Siddhartha Bhaiya: Small cap multibagger हंटर की पूरी कहानी, जिसने बाजार को पढ़ना सिखाया

नई दिल्ली: 31 दिसंबर 2025 की तारीख भारतीय निवेश जगत के लिए एक ऐसा काला अध्याय बन गई, जिसे लंबे समय तक भुलाया नहीं जा सकेगा। दलाल स्ट्रीट के जाने-माने स्मॉलकैप निवेशक, Aequitas Investment के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर Siddhartha Bhaiyaका 47 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। यह खबर सिर्फ एक व्यक्ति के जाने की नहीं थी, बल्कि उस सोच के खत्म हो जाने की थी, जो बुल मार्केट के शोर में भी जोखिम की सच्चाई कहने का साहस रखती थी।

Siddhartha Bhaiya: Small cap multibagger हंटर की पूरी कहानी, जिसने बाजार को पढ़ना सिखाया उन चुनिंदा फंड मैनेजर्स में थे, जिन्होंने बाजार को सिर्फ पैसा कमाने की जगह एक अनुशासन, एक दर्शन और एक जिम्मेदारी के तौर पर देखा। उनकी अचानक मौत से निवेशकों, फंड मैनेजर्स और मार्केट एनालिस्ट्स के बीच शोक की लहर दौड़ गई।  निवेश जगत के दिग्गज और Aequitas Investment के संस्थापक Siddhartha Bhaiya का 47 वर्ष की आयु में निधन हो गया. अपनी बेबाक राय और शानदार 34% CAGR रिटर्न के लिए मशहूर Siddhartha Bhaiya: Small cap multibagger हंटर की पूरी कहानी, जिसने बाजार को पढ़ना सिखाया ने साल 2025 में वैश्विक बाजार की उथल-पुथल से पहले अपने पोर्टफोलियो को 90% कैश में बदलकर सबको हैरान कर दिया था । taazanews24x7.com

कौन थे Siddhartha Bhaiya?

Siddhartha Bhaiya दलाल स्ट्रीट के उन नामों में शामिल थे, जिन्हें किसी परिचय की जरूरत नहीं थी। वे Aequitas (एक्विटास) पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के संस्थापक और एमडी थे। बाजार में उन्हें ‘Small cap multibagger hunter’ के नाम से जाना जाता था। यह उपनाम यूं ही नहीं मिला था—वे ऐसी कंपनियों को शुरुआती दौर में पहचान लेते थे, जिन्हें बाकी बाजार नजरअंदाज कर देता था।

उनकी खासियत यह थी कि वे ट्रेंड नहीं देखते थे, बल्कि बिजनेस की आत्मा पढ़ते थे। बैलेंस शीट, कैश फ्लो, प्रमोटर की नीयत और इंडस्ट्री की लंबी संभावनाएं—यही उनकी असली स्क्रीनिंग थी।

निवेश की शुरुआत: जब स्मॉलकैप को सट्टा माना जाता था

Siddhartha Bhaiya ने निवेश की दुनिया में कदम उस दौर में रखा, जब स्मॉलकैप शेयरों को जोखिम और सट्टे का दूसरा नाम माना जाता था। बड़े निवेशक केवल ब्लूचिप और लार्जकैप कंपनियों तक सीमित रहते थे। लेकिन Siddhartha Bhaiya का मानना था कि असली अवसर वहीं छिपे होते हैं, जहां धैर्य की सबसे ज्यादा जरूरत होती है

उन्होंने छोटी लेकिन मजबूत बुनियाद वाली कंपनियों पर रिसर्च शुरू की। वे प्रमोटर से मिलने, फैक्ट्री विजिट करने और सालों तक कंपनियों को ट्रैक करने से नहीं हिचकते थे।

निवेश दर्शन: रिटर्न से पहले रिस्क

Siddhartha Bhaiya का निवेश दर्शन बेहद साफ और कठोर था। वे कहते थे कि बाजार में हर कोई रिटर्न की बात करता है, लेकिन बहुत कम लोग रिस्क को समझते हैं।

उनका मानना था:

  • पूंजी की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है
  • वैल्यू के बिना ग्रोथ सिर्फ भ्रम है
  • कैश रखना कमजोरी नहीं, रणनीति है

यही सोच उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती थी।

13 साल में 3700% रिटर्न: एक प्रक्रिया की जीत

Siddhartha Bhaiya के करियर की सबसे चर्चित उपलब्धियों में से एक रहा 13 साल में 3700% तक का रिटर्न। यह किसी एक दांव या किस्मत का नतीजा नहीं था, बल्कि एक अनुशासित निवेश प्रक्रिया का परिणाम था।

उन्होंने कई ऐसी स्मॉलकैप कंपनियों को चुना, जो आगे चलकर मिडकैप और फिर लार्जकैप बनीं। इन निवेशों ने न केवल उन्हें पहचान दिलाई, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी मजबूत किया।

उनकी PMS स्कीम्स ने लंबे समय में लगभग 34% CAGR रिटर्न दिया, जो भारतीय बाजार में असाधारण माना जाता है।

जब बाजार बुलिश था और Siddhartha Bhaiya नेबुलबुला’ कहा

साल 2024 और 2025 में भारतीय शेयर बाजार रिकॉर्ड ऊंचाइयों पर था। हर तरफ IPO, स्मॉलकैप रैली और सोशल मीडिया पर शेयर टिप्स की बाढ़ थी। ऐसे माहौल में कोई भी सतर्कता की बात सुनना नहीं चाहता था।

लेकिन Siddhartha Bhaiya ने एक सम्मेलन में साफ शब्दों में कहा:

भारतीय बाजार एक ऐतिहासिक बुलबुले में है। निफ्टी का 20 का PE निवेशकों को गुमराह करता है।”

यह बयान उस समय विवादास्पद था, लेकिन आज इसे उनकी दूरदर्शिता के रूप में देखा जा रहा है।

90% पोर्टफोलियो कैश में बदलने का साहस

जब अधिकांश फंड मैनेजर्स पूरी तरह निवेशित थे, तब सिद्धार्थ भैया ने अपने PMS पोर्टफोलियो का लगभग 90% हिस्सा कैश में बदल दिया। यह फैसला निवेश जगत में हलचल मचा गया।

उनका तर्क साफ था:

जब वैल्यू नहीं दिखती, तब निवेश करना निवेश नहीं, जुआ होता है।”

यह कदम उनके करियर के सबसे साहसिक और चर्चित फैसलों में से एक बन गया।

₹7,700 करोड़ का निवेश साम्राज्य

बिना किसी आक्रामक मार्केटिंग के, केवल प्रदर्शन और पारदर्शिता के दम पर सिद्धार्थ भैया ने करीब ₹7,700 करोड़ के एसेट्स का प्रबंधन किया। निवेशक उन्हें इसलिए पसंद करते थे क्योंकि वे मुनाफे के साथ-साथ जोखिम की बात भी उतनी ही ईमानदारी से करते थे।

उनकी PMS निवेशकों के लिए सिर्फ एक स्कीम नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक थी।सिद्धार्थ भैया की सबसे बड़ी पहचान उनकी ‘बोल्ड कैश कॉल्स’ बनी. साल 2024 में जब भारतीय शेयर बाजार हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहा था और हर तरफ जश्न का माहौल था, तब Siddhartha Bhaiya वे चुनिंदा विशेषज्ञ थे जिन्होंने आने वाले संभावित ‘करेक्शन’ (गिरावट) को लेकर निवेशकों को आगाह किया था. वे अपनी राय बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते थे, भले ही वह बाजार की सामान्य धारणा के विपरीत ही क्यों न हो।

बेबाक राय और अलग नजरिया

Siddhartha Bhaiya कभी भीड़ के हिसाब से नहीं बोले। उन्होंने स्मॉलकैप रैली पर सवाल उठाए, ओवरवैल्यूएशन पर चेतावनी दी और निवेशकों को भावनाओं से दूर रहने की सलाह दी।

वे कहते थे:

बाजार आपको अमीर बना सकता है, लेकिन तभी, जब आप उसे भगवान नहीं, बिजनेस समझें।”

अचानक निधन और शोक की लहर

31 दिसंबर 2025 को दिल का दौरा पड़ने से उनका अचानक निधन हो गया। 47 वर्ष की उम्र में इस तरह एक तेज दिमाग का चला जाना निवेश जगत के लिए गहरा आघात है। सोशल मीडिया से लेकर फाइनेंशियल कॉन्फ्रेंस तक हर जगह उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

निवेशकों के लिए सीख

Siddhartha Bhaiya की जिंदगी निवेशकों के लिए कई अहम सबक छोड़ गई:

  1. भीड़ से अलग सोचने का साहस रखें
  2. कैश भी एक मजबूत पोजिशन है
  3. रिटर्न से पहले रिस्क समझें
  4. हर तेजी टिकाऊ नहीं होती
  5. ईमानदार सलाह हमेशा लोकप्रिय नहीं होती, लेकिन सही होती है

एक विचार जो अमर रहेगा

Siddhartha Bhaiya भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी सोच, उनका निवेश दर्शन और उनकी चेतावनियां आने वाले वर्षों तक निवेशकों का मार्गदर्शन करती रहेंगी। उन्होंने बाजार को जीतने की नहीं, समझने की सीख दी

दलाल स्ट्रीट ने एक ऐसा निवेशक खो दिया है, जो शोर में नहीं, खामोशी में अवसर खोजता था।

श्रद्धांजलि सिद्धार्थ भैया।

आपकी कमी निवेश जगत को लंबे समय तक खलेगी।

Leave a Comment