RTE Admission 2026-27 को लेकर देश के दो बड़े राज्यों—छत्तीसगढ़ और राजस्थान—में अहम फैसले हुए हैं। एक ओर छत्तीसगढ़ सरकार ने RTE Admission प्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए पहली कक्षा को ही एकमात्र एंट्री पॉइंट घोषित किया है और सीटों की संख्या दोगुनी करने का फैसला लिया है, वहीं राजस्थान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए निजी स्कूलों में 25% निशुल्क प्रवेश की आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इन फैसलों का सीधा असर लाखों अभिभावकों और बच्चों पर पड़ेगा, जो बेहतर शिक्षा के अवसर की तलाश में हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्या बदला है, आवेदन प्रक्रिया क्या है और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। taazanews24x7.com

RTE Act क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण?
Right of Children to Free and Compulsory Education Act यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दिया गया है। इस कानून के अनुसार निजी स्कूलों में प्रवेश स्तर (एंट्री लेवल) की 25% सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं।
सरकार इन बच्चों की फीस का भुगतान निर्धारित मानकों के अनुसार स्कूलों को करती है। इससे गरीब परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण निजी शिक्षा का अवसर मिलता है।
छत्तीसगढ़ में RTE प्रवेश प्रणाली में बड़ा बदलाव
Chhattisgarh सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है।
1. पहली कक्षा ही होगी एकमात्र एंट्री पॉइंट
अब तक कई निजी स्कूलों में नर्सरी, केजी या अन्य प्रारंभिक कक्षाओं में भी RTE के तहत प्रवेश मिलता था। लेकिन नए नियमों के अनुसार:
- केवल कक्षा 1 (Class 1) में ही RTE के तहत प्रवेश मिलेगा।
- प्री-प्राइमरी या नर्सरी स्तर पर RTE प्रवेश नहीं होगा।
- इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुव्यवस्थित होगी।
सरकार का तर्क है कि एक निश्चित एंट्री पॉइंट होने से सीटों का प्रबंधन आसान होगा और डुप्लीकेसी व विवाद कम होंगे।
2. सीटों की संख्या दोगुनी
राज्य सरकार ने RTE सीटों में ऐतिहासिक वृद्धि का ऐलान किया है। पहले जहां सीमित संख्या में सीटें उपलब्ध थीं, अब उन्हें लगभग दोगुना करने की तैयारी है।
इसका फायदा खासतौर पर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के परिवारों को मिलेगा, जहां निजी स्कूलों में दाखिला पाना आर्थिक रूप से कठिन होता है।
3. डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता
- ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।
- आधार आधारित सत्यापन और दस्तावेज जांच को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
- स्कूलों द्वारा सीट छिपाने या गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

राजस्थान में RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया शुरू
Rajasthan में RTE के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी है।
1. 25% सीटें फ्री
RTE प्रावधान के अनुसार:
- निजी स्कूलों में प्रवेश स्तर की 25% सीटें आरक्षित रहेंगी।
- चयनित विद्यार्थियों की ट्यूशन फीस सरकार वहन करेगी।
- स्कूल अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकते।
2. आवेदन की अंतिम तिथि
राज्य शिक्षा विभाग ने आवेदन के लिए निश्चित तिथि जारी की है। अभिभावकों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आमतौर पर यह प्रक्रिया मार्च के पहले सप्ताह तक चलती है, इसलिए देरी न करें।
3. दूसरे चरण का मौका
जो अभिभावक पहले चरण में आवेदन नहीं कर पाए, उनके लिए दूसरा चरण भी शुरू किया गया है।
- पहले चरण में खाली रह गई सीटों पर पुनः आवेदन का अवसर मिलेगा।
- लॉटरी के माध्यम से चयन होगा।
- चयनित छात्रों की सूची पोर्टल पर प्रकाशित की जाएगी।
पात्रता (Eligibility Criteria)
दोनों राज्यों में RTE के तहत प्रवेश के लिए सामान्य पात्रता इस प्रकार है:
- बच्चा राज्य का निवासी होना चाहिए।
- परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा से कम होनी चाहिए (EWS श्रेणी)।
- आय प्रमाण पत्र अनिवार्य।
- जन्म प्रमाण पत्र।
- निवास प्रमाण पत्र।
- आधार कार्ड (जहां लागू हो)।
कुछ मामलों में अनाथ, दिव्यांग या विशेष श्रेणी के बच्चों को प्राथमिकता दी जाती है।

आवेदन प्रक्रिया: ऐसे करें अप्लाई
- राज्य के आधिकारिक RTE पोर्टल पर जाएं।
- नया पंजीकरण करें।
- बच्चे की जानकारी भरें।
- दस्तावेज अपलोड करें।
- पसंदीदा स्कूलों का चयन करें (निर्धारित संख्या तक)।
- फॉर्म सबमिट कर प्रिंट निकाल लें।
ध्यान रखें कि गलत जानकारी देने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।
लॉटरी सिस्टम कैसे काम करता है?
RTE के तहत प्रवेश मेरिट आधारित नहीं, बल्कि रैंडम लॉटरी सिस्टम से होता है।
- यदि किसी स्कूल में सीटों से अधिक आवेदन आते हैं, तो कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ निकाला जाता है।
- पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है।
- चयन सूची सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध होती है।
अभिभावकों के लिए जरूरी सावधानियां
- केवल आधिकारिक पोर्टल से ही आवेदन करें।
- किसी बिचौलिए या एजेंट को पैसे न दें।
- दस्तावेज स्पष्ट और वैध हों।
- समय सीमा का ध्यान रखें।
- स्कूल चयन सोच-समझकर करें।
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में एकल एंट्री पॉइंट का फैसला लंबी अवधि में लाभकारी साबित हो सकता है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद कम होंगे।
वहीं राजस्थान में 25% फ्री सीटों की निरंतरता से हजारों गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल रही है। हालांकि, कुछ निजी स्कूलों द्वारा प्रतिपूर्ति राशि में देरी की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जिन्हें समय पर हल करना जरूरी है।
चुनौतियां भी कम नहीं
- कई अभिभावकों को ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी दिक्कतें आती हैं।
- दस्तावेज सत्यापन में समय लगता है।
- स्कूलों में RTE छात्रों के साथ भेदभाव की शिकायतें भी कभी-कभी सामने आती हैं।
सरकारों के लिए जरूरी है कि केवल प्रवेश ही नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और समावेशन पर भी बराबर ध्यान दिया जाए।
क्या कहता है भविष्य?
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू बदलावों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि:
- क्या छत्तीसगढ़ में सीटें दोगुनी होने से नामांकन दर में वृद्धि होती है?
- क्या राजस्थान में दूसरे चरण की प्रक्रिया से अधिकतम सीटें भर पाती हैं?
- क्या डिजिटल निगरानी से पारदर्शिता बढ़ती है?
RTE का उद्देश्य केवल स्कूल में प्रवेश देना नहीं, बल्कि सामाजिक समानता को मजबूत करना है। यदि सही तरीके से लागू किया जाए तो यह कानून शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक बदलाव का मजबूत आधार बन सकता है।

निष्कर्ष
RTE Admission 2026-27 को लेकर छत्तीसगढ़ और राजस्थान दोनों राज्यों में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एक तरफ छत्तीसगढ़ में पहली कक्षा को एकमात्र एंट्री पॉइंट बनाकर और सीटें दोगुनी कर व्यवस्था को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है, तो दूसरी ओर राजस्थान में 25% फ्री सीटों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर गरीब परिवारों को राहत दी गई है।
अभिभावकों के लिए यह सुनहरा अवसर है कि वे समय पर आवेदन करें और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ाएं।