विश्व स्तर पर महिला ड्रोन यूनिट्स: भारत के ‘दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन’ की वैश्विक तुलना

भारत का “दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन” केवल एक राष्ट्रीय पहल नहीं है, बल्कि यह वैश्विक महिला-सशक्तिकरण और तकनीकी-सुरक्षा के संगम का प्रतीक बन गया है। यह जानना रोचक है कि दुनिया के अन्य देशों में भी महिलाएं अब ड्रोन-युद्ध और निगरानी इकाइयों का हिस्सा बन रही हैं — लेकिन भारत की यह पहल अपने आप में अनोखी है क्योंकि यह पूर्णतः महिला ड्रोन यूनिट है। taazanews24x7.com

आइए देखते हैं कि अमेरिका, इज़राइल, चीन और अन्य देशों में महिलाओं की भूमिका इस क्षेत्र में कैसी है, और भारत इससे कैसे आगे निकल सकता है।

इज़राइल: अग्रणी महिला ड्रोन कमांडर्स की कहानी

इज़राइल उन देशों में से एक है जहाँ महिलाओं को सैन्य सेवा अनिवार्य है, और इसी कारण उनकी उपस्थिति सभी युद्ध इकाइयों में दिखती है।

  • 2025 में, इज़राइल एयर फोर्स (IAF) ने पहली बार एक महिला लेफ्टिनेंट कर्नल को UAV स्क्वाड्रन की कमांडर नियुक्त किया।
  • इसके अतिरिक्त, इज़राइल की “Battalion 869” पूरी तरह महिला सैनिकों से बनी है, जो लेबनान सीमा पर ड्रोन निगरानी करती हैं।
  • इन सैनिकों का कार्य है – सीमाई घुसपैठ पर नज़र रखना, रीयल-टाइम इंटेलिजेंस भेजना और ड्रोन-आधारित मिशनों को संचालित करना।

भारत से तुलना:
जहाँ इज़राइल में महिलाएं मिश्रित-यूनिट्स में कमांड भूमिका निभा रही हैं, वहीं भारत की “दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन” पूरी तरह महिला-संचालित यूनिट है। यह इसे वैश्विक स्तर पर और भी विशिष्ट बनाता है।

🇺🇸 अमेरिका: महिला ड्रोन पायलटों का विस्तार होता नेटवर्क

अमेरिकी वायु सेना (USAF) में महिला ड्रोन ऑपरेटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

  • 2024 में, पहली बार एक महिला एयरमैन को “Silver Star Medal” से सम्मानित किया गया, जिन्होंने ईरानी ड्रोन हमले को निष्क्रिय किया।
  • अमेरिकी एयर बेसों में महिला पायलट अब MQ-9 Reaper और RQ-4 Global Hawk जैसे उच्च-स्तरीय निगरानी ड्रोन संचालित करती हैं।

ड्रोन-ऑपरेटरों के प्रशिक्षण में साइबर-सुरक्षा, डेटा-लिंक और मिशन-एथिक्स भी शामिल हैं।

भारत से तुलना:
अमेरिका में महिलाएं तकनीकी और विश्लेषणात्मक दोनों मोर्चों पर सक्रिय हैं, परंतु “दुर्गा स्क्वाड्रन” की विशेषता यह है कि यह मिशन-संचालित फील्ड ऑपरेशन भी महिलाओं के हवाले कर रहा है।

🇨🇳 चीन: PLA में महिला UAV ऑपरेटरों का उदय

चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में अब महिला ड्रोन पायलटों को विशेष इकाइयों में शामिल किया जा रहा है।

  • चीन ने 2022 में अपनी पहली महिला UAV टीम की घोषणा की थी जो सैन्य निगरानी के साथ-साथ प्रशिक्षण कार्य भी संभालती है।
  • इन महिला पायलटों को स्वायत्त ड्रोन, “Wing Loong” और “CH-4 Rainbow” जैसे लंबी दूरी वाले UAVs पर प्रशिक्षित किया गया।

भारत से तुलना:
चीन की पहल भी मिश्रित है — पुरुष-महिला दलों में साझेदारी आधारित। भारत की “दुर्गा” यूनिट इस दृष्टि से सामाजिक-प्रेरणात्मक मॉडल है जहाँ महिलाएं केवल भागीदार बल्कि नेतृत्वकर्ता हैं।

🇵🇰 पाकिस्तान: सीमित लेकिन प्रारंभिक पहल

  • पाकिस्तान वायु सेना में कुछ महिला अधिकारी ड्रोन तकनीक व निगरानी-प्रणालियों में प्रशिक्षण ले रही हैं, परंतु अब तक कोई ऑल-वुमन ड्रोन यूनिट घोषित नहीं हुई।
  • यह मुख्य रूप से सुरक्षा और रूढ़िवादी दृष्टिकोण की सीमाओं के कारण है।

भारत से तुलना:
भारत का “दुर्गा स्क्वाड्रन” पाकिस्तान समेत पूरे दक्षिण एशिया में पहला और एकमात्र ऑल-वुमन ड्रोन यूनिट बन गया है।

वैश्विक तुलना: एक नजर में

देशमहिला ड्रोन यूनिट की स्थितिविशिष्टता
भारतपहली ऑल-वुमन ड्रोन स्क्वाड्रन (दुर्गा)महिला नेतृत्व + सीमा सुरक्षा
इज़राइलBattalion 869, मिश्रित-महिला यूनिटकमांड स्तर पर महिलाएं
अमेरिकासैकड़ों महिला ड्रोन पायलटतकनीकी-सैन्य संचालन में लिंग समानता
चीनPLA महिला UAV यूनिटसरकारी स्तर पर प्रशिक्षण पहल
पाकिस्तानप्रारंभिक प्रशिक्षण स्तरकोई ऑल-वुमन यूनिट नहीं

भारत की बढ़त: दुर्गा स्क्वाड्रन क्यों खास है

  1. 100% महिला ऑपरेशन यूनिट:
    अन्य देशों में मिश्रित या सीमित महिला-भागीदारी होती है, जबकि “दुर्गा स्क्वाड्रन” पूरी तरह महिलाओं के नेतृत्व में है।
  2. मेक इन इंडिया’ दृष्टिकोण:
    भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठनों (DRDO, BEL, IdeaForge आदि) द्वारा निर्मित स्वदेशी ड्रोन इसका हिस्सा हैं।
  3. सामाजिक प्रेरणा:
    यह पहल भारत की लाखों युवा महिलाओं को रक्षा-तकनीक व STEM क्षेत्र में आने की प्रेरणा दे रही है।
  4. रणनीतिक मजबूती:
    सीमा-निगरानी के क्षेत्र में भारत की स्वायत्त क्षमता बढ़ेगी — खासकर पंजाब-राजस्थान व पश्चिमी सीमाओं पर।

भविष्य: भारत का नेतृत्व और क्या कर सकता है

  • AI + ड्रोन नेटवर्क: दुर्गा स्क्वाड्रन को AI-आधारित ड्रोन-एनालिटिक्स से जोड़ा जा सकता है जिससे खुफिया जानकारी स्वतः विश्लेषित हो।
  • स्वार्म-ड्रोन टैक्टिक्स: एक साथ 10-20 ड्रोन का समन्वित उड़ान दल, जिससे सीमा पर अधिक व्यापक निगरानी हो।
  • वैश्विक प्रशिक्षण साझेदारी: भारत-इज़राइल-अमेरिका के बीच संयुक्त महिला ड्रोन पायलट प्रोग्राम प्रारंभ हो सकता है।
  • नागरिक उपयोग: भविष्य में ये प्रशिक्षित महिला अधिकारी आपदा-प्रबंधन, कृषि-सर्वेक्षण और आपातकालीन सेवाओं में भी योगदान दे सकती हैं।

निष्कर्ष: शक्ति, सुरक्षा और सम्मान

भारत का “दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन” केवल एक सैन्य इकाई नहीं — यह आत्मनिर्भर भारत की भावना, नारी-शक्ति का सम्मान और भविष्य की तकनीकी सुरक्षा का प्रतीक है। विश्व के परिदृश्य में यह एक ऐसा कदम है जिसने दिखाया कि— “जहाँ पुरुषों ने सीमाओं की रक्षा की, अब महिलाएं आसमान से सुरक्षा का पहरा देंगी।”

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