मोंथा चक्रवाती तूफान: अरब सागर में उठे चक्रवात से coastal राज्यों में अलर्ट, जानें संभावित असर और तैयारी की स्थिति

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2025:

अरब सागर से उठे मोंथा चक्रवाती तूफान (Cyclone Montha) ने भारतीय मौसम विभाग (IMD) और तटीय राज्यों की सरकारों को सतर्क कर दिया है। यह चक्रवात तेजी से उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है और अगले 48 घंटों में महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा के तटीय इलाकों पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मोंथा तूफान फिलहाल समुद्र में गहराते निम्न दबाव के रूप में सक्रिय है, लेकिन अगले कुछ घंटों में यह ‘गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm)’ का रूप ले सकता है। taazanews24x7.com

झारखण्ड की राजधानी रांची समेत देश के लिए अलग अलग राज्यों खासकर बंगाल बिहार, महाराष्ट्र, गोवा, ओडिसा एवं अन्य जगहों पर चक्रवाती तूफान मोंथा का असर लगातार जारी है। बुधवार की सुबह से लेकर शाम तक रुक रुक कर बारिश देखने को मिला। 

अचानक से बदले इस मौसम ने लोगो के दिनचर्या को प्रभावित कर दिया।  इस दौरान ऑफिस व स्कूल जाने वाले लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, सड़को पर पानी जमा हो गया, कई जगहों पर ट्रैफिक जाम की स्तिथि भी देखने मिला है।

सुबह से हो रही इस बारिश के कारण यात्रियों को बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा, यात्री सड़क किनारे फंसे नजर आए।

मौसम विभाग के मुताबिक, चक्रवाती तूफान मोंथा का असर 31 अक्टूबर तक राज्यभर में बने रहने की एवं देश की कई जिलों में में बारिश और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है और  2 नवंबर से मौसम में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

मोंथा चक्रवात का रूटमैप और गति

IMD की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, मोंथा चक्रवात अरब सागर के मध्य हिस्से में लगभग 550 किमी दक्षिण-पश्चिम मुंबई से दूर सक्रिय है। इसकी हवा की रफ्तार वर्तमान में 70 से 90 किमी प्रति घंटा है, जो अगले 24 घंटों में बढ़कर 110 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मुख्य असर महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और कर्नाटक के तटीय जिलों में देखने को मिल सकता है।

केंद्रीय और राज्य एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रेड अलर्ट जारी करते हुए मछुआरों को अगले कुछ दिनों तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है।

  • गुजरात सरकार ने तटीय इलाकों में राहत दलों को तैनात किया है।
  • NDRF और SDRF की टीमें मुंबई, सूरत, पोरबंदर और रत्नागिरी में तैयार रखी गई हैं।
  • स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टियां घोषित की जा सकती हैं यदि तूफान का प्रभाव बढ़ता है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है, और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा।”

संभावित मौसम प्रभाव

मोंथा चक्रवात के कारण तटीय इलाकों में तेज बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें, और तेज हवाएं चलने की संभावना है।

  • मुंबई, ठाणे, रत्नागिरी, पालघर और सूरत में भारी से अति भारी वर्षा का अनुमान है।
  • गोवा और कोंकण क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति बाधित हो सकती है।
  • समुद्र में 4 से 6 मीटर ऊंची लहरें उठने की चेतावनी दी गई है।

IMD के अनुसार, “इस तूफान की दिशा और ताकत अगले 12 घंटों में तय करेगी कि यह किस राज्य को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा।”

ठंड की होगी शुरुआत

मौसम बाज्ञैनिको के अनुसार, जैसे ही बादल छटेंगे, मोथा चक्रवती तूफान से प्रभावित देश के सभी राज्यों के तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की जाएगी। अगले कुछ दिनों में बंगाल, बिहार, ओडिसा, रांची तथा अन्य राज्यों का न्यूनतम तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे जा सकता है। यानी, बारिश के रुकते ही शहर में ठंड के मौसम की शुरुआत हो जाएगी।

मोंथा तूफान का नाम कैसे पड़ा?मोंथा (Montha)’ नाम थाईलैंड द्वारा सुझाया गया है। मौसम संगठन के नियमों के तहत, हिंद महासागर और अरब सागर में बनने वाले हर चक्रवात को सदस्य देशों की सूची में से एक नाम दिया जाता है। इसका अर्थ थाई भाषा में शक्ति और परिवर्तन” से जुड़ा है।

सरकार और प्रशासन की तैयारी

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने तटीय जिलों में राहत सामग्री, जेनरेटर, दवाइयां और नावों की व्यवस्था की है।
रेलवे ने भी कुछ ट्रेनों को रद्द या डायवर्ट करने की घोषणा की है ताकि यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे।
विद्युत विभागों को बिजली लाइनों और ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं –
📞 NDRF हेल्पलाइन: 1078
📞 राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष: 100/101/108

क्या कमजोर होगा यह तूफान?

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मोंथा चक्रवात तटीय जमीन से टकराने से पहले कमजोर हो जाता है, तो बड़े पैमाने पर नुकसान की संभावना कम रहेगी। लेकिन यदि यह गंभीर रूप ले लेता है, तो आने वाले 2–3 दिन पश्चिमी भारत के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

पर्यावरण और जीवन पर असर

चक्रवात के कारण तटीय इलाकों की खेती, नारियल और आम के बागान, तथा मछली पालन उद्योग को नुकसान हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते समुद्री तापमान और जलवायु परिवर्तन भविष्य में ऐसे तूफानों की आवृत्ति को और बढ़ा सकते हैं।

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