IndiGo में भारी फ्लाइट कैंसिलेशन से देशभर के एयरपोर्ट्स में हाहाकार — यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo इन दिनों अपने सबसे बड़े ऑपरेशनल संकटों में से एक से गुजर रही है। बीते कुछ दिनों में देशभर के एयरपोर्ट्स पर जिस तरह की अफरा-तफरी देखी गई, वैसा नजारा भारतीय विमानन इतिहास में कम ही देखने को मिला है। हजारों यात्री रात-भर एयरपोर्ट के फर्श पर सोते दिखे, लंबी कतारों में घंटों खड़े रहे और फ्लाइट रद्द होने की घोषणाओं से परेशान नजर आए।

Indigo के अचानक सैकड़ों उड़ानें रद्द करने और घंटों की अत्यधिक देरी के कारण दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन एक झटके में लड़खड़ा गई? taazanews24x7.com

इंडिगो संकट की शुरुआत — एक दिन में सैकड़ों उड़ानें क्यों रद्द हुईं?

पिछले सप्ताह के मध्य में अचानक इंडिगो ने देश के अलग-अलग शहरों से उड़ने वाली कई फ्लाइट्स को रद्द करना शुरू किया। यात्रियों को इसकी जानकारी या तो आखिरी मिनट में मिली या कई मामलों में एयरपोर्ट पहुंचने के बाद पता चला कि उनकी फ्लाइट अब उड़ान भरने वाली नहीं है।

घटना-परिचय: कितनी उड़ानें रद्द हुईं

  • 5 दिसंबर 2025 की सुबह — एक ही दिन में इंडिगो ने देशभर में 1,000 से भी ज्यादा उड़ानें रद्द कीं।
  • 6 दिसंबर तक यह संकट अब भी जारी है: शनिवार को भी खरी-बिकरी नहीं चली — लगभग 385 उड़ानें रद्द रही, और कई उड़ानें देर से चलीं।
  • प्रमुख एयरपोर्ट्स जैसे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद आदि पर भयंकर प्रभावित हुए — खासकर दिल्ली और चेन्नई पर, जहाँ तमाम उड़ानों को एक दिन के लिए पूरी तरह निलंबित किया गया।
  • कहने को, इंडिगो के “On-Time Performance (OTP)” — यानी समय पर उड़ान भरने की क्षमता — आमतौर पर 80% से ऊपर रहती थी। लेकिन इस संकट के दौरान यह गिरकर लगभग 8.5% तक गिर गई।

परिणाम: हज़ारों यात्री एकाएक अटके हुए — टिकटों और वो भी ऐसे मौके तब जब यात्रा तय थी — शादी, काम, ज़रूरी काम — सब रुक गए।

कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक एक ही दिन 400–1000 तक उड़ानें अलग-अलग कारणों से या तो रद्द हुईं या भारी देरी से चलीं।

इसके बाद एयरपोर्ट्स पर

  • लंबी कतारें
  • निराश यात्री
  • फंसे हुए परिवार
  • रोते हुए बच्चे
  • गुस्से में भरे यात्रियों की भीड़

 सब कुछ एक ही साथ दिखाई देने लगा।

मुख्य कारण — क्या सच में “क्रू शॉर्टेज” ही असली समस्या है?

इंडिगो ने इस बड़े ऑपरेशनल संकट की कोई एक “आधिकारिक वजह” नहीं बताई है, लेकिन विमानन विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण एक साथ इस उथल-पुथल की वजह बने।

उड़ानें अचानक क्यों रद्द होनी शुरू हुईं?

कुछ घंटों में इतने बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होना सामान्य बात नहीं । इंडिगो ने आधिकारिक तौर पर भले ही “ऑपरेशनल कारण” बताया हो , लेकिन अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि संकट कहीं अधिक गहरा है ।

  1. पायलट और क्रू की कमी ने बड़ा झटका दिया

पिछले कुछ महीनों में एयरलाइन ने कई नए रूट जोड़ दिए थे , लेकिन उतनी तेज़ी से नए पायलट तैयार नहीं हो पाए । यहां तक कि शेड्यूल पहले ही दबाव में था , और अचानक किसी दिन बड़ी संख्या में क्रू उपलब्ध न होने से पूरा नेटवर्क चरमरा गया।

  •  DGCA के नए नियमों ने एयरलाइन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया

नवंबर से लागू हुए नए FDTL Flight Duty Time Limit नियमों के तहत पायलटों को अधिक आराम देना अनिवार्य कर दिया गया । इससे रात की उड़ानें घटानी पड़ीं और पायलटों की कुल उपलब्धता पर असर पड़ा । इंडिगो पहले से ही क्रू की कमी झेल रहा था—नियम बदलने के साथ हालात और बिगड़ गए ।

  • सर्दी का मौसम और भारी भीड़—एयरलाइन की तैयारी पर्याप्त नहीं थी

दिसंबर और जनवरी भारतीय विमानन के लिए साल के सबसे व्यस्त महीने होते हैं । शादियाँ , छुट्टियां , त्योहार—हर वजह से यात्रा बढ़ जाती है । लेकिन ऐसा लगता है कि एयरलाइन इस दबाव को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं थी ।

  • ऑपरेशनल ‘रीसेट मोड’ — कंपनी ने खुद रद्द की कई उड़ानें

जब समस्या हाथ से निकलने लगी, तो इंडिगो ने नेटवर्क को स्थिर करने के लिए कुछ उड़ानें जानबूझकर रद्द करना शुरू किया। लेकिन इसका असर यात्रियों पर और ज्यादा पड़ा।

एयरपोर्ट्स में क्या हुआ? — ज़मीनी हकीकत डराने वाली थी

देश के कई एयरपोर्ट्स पर हालात किसी आपातकाल से कम नहीं दिखे।

दिल्ली में — नो एंट्री से लेकर रद्दीकरण की लहर

IGI एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 और टर्मिनल-3 पर चेक-इन काउंटरों के सामने लंबी कतारें लगी रहीं।

  • कई यात्रियों ने कहा कि उन्हें 8–12 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
  • कई को फूड वाउचर तक नहीं मिले।
  • बुजुर्ग यात्रियों को बैठने की जगह नहीं मिल सकी।

बेंगलुरु में — 60–70% उड़ानें प्रभावित

यहाँ पूरा दिन उड़ानें या तो रद्द रहीं या भारी देरी से चलीं।

  • यात्री लेटेस्ट अपडेट के लिए बार-बार स्क्रीन देखते रहे
  • अचानक ‘Cancelled’ का लाल निशान लग जाता था

मुंबई — भीड़ इतनी कि सुरक्षा लाइनें दोगुनी हो गईं

टर्मिनल-1 और टर्मिनल-2 दोनों पर यात्रियों की भीड़ दो-तीन गुना पहुँच गई।

चेन्नई — दिनभर उड़ानें ठप

कई घंटों तक इंडिगो की एक भी घरेलू उड़ान टेक-ऑफ नहीं कर सकी।

यात्रियों की परेशानियां — ‘एक दिन की बदहाली नहीं, जीवन के खास पल रुक गए’

इंडिगो के इस बड़े संकट ने हजारों यात्रियों की योजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया।

कुछ कठिन पल यात्रियों ने सोशल मीडिया पर साझा किए:

  • “मेरी बेटी की शादी थी, फ्लाइट रद्द हुई — अब हम सड़क मार्ग से 15 घंटे का सफर कर रहे हैं।”
  • “मेरी इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई। 45 हजार का नुकसान।”
  • “हम एयरपोर्ट पर 14 घंटे से फंसे हैं। कोई मदद करने वाला नहीं।”
  • “गर्भवती पत्नी के साथ 6 घंटे लाइन में खड़ा रहा। कोई वॉटर बॉटल तक नहीं दी।”

ऐसे सैकड़ों पोस्ट ट्विटर, इंस्टाग्राम, फेसबुक और यात्रियों के ग्रुप्स में वायरल हुए।

सरकार और DGCA एक्शन मोड में — जांच शुरू, कड़ी चेतावनी

जब सरकार तक यात्रियों की शिकायतें पहुँचीं, तो नागरिक उड्डयन मंत्रालय हरकत में आया।

1. जांच समिति गठित

एक चार-सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई है जो जांच करेगी:

  • इंडिगो की शेड्यूलिंग
  • क्रू मैनेजमेंट
  • फ्लाइट ऑपरेशन
  • यात्रियों के नियमों का पालन

2. DGCA ने एयरलाइन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी

DGCA ने पूछा है:

  • पायलट कमी क्यों?
  • प्लानिंग पहले क्यों नहीं सुधारी?
  • यात्रियों को समय पर सूचना क्यों नहीं दी?

3. यात्रियों को रिफंड का आदेश

रद्द हुई उड़ानों पर

  • फुल रिफंड
  • बिना शुल्क री-बुकिंग देने का निर्देश दिया गया है।

क्या इंडिगो की छवि को बड़ा झटका लगा?

इंडिगो अब तक भारत की सबसे भरोसेमंद एयरलाइन कहलाती थी —

  • समय पर उड़ान
  • सस्ता किराया
  • बड़ा नेटवर्क
  • कम शिकायतें

लेकिन इस संकट ने ब्रांड की छवि पर बड़ा असर डाला है।

लोगों का भरोसा हिला है — खासकर उन यात्रियों का जो समय की बहुत कीमत समझते हैं।

क्या स्थिति जल्द सामान्य होगी?

कंपनी की ओर से बयान आया है कि वह धीरे-धीरे उड़ानों को सामान्य कर रही है।

लेकिन विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • पायलट की कमी
  • नए नियम
  • भारी यात्रा सीजन

इन तीनों के बीच फुल रिकवरी 2–8 हफ्ते लग सकती है।

कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि इंडिगो अपने नेटवर्क को पूरी तरह सामान्य फरवरी 2026 तक कर पाएगी।

यात्रियों के लिए जरूरी सलाह

यदि आपकी इंडिगो फ्लाइट आने वाले दिनों में है:

1. फ्लाइट स्टेटस बार-बार चेक करें

ऑफिशियल ऐप/वेबसाइट पर हर 30 मिनट में चेक करें।

2. एयरपोर्ट टाइम बढ़ा दें

कम से कम 3 घंटे पहले पहुंचें।

3. अन्य एयरलाइंस का विकल्प खुला रखें

जरूरी यात्रा हो तो एक बैक-अप फ्लाइट देखें।

4. रिफंड कंपेनसेशन का अधिकार याद रखें

  • रद्द फ्लाइट पर फुल रिफंड
  • 2–4 घंटे की देरी पर मुफ्त खाने का अधिकार
  • लंबे समय फंसने पर होटल/ट्रांसपोर्ट सुविधा

5. यदि शादी/मेडिकल/जरूरी काम है — यात्रा तारीख बदल दें

अगले 7–10 दिन इंडिगो नेटवर्क अभी भी अस्थिर रह सकता है।

निष्कर्ष—यह संकट केवल इंडिगो का नहीं, भारतीय विमानन संरचना का भी इम्तिहान है

पायलटों की कमी, बढ़ती मांग, नए नियम और तेजी से फैलता नेटवर्क—ये सब मिलकर ऐसी स्थितियों को जन्म देते हैं।

यह समय है कि एयरलाइन

  • पारदर्शिता बढ़ाए
  • यात्रियों से संवाद सुधारे
  • क्रू मैनेजमेंट को मजबूत करे
  • और भरोसा फिर से कायम करे

क्योंकि भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते एविएशन मार्केट में गलतियाँ न केवल ब्रांड को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि यात्रियों के जीवन के महत्वपूर्ण पलों पर गहरा असर डालती हैं।

इंडिगो के इस संकट ने यह साफ कर दिया कि इतनी बड़ी एयरलाइन भी कभी-कभी अपने ही विस्तार के बोझ तले दब सकती है।

यह सवाल भी उठे हैं—

  • क्या एयरलाइंस पायलटों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रही हैं?
  • क्या DGCA नियमों को लागू करने से पहले ‘ट्रांजिशन पीरियड’ देना चाहिए?
  • क्या इंडिगो को पहले से बेहतर प्लानिंग करनी चाहिए थी?

इस संकट ने साफ कर दिया कि Indian Aviation Infrastructure अभी भी बहुत दबाव नहीं झेल सकता।

यात्रियों की परेशानी सिर्फ एक दिन की नहीं — किसी के सपने, किसी की नौकरी, किसी की शादी, और किसी की जिंदगी की सबसे जरूरी यात्रा — सब कुछ दांव पर लग गया।

इंडिगो के लिए यह मौका है कि वह अपनी टीम को मजबूत करे, नए क्रू को ट्रेनिंग दे, यात्रियों से कम्युनिकेशन बेहतर करे और भरोसा फिर से जीते। वरना भारतीय उड़ान उद्योग में उसका नंबर-वन का ताज खतरे में पड़ सकता है।

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