Artemis II Launch Date 6 March 2026—मानव अंतरिक्ष इतिहास के सबसे प्रतीक्षित पलों में से एक अब कुछ ही दिनों दूर है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उसका क्रू वाला चंद्र मिशन Artemis II 6 मार्च 2026 को लॉन्च होगा। हाल ही में स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट का दूसरा अहम ईंधन परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसे “वेट ड्रेस रिहर्सल” कहा जाता है। इस सफलता के बाद अब चार अंतरिक्ष यात्री लगभग 6 लाख मील की ऐतिहासिक यात्रा पर निकलने के लिए तैयार हैं। taazanews24x7.com
यह मिशन सिर्फ एक उड़ान नहीं, बल्कि 52 साल के इंतजार का अंत है। 1972 में अपोलो कार्यक्रम के आखिरी मिशन के बाद पहली बार इंसान चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचेगा। दुनिया भर में वैज्ञानिक समुदाय, अंतरिक्ष एजेंसियां और आम लोग इस पल का इंतजार कर रहे हैं।

अपोलो से आर्टेमिस तक: आधी सदी का सफर
1972 में Apollo 17 के साथ चंद्रमा पर मानव मिशनों का सिलसिला थम गया था। उसके बाद दशकों तक अंतरिक्ष यात्राएं पृथ्वी की निचली कक्षा तक सीमित रहीं—चाहे वह स्पेस शटल कार्यक्रम हो या अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS)।
लेकिन 21वीं सदी के दूसरे दशक में NASA ने चंद्रमा पर वापसी की नई योजना बनाई—Artemis Program। इसका नाम ग्रीक पौराणिक कथा की चंद्र देवी आर्टेमिस पर रखा गया है, जो अपोलो की जुड़वां बहन मानी जाती हैं। यह प्रतीक है—एक नए युग का, एक नई शुरुआत का।
Artemis कार्यक्रम का लक्ष्य सिर्फ चंद्रमा की परिक्रमा करना नहीं है, बल्कि वहां स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना, संसाधनों का अध्ययन करना और अंततः मंगल मिशन की नींव रखना है।
Artemis II: क्या है इस मिशन का उद्देश्य?
Artemis II एक क्रू वाला लूनर फ्लाईबाई मिशन है। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसकी कक्षा के आसपास घूमकर पृथ्वी पर लौट आएंगे।
इस मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं:
- गहरे अंतरिक्ष में मानव उड़ान की क्षमताओं का परीक्षण
- जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System) की जांच
- संचार और नेविगेशन सिस्टम की वैधता
- भविष्य के चंद्र अवतरण मिशन (Artemis III) की तैयारी
यह मिशन तकनीकी रूप से बेहद जटिल है, क्योंकि यह पृथ्वी की कक्षा से कहीं आगे जाएगा—जहां रेडिएशन, तापमान और संचार चुनौतियां कहीं अधिक गंभीर होती हैं।

SLS रॉकेट: शक्ति और तकनीक का संगम
Artemis II को अंतरिक्ष में भेजने की जिम्मेदारी है Space Launch System (SLS) पर। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है जिसे NASA ने विकसित किया है।
SLS की प्रमुख विशेषताएं:
- लगभग 98 मीटर ऊंचाई
- चार RS-25 इंजन
- ठोस रॉकेट बूस्टर
- भारी पेलोड ले जाने की क्षमता
हाल ही में हुए दूसरे फ्यूलिंग टेस्ट में रॉकेट में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन भरी गई। काउंटडाउन प्रक्रिया का अभ्यास किया गया और सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच हुई। यह परीक्षण सफल रहा—जो लॉन्च की दिशा में बड़ा कदम है।
Orion स्पेसक्राफ्ट: अंतरिक्ष यात्रियों का सुरक्षित घर
चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर उड़ान भरेगा Orion—एक आधुनिक क्रू कैप्सूल जिसे खास तौर पर डीप स्पेस मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है।
Orion की खूबियां:
- उन्नत लाइफ सपोर्ट सिस्टम
- विकिरण से सुरक्षा
- 40,000 किमी/घंटा से अधिक गति से पृथ्वी पर वापसी की क्षमता
- स्वचालित और मैनुअल नियंत्रण विकल्प
Artemis I मिशन (2022) के दौरान Orion बिना क्रू के चंद्रमा की परिक्रमा कर चुका है। अब Artemis II में पहली बार इंसान इसमें सवार होंगे।
6 लाख मील का रोमांचक सफर
Artemis II की यात्रा लगभग 10 दिनों की होगी।
- पृथ्वी से प्रस्थान
- चंद्रमा की कक्षा के करीब फ्लाईबाई
- डीप स्पेस में सिस्टम परीक्षण
- उच्च गति से पृथ्वी पर पुनः प्रवेश
यह यात्रा लगभग 6 लाख मील (करीब 10 लाख किलोमीटर) की होगी। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से लगभग 3,70,000 किलोमीटर दूर जाएंगे—जो अपोलो मिशनों के बाद सबसे दूर मानव यात्रा होगी।
52 साल बाद मानव की चंद्रमा के पास वापसी
अपोलो युग के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर निकलेगा। यह केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानव जिज्ञासा और साहस का प्रतीक है।
Artemis II यह साबित करेगा कि मानव फिर से गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित यात्रा कर सकता है। यह भविष्य के चंद्र बेस और मंगल मिशन की दिशा में निर्णायक कदम है।

तकनीकी चुनौतियां और समाधान
गहरे अंतरिक्ष मिशन आसान नहीं होते।
प्रमुख चुनौतियां:
- रेडिएशन एक्सपोजर
- संचार में देरी
- जीवन समर्थन प्रणाली की विश्वसनीयता
- उच्च गति से पुनः प्रवेश
नासा ने वर्षों तक सिमुलेशन और परीक्षण कर इन जोखिमों को कम करने की कोशिश की है। SLS और Orion दोनों को कई चरणों में टेस्ट किया गया है।
वैश्विक नजरें और अंतरराष्ट्रीय सहयोग
Artemis कार्यक्रम केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। इसमें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) सहित कई अंतरराष्ट्रीय भागीदार शामिल हैं।
चंद्रमा अब वैश्विक अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा का केंद्र बन चुका है। विभिन्न देश अपने-अपने चंद्र अभियानों की तैयारी में जुटे हैं। ऐसे में Artemis II एक निर्णायक संकेत है कि मानवता फिर से चंद्रमा की ओर अग्रसर है।
भविष्य की राह: Artemis III और आगे
Artemis II के बाद अगला लक्ष्य होगा Artemis III—जिसमें चंद्रमा की सतह पर मानव लैंडिंग की योजना है।
इसके तहत:
- चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की खोज
- जल-बर्फ के स्रोतों का अध्ययन
- दीर्घकालिक मानव उपस्थिति की योजना
यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो आने वाले दशक में चंद्रमा पर स्थायी बेस स्थापित किया जा सकता है।

विज्ञान और मानवता के लिए महत्व
Artemis II केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान का नया अध्याय है।
- गहरे अंतरिक्ष में मानव शरीर पर प्रभाव का अध्ययन
- चंद्र संसाधनों का संभावित उपयोग
- मंगल मिशन के लिए रणनीति
यह मिशन आने वाली पीढ़ियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में प्रेरित करेगा।
निष्कर्ष: इतिहास की दहलीज पर मानवता
6 मार्च 2026 को जब SLS रॉकेट लॉन्च पैड से उड़ान भरेगा, तो वह केवल चार अंतरिक्ष यात्रियों को नहीं, बल्कि मानवता की उम्मीदों और सपनों को साथ लेकर जाएगा।
Artemis II मिशन 52 वर्षों के इंतजार का अंत और नए युग की शुरुआत है। यह मिशन साबित करेगा कि इंसान की सीमाएं केवल उसकी कल्पना तक सीमित हैं।
दुनिया की निगाहें अब लॉन्च पैड पर हैं। चंद्रमा फिर से बुला रहा है—और इस बार इंसान पूरी तैयारी के साथ लौट रहा है।