तेलुगु सिनेमा में जब भी मेगास्टार Chiranjeevi का नाम आता है, दर्शकों की उम्मीदें अपने आप आसमान छूने लगती हैं। चार दशकों से ज्यादा लंबे करियर में Chiranjeevi ने न सिर्फ सुपरहिट फिल्में दी हैं, बल्कि समाज, सिस्टम और इंसान की भावनाओं को भी बड़े पर्दे पर दमदार तरीके से रखा है। अब उनकी नई फिल्म ‘Mana Shankara Vara Prasad Garu’ रिलीज होते ही इसी वजह से चर्चा में आ गई है। taazanews24x7.com
फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर फैंस का रिएक्शन साफ संकेत देता है कि दर्शक एक बार फिर विंटेज चिरंजीवी को स्क्रीन पर देखकर खुश हैं। X (पहले ट्विटर) पर #BossIsBack, #Chiranjeevi, #ManaShankaraVaraPrasadGaru जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं। शोर-शराबे और मसाला एंटरटेनमेंट से दूर, Chiranjeevi की यह नई फिल्म कंटेंट, संवेदना और सादगी के दम पर दर्शकों के दिल तक पहुंचती है। सोशल मीडिया पर फैंस बोले – “Boss Is Back, but with soul.” तेलुगु सिनेमा के मेगास्टार चिरंजीवी जब भी पर्दे पर आते हैं, दर्शक सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अनुभव की उम्मीद करते हैं। उनकी नई फिल्म ‘Mana Shankara Vara Prasad Garu’ भी कुछ ऐसा ही अनुभव लेकर आई है। यह फिल्म न तो ऊंचे डायलॉग्स पर टिकी है, न ही भारी-भरकम एक्शन पर, बल्कि एक आम आदमी की असाधारण भावनात्मक यात्रा को बेहद सादगी से पेश करती है। यही वजह है कि फिल्म रिलीज होते ही फैंस इमोशनल हो गए और सोशल मीडिया पर एक ही आवाज गूंजने लगी—“विंटेज बॉस इज़ बैक।”

फिल्म की पृष्ठभूमि: सादगी में छुपी ताकत
‘Mana Shankara Vara Prasad Garu’ कोई चमक-दमक वाली मसाला फिल्म नहीं है। यह उस तेलुगु सिनेमा की याद दिलाती है, जहां कहानी, संवेदना और सामाजिक सरोकार सबसे आगे होते हैं। फिल्म एक आम आदमी की जिंदगी पर आधारित है, जो रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझता है, लेकिन परिस्थितियां उसे असाधारण बना देती हैं।
निर्देशक ने जानबूझकर बड़े सेट्स, फिजूल के गाने और ओवर-ड्रामेटिक सीन से दूरी बनाई है। यही वजह है कि फिल्म शुरू से आखिर तक एक रियल और ग्राउंडेड फील देती है।
कहानी (Story Review): आम आदमी की असाधारण जंग
फिल्म की कहानी शंकर वरा प्रसाद नाम के एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करता। वह न तो क्रांतिकारी भाषण देता है और न ही सिस्टम से लड़ने के लिए हथियार उठाता है। उसकी लड़ाई ईमानदारी, आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों के लिए है।
कथानक धीरे-धीरे आगे बढ़ता है, लेकिन यही इसकी खूबसूरती है। हर सीन दर्शक को सोचने पर मजबूर करता है कि आज के समय में सही होना कितना मुश्किल और जरूरी दोनों है।

निर्देशन: शोर नहीं, असरदार सिनेमा
निर्देशक ने इस फिल्म को ड्रामा से ज्यादा जीवन के करीब रखने की कोशिश की है। कैमरा बार-बार चिरंजीवी के चेहरे पर ठहरता है, जहां बिना डायलॉग के भी भावनाएं साफ नजर आती हैं।
यह फिल्म उन लोगों के लिए नहीं है जो सिर्फ एंटरटेनमेंट या सीटी-मार सीन ढूंढते हैं, बल्कि उनके लिए है जो सिनेमा में भाव और अर्थ देखना चाहते हैं।
Chiranjeevi की परफॉर्मेंस: क्यों बोले फैंस “Boss Is Back”
अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत किसी एक चीज़ को कहा जाए, तो वह है चिरंजीवी की पॉवर-पैक्ड एक्टिंग।
यहां वह न तो ‘खलनायक’ वाले एंग्री यंग मैन हैं, न ‘स्टालिन’ या ‘इंद्रा’ वाला मास लीडर। बल्कि वह एक ऐसा इंसान हैं, जिसकी आंखों में थकान है, आवाज में अनुभव है और चाल में ठहराव।
फिल्म के कई सीन ऐसे हैं जहां Chiranjeevi बिना डायलॉग बोले ही पूरा सीन खा जाते हैं। यही वजह है कि फैंस सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं—
“This is the Chiranjeevi we missed.”
“No overacting, only pure class.”
“Boss is back with content cinema.”
X (Twitter) पर Fans Reactions: क्या कह रहे हैं दर्शक?
फिल्म रिलीज़ होते ही X पर रिव्यूज़ की बाढ़ आ गई। कुछ प्रमुख रिएक्शन इस तरह हैं:
- “Vintage Chiranjeevi vibes. Content-driven cinema at its best.”
- “No loud bgm, no unnecessary fights – just powerful storytelling.”
- “Chiranjeevi sir proved again why he is called Megastar.”
- “Boss is back, not with mass but with message.”
फैंस खास तौर पर इस बात की तारीफ कर रहे हैं कि चिरंजीवी ने उम्र के हिसाब से खुद को ढालते हुए एक परिपक्व और गहराई भरा किरदार चुना।
सह कलाकारों की एक्टिंग: सपोर्टिंग कास्ट ने बढ़ाया असर
फिल्म की सपोर्टिंग कास्ट ने भी कहानी को मजबूती दी है। कोई भी किरदार बेवजह नहीं लगता। हर पात्र की मौजूदगी कहानी को आगे बढ़ाती है।
खासकर महिला किरदारों को सिर्फ सजावटी नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें भी भावनात्मक और सामाजिक दृष्टि से मजबूत दिखाया गया है।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर: कम लेकिन असरदार
फिल्म में गानों की भरमार नहीं है, लेकिन जो भी म्यूजिक है, वह कहानी के मूड के साथ चलता है। बैकग्राउंड स्कोर वहां उभरता है, जहां उसकी जरूरत है, न कि जबरदस्ती।
यही सादगी फिल्म को बाकी कमर्शियल फिल्मों से अलग बनाती है।
सिनेमैटोग्राफी: रियल लोकेशन्स, रियल इमोशन्स
कैमरा वर्क बेहद नैचुरल है। गांव, कस्बे और आम लोगों की जिंदगी को बिना ग्लैमराइज किए दिखाया गया है। सिनेमैटोग्राफी फिल्म के टोन के साथ पूरी तरह मेल खाती है।
सोशल मैसेज: बिना उपदेश के असर
‘Mana Shankara Vara Prasad Garu’ सामाजिक मुद्दों पर बात करती है, लेकिन उपदेश नहीं देती। फिल्म यह नहीं कहती कि क्या सही है, बल्कि दर्शक को खुद सोचने का मौका देती है।
आज के समय में, जब ज़्यादातर फिल्में मैसेज को भाषण बना देती हैं, वहां यह फिल्म संतुलन बनाए रखती है।
बॉक्स ऑफिस बनाम कंटेंट
हालांकि फिल्म का ओपनिंग डे कलेक्शन किसी मास एंटरटेनर जैसा नहीं है, लेकिन वर्ड ऑफ माउथ इसकी सबसे बड़ी ताकत बन रहा है। जिस तरह सोशल मीडिया पर तारीफ हो रही है, उससे साफ है कि यह फिल्म लंबे समय तक टिकने वाली है।
क्या यह फिल्म सभी के लिए है?
ईमानदारी से कहें तो यह फिल्म उन दर्शकों के लिए ज्यादा है जो—
- कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा पसंद करते हैं
- चिरंजीवी को एक अभिनेता के रूप में देखना चाहते हैं
- सामाजिक और भावनात्मक कहानियों से जुड़ते हैं
अगर आप सिर्फ एक्शन और मसाला ढूंढ रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए धीमी लग सकती है।
निष्कर्ष (Final Verdict)
‘Mana Shankara Vara Prasad Garu’ चिरंजीवी के करियर की उन फिल्मों में शामिल होती है, जो कम शोर करती हैं लेकिन ज्यादा असर छोड़ती हैं। यह फिल्म साबित करती है कि उम्र बढ़ने के साथ कलाकार का अभिनय और गहरा हो सकता है।
फैंस का “Boss Is Back” कहना सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि उस भरोसे की वापसी है, जो दर्शकों को चिरंजीवी के सिनेमा से हमेशा रहा है।
#ManaShankaraVaraPrasadGaru in a tailor-made role driven by comedy timing. pic.twitter.com/vYHNbWMOfG
— Aakashavaani (@TheAakashavaani) August 22, 2025