Narayana Murthy: Infosys के संस्थापक Narayana Murthy का बड़ा बयान AI कभी इंसानी दिमाग की जगह नहीं ले सकता”

डिजिटल क्रांति के इस दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर जहां एक ओर उत्साह है, वहीं दूसरी ओर युवाओं के मन में एक बड़ा सवाल भी है—क्या AI हमारी नौकरियां छीन लेगा? इसी बहस के बीच देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys के सह-संस्थापक Narayana Murthy ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह कभी भी इंसानी दिमाग की रचनात्मकता, संवेदनशीलता और नैतिक निर्णय क्षमता की बराबरी नहीं कर सकती।

Narayana Murthy का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनियाभर में AI टूल्स तेजी से विकसित हो रहे हैं और ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक नौकरियों पर खतरे की आशंका जताई जा रही है। खासकर भारत जैसे युवा देश में, जहां लाखों छात्र हर साल टेक्नोलॉजी और मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तलाश में निकलते हैं, वहां AI को लेकर चिंता स्वाभाविक है। taazanews24x7.com

AI बनाम इंसानी दिमाग: Narayana Murthy ने क्या कहा?

Narayana Murthy ने कहा कि AI एक शक्तिशाली टूल है, लेकिन यह मानव मस्तिष्क का विकल्प नहीं, बल्कि सहयोगी है। उनके मुताबिक—

  • AI डेटा का विश्लेषण कर सकता है,
  • पैटर्न पहचान सकता है,
  • तेज़ी से निर्णय सुझाव दे सकता है,

लेकिन वह मानवीय मूल्यों, भावनाओं, नैतिकता और रचनात्मक सोच को नहीं समझ सकता।

उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन की असली ताकत उसके लोग होते हैं, मशीनें नहीं। टेक्नोलॉजी का उद्देश्य इंसान की उत्पादकता बढ़ाना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं।

70 घंटे काम की सलाह और युवा वर्ग

Narayana Murthy पहले भी युवाओं को सप्ताह में 70 घंटे काम करने की सलाह देकर चर्चा में रहे हैं। उनके इस बयान पर देशभर में बहस छिड़ी थी—कुछ लोगों ने इसे प्रेरणादायक माना तो कुछ ने वर्क-लाइफ बैलेंस के खिलाफ बताया।

इस बार AI को लेकर दिए गए बयान में भी उन्होंने युवाओं को कड़ी मेहनत, निरंतर सीखने और अनुशासन पर जोर दिया। उनका कहना है कि:

“अगर आप सीखना नहीं छोड़ेंगे, तो कोई भी टेक्नोलॉजी आपकी जगह नहीं ले सकती।”

उनका मानना है कि जो युवा खुद को अपस्किल करते रहेंगे, नई तकनीकों को अपनाएंगे और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करेंगे, उनके लिए भविष्य में अवसरों की कमी नहीं होगी।

क्या सच में AI नौकरियां छीन रहा है?

दुनियाभर में कई रिपोर्ट्स यह संकेत देती हैं कि ऑटोमेशन से कुछ पारंपरिक नौकरियां कम हो सकती हैं। खासकर:

  • डेटा एंट्री
  • बेसिक कस्टमर सपोर्ट
  • रूटीन अकाउंटिंग कार्य
  • साधारण कोडिंग

लेकिन दूसरी ओर, AI के कारण नए क्षेत्रों में नौकरियों की मांग भी बढ़ रही है, जैसे:

  • AI डेवलपमेंट
  • मशीन लर्निंग इंजीनियर
  • डेटा साइंस
  • साइबर सिक्योरिटी
  • क्लाउड कंप्यूटिंग

Narayana Murthy का कहना है कि हर तकनीकी बदलाव के साथ कुछ नौकरियां खत्म होती हैं, लेकिन उससे अधिक नई नौकरियां पैदा होती हैं। यह इतिहास का नियम रहा है—चाहे औद्योगिक क्रांति हो या इंटरनेट का दौर।

इंसानी दिमाग की ताकत क्या है?

AI जितना भी उन्नत हो जाए, उसमें कुछ मूलभूत सीमाएं हैं:

1. रचनात्मकता (Creativity)

AI मौजूदा डेटा के आधार पर उत्तर देता है, लेकिन पूरी तरह नया और मौलिक विचार इंसान ही पैदा कर सकता है।

2. नैतिक निर्णय (Ethical Judgment)

किसी जटिल सामाजिक या नैतिक स्थिति में सही-गलत का निर्णय इंसानी विवेक से ही संभव है।

3. भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence)

नेतृत्व, टीमवर्क और ग्राहक संबंध जैसे क्षेत्रों में भावनात्मक समझ बेहद जरूरी है—जो AI के लिए चुनौतीपूर्ण है।

4. अनिश्चित परिस्थितियों में निर्णय

जहां डेटा अधूरा या भ्रमित करने वाला हो, वहां इंसानी अनुभव और अंतर्ज्ञान काम आता है।

युवाओं के लिए Narayana Murthy की खास सलाह

1. लगातार सीखते रहें (Continuous Learning)

टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है। अगर आप हर साल कुछ नया सीखते हैं, तो आप कभी पीछे नहीं रहेंगे।

2. बेसिक स्किल्स मजबूत करें

गणित, लॉजिक, कम्युनिकेशन और समस्या समाधान जैसे कौशल हर क्षेत्र में जरूरी हैं।

3. टेक्नोलॉजी से डरें नहीं, अपनाएं

AI को दुश्मन नहीं, सहयोगी मानें। उसे समझें और अपने काम में उपयोग करना सीखें।

4. अनुशासन और मेहनत

उनका मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। मेहनत, समय प्रबंधन और प्रतिबद्धता ही असली कुंजी हैं।

भारत के लिए AI अवसर क्यों है?

भारत दुनिया का सबसे युवा देश माना जाता है। यहां हर साल लाखों इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स निकलते हैं। अगर इन्हें सही दिशा में प्रशिक्षित किया जाए, तो AI भारत के लिए खतरा नहीं बल्कि सुनहरा अवसर बन सकता है।

  • स्टार्टअप इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है
  • डिजिटल इंडिया जैसी पहलें टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे रही हैं
  • आईटी सर्विस सेक्टर पहले से मजबूत है

ऐसे में भारत AI आधारित समाधान विकसित कर वैश्विक बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है।

वर्क कल्चर पर फिर छिड़ी बहस

Narayana Murthy की 70 घंटे काम की सलाह को लेकर सोशल मीडिया पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ युवा मानते हैं कि आज के दौर में स्मार्ट वर्क ज्यादा जरूरी है, जबकि कुछ का कहना है कि शुरुआती करियर में अतिरिक्त मेहनत भविष्य के लिए फायदेमंद होती है।

हालांकि Narayana Murthy का तर्क साफ है—अगर भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी है, तो युवाओं को अधिक मेहनत और अनुशासन अपनाना होगा।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

कई टेक विशेषज्ञों का भी मानना है कि AI “जॉब रिप्लेसमेंट” से ज्यादा “जॉब ट्रांसफॉर्मेशन” का कारण बनेगा। यानी काम का स्वरूप बदलेगा, लेकिन इंसान की भूमिका खत्म नहीं होगी।

उदाहरण के लिए:

  • डॉक्टर AI से बेहतर डायग्नोसिस कर सकते हैं
  • वकील AI से रिसर्च तेज कर सकते हैं
  • शिक्षक AI टूल्स से पर्सनलाइज्ड लर्निंग दे सकते हैं

लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी इंसान की ही होगी।

निष्कर्ष: डर नहीं, तैयारी जरूरी

AI को लेकर डर स्वाभाविक है, लेकिन इतिहास बताता है कि हर नई तकनीक ने अंततः मानव समाज को आगे ही बढ़ाया है। Narayana Murthy का संदेश साफ है—अगर आप सीखते रहेंगे, मेहनत करेंगे और खुद को अपडेट रखेंगे, तो कोई भी तकनीक आपकी जगह नहीं ले सकती।

AI इंसानी दिमाग का विकल्प नहीं, बल्कि उसका विस्तार है। भविष्य उन्हीं का होगा जो तकनीक को अपनाकर अपने कौशल को मजबूत करेंगे।

आज जरूरत है घबराने की नहीं, बल्कि खुद को तैयार करने की। क्योंकि आने वाला दौर “AI बनाम इंसान” का नहीं, बल्कि “AI के साथ इंसान” का होगा।

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