बॉलीवुड में फिर उठा सवाल: सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाना कितना जायज़?
बॉलीवुड में जब भी कोई फिल्म “सच्ची घटनाओं से प्रेरित” होने का दावा करती है, तो उसके साथ विवाद आना लगभग तय हो जाता है। साल 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में शुमार शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर ‘O Romeo’ भी इसी रास्ते पर चल पड़ी है। taazanews24x7.com
एक तरफ जहां फिल्म का ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा, वहीं दूसरी ओर इस फिल्म पर कुख्यात अपराधी हुसैन उस्तरा के परिवार ने गंभीर आरोप लगा दिए हैं। उस्तरा की बेटी का कहना है कि फिल्म उनकी पिता की जिंदगी से प्रेरित है, लेकिन इसके लिए परिवार से कोई अनुमति नहीं ली गई।
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट में नाना पाटेकर का गुस्सा, उनका बीच इवेंट से उठकर चले जाना और उस पर डायरेक्टर विशाल भारद्वाज का बयान—इन सबने मिलकर ‘O Romeo’ को रिलीज से पहले ही सुर्खियों में ला दिया है।

क्या है ‘O Romeo’? एक फिल्म या कई जिंदगियों का कोलाज
‘O Romeo’ को डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने एक डार्क, वायलेंट और इमोशनल गैंगस्टर ड्रामा के रूप में पेश किया है। यह फिल्म उस रोमियो की कहानी है जो न तो शेक्सपियर का प्रेमी है और न ही पारंपरिक बॉलीवुड हीरो।
यह रोमियो:
- बंदूक चलाता है
- खून बहाता है
- गालियां देता है
- और फिर उसी हिंसा के बीच मोहब्बत ढूंढता है
फिल्म की दुनिया अपराध से भरी है, जहां कानून कमजोर और ताकतवर गैंगस्टर मजबूत हैं। शाहिद कपूर का किरदार इसी अंधेरी दुनिया में पनपता है और तृप्ति डिमरी के किरदार से टकराकर उसकी जिंदगी एक नया मोड़ लेती है।
हुसैन उस्तरा: वो नाम जिससे जुड़ा है पूरा विवाद
हुसैन उस्तरा का नाम मुंबई अंडरवर्ल्ड के इतिहास में डर और दहशत के साथ लिया जाता रहा है। एक दौर में उसका खौफ इतना था कि पुलिस और अपराध की दुनिया—दोनों उसे गंभीरता से लेते थे।
उसकी जिंदगी में:
- अपराध की शुरुआत
- गैंगवार
- सत्ता से नजदीकियां
- और आखिरकार हिंसक अंत
सब कुछ शामिल रहा है।
‘O Romeo’ पर आरोप है कि फिल्म के कई सीन, किरदार और घटनाएं सीधे तौर पर उस्तरा की जिंदगी से मेल खाते हैं, बस नाम बदल दिए गए हैं।
उस्तरा की बेटी का आरोप: “ये हमारी कहानी है, किसी ने पूछा नहीं”
हुसैन उस्तरा की बेटी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि:
“मेरे पिता कोई काल्पनिक किरदार नहीं थे। उनकी जिंदगी से जुड़ी हर घटना हमारे परिवार की निजी स्मृति है। बिना हमसे पूछे उस पर फिल्म बनाना गलत है।”
उनका यह भी कहना है कि फिल्म में उनके पिता की छवि को और ज्यादा हिंसक और सनसनीखेज बनाकर दिखाया गया है, जिससे परिवार की सामाजिक छवि प्रभावित हो सकती है।
यह आरोप सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि फिल्ममेकिंग के पूरे नैरेटिव पर सवाल उठाता है।

विशाल भारद्वाज का पलटवार: ‘ये बायोपिक नहीं है’
आरोपों के बाद डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने अपनी चुप्पी तोड़ी और साफ शब्दों में कहा:
“O Romeo किसी एक इंसान की कहानी नहीं है। यह कई घटनाओं, कहानियों और कल्पनाओं से मिलकर बनी एक फिक्शनल फिल्म है। इसलिए हमें किसी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं लगी।”
विशाल का कहना है कि:
- फिल्म में कोई असली नाम इस्तेमाल नहीं किया गया
- घटनाओं को ड्रामेटाइज किया गया है
- यह कानूनन पूरी तरह सुरक्षित है
हालांकि आलोचकों का कहना है कि कानूनी सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी दो अलग बातें हैं।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
बॉलीवुड का इतिहास ऐसे विवादों से भरा पड़ा है।
- गैंग्स ऑफ वासेपुर पर स्थानीय लोगों ने आपत्ति जताई
- संजू पर सच्चाई छुपाने के आरोप लगे
- राजनीति पर राजनीतिक परिवारों ने नाराजगी जताई
हर बार फिल्ममेकर्स ने “फिक्शन” और “क्रिएटिव फ्रीडम” का सहारा लिया।
O Romeo Trailer Review: खून, बदला और पागलपन
‘O Romeo’ का 3 मिनट 8 सेकंड का ट्रेलर किसी चेतावनी से कम नहीं है।
ट्रेलर में:
- लगातार फायरिंग
- गालियों से भरे डायलॉग
- टूटे हुए रिश्ते
- और एक बेचैन रोमियो
दिखाई देता है।
शाहिद कपूर का किरदार कई जगह:
- कबीर सिंह की आक्रामकता
- हैदर की पागलपन भरी पीड़ा
- और उड़ता पंजाब की अराजकता
का मिश्रण लगता है।
अविनाश तिवारी ने चुराया शो
जहां ट्रेलर शाहिद कपूर पर फोकस करता है, वहीं अविनाश तिवारी की मौजूदगी कहानी में एक मजबूत एंगल जोड़ती है। कई दर्शकों का मानना है कि फिल्म में असली टक्कर शाहिद और अविनाश के बीच देखने को मिलेगी।
तृप्ति डिमरी: हिंसा के बीच इंसानियत
तृप्ति डिमरी का किरदार फिल्म में उस दुनिया का प्रतिनिधित्व करता है जहां अभी भी भावनाएं जिंदा हैं। वह सिर्फ रोमांटिक एंगल नहीं, बल्कि कहानी की नैतिक रीढ़ नजर आती हैं।

ट्रेलर लॉन्च इवेंट में ड्रामा: नाना पाटेकर का गुस्सा
फिल्म का ट्रेलर लॉन्च इवेंट उतना ही चर्चा में रहा जितनी फिल्म।
बताया जा रहा है कि:
- शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी तय समय से काफी देर से पहुंचे
- नाना पाटेकर स्टेज पर इंतजार करते रहे
- और गुस्से में इवेंट बीच में छोड़कर चले गए
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।
विशाल भारद्वाज का बयान: ‘नाना बदमाश बच्चे जैसे हैं’
नाना पाटेकर के गुस्से पर विशाल भारद्वाज ने कहा:
“नाना को इंतजार बिल्कुल पसंद नहीं। वो बदमाश बच्चे की तरह हैं।”
हालांकि यह बयान मजाकिया था, लेकिन इंडस्ट्री में इसे अनुशासन बनाम स्टार कल्चर की बहस से जोड़कर देखा गया।
क्या ये विवाद फिल्म के लिए फायदेमंद है?
फिल्म ट्रेड एनालिस्ट मानते हैं कि:
- विवाद से फिल्म को जबरदस्त पब्लिसिटी मिल रही है
- ट्रेलर के व्यूज तेजी से बढ़े हैं
- युवाओं में फिल्म को लेकर उत्सुकता है
लेकिन खतरा यह है कि अगर मामला कोर्ट पहुंचा या रिलीज पर रोक लगी, तो नुकसान भी बड़ा हो सकता है।
सेंसर बोर्ड और कानूनी पहलू
सूत्रों के अनुसार:
- सेंसर बोर्ड फिल्म की हिंसा और भाषा पर कड़ी नजर रखे हुए है
- विवाद बढ़ने पर डिस्क्लेमर और मजबूत किया जा सकता है
- मेकर्स कानूनी टीम के संपर्क में हैं
सोशल मीडिया रिएक्शन: बंटी हुई राय
सोशल मीडिया पर लोग दो हिस्सों में बंटे दिख रहे हैं।
एक वर्ग का कहना है:
“कहानी फिक्शन है, आर्ट को आज़ाद होना चाहिए।”
दूसरा वर्ग लिख रहा है:
“अगर प्रेरणा किसी असली इंसान से है, तो उसकी फैमिली की इजाजत जरूरी है।”
फिल्म इंडस्ट्री क्या सोचती है?
वरिष्ठ फिल्मकारों का मानना है कि:
- सच्ची घटनाओं पर फिल्म बनाते समय संवेदनशीलता जरूरी है
- सिर्फ कानून नहीं, इंसानी भावनाओं का भी ध्यान रखना चाहिए

निष्कर्ष: हिट, फ्लॉप या सिर्फ विवाद?
‘O Romeo’ एक ऐसी फिल्म बन चुकी है जो कंटेंट से ज्यादा कॉन्फ्लिक्ट के कारण चर्चा में है।
शाहिद कपूर का अब तक का सबसे हिंसक अवतार, विशाल भारद्वाज की सिग्नेचर स्टोरीटेलिंग और नाना पाटेकर जैसी दमदार मौजूदगी इसे बड़ी फिल्म बनाती है।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर क्या करेगी, बल्कि यह भी कि:
- क्या विवाद रिलीज तक थमेगा?
- या फिर ‘O Romeo’ एक और उदाहरण बनेगी कि सच्ची घटनाओं पर बनी फिल्मों की कीमत क्या होती है?
एक बात तय है—
‘O Romeo’ 2026 की सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली फिल्मों में शामिल हो चुकी है।
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— THE GOSSIP QUEEN👸 (@SakshiMish30028) January 21, 2026