भारत की न्यायपालिका में 25 नवंबर 2025 का दिन एक ऐतिहासिक पल के रूप में दर्ज हो गया। इसी दिन जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India) के रूप में शपथ ली। उनके कार्यकाल को लेकर न्यायिक जगत, विधि विशेषज्ञों और आम जनता के बीच काफी उत्सुकता है, क्योंकि जस्टिस सूर्यकांत अपने बेबाक रवैये, सूझबूझ और व्यवस्था सुधार लाने वाली सोच के लिए जाने जाते हैं। taazanews24x7.com
जस्टिस सूर्यकांत उन जजों में शामिल हैं जिन्होंने अपने करियर में कई संवैधानिक और ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई का हिस्सा बनकर भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत किया। उनका सफर एक छोटे शहर के साधारण छात्र से उठकर देश की सबसे ऊँची न्यायिक कुर्सी तक पहुँचना लाखों युवाओं को प्रेरित करता है।
कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत? — एक विस्तृत जीवन परिचय
भारत के नए CJI जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के एक साधारण परिवार में हुआ। उनका बचपन आर्थिक रूप से बहुत सम्पन्न नहीं था, लेकिन शिक्षा और मेहनत की शक्ति ने उन्हें संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ाया।
शैक्षिक पृष्ठभूमि
- शुरुआती पढ़ाई: सरकारी स्कूल, हिसार
- स्नातक: गवर्नमेंट कॉलेज, हिसार
- विधि स्नातक: पंजाब विश्वविद्यालय
अपने कॉलेज के दिनों में ही सूर्यकांत अपनी तेज बुद्धि, तार्किक सोच और बहस में स्पष्टता के लिए चर्चित हो गए थे। यही नहीं, उनके शिक्षक उन्हें “लगन और अनुशासन की मिसाल” कहते थे।
‘हमारे कॉलेज का हीरा…’ — शिक्षकों की प्रतिक्रिया
जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने की खबर जिस क्षण उनके पुराने कॉलेज में पहुँची, वहाँ खुशी की लहर दौड़ गई। उनके एक वरिष्ठ शिक्षक ने गर्व से कहा:
“वह हमारे कॉलेज का हीरा था, और आज वह पूरे भारत का हीरा बन गया है। उसकी ईमानदारी और सादगी उसे हमेशा अलग बनाती थी।”
शिक्षकों का कहना है कि सूर्यकांत उन छात्रों में से थे जो किसी विषय को तब तक नहीं छोड़ते थे जब तक उसकी पूरी जड़ तक न पहुँच जाएँ। वे हर मुद्दे पर गहराई से शोध करते, और यही आदत उन्हें एक निष्पक्ष, अध्ययनशील और दूरदर्शी न्यायाधीश बनने में मददगार साबित हुई।
वकालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की यात्रा
जस्टिस सूर्यकांत ने 1984 में वकालत की शुरुआत की। उन्होंने हरियाणा में सिविल, क्रिमिनल और संवैधानिक मामलों पर गहरी पकड़ बनाई। उनकी सबसे बड़ी ताकत थी—तथ्यों का धारदार विश्लेषण और तर्कों की मजबूत प्रस्तुति।
मुख्य पड़ाव
- 2000: हरियाणा के एडवोकेट जनरल बने
- 2004: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने
- 2018: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त
- 2019: सुप्रीम कोर्ट के जज बने
- 2025: देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश
उनका कार्यकाल लंबा तो नहीं होगा, लेकिन न्यायिक सुधारों की रफ्तार उनके कार्यकाल में काफी तेज रहने का अनुमान है।
आर्टिकल 370 की सुनवाई: एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण सदस्य
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई बहुचर्चित सुनवाई में जस्टिस सूर्यकांत की भूमिका अहम रही।
उन्होंने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट रूप से कहा था कि —
“किसी भी संवैधानिक प्रावधान की समीक्षा करते समय हमें देश की एकता और लोकतांत्रिक संतुलन को सबसे ऊपर रखना होगा।”
उनका यह दृष्टिकोण बताता है कि वे संवैधानिक मूल्यों को बेहद मजबूती के साथ समझते हैं।
पेगासस स्पाइवेयर मामला: अधिकार बनाम सुरक्षा का संतुलन
पेगासस मामले में उन्होंने नागरिक अधिकारों की सुरक्षा के प्रश्न पर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ कीं। सरकार से सख्त सवाल पूछते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि—
“राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन नागरिकों की निजता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। दोनों के बीच संतुलन न्यायालय को तय करना होता है।”
यह टिप्पणी आज भी देश की डिजिटल गोपनीयता से जुड़े बहसों का केंद्र है।
CJI के रूप में पहला दिन: 17 केस सुने, ओरल मेंशनिंग बंद
सीजेआई सूर्यकांत ने कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले ही दिन अपनी कार्यशैली का संकेत दे दिया।
● पहले ही दिन 17 केसों की सुनवाई
उन्होंने पहले ही दिन कुल 17 मामलों पर सुनवाई की। यह संख्या कई पुराने मुख्य न्यायाधीशों के औसत से अधिक है।
● ओरल मेंशनिंग बंद — अब सिर्फ लिखित आवेदन
यह फैसला न्यायपालिका की कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वूपर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले अक्सर वकील अचानक खड़े होकर मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने की मांग करते थे। इससे कोर्ट की कार्यकुशलता प्रभावित होती थी।
सूर्यकांत ने कहा:
“न्याय रुकना नहीं चाहिए, और न्याय की प्रक्रिया व्यवस्थित और समयबद्ध होनी चाहिए।”
उम्मीद है कि इस फैसले से अदालत का समय बचेगा और मामलों की सुनवाई तेज होगी। जस्टिस सूर्यकांत राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयकों से निपटने में राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों से संबंधित राष्ट्रपति के परामर्श पर हाल में सुनवाई करने वाली न्यायालय की पीठ में शामिल हैं. जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस बी. आर. गवई की जगह लेंगे
भत्ते और सुविधाएँ (Perks of CJI)
- सरकारी आवास
लुटियंस ज़ोन, नई दिल्ली में पूरी तरह सुसज्जित बंगला - घरेलू स्टाफ और सुरक्षाकर्मी
- सरकारी कार और ड्राइवर
- यात्रा भत्ता और एयर फ़ेयर
- पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभ
- मेडिकल सुविधाएँ
इन सुविधाओं का उद्देश्य जज की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
जस्टिस सूर्यकांत क्यों हैं चर्चा में?
तार्किक और स्पष्ट निर्णय शैली
वे किसी भी मामले में सीधे मुद्दे पर आते हैं—अनावश्यक जटिलता से बचते हैं।
पीड़ित-केंद्रित नजरिया
उनके कई फैसलों में आम नागरिक की सुरक्षा, अधिकार और न्याय प्रमुख केंद्र में रहा है।
अनुशासनप्रिय और तेज़ कार्यशैली
पहले ही दिन 17 केस सुनना इसका बड़ा उदाहरण है।
न्याय प्रणाली में सुधार के समर्थक
वे हमेशा केस मैनेजमेंट, तकनीकी सुधार और ट्रायल कोर्ट की क्षमता बढ़ाने की वकालत करते आए हैं।
भविष्य की दिशा:
न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि जस्टिस सूर्यकांत के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण सुधारों की उम्मीद है।
1. लंबित मामलों को कम करने की बड़ी मुहिम
देश में लगभग 5 करोड़ केस लंबित हैं।
वे इस दिशा में सख्त कदम उठा सकते हैं—
- फास्ट ट्रैक कोर्ट
- ई-कोर्ट प्रक्रिया
- समयबद्ध सुनवाई
2. कोर्ट में तकनीक का अधिक उपयोग
वे AI आधारित केस-लिस्टिंग और डिजिटल फाइलिंग को आगे बढ़ाने के प्रबल समर्थक हैं।
3. अनुशासन और पारदर्शिता
ओरल मेंशनिंग बंद करना इसी की शुरुआत है।
4. निचली अदालतों को मजबूत करना
ज़िला अदालतों में स्टाफ और जजों की कमी दूर करने के लिए बड़े निर्णय संभव हैं।
प्रमुख फैसलों में भूमिका
उन्होंने रक्षा बलों के लिए ‘वन रैंक-वन पेंशन’ (ओआरओपी) योजना को भी बरकरार रखा था और इसे संवैधानिक रूप से वैध बताया तथा सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन में समानता का अनुरोध करने वाली महिला अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई जारी रखी. जस्टिस सूर्यकांत उन सात न्यायाधीशों की पीठ में भी थे, जिसने 1967 के एएमयू के फैसले को खारिज कर दिया था, जिससे उसके अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार का रास्ता खुल गया था. वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने कुछ लोगों की निगरानी के लिए इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के कथित उपयोग की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी.
कब तक CJI रहेंगे जस्टिस सूर्यकांत
30 अक्टूबर को जस्टिस सूर्यकांत को अगले प्रधान न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया था और वह इस पद पर लगभग 15 महीने तक रहेंगे. वह 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर नौ फरवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे. हरियाणा के हिसार जिले में 10 फरवरी, 1962 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत एक छोटे शहर के वकील से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे हैं, जहां वह राष्ट्रीय महत्व और संवैधानिक मामलों के कई फैसलों और आदेशों का हिस्सा रहे. उन्हें 2011 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर में ‘प्रथम श्रेणी में प्रथम’ स्थान प्राप्त करने का गौरव भी प्राप्त है.
निष्कर्ष: एक और मजबूत न्यायिक युग की शुरुआत
जस्टिस सूर्यकांत का CJI के रूप में कार्यभार संभालना भारतीय न्यायपालिका के लिए नई उम्मीदों का समय है।
उनकी साफ-सुथरी छवि, सादगी, कड़ी कार्यशैली और संवैधानिक समझ उन्हें इस पद के लिए आदर्श बनाती है।
उनके पहले दिन की ऊर्जा, स्पष्ट दिशा और सुधारों की प्रतिबद्धता बताती है कि आने वाले महीनों में सुप्रीम कोर्ट में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे।
भारत को एक ऐसे मुख्य न्यायाधीश की जरूरत है जो तेज, निष्पक्ष और समय-संवेदनशील हो — और जस्टिस सूर्यकांत इनमें पूरी तरह खरे उतरते हैं।