मानव सभ्यता के इतिहास में कुछ पल ऐसे होते हैं जो सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं होते, बल्कि पूरी पीढ़ी की सोच बदल देते हैं। नासा का Artemis Program ऐसा ही एक मिशन है, जो दशकों बाद इंसानों को फिर से चंद्रमा की सतह पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। NASA Artemis रॉकेट लॉन्च केवल एक रॉकेट उड़ान नहीं, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण की आधारशिला है—जहां चंद्रमा सिर्फ गंतव्य नहीं, बल्कि मंगल और उससे आगे की यात्रा का पड़ाव बनेगा।
Artemis मिशन के साथ नासा एक बार फिर यह संदेश दे रहा है कि अंतरिक्ष अब सिर्फ खोज का विषय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक मानव उपस्थिति का क्षेत्र बनने जा रहा है। taazanews24x7.com

Artemis मिशन क्या है? नाम के पीछे की कहानी
ग्रीक पौराणिक कथाओं में Artemis, अपोलो की जुड़वां बहन और चंद्रमा की देवी मानी जाती हैं। नासा ने अपने नए चंद्र मिशन का नाम Artemis रखकर एक प्रतीकात्मक संदेश दिया—
जहां Apollo Program ने पहली बार इंसान को चंद्रमा तक पहुंचाया, वहीं Artemis मिशन उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए पहली महिला और विविध पृष्ठभूमि के अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य रखता है।
यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि सोच का विस्तार है।
Apollo से Artemis तक: 50 साल का अंतर क्यों मायने रखता है?
1969 में Apollo 11 के साथ इंसान ने पहली बार चंद्रमा पर कदम रखा। उसके बाद कई सफल Apollo मिशन हुए, लेकिन 1972 के बाद इंसानी चंद्र मिशन बंद हो गए। सवाल उठता है—
इतने साल बाद फिर चंद्रमा क्यों?
इसके पीछे कई कारण हैं—
- नई तकनीक और वैज्ञानिक समझ
- चंद्रमा पर संसाधनों की संभावनाएं
- मंगल मिशन की तैयारी
- दीर्घकालिक अंतरिक्ष आवास की योजना
Artemis मिशन दरअसल भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की नींव है।
Artemis रॉकेट: Space Launch System (SLS) की ताकत
NASA Artemis मिशन के लिए जिस रॉकेट का इस्तेमाल हो रहा है, वह है Space Launch System (SLS)—अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट, जिसे नासा ने विकसित किया है।
SLS की प्रमुख खूबियां:
- जबरदस्त पेलोड क्षमता
- डीप स्पेस मिशन के लिए डिज़ाइन
- भारी अंतरिक्ष यान ले जाने में सक्षम
- भविष्य के मंगल मिशन के लिए अनुकूल
SLS केवल Artemis तक सीमित नहीं है। यह आने वाले दशकों में नासा के बड़े अंतरिक्ष अभियानों की रीढ़ बनने वाला है।
Orion अंतरिक्ष यान: इंसानों का सुरक्षित वाहन
Artemis मिशन में रॉकेट जितना अहम है, उतना ही अहम है Orion Spacecraft। यही वह अंतरिक्ष यान है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा तक की यात्रा करेंगे।
Orion की खासियत यह है कि—
- यह डीप स्पेस रेडिएशन से सुरक्षा देता है
- लंबी अवधि की यात्रा के लिए डिज़ाइन किया गया है
- आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित वापसी संभव है
Apollo युग के बाद यह पहला ऐसा मानव अंतरिक्ष यान है, जिसे खासतौर पर चंद्रमा और उससे आगे के मिशनों के लिए बनाया गया है।

Artemis मिशन के चरण: एक लॉन्च नहीं, पूरी श्रृंखला
Artemis कोई एक मिशन नहीं, बल्कि मल्टी-फेज प्रोग्राम है।
Artemis I
- बिना क्रू के टेस्ट मिशन
- रॉकेट और Orion सिस्टम की जांच
- चंद्रमा की परिक्रमा
Artemis II
- पहली बार इंसानों के साथ चंद्रमा की यात्रा
- लैंडिंग नहीं, लेकिन मानव परीक्षण
Artemis III
- ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग
- पहली महिला और नए अंतरिक्ष यात्री
- दक्षिणी ध्रुव (South Pole) क्षेत्र पर फोकस
यहीं से Artemis मिशन इतिहास रचने की दिशा में कदम बढ़ाता है।
चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव: क्यों है खास?
Artemis मिशन का एक बड़ा फोकस है Moon South Pole। यह इलाका पहले के Apollo मिशनों में शामिल नहीं था।
यह क्षेत्र खास इसलिए है क्योंकि—
- यहां स्थायी रूप से छाया वाले गड्ढों में पानी की बर्फ मिलने के संकेत हैं
- पानी से ऑक्सीजन, पीने का पानी और ईंधन बनाया जा सकता है
- भविष्य के चंद्र बेस के लिए आदर्श स्थान
सीधे शब्दों में कहें तो, दक्षिणी ध्रुव चंद्रमा पर मानव बस्ती की संभावना खोलता है।
Gateway: चंद्र कक्षा में अंतरिक्ष स्टेशन
Artemis मिशन के तहत नासा एक और बड़ा कदम उठा रहा है—Lunar Gateway। यह चंद्रमा की कक्षा में बनाया जाने वाला एक छोटा अंतरिक्ष स्टेशन होगा।
Gateway के फायदे:
- चंद्र सतह और पृथ्वी के बीच लॉजिस्टिक हब
- अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ठहराव
- मंगल मिशन की टेस्टिंग
यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी बड़ा उदाहरण है, जिसमें कई देश भागीदार हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और Artemis Accords
NASA Artemis प्रोग्राम सिर्फ अमेरिका का मिशन नहीं है। इसके साथ जुड़े हैं कई देश और अंतरिक्ष एजेंसियां।
Artemis Accords के तहत:
- शांतिपूर्ण अंतरिक्ष उपयोग
- संसाधनों का जिम्मेदार दोहन
- पारदर्शिता और सहयोग
यह अंतरिक्ष कानून और कूटनीति का नया अध्याय है।
भारत और Artemis मिशन का कनेक्शन
भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने भी हाल के वर्षों में चंद्र मिशनों के जरिए वैश्विक ध्यान खींचा है। Artemis मिशन के साथ भारत जैसे देशों के लिए सहयोग और साझा शोध के नए अवसर खुलते हैं।
चंद्रयान मिशनों से मिली जानकारी Artemis जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स को वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है।
तकनीकी चुनौतियां और जोखिम
इतना बड़ा मिशन बिना चुनौतियों के नहीं आता।
मुख्य चुनौतियां:
- रॉकेट और सिस्टम की विश्वसनीयता
- रेडिएशन और माइक्रो-मीटियोराइट्स
- लंबी अवधि तक मानव स्वास्थ्य
- लागत और समयसीमा
नासा हर कदम पर टेस्टिंग और सेफ्टी को प्राथमिकता दे रहा है।
लागत और आलोचना: सवाल भी जरूरी
Artemis मिशन की लागत अरबों डॉलर में है। इसे लेकर आलोचना भी होती रही है।
आलोचक पूछते हैं—
- क्या पृथ्वी की समस्याओं से पहले अंतरिक्ष जरूरी है?
- क्या लागत बहुत ज्यादा नहीं?
समर्थकों का तर्क है—
- अंतरिक्ष तकनीक का सीधा लाभ पृथ्वी पर मिलता है
- नई नौकरियां और इनोवेशन
- वैज्ञानिक और रणनीतिक बढ़त
यह बहस भी Artemis मिशन का हिस्सा है।
Artemis लॉन्च का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व
जब Artemis रॉकेट लॉन्च होता है, तो वह सिर्फ एक तकनीकी घटना नहीं होती। वह—
- बच्चों में विज्ञान के प्रति उत्साह जगाता है
- नई पीढ़ी को STEM की ओर प्रेरित करता है
- मानव सीमाओं को आगे बढ़ाता है
Apollo की तरह Artemis भी एक पीढ़ीगत प्रेरणा बनने की क्षमता रखता है।
भविष्य की दिशा: चंद्रमा से मंगल तक
NASA Artemis मिशन का अंतिम लक्ष्य चंद्रमा नहीं है। चंद्रमा एक ट्रेनिंग ग्राउंड है।
Artemis के जरिए—
- मंगल मिशन की तैयारी
- लंबी अवधि के अंतरिक्ष आवास
- पृथ्वी से बाहर मानव विस्तार
यह सब संभव हो पाएगा।
निष्कर्ष: Artemis सिर्फ मिशन नहीं, मानव भविष्य की योजना
NASA Artemis रॉकेट लॉन्च मानव इतिहास के उस मोड़ का प्रतीक है, जहां हम सिर्फ देखने नहीं, बल्कि बसने की तैयारी कर रहे हैं। यह मिशन दिखाता है कि इंसान की जिज्ञासा, विज्ञान और सहयोग मिलकर क्या कर सकते हैं।
चंद्रमा पर वापसी केवल अतीत की पुनरावृत्ति नहीं, बल्कि भविष्य की नींव है।
Artemis हमें यह याद दिलाता है कि आकाश अब सीमा नहीं, शुरुआत है।
After working around a hydrogen leak, NASA pressed ahead with a "wet dress" rehearsal countdown of its Artemis II moon rocket Monday, loading the huge rocket with more than 750,000 gallons of liquid oxygen and hydrogen fuel, only to be derailed by additional leakage early… pic.twitter.com/RU7xypZ4LP
— CBS Mornings (@CBSMornings) February 3, 2026