गाजा में फिर गूंजे धमाके, शांति की उम्मीदों पर पानी: गाजा पर इज़राइली हमलों की नई लहर के बाद टूटीं फ़िलिस्तीनियों की संघर्षविराम की उम्मीदें, हालात और बिगड़े

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025:
मध्य पूर्व एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस रहा है। इज़राइल ने गाजा पट्टी पर हवाई हमलों की नई लहर शुरू कर दी है, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई है।
बीते कुछ दिनों से चल रही कूटनीतिक बातचीत से जो थोड़ी-बहुत उम्मीदें बंधी थीं, वे अब राख में बदल गई हैं। taazanews24x7.com

स्थानीय समयानुसार बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक गाजा में लगातार विस्फोटों की आवाज़ें सुनी गईं। इज़राइल के लड़ाकू विमानों ने गाजा सिटी, रफ़ाह, खान यूनिस और बेइत हनून इलाकों में कई टारगेट्स को निशाना बनाया।
गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की कि इन हमलों में अब तक 150 से अधिक लोग मारे गए और 400 से ज्यादा घायल हैं। मरने वालों में कई बच्चे और महिलाएं शामिल हैं।

इज़राइल का दावा – “हमास के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई”

इज़राइली रक्षा बल (IDF) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ये हमले “हमास के सैन्य ठिकानों और सुरंग नेटवर्क” पर किए गए हैं।
IDF प्रवक्ता डेनियल हागारी ने कहा —

“हमारा लक्ष्य नागरिकों पर हमला करना नहीं है, बल्कि उन आतंकवादी संरचनाओं को नष्ट करना है जो इज़राइल की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।”

हालांकि, गाजा में रहने वाले नागरिकों का कहना है कि ये हमले केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आवासीय इमारतें, अस्पतालों के आसपास के क्षेत्र और यहां तक कि शरणार्थी कैंप भी निशाने पर हैं।

आम फ़िलिस्तीनियों की स्थिति भयावह

गाजा के निवासी इस वक्त भयंकर मानवीय संकट से गुजर रहे हैं।
रात-दिन चल रहे हमलों ने लोगों को बेघर कर दिया है। हजारों लोग अपने परिवारों के साथ सड़कों पर या स्कूलों में बने अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

एक स्थानीय महिला, फ़ातिमा नूर, ने बताया —

“हम अपने बच्चों को सुरक्षित जगह नहीं ले जा पा रहे हैं। हर जगह बम गिर रहे हैं। हमें नहीं पता अगला वार कहां होगा। हम बस भगवान से दुआ कर रहे हैं कि सुबह तक जिंदा रहें।”

गाजा के दक्षिणी हिस्से में राहत संगठनों द्वारा बनाए गए शिविरों में भारी भीड़ है।
कई जगहों पर भोजन, पानी और दवाइयों की भारी कमी है। बच्चे भूख से बेहाल हैं और अस्पतालों में जगह नहीं बची है।

संघर्षविराम की उम्मीद अब लगभग खत्म

गाजा और इज़राइल के बीच पिछले कुछ हफ्तों से संघर्षविराम को लेकर चर्चा चल रही थी। मिस्र, कतर और अमेरिका मध्यस्थता कर रहे थे, लेकिन ताज़ा हमलों ने सारी उम्मीदों को खत्म कर दिया है।

गाजा के एक राजनीतिक विश्लेषक समी अल-ख़तीब ने कहा —

“जब एक तरफ़ बम गिर रहे हों और दूसरी तरफ़ बातचीत की बात हो रही हो, तो शांति का कोई अर्थ नहीं रह जाता। फ़िलिस्तीनियों को अब ceasefire पर भरोसा नहीं रहा।”

इज़राइली जनता में भी बढ़ रही असुरक्षा की भावना

दूसरी ओर, इज़राइल के कुछ हिस्सों में भी तनाव बढ़ रहा है। सीमा के पास बसे शहरों में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।
इज़राइली नागरिकों का कहना है कि हमास द्वारा छोड़े गए रॉकेट्स भी उनके लिए भय का कारण हैं।
तेल अवीव की एक निवासी माया कोहेन ने बताया —

“हम अपने घरों में सुरक्षित नहीं हैं। हर समय सायरन बजता है और हमें बंकर में भागना पड़ता है। यह संघर्ष दोनों ओर के आम लोगों के जीवन को तबाह कर रहा है।”

संयुक्त राष्ट्र और विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बयान जारी कर दोनों पक्षों से तत्काल हिंसा रोकने की अपील की है।
उन्होंने कहा —

“गाजा की मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मानवता के खिलाफ़ एक और त्रासदी में बदल सकती है।”

अमेरिका ने इज़राइल से “संयम बरतने” का आग्रह किया है, वहीं मिस्र और तुर्की ने गाजा में राहत सामग्री भेजने की अनुमति मांगी है।
यूरोपीय संघ ने भी चेतावनी दी है कि “अगर युद्धविराम नहीं हुआ, तो यह संघर्ष पूरी तरह क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।”

गाजा में मानवीय आपदा – अस्पतालों में हाहाकार

गाजा के प्रमुख अल-शिफा अस्पताल में घायल लोगों की लंबी कतारें लगी हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि न दवाइयां बची हैं और न बिजली। कई वार्डों में जनरेटर बंद हो चुके हैं क्योंकि ईंधन खत्म हो गया है।
डॉ. यूसुफ हामिद ने बताया —

“हम मरीजों का इलाज हाथों से कर रहे हैं। ICU में बच्चे हैं जिन्हें ऑक्सीजन चाहिए, लेकिन बिजली के बिना मशीनें नहीं चल पा रहीं।”

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि गाजा के लगभग 70% स्वास्थ्य केंद्र अब काम करने में असमर्थ हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और उनमें से अधिकांश के पास अब कोई आश्रय नहीं है।

इंटरनेट और संचार प्रणाली ठप

गाजा में लगातार बमबारी से बिजली और इंटरनेट सेवाएं ठप हो चुकी हैं।
कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क बंद हैं, जिससे परिवार अपने प्रियजनों से संपर्क नहीं कर पा रहे।
राहत एजेंसियों का कहना है कि संचार के अभाव में वे यह भी नहीं जान पा रहे कि किन इलाकों को सबसे ज्यादा मदद की ज़रूरत है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और हालिया घटनाक्रम

यह संघर्ष पिछले वर्ष अक्टूबर में तब शुरू हुआ जब इज़राइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौता टूट गया।
हमास द्वारा इज़राइली क्षेत्र में की गई रॉकेट फायरिंग के जवाब में इज़राइल ने गाजा पर भीषण हवाई हमले शुरू किए।
इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच कई बार बातचीत की कोशिशें हुईं, लेकिन हर बार हिंसा ने उन्हें विफल कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि राजनैतिक नेतृत्व की जिद, क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा और धार्मिक भावनाएं इस संघर्ष को और गहराती जा रही हैं।

मानवाधिकार संगठनों का आरोप – “युद्ध अपराधों की जांच हो”

एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं ने इस हमले को “मानवाधिकारों का उल्लंघन” बताया है।
उन्होंने कहा कि इज़राइल को नागरिक इलाकों पर हमले बंद करने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICC) को इसकी स्वतंत्र जांच करनी चाहिए।

फ़िलिस्तीनी अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया है।
उनका कहना है कि इज़राइल की कार्रवाई “युद्ध अपराध” के समान है।

गाजा की अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप

गाजा की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था अब पूरी तरह चरमरा गई है।
बंदरगाहों और सीमाओं के बंद होने से व्यापार रुक गया है।
कई परिवारों के पास न रोजगार है, न कोई आय।
राहत एजेंसियों का अनुमान है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले हफ्तों में भूखमरी का खतरा गंभीर रूप ले सकता है।

मिस्र की सीमा पर बढ़ती भीड़

गाजा और मिस्र की सीमा (रफ़ाह क्रॉसिंग) पर हजारों लोग इकट्ठा हैं, जो किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलना चाहते हैं।
लेकिन मिस्र ने सुरक्षा कारणों से सीमा को सीमित रूप से खुला रखा है।
कई लोग वहां दिनों से भूखे-प्यासे फंसे हैं।

राहत संगठन रेड क्रॉस ने बताया कि सीमा पार करने की अनुमति के बिना कई घायल लोग वहीं दम तोड़ रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषण – शांति की राह अब और कठिन

मध्य पूर्व मामलों के विश्लेषक डॉ. हसन यूसुफ का कहना है —

“अब दोनों पक्षों के बीच विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय दबाव के बिना ceasefire की संभावना बेहद कम है।”

उनके अनुसार, इज़राइल का लक्ष्य “हमास को पूरी तरह कमजोर करना” है, जबकि हमास इसे “विरोध की आखिरी लड़ाई” बता रहा है।
इसलिए, यह संघर्ष जल्द खत्म होता नहीं दिख रहा।

दुनिया की नज़रों में गाजा

सोशल मीडिया पर गाजा की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें मलबे में दबे बच्चे, जलते घर और राहत कर्मी नज़र आ रहे हैं।
दुनिया भर के लोग #PrayForGaza और #StopTheWar जैसे हैशटैग चला रहे हैं।
हालांकि, फ़िलिस्तीनी नागरिकों का कहना है कि “सहानुभूति नहीं, कार्रवाई चाहिए।”

निष्कर्ष: युद्ध नहीं, इंसानियत की ज़रूरत

गाजा में जो कुछ हो रहा है, वह केवल एक युद्ध नहीं बल्कि एक मानवीय त्रासदी है।
हर तरफ तबाही, मौत और निराशा का आलम है।
इज़राइल और फ़िलिस्तीन दोनों ही पक्षों के आम लोग इस हिंसा का शिकार बन रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब केवल बयान जारी करने के बजाय ठोस कदम उठाने होंगे —
जैसे कि मानवीय सहायता बढ़ाना, युद्धविराम के लिए मध्यस्थता करना और युद्ध अपराधों की पारदर्शी जांच कराना।

शांति की राह लंबी और कठिन जरूर है, लेकिन यह असंभव नहीं।
गाजा के बच्चे आज भी उम्मीद कर रहे हैं कि शायद एक दिन वे बमों की आवाज़ की जगह पक्षियों की चहचहाहट सुन पाएंगे।

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