नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025:
Silver-Gold की कीमतों में गिरावट: सोमवार को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और निवेशकों की सतर्क रणनीति के चलते कीमती धातुओं का बाजार दबाव में रहा। त्योहारों के मौसम में कीमतों में आई इस गिरावट ने निवेशकों और उपभोक्ताओं दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। taazanews24x7.com
आज के ताजा Silver-Gold के रेट
दिल्ली सर्राफा बाजार में सोमवार को 24 कैरेट Gold ₹500 की गिरावट के साथ ₹70,850 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
वहीं 22 कैरेट Gold का भाव ₹64,900 प्रति 10 ग्राम दर्ज हुआ।
चांदी (Silver Price Today) की बात करें तो इसमें ₹800 प्रति किलोग्राम की गिरावट आई और यह ₹83,700 प्रति किलो पर कारोबार कर रही है।
एमसीएक्स (MCX) पर दिसंबर फ्यूचर्स में Gold ₹68,920 प्रति 10 ग्राम पर और Silver ₹82,850 प्रति किलो पर ट्रेड हो रही थी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्पॉट Gold $2,320 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले सत्र से लगभग $12 कम है।
वहीं स्पॉट Silver की कीमत $27.10 प्रति औंस दर्ज की गई है।
डॉलर इंडेक्स 106.5 के स्तर पर बना हुआ है, जो Gold और Silver दोनों के लिए नकारात्मक संकेत है।

सोने-चांदी के दाम गिरने की प्रमुख वजहें
डॉलर इंडेक्स की मजबूती
डॉलर इंडेक्स में लगातार बढ़त दर्ज की जा रही है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे उनकी मांग कम हो जाती है। यही वजह है कि निवेशकों ने इस सप्ताह सोने से दूरी बनाई।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि
10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 4.8% तक पहुंच गई है। उच्च यील्ड का मतलब है कि निवेशकों को बॉन्ड से बेहतर रिटर्न मिल रहा है, जिससे सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट एसेट की मांग घटती है।
फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेतों ने सोने पर दबाव डाला है। निवेशकों को डर है कि ब्याज दरें जल्द घटेंगी नहीं, जिससे गोल्ड की सेफ-हेवन अपील कमजोर हुई है।
मध्य पूर्व तनाव में कमी
पिछले कुछ हफ्तों में मध्य पूर्व में तनाव घटने से सोने की सेफ-हेवन डिमांड में कमी आई है। पहले जब युद्ध या संकट की आशंका थी, तब निवेशक सुरक्षा के लिए सोना खरीद रहे थे, लेकिन अब स्थिति सामान्य होने से मांग घटी है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत
अमेरिकी, यूरोपीय और एशियाई देशों में उत्पादन और रोजगार डेटा में सुधार दिखा है, जिससे निवेशक स्टॉक्स और अन्य जोखिमभरे एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
भारत में सोने-चांदी का ऐतिहासिक ट्रेंड
पिछले छह महीनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला है —
- अप्रैल 2025: ₹72,000 प्रति 10 ग्राम तक उछाल
- जुलाई 2025: ₹68,400 तक गिरावट
- सितंबर 2025: ₹71,800 तक फिर से मजबूती
- अक्टूबर 2025: ₹70,850 (वर्तमान स्तर)
वहीं चांदी के भाव ने भी रोलर-कोस्टर राइड ली है —
- मार्च 2025: ₹88,000 प्रति किलो
- जून 2025: ₹81,200 प्रति किलो
- अगस्त 2025: ₹85,500 प्रति किलो
- अक्टूबर 2025: ₹83,700 प्रति किलो
निवेशकों की रणनीति में बदलाव
सोने-चांदी के बाजार में हालिया गिरावट से निवेशक दो भागों में बंटे हुए हैं —
- शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स, जो गिरावट में मुनाफा बुक कर रहे हैं।
- लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स, जो इसे खरीदारी का मौका मान रहे हैं।
कमोडिटी एक्सपर्ट राजीव मेहता का कहना है —
“अगर सोना ₹68,500 के नीचे नहीं जाता है, तो यह मजबूत सपोर्ट ज़ोन रहेगा। ₹71,200 पर रेजिस्टेंस बनता है। अगले कुछ हफ्तों में ₹72,000 का स्तर फिर देखने को मिल सकता है।”
त्योहार और शादी सीजन में खरीदारी का असर
भारत में सोने की मांग भावनाओं से जुड़ी होती है। दिवाली, धनतेरस और शादी सीजन के चलते ज्वेलर्स को उम्मीद है कि इस बार फिजिकल डिमांड बढ़ेगी।
ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी ट्रेड फेडरेशन (GJF) के अनुसार, “मौजूदा कीमतें उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रही हैं। अगले दो हफ्तों में बिक्री में 15-20% बढ़ोतरी की संभावना है।”

फिजिकल बनाम पेपर गोल्ड निवेश
| निवेश का प्रकार | जोखिम स्तर | रिटर्न की संभावना | उपयोग |
| फिजिकल गोल्ड (ज्वेलरी, कॉइन) | कम | सीमित | व्यक्तिगत उपयोग, उपहार |
| डिजिटल गोल्ड | मध्यम | अच्छा | आसान खरीद-बिक्री |
| गोल्ड ETF | कम से मध्यम | स्थिर | निवेश पोर्टफोलियो |
| सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) | बहुत कम | ब्याज सहित रिटर्न | दीर्घकालिक निवेश |
निवेश विशेषज्ञों के मुताबिक, SGB और Gold ETF जैसे विकल्प फिलहाल सबसे सुरक्षित और पारदर्शी माने जा रहे हैं।
विश्लेषण: आगे क्या हो सकता है?
अल्पकालिक दृष्टि से
- डॉलर में मजबूती जारी रही तो सोने में और 1-1.5% की गिरावट संभव है।
- चांदी में ₹82,000 का स्तर सपोर्ट रहेगा।
दीर्घकालिक दृष्टि से
- 2025 के अंत तक सोना ₹75,000 प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
- चांदी ₹90,000 प्रति किलो तक उछाल ले सकती है।
- निवेशकों को 6–12 महीने के समय-फ्रेम में होल्ड करने की सलाह दी जा रही है।
भारत में सोने की मांग के मुख्य कारक
- त्योहार और शादियां — नवंबर-दिसंबर में शादी सीजन के चलते खरीदारी बढ़ेगी।
- रुपये की मजबूती या कमजोरी — डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी सोने को महंगा बना सकती है।
- ** आयात नीति और टैक्स** — सरकार की नीतियां सोने की कीमतों पर बड़ा प्रभाव डालती हैं।
- वैश्विक महंगाई — अगर अमेरिका या यूरोप में महंगाई बढ़ी तो सोने की कीमतें फिर तेजी से बढ़ेंगी।
सोने और चांदी में निवेश के टिप्स
- हर गिरावट को खरीदारी के अवसर के रूप में देखें।
- अपने पोर्टफोलियो का 10-15% हिस्सा सोने में रखें।
- सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में निवेश लंबी अवधि के लिए सबसे बेहतर विकल्प है।
- चांदी में ETF या कमोडिटी फ्यूचर्स के जरिए निवेश करें, क्योंकि यह इंडस्ट्रियल डिमांड से जुड़ा हुआ है।
एक्सपर्ट्स की राय
🔸 कमोडिटी एनालिस्ट नीरज अग्रवाल कहते हैं —
“सोने की गिरावट अल्पकालिक है। वैश्विक आर्थिक दबाव और फेड की ब्याज नीति में बदलाव के संकेत मिलते ही यह फिर 3-4% की तेजी दिखा सकता है।”
🔸 बुलियन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष के अनुसार —
“भारत में सोने की फिजिकल मांग अब भी मजबूत है। अगर कीमतें ₹70,000 के नीचे बनी रहीं तो मार्केट में बड़ी खरीदारी देखने को मिल सकती है।”
निष्कर्ष (Conclusion)
सोने-चांदी की मौजूदा गिरावट निवेशकों के लिए घबराने की नहीं, समझदारी से कदम उठाने की स्थिति है।
अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद दीर्घकाल में ये कीमती धातुएं हमेशा सुरक्षित निवेश साबित हुई हैं।
डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजार की हलचल भले ही कीमतों को कुछ समय तक प्रभावित करें, लेकिन भारत जैसे बाजारों में इसकी संवेदनात्मक और आर्थिक दोनों मांग इतनी गहरी है कि यह लंबे समय में फिर मजबूती हासिल करेगा।