The Raja Saab Review: PRABHAS की ‘द राजा साब’ पर जनता का फैसला, कहीं ताली तो कहीं तीखी आलोचना

साउथ से लेकर बॉलीवुड तक अपनी पैन-इंडिया फिल्मों से रिकॉर्ड तोड़ने वाले सुपरस्टार PRABHAS एक बार फिर बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म The Raja Saab ’ (The Raja Saab) आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज़ हो चुकी है। फिल्म के रिलीज़ होते ही फर्स्ट डे फर्स्ट शो (FDFS) देखने वाले दर्शकों और इंटरनेट यूजर्स ने सोशल मीडिया पर रिव्यू की बाढ़ ला दी है। कहीं इसे ब्लॉकबस्टर बताया जा रहा है, तो कहीं इसे सिरदर्द करार दिया गया है।

तो आखिर The Raja Saab ’ कैसी फिल्म है? क्या यह डराती है, हंसाती है या फिर इन दोनों में ही फेल हो जाती है? आइए, जानते हैं जनता, क्रिटिक्स और सोशल मीडिया के रिएक्शन्स के आधार पर इस फिल्म का डिटेल्ड और ग्राउंडेड रिव्यूtaazanews24x7.com

PRABHAS की स्टार पावर बनाम कहानी की परीक्षा

‘बाहुबली’, ‘साहो’, ‘सलार’ और ‘आदिपुरुष’ जैसी फिल्मों के बाद PRABHAS से दर्शकों की उम्मीदें हमेशा आसमान पर रहती हैं। The Raja Saab ’ को भी एक हॉरर-फैंटेसी एंटरटेनर के तौर पर पेश किया गया, जिसमें डर, कॉमेडी और मसालेदार ट्विस्ट का वादा किया गया था।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत शुरू से ही PRABHAS का नाम रहा है। उनके फैंस ने रिलीज़ से पहले ही थिएटर बुकिंग और सोशल मीडिया ट्रेंड्स से माहौल बना दिया था। लेकिन सवाल यही है—क्या सिर्फ स्टारडम के दम पर फिल्म टिक पाई?

कहानी (Story): आइडिया अच्छा, ट्रीटमेंट कमजोर?

फिल्म की कहानी एक ऐसे रहस्यमयी राजा के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके अतीत में छुपे हैं डरावने राज़ और वर्तमान में हैं कुछ चौंकाने वाले मोड़। हॉरर और फैंटेसी के कॉम्बिनेशन के साथ कहानी आगे बढ़ती है, लेकिन कई दर्शकों का मानना है कि लेखन कमजोर और कहानी बिखरी हुई लगती है।

पहला हाफ अपेक्षाकृत हल्का-फुल्का है, जिसमें कॉमेडी और फैंटेसी का तड़का डाला गया है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा—

“फर्स्ट हाफ एंटरटेनिंग है, टाइम पास हो जाता है।”

हालांकि, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, दर्शकों को एक सॉलिड स्क्रिप्ट की कमी खलने लगती है।

सेकंड हाफ और आखिरी 40 मिनट: फिल्म की जान?

जहां कई दर्शक फिल्म को औसत बता रहे हैं, वहीं एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो कहता है कि आखिरी 40 मिनटों के ट्विस्ट ने होश उड़ा दिए

X (पहले ट्विटर) पर कई यूजर्स ने लिखा—

“अगर आपने सब्र रखा, तो क्लाइमैक्स आपको सरप्राइज देगा।”

यानी फिल्म का सेकंड हाफ और खासकर क्लाइमैक्स, उन लोगों के लिए रिवॉर्ड बनकर आता है जो पूरी फिल्म देख पाते हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ आखिरी 40 मिनट किसी फिल्म को महान बना सकते हैं?

डर और कॉमेडी: दोनों में अधूरापन?

The Raja Saab ’ को हॉरर-कॉमेडी बताया गया था, लेकिन सोशल मीडिया रिव्यूज में एक लाइन बार-बार सामने आ रही है—
डराती है, हंसाती है।”

कई दर्शकों का कहना है कि हॉरर सीन डर पैदा नहीं करते और कॉमेडी पंचेज़ जबरदस्ती के लगते हैं। यही वजह है कि कुछ लोगों ने फिल्म को डिसकनेक्टेड अनुभव बताया।

हालांकि PRABHAS की स्क्रीन प्रेजेंस कई सीन को संभाल लेती है, लेकिन कंटेंट की कमी साफ झलकती है।

अभिनय (Acting): PRABHAS का जलवा बरकरार

अगर फिल्म में सबसे ज्यादा तारीफ किसी चीज़ की हो रही है, तो वह है PRABHAS का अभिनय और उनकी एंट्री

उनकी पहली एंट्री पर थिएटर में सीटियां और तालियां सुनाई देने की खबरें सामने आई हैं। X पर एक यूजर ने लिखा—

“PRABHAS + बैकग्राउंड म्यूज़िक = पैसा वसूल।”

फिल्म में मौजूद अन्य कलाकारों, खासकर संजय दत्त की एंट्री को भी दर्शकों ने पसंद किया है। PRABHAS और संजय दत्त का आमना-सामना फिल्म के हाई पॉइंट्स में गिना जा रहा है।

डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले: यहीं हुई चूक?

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी के तौर पर डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले को देखा जा रहा है। कई क्रिटिक्स का मानना है कि अगर कहानी को टाइट रखा जाता और हॉरर एलिमेंट्स पर ज्यादा काम किया जाता, तो फिल्म ज्यादा असरदार हो सकती थी।

कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जिससे फिल्म की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। यही वजह है कि कई दर्शक बीच में ही बोर होने की शिकायत कर रहे हैं।

म्यूज़िक और BGM: माहौल बनाने में सफल

फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर सोशल मीडिया पर पॉजिटिव रिस्पॉन्स बटोर रहा है। खासकर इंट्रो और क्लाइमैक्स सीन में BGM फिल्म को एक लेवल ऊपर ले जाता है।

हालांकि गाने लंबे समय तक याद रहने वाले नहीं बताए जा रहे, लेकिन सिचुएशन के हिसाब से फिट बैठते हैं।

सोशल मीडिया और X (Twitter) रिव्यू: जनता बंटी हुई

The Raja Saab ’ को लेकर सोशल मीडिया पर रिएक्शन्स दो धड़ों में बंटे हुए हैं।

पॉजिटिव रिव्यू:

  • “PRABHAS के फैंस के लिए फिल्म जरूर देखें।”
  • “आखिरी 40 मिनट शानदार हैं।”
  • “हॉरर-फैंटेसी का अच्छा प्रयास।”

नेगेटिव रिव्यू:

  • “कमजोर कहानी और बिखरा स्क्रीनप्ले।”
  • “न डर, न कॉमेडी—बस लंबी फिल्म।”
  • “PRABHAS के नाम पर फिल्म खिंचती है।”

यानी फिल्म को लेकर वर्ड ऑफ माउथ पूरी तरह पॉजिटिव नहीं, लेकिन PRABHAS की फैन फॉलोइंग इसे शुरुआती कलेक्शन में फायदा जरूर दिला सकती है।

बॉक्स ऑफिस पर क्या होगा असर?

ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि The Raja Saab ’ ओपनिंग डे पर अच्छी कमाई कर सकती है, खासकर साउथ और मेट्रो सिटीज़ में। लेकिन लॉन्ग रन पूरी तरह कंटेंट और वर्ड ऑफ माउथ पर निर्भर करेगा

अगर फैमिली ऑडियंस और न्यूट्रल दर्शक फिल्म से जुड़ नहीं पाए, तो दूसरे हफ्ते में कलेक्शन गिर सकता है।

देखनी चाहिए या नहीं? (Final Verdict)

अगर आप कट्टर PRABHAS फैन हैं, तो The Raja Saab ’ आपके लिए एक थिएटर एक्सपीरियंस हो सकती है। स्टार पावर, BGM और क्लाइमैक्स ट्विस्ट आपको निराश नहीं करेंगे।

लेकिन अगर आप एक सॉलिड हॉरर या जोरदार कॉमेडी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो आपको थोड़ा निराशा हाथ लग सकती है।

निष्कर्ष:
The Raja Saab ’ एक ऐसा प्रयोग है जो पूरी तरह सफल नहीं हो पाता, लेकिन PRABHAS की मौजूदगी इसे देखने लायक बना देती है। यह फिल्म न तो पूरी तरह डराती है, न ही खुलकर हंसाती है—बस बीच के रास्ते पर चलती हुई नजर आती है।

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