गुरुपुरब 2025: गुरुनानक देव जी के प्रकाश पर्व पर उमड़ी श्रद्धा, जानिए इतिहास, महत्वऔर इस वर्ष का शुभ मुहूर्त

नवंबर 2025

नई दिल्ली:
गुरुपुरब 2025: सिख धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे बड़ा और पवित्र पर्व — गुरुपुरब — नजदीक आ चुका है। पूरे देश और विदेश में सिख समाज के लोग इस दिन को गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के रूप में बड़े हर्ष और श्रद्धा से मनाते हैं। 2025 में गुरु नानक जयंती (Gurpurab 2025) का पर्व 14 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। यह दिन सिख इतिहास में उस क्षण का प्रतीक है जब ज्ञान, करुणा और सत्य का प्रकाश धरती पर अवतरित हुआ था।

गुरु नानक देव जी: ज्ञान और मानवता के प्रतीक

गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 . में रावी नदी के किनारे तलवंडी (वर्तमान पाकिस्तान के ननकाना साहिब) में हुआ था। वे न केवल सिख धर्म के प्रथम गुरु थे, बल्कि एक ऐसे समाज सुधारक भी थे जिन्होंने जातिवाद, अंधविश्वास, असमानता और पाखंड के विरुद्ध आवाज उठाई।
उनका संदेश था — एक ओंकार सतनाम यानी ईश्वर एक है और वही सत्य है।

गुरु नानक देव जी ने पूरी दुनिया को समानता, प्रेम, सत्य और सेवा का संदेश दिया। उन्होंने यात्राएं कीं जिन्हें उदासियां कहा जाता है — इन यात्राओं के दौरान उन्होंने हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध और अन्य समुदायों में भाईचारा फैलाया।

गुरुपुरब का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

गुरुपुरब केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरण का अवसर है। इस दिन श्रद्धालु सुबह-सुबह गुरुद्वारों में जाकर अखंड पाठ, कीर्तन, और लंगर सेवा में भाग लेते हैं।
इस दिन सिख समाज और अन्य धर्मों के लोग भी गुरु नानक जी के उपदेशों को स्मरण करते हैं।

गुरुपुरब के प्रमुख पहलू:

  1. अखंड पाठ: तीन दिन पहले से गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ शुरू होता है, जो बिना रुके लगातार चलता है।
  2. नगर कीर्तन: अखंड पाठ के समापन के बाद सज-धजकर नगर कीर्तन निकाला जाता है, जिसमें पंज प्यारे और निशान साहिब आगे-आगे चलते हैं।
  3. लंगर सेवा: हर गुरुद्वारे में निःशुल्क लंगर का आयोजन होता है — यह गुरु नानक जी की समानता और सेवा की भावना का प्रतीक है।
  4. दीप सज्जा: शाम को गुरुद्वारों और घरों में दीप जलाए जाते हैं, जैसे दीपावली का वातावरण बन जाता है।

गुरुपुरब 2025: तिथि, समय और शुभ मुहूर्त

  • पर्व का नाम: गुरु नानक जयंती / गुरुपुरब
  • तिथि: 14 नवंबर 2025, शुक्रवार
  • पूर्णिमा प्रारंभ: 13 नवंबर, शाम 4:32 बजे
  • पूर्णिमा समाप्त: 14 नवंबर, शाम 6:10 बजे
  • शुभ समय: प्रातः 4:00 बजे से 10:00 बजे तक प्रभात फेरी और कीर्तन सर्वोत्तम माने गए हैं।

भारत से विदेश तक उत्सव का रंग

गुरुपुरब केवल पंजाब या भारत तक सीमित नहीं रहा। आज यह पर्व कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और दुबई में भी बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।
विदेशों में बसे भारतीय समुदाय विशेष रूप से इस दिन गुरुद्वारों में दीवाली जैसी रौनक फैलाते हैं।
कनाडा के ब्रैम्पटन, लंदन के साउथहॉल और अमेरिका के कैलिफोर्निया में विशाल नगर कीर्तन निकलता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

गुरु नानक जी के उपदेश जो आज भी प्रासंगिक हैं

गुरु नानक देव जी के उपदेश किसी धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि मानवता के लिए दिशा-प्रदर्शक हैं।
उनके कुछ प्रमुख संदेश आज भी जीवन को प्रेरणा देते हैं:

  • ना को हिंदू, ना को मुसलमान — इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।
  • किरत करो, नाम जपो, वंड छको — मेहनत से कमाओ, भगवान का नाम लो और दूसरों से बाँटो।
  • सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है — निस्वार्थ सेवा जीवन का सच्चा मार्ग है।
  • ईश्वर सर्वत्र है — हर जीव में वही परमात्मा विद्यमान है।

इन सिद्धांतों के कारण ही गुरु नानक जी का संदेश आज भी दुनिया भर में शांति और समानता की प्रेरणा देता है।

गुरुपुरब पर सामाजिक एकता और सेवा की भावना

गुरुपुरब के अवसर पर देशभ के गुरुद्वारों में सामूहिक भोजन (लंगर) की व्यवस्था होती है, जहाँ अमीर-गरीब, जाति-धर्म का भेद मिटाकर सब एक साथ बैठकर भोजन करते हैं।
यह परंपरा आज की आधुनिक दुनिया में समानता और मानवता का सबसे बड़ा प्रतीक है।

कई स्थानों पर रक्तदान शिविर, चिकित्सा शिविर और गरीबों को वस्त्र वितरण जैसे कार्य भी किए जाते हैं।
इससे समाज में सेवा और दया की भावना बढ़ती है, जो गुरु नानक जी के जीवन का मूल सिद्धांत था।

गुरुपुरब की रात: प्रकाश पर्व का अलौकिक दृश्य

गुरुपुरब की रात जब गुरुद्वारे और घरों में हज़ारों दीपक जलते हैं, तो दृश्य मनमोहक हो जाता है।
अमृतसर का स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब) इस दिन जगमग रोशनी से नहाया हुआ दिखाई देता है।
शाम को आतिशबाज़ी, शबद कीर्तन और भजन संध्या के बीच श्रद्धालु पूरी रात भगवान के नाम में लीन रहते हैं।

गुरु ग्रंथ साहिब: सिख धर्म का जीवंत गुरु

सिख धर्म में गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम और शाश्वत गुरु माना गया है।
गुरुपुरब के दिन श्रद्धालु गुरु ग्रंथ साहिब के उपदेशों का पाठ करते हैं और जीवन में उनके सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
हर गुरुद्वारे में इस दिन ‘हुकमनामा’ पढ़ा जाता है — जो यह दर्शाता है कि आने वाले वर्ष के लिए गुरु की क्या वाणी है।

आधुनिक युग में गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं की आवश्यकता

आज के युग में जब समाज में भेदभाव, असहिष्णुता और तनाव बढ़ रहे हैं, गुरु नानक जी की वाणी पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा था —

“यदि तुम ईश्वर को पाना चाहते हो, तो पहले मनुष्य की सेवा करो।”

उनकी शिक्षाएं आज भी मानवता, पर्यावरण और शांति के लिए प्रकाशस्तंभ हैं।
उनके विचार बताते हैं कि आध्यात्मिकता केवल पूजा नहीं, बल्कि व्यवहार और कर्म में झलकनी चाहिए।

निष्कर्ष: प्रकाश का पर्व, आत्मा का जागरण

गुरुपुरब केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि जीवन दर्शन का प्रतीक है।
यह हमें यह सिखाता है कि इंसानियत, प्रेम और सेवा ही जीवन का सच्चा मार्ग है।
2025 में जब देश और दुनिया गुरु नानक देव जी के 556वें प्रकाश पर्व का जश्न मनाएगी, तब हर दिल में यही कामना होगी कि —
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया।

गुरुपुरब के अवसर पर हर घर और दिल में वही प्रकाश जले, जिसने 500 वर्ष पहले मानवता के पथ को आलोकित किया था।

गुरु नानक देव जी के शब्दों में:

“ना मैं हिन्दू, ना मैं मुसलमान — मैं इंसान हूँ और इंसानियत ही मेरा धर्म है।”

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