नई दिल्ली/तेल अवीव:
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने एक बार फिर कूटनीतिक इतिहास में अपनी अलग पहचान दर्ज कराई है। Israel और फिलिस्तीन—दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले दुनिया के चुनिंदा नेताओं की सूची में उनका नाम शामिल हो गया है। हालिया Israel दौरे के दौरान उन्हें इजरायली संसद में ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। इससे पहले Palestine की ओर से भी उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा जा चुका है। यह उपलब्धि भारत की संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति की मजबूती को दर्शाती है। taazanews24x7.com

नेसेट में गूंजा ‘Modi-Modi’, मिला स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल
तेल अवीव स्थित इजरायली संसद Knesset में प्रधानमंत्री Narendra Modi का भव्य स्वागत हुआ। सदन में ‘Modi-Modi’ के नारों के बीच उन्होंने ऐतिहासिक संबोधन दिया। संसद के स्पीकर ने उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ प्रदान किया, जिसे इजरायल के प्रमुख लोकतांत्रिक सम्मान में गिना जाता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री Modi ने कहा कि भारत और Israel के रिश्ते केवल सामरिक या आर्थिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये साझा मूल्यों—लोकतंत्र, नवाचार और मानवता—पर आधारित हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ Israel के साथ मजबूती से खड़ा है, लेकिन साथ ही गाजा में शांति और मानवीय समाधान का समर्थन करता है।
‘एशिया का शेर’ और ‘फादर लैंड-मदर लैंड’ का संदेश
Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने अपने संबोधन में मोदी को ‘एशिया का शेर’ बताया। उन्होंने कहा कि भारत और Israel के संबंध पिछले दशक में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।
जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने भावनात्मक अंदाज में कहा—
“Israel फादर लैंड है और भारत मदर लैंड। हमारे रिश्ते दिल से जुड़े हैं।”
इस एक वाक्य ने दोनों देशों के रिश्तों की गहराई को नई परिभाषा दे दी। सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इस बयान की व्यापक चर्चा हुई।

गाजा शांति पहल पर भारत का स्पष्ट रुख
प्रधानमंत्री Modi ने अपने संबोधन में गाजा में चल रहे संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को दोहराते हुए कहा कि भारत हमेशा से शांति, संवाद और स्थिरता का पक्षधर रहा है।
यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए भी है क्योंकि भारत ने Israel के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत की है, वहीं फिलिस्तीन के साथ ऐतिहासिक संबंधों को भी बरकरार रखा है।
फिलिस्तीन से भी मिला सर्वोच्च सम्मान
प्रधानमंत्री Narendra Modi को 2018 में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति Mahmoud Abbas द्वारा ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ से सम्मानित किया गया था। यह फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विदेशी नेताओं को दिया जाता है।
इस तरह Narendra Modi उन गिने-चुने वैश्विक नेताओं में शामिल हो गए हैं जिन्हें Israel और फिलिस्तीन दोनों ने अपने सर्वोच्च सम्मान से नवाजा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह उपलब्धि बेहद दुर्लभ मानी जाती है।
भारत-Israel रिश्तों की नई ऊंचाई
भारत और Israel के संबंधों में 2014 के बाद उल्लेखनीय तेजी आई है। रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
- रक्षा सौदों में वृद्धि
- ड्रोन और मिसाइल तकनीक में साझेदारी
- कृषि तकनीक के आदान-प्रदान
- जल संरक्षण और स्मार्ट सिंचाई परियोजनाएं
Israel को भारत एक बड़े रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है, जबकि भारत के लिए Israel उन्नत तकनीक और रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण स्रोत है।

संतुलित कूटनीति का उदाहरण
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की विदेश नीति का एक प्रमुख स्तंभ ‘संतुलन’ है। भारत ने एक ओर Israel के साथ रक्षा और तकनीकी संबंध मजबूत किए, तो दूसरी ओर फिलिस्तीन को मानवीय और विकासात्मक सहायता जारी रखी।
भारत का रुख स्पष्ट रहा है—
- आतंकवाद का विरोध
- दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन
- क्षेत्रीय स्थिरता की वकालत
इसी संतुलन के कारण भारत को दोनों पक्षों का सम्मान प्राप्त हुआ है।
वैश्विक मंच पर बढ़ता भारत का कद
प्रधानमंत्री Narendra Modi को विभिन्न देशों द्वारा दिए गए सर्वोच्च सम्मानों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रतीक माने जा रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह कूटनीतिक उपलब्धि भारत को पश्चिम एशिया में एक विश्वसनीय मध्यस्थ और संतुलित शक्ति के रूप में स्थापित करती है। भारत न तो किसी एक खेमे में बंधा है और न ही अपने रणनीतिक हितों से समझौता करता है।
नेसेट में संबोधन के प्रमुख बिंदु
प्रधानमंत्री Narendra Modi के भाषण के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:
- लोकतंत्र और साझा मूल्यों पर जोर
- आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई
- तकनीकी और नवाचार सहयोग
- गाजा में शांति और मानवीय सहायता
- भविष्य की रणनीतिक साझेदारी
उन्होंने कहा कि भारत और Israel मिलकर न केवल अपने नागरिकों के लिए बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी काम कर सकते हैं।

भारत के लिए क्या मायने?
- पश्चिम एशिया में मजबूत रणनीतिक स्थिति
- रक्षा सहयोग में और विस्तार
- ऊर्जा और तकनीक क्षेत्र में नई संभावनाएं
- भारत की संतुलित विदेश नीति को वैश्विक स्वीकृति
यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक परिणामों की दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
जहां समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, वहीं कुछ विपक्षी नेताओं ने सरकार से गाजा संकट पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की मांग की। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इसे भारत की ‘संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति’ का प्रमाण बताया है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री Narendra Modi का Israel दौरा कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ है। इजरायली संसद में मिला सम्मान और Palestine से पहले प्राप्त सर्वोच्च नागरिक सम्मान यह दर्शाते हैं कि भारत ने पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति में संतुलन साधने की अनूठी मिसाल पेश की है।
यह उपलब्धि केवल एक नेता का सम्मान नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की सामूहिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
भारत ने यह साबित किया है कि कूटनीति में संतुलन, स्पष्टता और दृढ़ता—तीनों साथ चल सकते हैं। और शायद यही वजह है कि आज भारत को दुनिया एक भरोसेमंद और जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में देख रही है।
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— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2026
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