जब भी स्विट्ज़रलैंड का नाम टेनिस में लिया जाता है, सबसे पहले दिमाग में रोजर फेडरर का नाम आता है। लेकिन इसी देश से निकला एक और खिलाड़ी था, जिसने इतिहास के सबसे मजबूत खिलाड़ियों को हराकर साबित किया कि टेनिस सिर्फ स्टाइल नहीं, बल्कि हिम्मत, ताकत और जिद का खेल भी है।
उस खिलाड़ी का नाम है — Stan Wawrinka। taazanews24x7.com
स्टैन वावरिंका वह खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने करियर का बड़ा हिस्सा Big Three (फेडरर, नडाल, जोकोविच) के दौर में खेला, लेकिन इसके बावजूद खुद की एक अलग पहचान बनाई। तीन ग्रैंड स्लैम खिताब, अनगिनत यादगार मुकाबले और एक ऐसा बैकहैंड जिसने टेनिस दुनिया को हिला दिया—वावरिंका की कहानी सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि संघर्ष और आत्मविश्वास की भी है।

शुरुआत: जहां उम्मीदें कम और सवाल ज्यादा थे
Stan Wawrinka का जन्म 28 मार्च 1985 को स्विट्ज़रलैंड के लॉज़ान में हुआ। बचपन से ही खेल में रुचि थी, लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे उसी देश से आते थे, जहां रोजर फेडरर पहले से ही टेनिस का सुपरस्टार बन चुके थे।
कई सालों तक वावरिंका को सिर्फ
“फेडरर का साथी खिलाड़ी”
या
“स्विस टीम का दूसरा नाम”
कहा जाता रहा।
यह टैग उनके लिए सबसे बड़ा बोझ भी था और सबसे बड़ी प्रेरणा भी।
शुरुआती करियर: टैलेंट था, लेकिन निरंतरता नहीं
2000 के दशक के मध्य में वावरिंका प्रोफेशनल टेनिस में आए। उनके शॉट्स में ताकत थी, बैकहैंड बेहद खतरनाक था, लेकिन समस्या थी मेंटल स्ट्रेंथ और कंसिस्टेंसी।
वे बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ अच्छा खेलते थे, लेकिन अहम मौकों पर हार जाते थे। आलोचक कहते थे:
“वावरिंका के पास टैलेंट है, लेकिन चैंपियन का दिमाग नहीं।”
यहीं से उनके असली संघर्ष की शुरुआत होती है।
2008 ओलंपिक: पहला बड़ा मोड़
Stan Wawrinka के करियर का पहला बड़ा टर्निंग पॉइंट आया 2008 बीजिंग ओलंपिक में।
यहां उन्होंने रोजर फेडरर के साथ मिलकर मेंस डबल्स में गोल्ड मेडल जीता।
यह जीत सिर्फ एक मेडल नहीं थी, बल्कि वावरिंका के आत्मविश्वास की नींव थी।
उन्होंने पहली बार महसूस किया कि वे बड़े मंच पर दबाव झेल सकते हैं।
बैकहैंड जिसने इतिहास बदल दिया
अगर Stan Wawrinka को एक शब्द में परिभाषित करना हो, तो वह होगा — One-Handed Backhand।
टेनिस इतिहास में बहुत से शानदार बैकहैंड रहे हैं, लेकिन वावरिंका का बैकहैंड:
- ताकतवर
- सटीक
- और डर पैदा करने वाला
था।
यह बैकहैंड इतना घातक था कि:
- नडाल की टॉपस्पिन
- जोकोविच की डिफेंस
- और मरे की रैली
सब इसके सामने कमजोर नजर आए।
2014 ऑस्ट्रेलियन ओपन: जब वावरिंका ने दुनिया को चौंकाया
साल 2014—यह वह साल था जब Stan Wawrinka ने खुद को “अंडरडॉग” से “ग्रैंड स्लैम चैंपियन” में बदल दिया।
ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्होंने:
- क्वार्टरफाइनल में नोवाक जोकोविच को हराया
- फाइनल में राफेल नडाल को मात दी
और अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीता।
यह जीत सिर्फ ट्रॉफी नहीं थी, बल्कि यह संदेश था:
“मैं भी इस युग का चैंपियन हूं।”
फ्रेंच ओपन 2015: क्ले कोर्ट पर नडाल-जोकोविच को मात
क्ले कोर्ट को राफेल नडाल का साम्राज्य माना जाता है।
लेकिन 2015 फ्रेंच ओपन में वावरिंका ने इतिहास रच दिया।
फाइनल में उन्होंने नोवाक जोकोविच को हराया—उस जोकोविच को, जो उस समय करियर ग्रैंड स्लैम के बेहद करीब थे।
वावरिंका का आक्रामक खेल, बैकहैंड विनर्स और मानसिक मजबूती—सबने मिलकर इस मैच को क्लासिक बना दिया।

US Open 2016: तीसरा ग्रैंड स्लैम, तीसरी कहानी
US Open 2016 में वावरिंका फिर फाइनल में पहुंचे और एक बार फिर सामने थे नोवाक जोकोविच।
इस मुकाबले में वावरिंका ने साबित किया कि:
- वे सिर्फ एक-दो टूर्नामेंट के चैंपियन नहीं
- बल्कि बड़े मैचों के खिलाड़ी हैं
तीसरा ग्रैंड स्लैम जीतकर उन्होंने खुद को आधुनिक टेनिस के सबसे खतरनाक चैलेंजर्स में शामिल कर लिया।
Big Three के खिलाफ रिकॉर्ड: सम्मान की लड़ाई
Stan Wawrinka का करियर इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने Big Three के दौर में:
- नडाल को ग्रैंड स्लैम में हराया
- जोकोविच को कई बार बड़े मुकाबलों में मात दी
- फेडरर के साथ भी कांटे की टक्कर दी
वे उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जो Big Three को उनके प्राइम में हरा सके।
चोटें और गिरावट: असली परीक्षा
2017 के बाद वावरिंका का करियर आसान नहीं रहा।
घुटने और पैर की गंभीर चोटों ने उन्हें लंबे समय तक कोर्ट से दूर रखा।
कई लोगों ने कहा:
“अब वावरिंका का दौर खत्म हो गया है।”
लेकिन यही वह वक्त था, जब उनके जज्बे की असली परीक्षा हुई।
कमबैक की कोशिश: उम्र सिर्फ एक नंबर
30 की उम्र पार करने के बाद भी वावरिंका ने हार नहीं मानी।
उन्होंने फिटनेस पर काम किया, रैंकिंग गिरने के बावजूद छोटे टूर्नामेंट खेले और हर मैच में खुद को साबित करने की कोशिश की।
हालांकि वे दोबारा ग्रैंड स्लैम जीत नहीं पाए, लेकिन:
- उनका जज्बा
- खेल के प्रति ईमानदारी
- और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा
बन गई।
फैंस और टेनिस दुनिया में सम्मान
Stan Wawrinka को भले ही फेडरर जैसी लोकप्रियता न मिली हो, लेकिन टेनिस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि:
“अगर Big Three का दौर न होता, तो वावरिंका और भी ज्यादा ग्रैंड स्लैम जीत सकते थे।”
उनका सम्मान इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि उन्होंने हार नहीं मानी, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न रहे।
खेल शैली: ताकत बनाम कला
जहां फेडरर को कला माना जाता है, वहीं वावरिंका को ताकत।
उनका खेल दिखावटी नहीं, बल्कि सीधा और क्रूर था।
वे कोर्ट पर:
- डर पैदा करते थे
- गलतियों की कम गुंजाइश देते थे
- और सही मौके पर हमला करते थे
Stan Wawrinka की विरासत
वावरिंका की विरासत सिर्फ तीन ग्रैंड स्लैम नहीं है।
उनकी असली पहचान है:
- Big Three को चुनौती देना
- दबाव में बेहतर खेलना
- और कभी हार न मानना
वे उन खिलाड़ियों में हैं जिन्होंने दिखाया कि टेनिस में सिर्फ स्टार नहीं, योद्धा भी होते हैं।

निष्कर्ष: इतिहास में अलग पहचान
Stan Wawrinka टेनिस इतिहास में उस खिलाड़ी के रूप में याद किए जाएंगे, जिसने:
- दिग्गजों को उनके घर में हराया
- आलोचनाओं को जवाब दिया
- और खुद की शर्तों पर खेला
वे फेडरर नहीं थे, नडाल नहीं थे, जोकोविच नहीं थे—
वे सिर्फ Stan Wawrinka थे।
और शायद यही उनकी सबसे बड़ी जीत है।
How to win a set, Stan Wawrinka edition. pic.twitter.com/taEu5jb9rU
— We Are Tennis (@WeAreTennis) January 22, 2026