओं को अधिकारियों के सामने उठाने आए थे।
लेकिन जैसे ही वे बैठक से बाहर निकले:
- भीड़ ने उन्हें घेर लिया
- “गो बैक… गो बैक” के नारे लगाए
- कुछ लोगों ने उनसे सवाल भी किए कि विपक्ष के नेता होने के बावजूद BLO की परेशानी पर सरकार और आयोग के बीच ठोस समाधान क्यों नहीं निकला
अधिकारी ने कहा कि वे BLO के मुद्दों को विधानसभा में भी उठाएंगे, लेकिन प्रदर्शनकारियों का गुस्सा उनके बयान से शांत नहीं हुआ।

निष्कर्ष
कुल मिलाकर, कोलकाता का यह प्रदर्शन सिर्फ एक दिन की नाराजगी नहीं, बल्कि लंबे समय से जमा असंतोष का परिणाम है।
BLO चुनावी प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं—लेकिन जब वही कर्मचारी तनाव, दबाव, भय और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हों, तब चुनाव प्रक्रिया पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकार, चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए यह एक बड़ा अलार्म है—
अगर BLO को राहत और सम्मान नहीं दिया गया, तो आने वाले चुनावों की निष्पक्षता और सुचारु संचालन पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
