2025 नोबेल पुरस्कार विजेता: प्रतिरक्षा प्रणाली और टी-कोशिकाओं का बड़ा खुलासा

2025 नोबेल पुरस्कार विजेता : वार्षिक नोबेल सप्ताह 2025 की शुरुआत सोमवार को हुई, जब दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस वर्ष फिजियोलॉजी या मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार तीन वैज्ञानिकों — दो अमेरिकी और एक जापानी — को मानव प्रतिरक्षा प्रणाली के रहस्यों को उजागर करने के लिए दिया गया। इनकी खोज ने कैंसर और ऑटो-इम्यून रोगों के इलाज में नए रास्ते खोलने में मदद की है। Taazanews24x7.com

नोबेल विजेता कौन हैं?

2025 के नोबेल पुरस्कार विजेता हैं:

इन वैज्ञानिकों ने नियामक टी कोशिकाओं (Regulatory T-cells) की पहचान की। ये कोशिकाएँ प्रतिरक्षा प्रणाली को हमारे स्वस्थ अंगों पर हमला करने से रोकती हैं।

नोबेल समिति के अध्यक्ष ओले काम्पे ने कहा:
इन खोजों ने यह समझने में मदद की कि प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे काम करती है और हम सभी को गंभीर स्व-प्रतिरक्षी रोग क्यों नहीं होते।”

प्रतिरक्षा प्रणाली: शरीर की सुरक्षा कवच

हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली एक जटिल नेटवर्क है, जिसमें शामिल हैं:

  • बी कोशिकाएँ (B-cells) – रोगजनकों की पहचान कर एंटीबॉडी बनाती हैं
  • टी कोशिकाएँ (T-cells) – हानिकारक कोशिकाओं को पहचान कर नष्ट करती हैं
  • न्यूट्रोफिल (Neutrophils) – संक्रमण के खिलाफ पहला बचाव करती हैं
  • मैक्रोफेज (Macrophages) – मृत कोशिकाओं और संक्रमणजनकों को साफ करती हैं

प्रतिरक्षा प्रणाली का सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि वह हानिकारक कोशिकाओं को सौम्य कोशिकाओं से अलग करे। उदाहरण के लिए, कैंसरग्रस्त कोशिकाओं की पहचान करना और उन्हें नष्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

साकागुची का वैज्ञानिक योगदान

74 वर्षीय जापानी वैज्ञानिक शिमोन साकागुची ने 1995 में प्रतिरक्षा सहिष्णुता (Immune Tolerance) की नई समझ दी। उस समय तक शोधकर्ताओं का मानना था कि केवल सेंट्रल टॉलरेंस (Central Tolerance) के जरिए ही हानिकारक प्रतिरक्षा कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

साकागुची ने दिखाया कि प्रतिरक्षा प्रणाली अधिक जटिल है। उन्होंने नियामक टी कोशिकाओं की खोज की, जो शरीर को स्व-प्रतिरक्षी रोगों से बचाती हैं। उनकी खोज ने यह स्पष्ट किया कि प्रतिरक्षा प्रणाली सिर्फ बाहरी खतरों से नहीं, बल्कि हमारे अपने अंगों को भी सुरक्षा प्रदान करती है।

ऑटो-इम्यून रोग और टी-कोशिकाएँ

टी-कोशिकाएँ प्रतिरक्षा प्रणाली की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। ये कोशिकाएँ यह सीखती हैं कि कौन-सा तत्व शरीर के लिए हानिकारक है और कौन-सा सुरक्षित।

यदि टी-कोशिकाएँ गलती से अपने ही शरीर के अंगों को “दुश्मन” समझ लें, तो ऑटो-इम्यून रोग (Autoimmune Disease) उत्पन्न हो सकता है। उदाहरण:

  • रुमेटॉयड आर्थराइटिस
  • टाइप 1 डायबिटीज
  • लुपस (Lupus)

थाइमस (Thymus) नामक अंग में गड़बड़ टी-कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। इसे सेंट्रल टॉलरेंस कहा जाता है।

ब्रुनको और रामस्डेल की भूमिका

  • मैरी ब्रुनको – प्रतिरक्षा तंत्र की जटिलताओं की पहचान में प्रमुख योगदान
  • फ्रेड रामस्डेल – ऑटो-इम्यून रोगों और टी-कोशिकाओं पर शोध

इनकी खोज ने स्पष्ट किया कि प्रतिरक्षा प्रणाली न केवल बाहरी खतरों से सुरक्षा करती है, बल्कि शरीर के अपने अंगों को भी नुकसान से बचाती है।

शरीर की सुरक्षा प्रणाली पर बड़ा खुलासा

नियामक टी कोशिकाओं की खोज ने यह साबित किया कि:

  • सभी को गंभीर बीमारियाँ क्यों नहीं होती
  • प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे संतुलित रहती है
  • कैंसर और ऑटो-इम्यून रोगों के इलाज में नई तकनीकें विकसित की जा सकती हैं

नोबेल समिति के महासचिव थॉमस पर्लमैन के अनुसार, यह खोज प्रतिरक्षा विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव साबित हुई है।

नोबेल विजेताओं के योगदान से होने वाले लाभ

  1. कैंसर इम्यूनोथेरपी में सुधार – शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को प्रशिक्षित करना
  2. ऑटो-इम्यून रोगों का बेहतर उपचार – टी-कोशिकाओं की भूमिका समझना
  3. वैज्ञानिक अनुसंधान में नई दिशा – प्रतिरक्षा प्रणाली की जटिल कार्यप्रणाली को समझना
  4. मानव जीवन की गुणवत्ता में सुधार – गंभीर बीमारियों से बचाव

T-Cells और Cancer Treatment

नियामक टी कोशिकाओं की समझ से इम्यूनोथेरपी (Immunotherapy) में नई तकनीकें सामने आई हैं। कैंसर उपचार में टी-कोशिकाओं का प्रशिक्षण शरीर को कैंसरग्रस्त कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने में सक्षम बनाता है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

Q1: नियामक टी कोशिकाएँ क्या हैं?
A: ये विशेष टी-कोशिकाएँ हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली को अपने शरीर के खिलाफ हमला करने से रोकती हैं।

Q2: ऑटो-इम्यून रोग क्या है?
A: यह स्थिति तब होती है जब प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला करती है।

Q3: नोबेल पुरस्कार विजेताओं की खोज का महत्व क्या है?
A: उनकी खोज से कैंसर और ऑटो-इम्यून रोगों के उपचार में नई संभावनाएँ खुली हैं।

Q4: थाइमस का क्या काम है?
A: यह अंग हानिकारक टी-कोशिकाओं को नष्ट करके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।Q5: नियामक टी कोशिकाओं की खोज का भविष्य पर क्या असर होगा?
A: यह खोज भविष्य में कैंसर और ऑटो-इम्यून रोगों के नए उपचार विकसित करने में मार्गदर्शक साबित होगी।

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