वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते समीकरणों के बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित फ्री Trade Agreement (FTA) को एक Game-changer माना जा रहा है। जहां एक ओर यूरोप द्वारा जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) जैसी टैक्स छूट का दायरा सिमटने से सुर्खियां बनीं—तो वहीं भारत ने स्पष्ट किया कि इसका वास्तविक असर महज 2.66% निर्यात पर पड़ेगा। दूसरी ओर, इसी पृष्ठभूमि में भारत‑EU FTA का अंतिम चरण, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ‘मंगल’ साबित होने की उम्मीद जगा रहा है।
यह डील सिर्फ टैरिफ कटौती तक सीमित नहीं है; यह नौकरियों, निवेश, सप्लाई‑चेन सुरक्षा, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भू‑राजनीतिक संतुलन की कहानी है।

GSP छूट का अंत: 87% निर्यात पर टैक्स छूट खत्म—हकीकत क्या है?
यूरोप की GSP स्कीम के तहत भारत को वर्षों से कुछ उत्पादों पर टैरिफ छूट मिलती रही है। हालिया बदलावों के बाद यह छूट काफी हद तक समाप्त हो रही है, जिससे यह नैरेटिव उभरा कि 87% भारतीय निर्यात प्रभावित होगा। लेकिन भारत सरकार और नीति‑विशेषज्ञों का कहना है कि:
- वास्तविक टैरिफ‑इम्पैक्ट केवल 2.66% निर्यात पर पड़ेगा।
- जिन उत्पादों पर असर है, उनमें से कई पहले से ही वैकल्पिक बाजारों या बेहतर मार्जिन वाले सेगमेंट में शिफ्ट किए जा सकते हैं।
- FTA लागू होते ही टैरिफ नुकसान की भरपाई बड़े पैमाने पर हो जाएगी।
यानी शोर ज्यादा है, असर सीमित—और अवसर कहीं बड़ा। taazanews24x7.com
भारत‑EU FTA: क्यों कहा जा रहा है ‘मंगल’?
27 जनवरी को होने वाला यह समझौता कई मायनों में ऐतिहासिक है। भारत के लिए EU दुनिया का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक है, जबकि EU के लिए भारत तेजी से बढ़ता, स्थिर और भरोसेमंद साझेदार।
इस डील की 5 बड़ी खासियतें:
- 10–11 अरब डॉलर अतिरिक्त निर्यात का अवसर
- नई फैक्ट्रियों की जरूरत नहीं—मौजूदा निर्यात का स्मार्ट शिफ्ट
- रोजगार‑प्रधान सेक्टर (कपड़ा, लेदर, जेम्स‑ज्वेलरी) को बढ़ावा
- किसानों के हित सुरक्षित—संवेदनशील कृषि पर लाल रेखा
- रणनीतिक भरोसा—चीन‑रूस पर निर्भरता घटेगी
कौन‑कौन से सेक्टर होंगे सबसे बड़े विजेता?
1) कपड़ा और परिधान
EU भारतीय रेडीमेड गारमेंट्स का बड़ा बाजार है। FTA के बाद:
- टैरिफ 8–12% तक घट सकते हैं
- बांग्लादेश/वियतनाम के मुकाबले प्रतिस्पर्धा सुधरेगी
- MSME और महिला रोजगार में उछाल
2) लेदर और फुटवियर
- यूरोप में हाई‑वैल्यू लेदर गुड्स की मांग
- डिजाइन, सस्टेनेबिलिटी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से वैल्यू एडिशन
3) जेम्स‑ज्वेलरी
- ड्यूटी फ्री एक्सेस से मार्जिन बढ़ेगा
- एंटवर्प जैसे हब्स में भारतीय उपस्थिति मजबूत
4) फार्मा और केमिकल्स
- रेगुलेटरी हार्मोनाइजेशन से अप्रूवल तेज
- जेनेरिक्स और स्पेशियलिटी केमिकल्स को बढ़त
5) IT, डिजिटल और प्रोफेशनल सर्विसेज
- डेटा, मोबिलिटी और प्रोफेशनल रिकग्निशन पर स्पष्टता
- स्टार्टअप्स और GCCs के लिए नया रास्ता

किसानों के हित: लाल रेखा कैसे सुरक्षित रही?
भारत ने इस FTA में कृषि पर संतुलन साधा है:
- डेयरी, अनाज, चीनी जैसे संवेदनशील उत्पादों पर सीमित/नियंत्रित एक्सेस
- यूरोपीय सब्सिडी वाले उत्पादों से घरेलू किसानों की सुरक्षा
- प्रोसेस्ड एग्री और ऑर्गेनिक में निर्यात के अवसर
यानी समझौता विकास‑अनुकूल है, किसान‑विरोधी नहीं।
निवेश और रोजगार: फैक्ट्री से फ्यूचर‑रेडी इकोनॉमी तक
FTA सिर्फ निर्यात नहीं, निवेश का मैग्नेट भी है:
- यूरोपीय कंपनियों के लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग आकर्षक
- EV, रिन्यूएबल, ग्रीन हाइड्रोजन में संयुक्त निवेश
- स्किल्ड जॉब्स और सप्लाई‑चेन अपग्रेड
अनुमान है कि आने वाले वर्षों में लाखों प्रत्यक्ष‑अप्रत्यक्ष नौकरियां बन सकती हैं।
भू‑राजनीति: चीन‑रूस निर्भरता से दूरी
EU नेतृत्व ने साफ कहा है कि भारत‑EU FTA रणनीतिक है:
- चीन पर सप्लाई‑चेन निर्भरता घटेगी
- रूस से ऊर्जा/ट्रेड रिस्क का बैलेंस बनेगा
- भारत को EU का सबसे भरोसेमंद पार्टनर माना जा रहा है
यह डील इंडो‑पैसिफिक संतुलन में भारत की भूमिका को और मजबूत करती है।
‘आखिरी कदम हमेशा मुश्किल’: बातचीत के चुनौतीपूर्ण पहलू
यूरोपीय कमीशन की प्रेजिडेंट का बयान बताता है कि अंतिम दौर आसान नहीं था:
- सस्टेनेबिलिटी और कार्बन स्टैंडर्ड्स
- IPR और डेटा फ्लो
- लेबर और पर्यावरण
लेकिन भारत ने विकास और संप्रभुता के बीच संतुलन बनाते हुए रास्ता निकाला।

MSME और स्टार्टअप्स: छुपे हुए विजेता
- आसान नियमों से MSME का EU एंट्री बैरियर घटेगा
- डिजाइन‑ड्रिवन, सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स को प्रीमियम
- स्टार्टअप्स के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स और को‑क्रिएशन
जोखिम और तैयारी: क्या ध्यान रखना होगा?
- EU के कड़े ग्रीन और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स
- लॉजिस्टिक्स और कंप्लायंस कॉस्ट
- स्किल अपग्रेड और टेक्नोलॉजी निवेश
सरकार और उद्योग—दोनों को रेडीनेस रोडमैप पर काम करना होगा।
केस स्टडी: पहले से मौजूद ट्रेड शिफ्ट कैसे करेगा काम?
भारत के कई निर्यातक पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे GSP समाप्ति के बाद भी नुकसान में नहीं जाएंगे। उदाहरण के तौर पर:
- रेडीमेड गारमेंट्स में निर्यातक EU के भीतर हाई-मार्जिन नॉर्डिक और ईस्टर्न यूरोपियन मार्केट्स की ओर शिफ्ट कर रहे हैं।
- फार्मा कंपनियां रेगुलेटरी अप्रूवल वाले प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देकर वॉल्यूम नहीं, वैल्यू पर फोकस कर रही हैं।
- इंजीनियरिंग गुड्स में भारतीय कंपनियां लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए टैरिफ इम्पैक्ट को न्यूट्रल कर रही हैं।
यह बताता है कि FTA लागू होने से पहले ही उद्योग ने रणनीतिक तैयारी शुरू कर दी है।

MSME के लिए सरकार की तैयारी क्या है?
FTA का असली फायदा तभी मिलेगा जब MSME तैयार हों। इसके लिए सरकार की रणनीति में शामिल हैं:
- एक्सपोर्ट रेडीनेस प्रोग्राम और क्लस्टर आधारित ट्रेनिंग
- डिजिटल कंप्लायंस टूल्स ताकि EU के सख्त मानकों को आसानी से पूरा किया जा सके
- सस्ते क्रेडिट और गारंटी स्कीम्स जिससे अपग्रेडेशन संभव हो
विशेषज्ञ मानते हैं कि MSME की भागीदारी बढ़ते ही रोजगार सृजन कई गुना बढ़ेगा।
यूरोप को क्यों लग रहा है ‘झटका’?
EU के लिए यह डील इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि:
- भारतीय प्रोडक्ट्स कीमत और क्वालिटी दोनों में प्रतिस्पर्धी हैं
- लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में यूरोपीय कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलेगी
- सप्लाई-चेन शिफ्ट से कुछ यूरोपीय मैन्युफैक्चरर्स का कॉस्ट एडवांटेज घटेगा
यही वजह है कि यूरोप में इसे ‘ट्रेड एडजस्टमेंट शॉक’ कहा जा रहा है।
अमेरिका पर क्या पड़ेगा असर?
भारत-EU FTA का अप्रत्यक्ष असर अमेरिका पर भी पड़ेगा:
- भारतीय निर्यात का एक हिस्सा US से EU की ओर शिफ्ट हो सकता है
- ग्रीन टेक और डिजिटल सर्विसेज में भारत-EU कोलैबोरेशन से US कंपनियों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
- ट्रंप-युग की प्रोटेक्शनिस्ट नीतियों की तुलना में यह डील ज्यादा ओपन मानी जा रही है
इसीलिए कहा जा रहा है कि इस समझौते से ‘ट्रंप के होश उड़ सकते हैं’।

आंकड़ों की नजर से India–EU ट्रेड
- कुल द्विपक्षीय व्यापार: 120 अरब डॉलर+
- EU, भारत का दूसरा सबसे बड़ा Trade पार्टनर
- भारत का EU में निर्यात: टेक्सटाइल, फार्मा, इंजीनियरिंग, IT
- EU का भारत में निर्यात: मशीनरी, ऑटो, केमिकल्स, ग्रीन टेक
FTA के बाद इन आंकड़ों में तेज़ उछाल की उम्मीद है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक:
- यह डील एक्सपोर्ट-लेड ग्रोथ को नई रफ्तार देगी
- बिना नई फैक्ट्रियां लगाए निर्यात बढ़ना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि होगी
- लॉन्ग टर्म में GDP पर सकारात्मक असर दिखेगा
हालांकि वे यह भी चेतावनी देते हैं कि स्टैंडर्ड्स और कंप्लायंस में ढील नहीं दी जा सकती।
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— AajTak (@aajtak) January 21, 2026
निष्कर्ष: झटका यूरोप को, अवसर भारत को
GSP टैक्स छूट का खत्म होना भले ही सुर्खियां बने, लेकिन असल तस्वीर इससे कहीं बड़ी है। India–EU Free Trade Agreement भारत को निर्यात, निवेश, रोजगार और रणनीतिक भरोसे की नई ऊंचाइयों पर ले जाने की क्षमता रखता है।
जहां यूरोप को भारतीय प्रतिस्पर्धा से झटका लग सकता है, वहीं भारत के लिए यह समझौता एक ऐसा महा-द्वार है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका को और मजबूत करेगा। आने वाला समय बताएगा, लेकिन संकेत साफ हैं—यह मंगलवार भारत के लिए सचमुच ‘मंगल’ साबित हो सकता है।
🇪🇺🇮🇳 EU–India ties move forward.@EUCouncil President @antoniocostapm and @EU_Commission President @vonderleyen will be in New Delhi for the Republic Day & 16th EU–India Summit
— EU in India (@EU_in_India) January 24, 2026
Trade, security & clean transition and more on the agenda.🇪🇺🇮🇳 pic.twitter.com/rYvtr20NHT