नई दिल्ली : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए आने वाले महीने बेहद अहम साबित हो सकते हैं। वजह है—आठवां वेतन आयोग (8th Pay Commission)। सातवें वेतन आयोग का कार्यकाल जैसे-जैसे अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे करीब 1.19 करोड़ कर्मचारी और पेंशनर परिवारों की धड़कनें तेज हो गई हैं। हर किसी के मन में एक ही सवाल है—
क्या 1 जनवरी 2026 से सैलरी बढ़ जाएगी? अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है तो असल में जेब में कितना पैसा आएगा? taazanews24x7.com
यह सवाल इसलिए भी ज्यादा अहम हो गया है क्योंकि बीते कुछ सालों में महंगाई ने आम और मध्यम वर्ग की आर्थिक गणना पूरी तरह बदल दी है। घर का किराया, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य बीमा, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें—सब कुछ महंगा हुआ है, जबकि सातवें वेतन आयोग से मिली राहत अब लगभग खत्म हो चुकी है।

क्यों जरूरी हो गया है 8वां वेतन आयोग
भारत में वेतन आयोग सिर्फ सैलरी बढ़ाने का जरिया नहीं होता, बल्कि यह सरकार और कर्मचारियों के बीच एक सामाजिक-आर्थिक समझौते की तरह काम करता है। आजादी के बाद से अब तक 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं और हर आयोग ने अपने समय की महंगाई और जीवन-स्तर को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें की हैं।
- 7वां वेतन आयोग: लागू हुआ 1 जनवरी 2016 से
- कार्यकाल समाप्त: 31 दिसंबर 2025
मतलब साफ है—परंपरा के अनुसार 1 जनवरी 2026 से नया वेतन आयोग लागू होना चाहिए। हालांकि यह जरूरी नहीं कि उसी दिन सैलरी बढ़ भी जाए। अक्सर आयोग की रिपोर्ट, कैबिनेट मंजूरी और नोटिफिकेशन में समय लग जाता है।
लेकिन एक बात लगभग तय मानी जाती है—अगर लागू होने में देरी भी होती है, तो कर्मचारियों को एरियर जरूर मिलता है।
फिटमेंट फैक्टर क्या है और क्यों सबसे अहम है
वेतन आयोग की पूरी बहस का केंद्र एक ही शब्द होता है—फिटमेंट फैक्टर।
सरल भाषा में कहें तो फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक तय की जाती है।
फॉर्मूला
नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक × फिटमेंट फैक्टर
7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था।
अब 8वें वेतन आयोग को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं—2.15, 2.28, 2.35 और 2.64 तक।
सरकार आमतौर पर न्यूनतम और अधिकतम मांग के बीच का रास्ता चुनती है।
फिटमेंट फैक्टर तय करते समय किन बातों पर नजर रखी जाती है
यह मान लेना गलत होगा कि फिटमेंट फैक्टर सिर्फ कर्मचारियों की मांग पर तय हो जाता है। असल में इसके पीछे एक लंबी आर्थिक प्रक्रिया होती है।
सरकार इन बिंदुओं को देखती है:
- महंगाई दर और CPI-IW डेटा
- पिछले 10 साल में जीवन-यापन की लागत
- सरकारी राजस्व और टैक्स कलेक्शन
- राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)
- निजी सेक्टर में सैलरी ट्रेंड
- DA किस स्तर पर पहुंच चुका है
इसी वजह से हर वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर लंबी बहस होती है।
अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 हुआ तो कितनी बढ़ेगी सैलरी
अब आते हैं उस सवाल पर, जिसका जवाब हर कर्मचारी जानना चाहता है—असल कैलकुलेशन।
लेवल-1 (चपरासी / मल्टी टास्किंग स्टाफ)
- मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000
- नई बेसिक (2.15 पर): ₹38,700
यहां सिर्फ बेसिक में ही ₹20,700 की बढ़ोतरी होगी। DA, HRA और अन्य भत्ते अलग से जुड़ेंगे।
लेवल-2
- मौजूदा बेसिक: ₹19,900
- नई बेसिक: ₹42,785
लेवल-3
- मौजूदा बेसिक: ₹21,700
- नई बेसिक: ₹46,655
लेवल-4
- मौजूदा बेसिक: ₹25,500
- नई बेसिक: ₹54,825
लेवल-6 (क्लर्क, इंस्पेक्टर, सब-इंस्पेक्टर)
- मौजूदा बेसिक: ₹35,400
- नई बेसिक: ₹76,110
यह लेवल लाखों कर्मचारियों को कवर करता है, इसलिए यहां सैलरी बढ़ोतरी का असर सबसे ज्यादा दिखाई देगा।
लेवल-10 (IAS/IPS की एंट्री लेवल सैलरी)
- मौजूदा बेसिक: ₹56,100
- नई बेसिक: ₹1,20,615
लेवल-13
- मौजूदा बेसिक: ₹1,23,100
- नई बेसिक: ₹2,64,665
लेवल-18 (कैबिनेट सेक्रेटरी / DM टॉप लेवल)
- मौजूदा बेसिक: ₹2,50,000
- नई बेसिक: ₹5,37,500
यह देश की सबसे ऊंची सरकारी सैलरी मानी जाती है।

DA यानी महंगाई भत्ते का क्या होगा
DA हर वेतन आयोग का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है।
मौजूदा स्थिति
- DA लगभग 50% के आसपास है
- पिछला अनुभव बताता है कि जब DA 50% पार करता है, तो सरकार उसे बेसिक में मर्ज करने पर विचार करती है
8वें वेतन आयोग में क्या बदलाव संभव
- DA को शून्य (0) से रीसेट किया जा सकता है
- नया DA नए बेसिक पर लागू होगा
- शुरुआती महीनों में DA कम दिखेगा, लेकिन समय के साथ तेजी से बढ़ेगा
यही वजह है कि शुरुआती सैलरी स्लिप देखकर कई कर्मचारियों को भ्रम हो सकता है।
पेंशनर्स के लिए क्या बदलेगा
8वां वेतन आयोग पेंशनर्स के लिए भी उतना ही अहम है जितना कर्मचारियों के लिए।
न्यूनतम पेंशन
- अभी: ₹9,000
- 2.15 फिटमेंट फैक्टर पर: ₹19,350
अधिकतम पेंशन
- अभी: ₹1,25,000
- नई पेंशन: ₹2,68,750
इसके अलावा:
- फैमिली पेंशन में भी समान अनुपात में बढ़ोतरी
- पेंशन पर DA का लाभ जारी रहेगा
एरियर मिलेगा या नहीं—सबसे बड़ा सवाल
हर वेतन आयोग में यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि:
- अगर आयोग 1 जनवरी 2026 से लागू माना गया
- लेकिन भुगतान 2027 या 2028 में शुरू हुआ
- तो कर्मचारियों को पूरा एरियर मिल सकता है
पिछली बार भी:
- कर्मचारियों को 18 से 24 महीने तक का एरियर मिला था
हालांकि सरकार पर वित्तीय दबाव को देखते हुए एरियर किस्तों में भी दिया जा सकता है।
क्या 1 जनवरी 2026 से सैलरी अपने आप बढ़ जाएगी
इसका सीधा जवाब है—नहीं।
वेतन आयोग की प्रक्रिया लंबी होती है:
- आयोग का गठन
- डेटा कलेक्शन
- रिपोर्ट तैयार
- कैबिनेट की मंजूरी
- अधिसूचना जारी
इस पूरी प्रक्रिया में अक्सर डेढ़ से दो साल लग जाते हैं।
कर्मचारी संगठन 2.64 फिटमेंट फैक्टर क्यों मांग रहे हैं
कर्मचारी संगठनों का तर्क साफ है:
- बीते 10 साल में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
- हाउस रेंट और हेल्थ खर्च कई गुना बढ़े
- सातवें वेतन आयोग का असर अब खत्म हो चुका है
इसीलिए उनकी मांग है कि:
फिटमेंट फैक्टर 2.64 से कम नहीं होना चाहिए
हालांकि सरकार के लिए यह बड़ा वित्तीय बोझ साबित हो सकता है।
सरकार का रुख क्या संकेत देता है
फिलहाल सरकार ने 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि:
- वित्त मंत्रालय स्तर पर आंतरिक समीक्षा जारी है
- कर्मचारियों की मांगों का राजनीतिक असर भी देखा जा रहा है
- 2025 के अंत या 2026 की शुरुआत में बड़ा फैसला संभव है

निष्कर्ष: कर्मचारियों के लिए कितना फायदेमंद होगा 8वां वेतन आयोग
अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 तय होता है, तो:
- सैलरी में 40–45% तक वास्तविक बढ़ोतरी
- पेंशनर्स को सीधी राहत
- DA और एरियर से अतिरिक्त फायदा
कुल मिलाकर, 8वां वेतन आयोग केंद्रीय कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती देने वाला साबित हो सकता है।
Well written article. Appreciate the effort.👏