महिला शक्ति और हाई-टेक सुरक्षा: BSF का “Durga Drone Squadron”

महिला शक्ति और हाई-टेक सुरक्षा: ग्वालियर/टेकनपुर। द्रुत गति से बदलते सीमाई परिदृश्यों और उभरते ड्रोन खतरों के बीच, भारत की सीमाओं की रक्षा में एक नया अध्याय लिखने की तैयारी है। आज के समय में सिर्फ सैनिक बलों से ही नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक और नवीनतम सोच से भी युद्ध लड़ना पड़ रहा है। इसी सोच के साथ केंद्रीय सशस्त्र सीमा बलों में एक ऐसा प्रोजेक्ट सामने आया है, जो न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी एक प्रेरणा बनेगा — वह है हमारे देश का पहली महिला ड्रोन संचालन यूनिट, “दुर्गा ड्रोन स्क्वोड्रन”।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि यह स्क्वाड्रन क्या है, क्यों महत्वपूर्ण है, इसके तंत्र-प्रशिक्षण कैसे चल रहा है,-साथ ही इसमें आने वाली चुनौतियाँ तथा इससे हमारा भविष्य कैसा बदल सकता है। taazanews24x7.com

क्यों इस दिशा में कदम उठाया गया?

अब यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं कि अब सीमा सुरक्षा पैदल सैनिकों और पे्रम-पालटूनों ही तक सीमित नहीं रह गई है। Border Security Force (बीएसएफ) ने बड़े बदलाव देखे हैं — ड्रोन और अभियंत्रित वायुयान (UAV)-आधारित खतरों की संख्या बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, हाल ही में ड्रोन आधारित निगरानी और गश्ती पर बल दिया गया है। इसके आलावा, बल में महिला प्रतिभाओं को बढ़ावा देने, तकनीकी नेतृत्व में लाने का सामाजिक दृष्टिकोण भी अब बलों के लिए एक प्राथमिकता बन गया है।

  • मीडिया सूत्र बताते हैं कि टेकनपुर (मध्य प्रदेश) में बीएसएफ अकादमी के “स्कूल ऑफ ड्रोन वारफेयर” में महिला अधिकारियों-प्रहारीयों को उन्नत ड्रोन संचालन-प्रशिक्षण दिया जा रहा
  • इस पहल का नाम “दुर्गा” रखा गया है — देवी दुर्गा की प्रतिमा की तरह शक्ति, रक्षा एवं तकनीक का संगम। इस तरह, यह यूनिट न केवल रक्षा-ओपरेशनल पहल की ओर इशारा करती है बल्कि समापन करती है उस परंपरागत सोच को जिसमें महिला सुरक्षा बलों की भूमिका सीमित मानी जाती थी।

दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन” क्या है?

इस यूनिट की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • यह पहली महिला-संपूर्ण ड्रोन संचालन यूनिट है, जिसमें केवल महिला अधिकारी और महिला प्रहरी इसमे शामिल होंगी।
  • स्थान: बीएसएफ अकादमी, टेकनपुर/ग्वालियर, मध्य प्रदेश में स्थित “स्कूल ऑफ ड्रोन वारफेयर” में स्थापित।
  • प्रशिक्षण अवधि: उदाहरण के लिए, 6 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण महिलाओं को दिया जा रहा है जिसमें ड्रोन-उड़ान, निगरानी, डेटा विश्लेषण आदि शामिल हैं।
  • ऑपरेशन के दायरे: सीमाई निगरानी, तस्करी विरोधी अभियानों, आपदा-प्रतिक्रिया एवं रात-दिन ड्रोन संचालन।
  • तकनीकी उपकरण: लंबी अवधि उड़ान वाले यूएवी (UAVs), वीटीओएल (Vertical Take-Off & Landing) ड्रोन, निगरानी सेंसर तथा इलैक्ट्रॉनिक काउंटर-ड्रोन तकनीक।

इस तरह, “दुर्गा स्क्वाड्रन” बल के लिए सिर्फ एक यूनिट नहीं बल्कि एक संदेश बन चुकी है — महिलाएं तकनीक के अग्रिम मोर्चे पर, सीमाओं की रक्षा में सक्षम।

प्रशिक्षण और तंत्र : कैसे तैयार हो रही है यह टीम

इस भाग में हम देखेंगे कि इस यूनिट को प्रशिक्षण कैसे दिया जा रहा है और किन-किन तकनीकी एवं ऑपरेशनल पहलुओं पर बल दिया गया है।

प्रशिक्षण का पाठ्यक्रम

  • ड्रोन उड़ान-कौशल: मल्टीरोटर और फिक्स्ड-विंग ड्रोन संचालन, वीटीओएल प्लेटफार्म।
  • निगरानी एवं डेटा एकत्रीकरण: ड्रोन द्वारा ली गई छवियों का विश्लेषण, सीमाई इलाकों का जिओ-स्पैशल मोनिटरिंग।
  • इलैक्ट्रॉनिक व काउंटर-ड्रोन उपाय: ड्रोन-ऊपर नियंत्रण, रिस्की कंट्रीब्यूटरों पर नजर रखना।
  • विविध भू-भागों में संचालन-सहायता: पर्वतीय, जंगल और रेगिस्तानी इलाकों में ड्रोन संचालन की चुनौतियाँ।

तकनीकी-संसाधन

  • यह यूनिट “मेक इन इंडिया” के अंतर्गत विकसित या सम्मिलित ड्रोन प्लेटफार्मों से लैस है।
  • ड्रोन-पायलटिंग भवनों और सिम्युलेशन-प्रशिक्षण कक्ष जैसे आधुनिक सेट-अप तैयार किये गए हैं।
  • समय-समय पर अभ्यास-मिशन और लाइव-सिमुलेशन से तैयारियाँ होती रहती हैं।

संगठनात्मक मॉडल

  • इस स्क्वाड्रन को अगले चरण में फ्रंटियर कमांडों में विस्तारित करने की योजना है।
  • ज़मीनी गश्ती, सीमाई चौकियों तथा ड्रोन मॉनिटरिंग टीमों के बीच समन्वय को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  • महिला अधिकारी-प्रहरीयों को कॅरियर-विकास की दिशा में आगे आने का अवसर भी मिलेगा — यह एक प्रेरणा स्रोत है।

इस पहल का महत्व और प्रभाव

यह कदम रक्षा-नियमों और सामाजिक दृष्टिकोण दोनों में अनेक मायनों में महत्वपूर्ण है।

तकनीकी दृष्टि से

  • सीमाई क्षेत्रों में ड्रोन-तंत्र ने गश्ती को अधिक प्रभावी और त्वरित बना दिया है—जहाँ पैदल-गश्ती या वाहन-गश्ती कठिन थी।
  • महिला-ड्रोन-पायलटों द्वारा संचालन-सहायता से निगरानी कवर बढ़ेगा।
  • विरोधी ड्रोन गतिविधियों एवं तस्करी के उभरते खतरों के प्रति प्रतिक्रिया-पीछे नहीं रहना होगा।

सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से

  • यह यह स्पष्ट संदेश देता है कि महिलाएं-उच्च-टेक ऑपरेशन में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं, सिर्फ सहायक नहीं।
  • इससे देश की सीमाई बलों में लिंग-समावेशन (gender inclusion) की दिशा में एक मील-पत्थर खड़ा होगा।
  • युवाओं-खासकर-महिलाओं को तकनीक और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में प्रेरणा मिल सकती है।

रणनीतिक दृष्टि से

  • इस प्रकार की यूनिट सीमाओं पर स्थित खतरों के खिलाफ एक नए स्वरूप की तैयारी दर्शाती है—राष्ट्र अब सिर्फ बख्तरबंद वाहन या पैदल गश्ती नहीं, बल्कि ड्रोन-उड़ान, निगरानी, डेटा-सेंसर नेटवर्क से लैस है।
  • भविष्य में अन्य सीएपीएफ (CAPF = Central Armed Police Forces) में भी यह मॉडल अपनाया जा सकता है, जिससे समग्र सुरक्षा-तंत्र को मजबूती मिलेगी।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हर बड़ी पहल की तरह, इस स्क्वाड्रन के समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं — जिन्हें समय रहते सुलझाना महत्त्वपूर्ण होगा।

चुनौतियाँ

  • प्रौद्योगिकी-उन्नयन: ड्रोन-तकनीक बहुत तेजी से बदल रही है — हार्डवेयर, सेंसर, डेटा लिंक, निगरानी सॉफ्टवेयर्स। इनका निरंतर अपडेट करना होगा।
  • भू-भाग एवं पर्यावरणीय बाधाएँ: सीमाई इलाकों की कठिन परिस्थितियाँ — ऊँचाई, मौसम, नेटवर्क-राहत की कमी — अभ्यास को चुनौती देती हैं।
  • मानव संसाधन-उपयुक्तता: महिला-ड्रोन-पायलटों को प्रेरित रखना, उनकी कॅरियर-प्रगति सुनिश्चित करना और तकनीकी बदलाव से तेज गति से तालमेल बनाना जरूरी है।
  • ज़मीनी-तंत्र से समन्वय: ड्रोन-इंटेलिजेंस तभी असरदार है जब उसे गश्ती टीम, चौकी-बिंदु, ग्राउंड-रडार नेटवर्क आदि से जोड़ा जाए। इस समन्वय की रणनीति विकसित करनी होगी।

आगे की राह

  • फ्रंटियर­कमांडों में इस तरह की महिला-ड्रोन-यूनिट्स की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
  • प्रशिक्षण-पाठ्यक्रम को और विस्तारित कर स्वार्म-ड्रोन टैक्टिक्स, स्वायत्त ड्रोन संचालन, काउंटर-ड्रोन तकनीक आदि भी शामिल किया जाना चाहिए।
  • देशी-ड्रोन निर्माता और अनुसंधान-संस्थाओं के साथ साझेदारी बढ़ानी होगी ताकि “निर्मित-भारतीय सामग्री (indigenous content)” को और आगे ले जाया जा सके।
  • सामाजिक-मीडिया और जन-संचार के माध्यम से इस पहल की जागरूकता बढ़ाई जा सकती है — ताकि आने वाले युवाओं-विशेषकर महिलाओं को आकर्षित किया जा सके।

निष्कर्ष

“दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन” सिर्फ एक यूनिट नहीं है — यह भारत की सीमाई सुरक्षा में नए युग का प्रतीक है जहाँ तकनीक, महिला-शक्ति और समावेशिता एक साथ मिलकर आगे बढ़ रही हैं।

जब माँ दुर्गा का रूप शक्ति-संकेत देता है, तो यहाँ यह यूनिट उसी भावना को धरातल पर उतार रही है: सीमा की रक्षा, आधुनिकता का संगम और महिला नेतृत्व का प्रतीक।

यदि यह मॉडल सफल रूप से आगे विकसित हो गया, तो आने वाले वर्षों में हम ऐसा देख सकते हैं कि सीमा चौकियों के ऊपर चहलकदमी करने वाले कवचगाड़े (armoured vehicles) के साथ-साथ एक महिला-ड्रोन-पायलट टीम भी अपने मिशन पर उड़ान भरती है — निगरानी करती है, संदिग्ध को ट्रैक करती है, सीमाई सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इसके द्वारा हमें यह संदेश भी मिलता है कि आज का युद्ध सिर्फ सैनिकों-हथियारों का नहीं है — बल्कि सूचना, डेटा, ड्रोन और महिला-ताकत का भी है। और इस दिशा में इस पहल ने एक नया आयाम खोल दिया है।

हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस तरह की पहल से आने-वाले समय में हमारा देश न केवल सीमाओं पर लेकिन सामाजिक रूप से भी अधिक समृद्ध और समर्थ बनेगा।

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