लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में यादव परिवार का नाम दशकों से सत्ता, संघर्ष और प्रभाव का प्रतीक रहा है। लेकिन इस बार चर्चा किसी चुनाव, बयान या राजनीतिक फैसले की नहीं, बल्कि एक टूटते वैवाहिक रिश्ते की है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के सौतेले भाई PRATEEK YADAV और मुलायम सिंह यादव परिवार की छोटी बहू APARNA YADAVके बीच तलाक की खबरों ने न केवल राजनीतिक हलकों में, बल्कि आम लोगों के बीच भी गहरी चर्चा छेड़ दी है। taazanews24x7.com
सोशल मीडिया पर PRATEEK YADAV द्वारा लिखी गई भावनात्मक पोस्ट ने इस निजी विवाद को सार्वजनिक मंच पर ला खड़ा किया है। आरोप गंभीर हैं, शब्द तीखे हैं और संकेत साफ—रिश्ता अब लगभग टूट चुका है।

कैसे शुरू हुआ विवाद: एक पोस्ट जिसने सब बदल दिया
पूरा मामला तब सुर्खियों में आया जब PRATEEK YADAV ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावनात्मक पोस्ट साझा की। कुछ ही घंटों में उन्होंने दो पोस्ट किए, जिनमें उन्होंने बिना नाम लिए अपनी पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने लिखा—
“मैंने अपना घर बचाने की हर कोशिश की, लेकिन एक स्वार्थी महिला ने मेरी जिंदगी, मेरे रिश्ते और मेरा परिवार तबाह कर दिया। अब सहने की ताकत नहीं बची।”
यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई। राजनीतिक परिवार से आने वाले व्यक्ति का इस तरह सार्वजनिक रूप से निजी दर्द साझा करना असामान्य माना गया। यही वजह है कि लोग इसे तलाक की आधिकारिक घोषणा से पहले का आखिरी संकेत मान रहे हैं।
क्या सच में तलाक लेंगे PRATEEK YADAV?
परिवार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, PRATEEK YADAV और APARNA YADAVके बीच पिछले काफी समय से रिश्ते सामान्य नहीं थे। मतभेद इतने बढ़ चुके थे कि दोनों अलग-अलग रह रहे थे और सुलह की तमाम कोशिशें नाकाम हो चुकी थीं।
सूत्र बताते हैं कि:
- परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने मध्यस्थता की
- कई दौर की बातचीत हुई
- लेकिन आपसी अविश्वास और तनाव खत्म नहीं हो पाया
अब मामला कानूनी तलाक की दिशा में बढ़ चुका है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने अदालत में याचिका दाखिल करने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है।
कौन हैं अपर्णा यादव? मुलायम परिवार की छोटी बहू का सफर
APARNA YADAVउत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वह मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे PRATEEK YADAV की पत्नी हैं और लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़ी रहीं।
राजनीतिक पहचान
APARNA YADAVने राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई—
- समाजवादी पार्टी से जुड़कर चुनाव लड़ा
- सामाजिक मुद्दों पर मुखर रहीं
- महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहीं

BJP में शामिल होना
APARNA YADAVका राजनीतिक जीवन उस वक्त सुर्खियों में आया जब उन्होंने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की। यह फैसला यादव परिवार और सपा के लिए बड़ा झटका माना गया।
इस कदम को लेकर:
- सपा नेताओं ने नाराजगी जताई
- परिवार के भीतर भी असहमति की खबरें आईं
- APARNA YADAVको ‘स्वतंत्र सोच वाली नेता’ बताया गया
क्या राजनीति ने तोड़ा घर?
इस सवाल से बचना मुश्किल है—क्या APARNA YADAVका BJP में जाना ही इस रिश्ते के टूटने की सबसे बड़ी वजह बना?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यादव परिवार की राजनीति में विचारधारा बेहद अहम रही है। समाजवादी पार्टी की जड़ें समाजवाद में हैं, जबकि BJP की राजनीति पूरी तरह अलग धारा पर चलती है।
सूत्रों के अनुसार:
- राजनीतिक मतभेद घर तक पहुंच गए
- सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग रुख ने दूरी बढ़ाई
- पारिवारिक बैठकों में तनाव बढ़ा
हालांकि, यह भी सच है कि किसी भी विवाह का टूटना सिर्फ राजनीति की वजह से नहीं होता। निजी रिश्तों में संवाद, विश्वास और आपसी समझ की कमी भी अहम भूमिका निभाती है।
PRATEEK YADAV: कम बोलने वाले, ज्यादा सहने वाले?
PRATEEK YADAV राजनीति में सक्रिय भूमिका में कम नजर आए हैं। वह अक्सर खुद को पारिवारिक और निजी जीवन तक सीमित रखते हैं।
व्यक्तित्व
- शांत स्वभाव
- मीडिया से दूरी
- निजी जीवन को सार्वजनिक न करने की आदत
इसी वजह से उनका सोशल मीडिया पर इस तरह खुलकर बोलना लोगों को चौंकाने वाला लगा। कई लोग इसे वर्षों से दबे दर्द का विस्फोट मान रहे हैं।
सोशल मीडिया ट्रायल: जनता की अदालत में मामला
PRATEEK YADAV की पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
समर्थन करने वाले बोले:
- “पुरुषों की भावनाएं भी मायने रखती हैं”
- “हर बार महिला ही पीड़ित हो, यह जरूरी नहीं”
- “घर टूटने का दर्द शब्दों में दिख रहा है”
विरोध करने वालों ने कहा:
- “निजी विवाद को सार्वजनिक करना गलत है”
- “एकतरफा आरोपों से सच्चाई सामने नहीं आती”
- “कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करना चाहिए”
यह बहस दिखाती है कि आज के दौर में सोशल मीडिया किसी अदालत से कम नहीं रह गया है।
यादव परिवार की चुप्पी: रणनीति या मजबूरी?
अब तक अखिलेश यादव, डिंपल यादव या परिवार के किसी वरिष्ठ सदस्य की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह चुप्पी भी अपने आप में कई संकेत देती है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक:
- परिवार मामले को और राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता
- सपा नहीं चाहती कि विपक्ष इसे हथियार बनाए
- कानूनी प्रक्रिया से पहले बयान नुकसानदायक हो सकता है
कानूनी नजरिए से मामला कितना मजबूत?
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि:
- सोशल मीडिया पोस्ट भावनात्मक सबूत हो सकते हैं
- लेकिन कोर्ट में ठोस प्रमाण जरूरी होते हैं
- सार्वजनिक आरोप भविष्य में केस को जटिल बना सकते हैं
यदि तलाक की याचिका दाखिल होती है, तो:
- आरोपों की जांच होगी
- सुलह की अंतिम कोशिश की जाएगी
- फिर आगे का फैसला लिया जाएगा

निजी रिश्ते बनाम सार्वजनिक जीवन
APARNA YADAVऔर PRATEEK YADAV का मामला इस बड़े सवाल को सामने लाता है—
क्या सार्वजनिक जीवन जीने वाले लोग निजी रिश्ते बचा पाते हैं?
राजनीति में:
- हर फैसला सार्वजनिक हो जाता है
- हर विवाद खबर बन जाता है
- निजी दर्द भी राजनीतिक बहस बन जाता है
यही वजह है कि यह मामला सिर्फ एक तलाक की खबर नहीं, बल्कि सत्ता, परिवार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के टकराव की कहानी बन गया है।
समाज पर असर: क्या बदल रही है सोच?
यह विवाद समाज में भी एक नई बहस को जन्म दे रहा है—
- क्या पुरुष भी घरेलू रिश्तों में पीड़ित हो सकते हैं?
- क्या सोशल मीडिया पर अपनी बात रखना सही है?
- क्या राजनीति रिश्तों को निगल जाती है?
इन सवालों के जवाब आसान नहीं हैं, लेकिन यह मामला इन्हें नजरअंदाज नहीं करने देता।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि:
- क्या कानूनी तलाक की पुष्टि होती है
- क्या APARNA YADAVअपनी चुप्पी तोड़ेंगी
- क्या यादव परिवार कोई आधिकारिक बयान देगा
फिलहाल, सन्नाटा ही सबसे बड़ा बयान बना हुआ है।
निष्कर्ष: तलाक से बड़ी है यह कहानी
APARNA YADAVऔर PRATEEK YADAV का विवाद सिर्फ पति-पत्नी के अलग होने की खबर नहीं है। यह—
- राजनीति की कीमत
- सार्वजनिक जीवन का दबाव
- और टूटते रिश्तों की त्रासदी
की कहानी है।
यह मामला दिखाता है कि सत्ता के शिखर पर बैठे परिवार भी भावनात्मक तूफानों से अछूते नहीं होते।