Adani Stocks Crash: अमेरिका से आई एक खबर और बिखर गया अडानी साम्राज्य, 14% तक टूटे शेयर; जानिए पूरा मामला, कानूनी पेच और निवेशकों के लिए आगे क्या?

भूमिका: एक खबर और बाजार में मच गया भूचाल

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार का कारोबारी सत्र अडानी ग्रुप के निवेशकों के लिए बेहद भारी साबित हुआ। सुबह तक सामान्य दायरे में कारोबार कर रहे अडानी समूह के शेयरों में अचानक ऐसी बिकवाली शुरू हुई कि देखते ही देखते बाजार में हड़कंप मच गया।
Adani Enterprises, Adani Ports, Adani Power, Adani Green Energy, Adani Total Gas समेत ग्रुप की लगभग सभी प्रमुख कंपनियों के शेयर 5% से 14% तक टूट गएtaazanews24x7.com

इस तेज गिरावट ने न केवल अडानी निवेशकों को चौंकाया, बल्कि पूरे बाजार की धारणा को भी कमजोर कर दिया। कई निवेशकों के मन में एक ही सवाल गूंजने लगा—
आखिर ऐसा क्या हुआ कि अडानी स्टॉक्स अचानक धराशायी हो गए?

अमेरिका से जुड़ा है पूरा मामला: कहां से आई गिरावट की वजह

इस पूरी गिरावट की जड़ में है अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (US SEC) की एक कानूनी कार्रवाई।
SEC ने न्यूयॉर्क की एक फेडरल अदालत में अर्जी दाखिल करते हुए यह अनुमति मांगी है कि वह गौतम अडानी और सागर अडानी को ईमेल के जरिए कानूनी समन (Summons) भेज सके।

जैसे ही यह खबर भारतीय बाजार तक पहुंची, निवेशकों में डर फैल गया और भारी बिकवाली शुरू हो गई।

SEC आखिर अडानी को समन क्यों भेजना चाहती है?

SEC की कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक:

  • यह मामला 2024 से जुड़े एक कथित रिश्वत (Bribery) और कॉरपोरेट लेनदेन से संबंधित है
  • जांच Foreign Corrupt Practices Act (FCPA) के तहत की जा रही है
  • FCPA अमेरिकी कानून है, जो विदेशी कंपनियों और अधिकारियों पर भी लागू हो सकता है

SEC का कहना है कि:

  • गौतम अडानी और सागर अडानी अमेरिका में निवास नहीं करते
  • पारंपरिक कूटनीतिक माध्यमों से समन भेजने में काफी समय लग सकता है
  • इसलिए अदालत से ईमेल के जरिए समन भेजने की अनुमति मांगी गई है

क्या समन का मतलब दोषी होना है?

यह बात समझना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है।

समन भेजा जाना दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।

  • समन केवल यह बताता है कि किसी व्यक्ति से
    • जानकारी मांगी जा रही है
    • या जांच में सहयोग की अपेक्षा की जा रही है
  • अभी तक:
    • न कोई चार्जशीट दाखिल हुई है
    • न ही किसी अदालत ने दोष तय किया है

लेकिन शेयर बाजार अक्सर:

कानूनी प्रक्रिया और अंतिम फैसले के बीच फर्क नहीं करता।

यही वजह है कि खबर आते ही बाजार ने नेगेटिव रिएक्शन दिया।

क्या US SEC भारत सरकार को बायपास कर सकती है?

यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है।

कानूनी नियम क्या कहते हैं?

सामान्य तौर पर:

  • किसी भारतीय नागरिक या कारोबारी को कानूनी नोटिस भेजने के लिए
    Mutual Legal Assistance Treaty (MLAT) का इस्तेमाल होता है
  • इसमें भारत सरकार की भूमिका अहम होती है

तो फिर ईमेल से समन कैसे?

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक:

  • अमेरिकी अदालतों के पास यह अधिकार है कि
    विशेष परिस्थितियों में वैकल्पिक माध्यमों को मंजूरी दें
  • ईमेल समन का मतलब भारत की संप्रभुता को चुनौती देना नहीं है
  • यह केवल प्रोसीजरल सुविधा है

फिर भी, बाजार ने इसे एक बड़ा जोखिम संकेत मान लिया।

हिंडनबर्ग की यादें क्यों लौट आईं?

जनवरी 2023 में आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप को भारी नुकसान पहुंचाया था।
उस समय:

  • विदेशी रिसर्च फर्म
  • कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर सवाल
  • और अचानक शेयरों में ऐतिहासिक गिरावट

इस बार भी:

  • खबर अमेरिका से आई
  • नाम अडानी का जुड़ा
  • और निवेशकों के दिमाग में पुरानी आशंकाएं ताजा हो गईं

हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं:

“यह मामला हिंडनबर्ग जैसा नहीं है, लेकिन बाजार का डर उसी याद से जुड़ा है।”

किन अडानी शेयरों में कितनी गिरावट आई?

गिरावट लगभग पूरे ग्रुप में फैली:

  • Adani Enterprises: 12–14% की भारी गिरावट
  • Adani Ports & SEZ: करीब 8–10% टूटे
  • Adani Power: 6–7% तक फिसले
  • Adani Green Energy: 6% से ज्यादा की गिरावट
  • Adani Total Gas: 5–6% नीचे

सबसे अहम बात यह रही कि
अच्छे तिमाही नतीजे भी शेयरों को नहीं बचा सके।

₹1.1 लाख करोड़ का झटका: कैसे उड़ी बाजार पूंजीकरण

इस एक कारोबारी दिन में:

  • अडानी ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों का
  • कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.1 लाख करोड़ घट गया

इसके पीछे वजह रही:

  • विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की सतर्कता
  • घरेलू फंड्स की प्रॉफिट बुकिंग
  • और रिटेल निवेशकों में घबराहट

Adani Total Gas: मुनाफा बढ़ा, फिर भी शेयर क्यों टूटा?

Q3 नतीजों में:

  • Adani Total Gas का नेट प्रॉफिट 10% बढ़कर ₹157 करोड़ रहा
  • कंपनी के ऑपरेशनल आंकड़े मजबूत थे

इसके बावजूद शेयर गिरा क्योंकि:

  • बाजार फिलहाल ग्रुप-लेवल रिस्क को ज्यादा महत्व दे रहा है
  • जब किसी ग्रुप पर कानूनी अनिश्चितता होती है,
    तो अच्छी खबरें भी दब जाती हैं

क्या यह गिरावट लॉन्ग-टर्म के लिए खतरनाक है?

मार्केट एक्सपर्ट्स की राय

  • यह गिरावट Short-Term Sentiment Driven है
  • अडानी ग्रुप की कंपनियों के:
    • एसेट्स
    • प्रोजेक्ट्स
    • और कैश फ्लो
      अभी भी मजबूत हैं

कुछ विश्लेषकों का मानना है:

“यह Panic Selling है, न कि Business Collapse।”

अडानी ग्रुप की प्रतिक्रिया क्या रही?

फिलहाल अडानी ग्रुप की ओर से कोई विस्तृत बयान नहीं आया है,
लेकिन पहले के मामलों में ग्रुप यह कहता रहा है कि:

  • वह सभी नियामक एजेंसियों के साथ सहयोग करता है
  • और कानूनी प्रक्रियाओं में पूरा भरोसा रखता है

निवेशकों के लिए सीख: अब क्या करें?

1️घबराकर फैसले लें

हर जांच का मतलब दोष सिद्ध होना नहीं होता

2️लॉन्ग-टर्म निवेशक धैर्य रखें

इंफ्रास्ट्रक्चर बिजनेस समय के साथ मूल्य बनाता है

3️पोर्टफोलियो में विविधता रखें

एक ही ग्रुप पर निर्भरता जोखिम बढ़ाती है

राजनीतिक और नीतिगत असर भी चर्चा में

इस मामले ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है।
विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि:

  • कानून अपना काम करेगा
  • और भारत की कानूनी संप्रभुता से समझौता नहीं होगा

आगे क्या हो सकता है? संभावित परिदृश्य

  1. SEC को ईमेल समन की अनुमति मिलती है
  2. अडानी पक्ष कानूनी जवाब देता है
  3. जांच आगे बढ़ती है, लेकिन फैसला आने में समय लगता है
  4. बाजार में धीरे-धीरे स्थिरता लौट सकती है

निष्कर्ष: डर, धारणा और हकीकत के बीच अडानी स्टॉक्स

अडानी स्टॉक्स में आई यह गिरावट:

  • किसी तिमाही घाटे
  • किसी डिफॉल्ट
  • या किसी घोटाले के खुलासे की वजह से नहीं

बल्कि:

  • अमेरिका से आई एक कानूनी प्रक्रिया की खबर
  • और उससे जुड़े निवेशकों के डर की वजह से हुई

शेयर बाजार का इतिहास बताता है कि
जहां अनिश्चितता होती है, वहां पहले गिरावट आती है और बाद में तस्वीर साफ होती है।

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