रूस-भारत संबंध
भारत की राजधानी दिल्ली अगले 30 घंटों के लिए वैश्विक कूटनीति का केंद्र बनने जा रही है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4–5 दिसंबर 2025 को भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। यह केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि वर्ष 2022 के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा होने के कारण रणनीतिक, समझौतों और आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। taazanews24x7.com
मोदी-पुतिन मुलाकात को लेकर वैश्विक शक्तियों की नज़र दिल्ली पर टिकी है—जहाँ रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस दौरे को भारत-रूस संबंधों के “नए अध्याय” की शुरुआत भी कहा जा रहा है।
आइए जानते हैं—इस 30 घंटे की हाई-प्रोफाइल यात्रा में पुतिन क्या-क्या करेंगे, किन बड़े समझौतों पर मुहर लग सकती है, और क्यों यह दौरा दोनों देशों के लिए इतना महत्वपूर्ण है।

यात्रा की शुरुआत: 4 दिसंबर की शाम—दिल्ली में पुतिन का स्वागत
राष्ट्रपति पुतिन की आगमन-घड़ी — 4 दिसंबर की शाम, दिल्ली का हवाई अड्डा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का नज़ारा बन जाएगा। विशेष सरकारी विमान से उतरते ही उन्हें भारतीय सत्ताधिकारियों और औपचारिक प्रोटोकॉल दल द्वारा स्वागत किया जाएगा — पारंपरिक रीतियों के साथ रेड-कार्पेट, सरकारी बैंड और उच्चस्तरीय अभिवादन। स्वागत समारोह में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम होंगे: एयरपोर्ट और आस-पास के इलाकों में संवेदनशीलता के मद्देनज़र सुरक्षा बनी रहे, इसको ध्यान में रखते हुए संसाधनों की तैनाती और कड़ी निगरानी की जाएगी।
यह आगमन सिर्फ रस्मी आयोजन नहीं होगा, बल्कि संदेश भी होगा — दोनों देशों के बीच सम्मान और परंपरा का संकेत। मीडिया कवरेज, शॉर्ट-ब्रिफिंग और उच्च-स्तरीय अधिकारीयों के बीच त्वरित बैठकें भी इस स्वागत का हिस्सा होंगी। पुतिन के एयरपोर्ट से निकलने के बाद उनका काफिला सीधे निर्धारित पते तक जाएगा, जहाँ निजी और औपचारिक कार्यक्रमों की शुरुआत—मसलन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए जाने वाला निजी रात्रिभोज—होगी। इन प्रोटोकॉल और सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच यात्रा का यह प्रारम्भिक चरण दोनों देशों की संजीदा पहचान और कूटनीतिक महत्व को सामने रखेगा।
डिनर-डिप्लोमेसी की शुरुआत: पीएम मोदी का निजी रात्रिभोज
पहले ही दिन सबसे खास और गोपनीय हिस्सा होगा—निजी डिनर बैठक।
शाम को पीएम नरेंद्र मोदी पुतिन का निजी रात्रिभोज से स्वागत करेंगे।
यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि
- कई मुद्दों पर अनौपचारिक बात होती है
- दो नेताओं की केमिकेल मजबूत होती है
- कूटनीतिक पहल छोटे कमरों में ही बड़ी दिशा तय करती है
इस मुलाकात को कई विश्लेषक “डिनर-डिप्लोमेसी” कह रहे हैं जो रिश्तों को मानवीय और व्यक्तिगत स्तर पर मजबूत बनाती है।
5 दिसंबर—सबसे व्यस्त और कूटनीतिक दिन
सुबह 9 बजे — राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत
5 दिसंबर का दिन पूरी तरह से पुतिन की राज्य यात्रा को समर्पित होगा।
सुबह 9 बजे पुतिन को
- राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में
- औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर
- राष्ट्रगान
- औपचारिक स्वागत
दिया जाएगा। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं इस समारोह की मेजबानी करेंगी।
मोदी-पुतिन शिखर बैठक — 23वां वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन
यह इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा होगा।
भारत और रूस हर वर्ष इस वार्षिक बैठक का आयोजन करते हैं, और यह 23वाँ संस्करण होगा।
यह बैठक दो भागों में होगी:
प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता
वन-टू-वन बातचीत (Modi-Putin one-on-one)
दोनों नेता जिन प्रमुख मुद्दों पर बात करेंगे, वे दुनियाभर में चर्चा का विषय हैं—
1. रक्षा सहयोग—S-400, Su-30, मिग और नई टेक्नोलॉजी
भारत और रूस दशकों से रक्षा साझेदार हैं। इस बार भी रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेगा।
संभावित मुद्दे:
- S-400 मिसाइल सिस्टम की शेष डिलीवरी
- Su-30 MKI अपग्रेड
- भारत-रूस संयुक्त प्रौद्योगिकी विकास
- नौसेना के लिए हथियारों का सहयोग
- स्पेयर पार्ट्स और मेंटेनेंस समझौते
- नई रक्षा तकनीकों पर MoUs
रूस ने हाल ही में भारत के साथ एक बड़ा सैन्य सहयोग पैक्ट भी रैटिफाई किया है, जिससे उम्मीद बढ़ गई है कि नई डील्स का ऐलान इस यात्रा में हो सकता है।
2. ऊर्जा साझेदारी — तेल, गैस और न्यूक्लियर
भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीद रहा है। पुतिन इस दौरे के ज़रिए ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं।
मुख्य चर्चाएँ:
- लम्बे समय के तेल-गैस समझौते
- LNG कॉरिडोर
- रोसनेफ्ट और भारतीय कंपनियों के बीच नई डील
- कुडनकुलम न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की प्रगति
- नए परमाणु बिजली संयंत्रों पर चर्चा
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में उथल-पुथल के बीच यह सहयोग भारत को बड़ी स्थिरता दे सकता है।
3. व्यापार और रुपया-रूबल भुगतान
भारत-रूस व्यापार 50 बिलियन डॉलर को पार कर चुका है।
इस बार लक्ष्य है—
“100 बिलियन डॉलर व्यापार”
मोदी और पुतिन इन मुद्दों पर बात करेंगे—
- द्विपक्षीय व्यापार में विविधता
- भुगतान प्रणाली, रुपया-रूबल मैकेनिज़्म
- बैंकिंग चैनल को मजबूत करना
- शिपिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर
- कृषि, फार्मा और IT ट्रेड
4. आर्कटिक, स्पेस और विज्ञान को लेकर सहयोग
रूस चाह रहा है कि भारत
- आर्कटिक रिसर्च
- रूस के उत्तरी समुद्री मार्ग
- स्पेस प्रोजेक्ट्स
- नई वैज्ञानिक तकनीक
में अपनी भूमिका बढ़ाए।
भारत भी ISRO-Roscosmos सहयोग को नई दिशा देना चाहता है।
5. अंतरराष्ट्रीय राजनीति — यूक्रेन संकट, चीन और वैश्विक दक्षिण
दोनों देश कई मुद्दों पर
- स्वतंत्र नीति
- रणनीतिक संतुलन
- वैश्विक दक्षिण की आवाज़
को आगे बढ़ाते हैं।
यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक समीकरण बदल चुके हैं, इसलिए भारत-रूस तालमेल दुनिया की बड़ी राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
शाम 4 बजे — इंडिया-रूस बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे पीएम मोदी और पुतिन
इस मंच पर
- 100+ कंपनियां
- उद्योगपति
- निवेशक
- ऊर्जा, रक्षा, IT, स्टील, फार्मा जैसे सेक्टर
शामिल होंगे।
इस कार्यक्रम का मकसद है—
“व्यापार और निवेश को नई दिशा देना”
कई बड़े आर्थिक समझौतों, उद्योग परियोजनाओं और जॉइंट वेंचर्स की घोषणा यहीं से हो सकती है।
शाम 7 बजे — राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा राजकीय भोज
यात्रा का सबसे औपचारिक और प्रतिष्ठित कार्यक्रम—
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्टेट डिनर।
यह कार्यक्रम
- भारतीय संस्कृति
- मेहमाननवाज़ी
- कूटनीति
का मिश्रण होता है।
इसी दौरान दोनों देश यह संदेश देते हैं कि उनकी दोस्ती केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और मानवीय भी है।
30 घंटे बाद—यात्रा का समापन
राजकीय भोज के बाद देर रात पुतिन रूस लौट जाएंगे।
इस तरह पूरा दौरा लगभग 30 घंटे का होगा, पर असर वर्षों तक दिख सकता है।
🇮🇳 भारत के लिए ये यात्रा क्यों महत्वपूर्ण है?
- रक्षा साझेदारी को स्थिरता मिलेगी
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी
- सस्ते रूसी तेल से भारत को आर्थिक लाभ
- भू-राजनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद
- वैश्विक दक्षिण की आवाज़ मजबूत होगी
भारत की नीति है—
“सबका दोस्त, किसी का दुश्मन नहीं”
और रूस के साथ संबंध इसी नीति का सबसे पुराना उदाहरण हैं।
रूस के लिए यह यात्रा क्यों अहम है?
- एशियाई क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदार बना रहना
- ऊर्जा और रक्षा निर्यात बढ़ाना
- वैश्विक अलगाव के समय भारत एक बड़ी शक्ति
- नई आर्थिक बाजारों तक पहुंच
- चीन-रूस समीकरण के संतुलन में भारत की भूमिका
पुतिन भारत को केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि एक “ट्रस्टेड फ़्रेंड” के रूप में देखते हैं।
क्या भारत-रूस संबंध नई ऊंचाई पर जाएंगे?
ये यात्रा कई मायनों में नई दिशा दे सकती है—
- पुरानी दोस्ती
- भविष्य की रणनीति
- आर्थिक तालमेल
- वैश्विक संकट
इन्हीं चारों मोर्चों पर मोदी और पुतिन के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।
यदि इस दौरे में
- व्यापार समझौते
- रक्षा डील
- ऊर्जा परियोजनाएं
- न्यूक्लियर सहयोग
- आर्कटिक मोर्चा
- स्पेस प्रोग्राम
जैसे क्षेत्रों में प्रगति होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत-रूस रिश्ते और भी मजबूत होंगे।