भारतीय शेयर बाजार में कुछ कंपनियां ऐसी हैं, जिनका नाम सुनते ही भरोसे का एहसास होता है। Oil and Natural Gas Corporation Limited (ONGC) उन्हीं में से एक है। दशकों से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करती आ रही ONGC न केवल भारत की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनी है, बल्कि शेयर बाजार में भी यह एक ऐसा नाम है, जिसे लंबी अवधि के निवेशक “सुरक्षित दांव” मानते हैं। taazanews24x7.com
हाल के दिनों में ONGC शेयर प्राइस में आई मजबूती ने बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है। निवेशकों के मन में सवाल है—
क्या ONGC का शेयर आने वाले समय में और ऊपर जा सकता है?
क्या यह सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों का असर है या इसके पीछे कोई बड़ी रणनीति है?
इस विस्तृत रिपोर्ट में हम ONGC शेयर प्राइस की हर परत को खोलकर समझेंगे—कंपनी की स्थिति, सरकारी भूमिका, कच्चे तेल का प्रभाव, वित्तीय सेहत, जोखिम और भविष्य की संभावनाएं।

ONGC: भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़
ONGC केवल एक कंपनी नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा स्तंभ है। देश में जितना भी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस पैदा होती है, उसका बड़ा हिस्सा ONGC से आता है।
ONGC के बारे में कुछ अहम तथ्य:
- भारत की सबसे बड़ी अपस्ट्रीम ऑयल कंपनी
- कुल घरेलू कच्चे तेल उत्पादन का बड़ा हिस्सा
- प्राकृतिक गैस उत्पादन में प्रमुख योगदान
- महारत्न दर्जा प्राप्त PSU
- भारत सरकार की रणनीतिक कंपनी
ONGC का महत्व सिर्फ मुनाफे से नहीं, बल्कि देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा हुआ है।
ONGC Share Price: हालिया तेजी क्या संकेत देती है?
ONGC के शेयर में हाल की तेजी अचानक नहीं आई है। यह कई कारकों का संयुक्त परिणाम है।
ONGC शेयर प्राइस में मजबूती के पीछे तीन बड़े संकेत दिखते हैं:
- निवेशकों का भरोसा लौटना
- ऊर्जा सेक्टर में पॉजिटिव माहौल
- लॉन्ग-टर्म वैल्यू की पहचान
बीते समय में ONGC को अक्सर “स्लो मूविंग PSU स्टॉक” कहा जाता था, लेकिन अब यह धारणा बदलती दिख रही है।
कच्चे तेल की कीमतें: ONGC के मुनाफे की असली चाबी
ONGC का बिजनेस सीधे तौर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ा हुआ है। जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, ONGC के रेवेन्यू और मुनाफे पर इसका सीधा असर पड़ता है।
तेल की कीमतें बढ़ने पर:
- प्रति बैरल ज्यादा कमाई
- ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार
- शेयर प्राइस को सपोर्ट
तेल की कीमतें गिरने पर:
- मुनाफे पर दबाव
- शेयर में सुस्ती
हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद तेल की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है, जिसने ONGC जैसे शेयरों को मजबूती दी है।

सरकार और ONGC: फायदा भी, चुनौती भी
ONGC एक सरकारी कंपनी है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत भी है और कभी-कभी सबसे बड़ी चुनौती भी।
सरकारी कंपनी होने के फायदे:
- रणनीतिक परियोजनाओं में प्राथमिकता
- संकट के समय सरकारी समर्थन
- राष्ट्रीय ऊर्जा नीति में अहम भूमिका
- कम दिवालिया होने का जोखिम
सरकारी नियंत्रण की चुनौतियां:
- सब्सिडी का दबाव
- नीतिगत हस्तक्षेप
- फैसलों में देरी
हालांकि मौजूदा सरकार का फोकस घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर है, जिससे ONGC को आने वाले वर्षों में फायदा मिल सकता है।
ONGC का बिजनेस मॉडल: क्यों है यह अलग?
ONGC मुख्य रूप से अपस्ट्रीम बिजनेस में है, यानी:
- तेल और गैस की खोज
- उत्पादन
- प्रारंभिक प्रोसेसिंग
यह मॉडल प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियों से अलग है। ONGC का फायदा तब ज्यादा होता है, जब कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं।
ONGC का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस
ONGC की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो तस्वीर संतुलित दिखती है।
मजबूत पक्ष:
- स्थिर रेवेन्यू
- अच्छा कैश फ्लो
- नियंत्रित कर्ज
- लगातार डिविडेंड
कमजोरियां:
- उत्पादन में सीमित वृद्धि
- पुराने फील्ड्स से घटता आउटपुट
- भारी कैपेक्स की जरूरत
फिर भी ONGC की बैलेंस शीट इसे लॉन्ग-टर्म निवेश के लिए सुरक्षित बनाती है।
डिविडेंड स्टॉक के रूप में ONGC
ONGC उन कंपनियों में से है, जो निवेशकों को सिर्फ कैपिटल गेन ही नहीं, बल्कि नियमित आय भी देती है।
डिविडेंड निवेशकों के लिए ONGC इसलिए खास है क्योंकि:
- PSU होने के कारण डिविडेंड की निरंतरता
- सरकार को भी डिविडेंड की जरूरत
- लॉन्ग-टर्म होल्डिंग पर बेहतर यील्ड
यही कारण है कि रिटायरमेंट प्लानिंग करने वाले निवेशक ONGC को पसंद करते हैं।

ONGC शेयर में गिरावट के दौर भी आए
ONGC का शेयर हमेशा ऊपर ही नहीं गया। ऐसे दौर भी आए हैं, जब:
- तेल की कीमतें गिरीं
- शेयर लंबे समय तक रेंज में फंसा रहा
- निवेशकों को धैर्य रखना पड़ा
लेकिन इतिहास गवाह है कि जब भी ऊर्जा सेक्टर में तेजी आई, ONGC ने मजबूती से वापसी की।
ONGC बनाम प्राइवेट ऑयल कंपनियां
ONGC की तुलना अगर प्राइवेट कंपनियों से करें तो फर्क साफ दिखता है।
- ONGC = स्थिरता + सुरक्षा
- प्राइवेट कंपनियां = तेज ग्रोथ + ज्यादा जोखिम
ONGC उन निवेशकों के लिए है, जो धीमी लेकिन भरोसेमंद कमाई चाहते हैं।
भविष्य की रणनीति: ONGC आगे क्या कर रही है?
ONGC आने वाले समय में कई बड़े कदम उठा रही है:
- नए तेल और गैस फील्ड्स
- डीप-सी एक्सप्लोरेशन
- ग्रीन एनर्जी में निवेश
- टेक्नोलॉजी अपग्रेड
- विदेशी परियोजनाओं का विस्तार
इन पहलों से ONGC सिर्फ पारंपरिक तेल कंपनी नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा कंपनी बनने की कोशिश कर रही है।
ONGC में निवेश के जोखिम
ONGC में निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी है।
मुख्य जोखिम:
- कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
- सरकारी नीतियों में बदलाव
- वैश्विक मंदी
- पर्यावरण नियमों की सख्ती
इन जोखिमों के बावजूद ONGC को पूरी तरह नजरअंदाज करना मुश्किल है।

एक्सपर्ट्स की राय
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार:
- ONGC लॉन्ग-टर्म वैल्यू स्टॉक है
- डिविडेंड निवेशकों के लिए मजबूत विकल्प
- शॉर्ट-टर्म में उतार-चढ़ाव संभव
- ऊर्जा सेक्टर में भरोसेमंद नाम
निष्कर्ष: क्या ONGC शेयर आपके पोर्टफोलियो के लिए सही है?
ONGC शेयर प्राइस में हालिया मजबूती सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि बदलते ऊर्जा बाजार का संकेत है। मजबूत सरकारी समर्थन, कच्चे तेल की कीमतों का सहारा, स्थिर वित्तीय स्थिति और डिविडेंड पॉलिसी—ये सभी ONGC को एक भरोसेमंद निवेश विकल्प बनाते हैं।
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— The Algo Day Trader (@algo_charts) January 28, 2026
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🔹Radico Khaitan delivers best-ever Q3 FY26 performance
HINDCOPPER –
🔹Hindustan Copper shares rally 15% in 2 days. What's behind the surge? pic.twitter.com/7h8dkjWVUo
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