नई दिल्ली/जयपुर। NEET अभ्यर्थी प्रदीप मेघवाल की कथित आत्महत्या का मामला अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एक तरफ जहां छात्र की मौत को लेकर युवाओं और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने छात्र के परिवार से मुलाकात कर केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस घटना को केवल एक छात्र की आत्महत्या नहीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार का परिणाम बताया। taazanews24x7.com
इस बीच, प्रदीप मेघवाल को न्याय दिलाने की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन कैंडल मार्च निकाला गया। बड़ी संख्या में छात्र, युवा संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कौन थे प्रदीप मेघवाल?
प्रदीप मेघवाल एक NEET अभ्यर्थी थे, जो मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि परीक्षा और शिक्षा प्रणाली से जुड़ी अनियमितताओं, मानसिक दबाव तथा भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता ने उन्हें इतना परेशान कर दिया कि उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।
हालांकि मामले की जांच अभी जारी है, लेकिन छात्र की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ती अनिश्चितता, पेपर लीक, परीक्षा प्रबंधन में गड़बड़ियां और लगातार बढ़ता मानसिक दबाव युवाओं को गंभीर संकट की ओर धकेल रहा है।
राहुल गांधी ने परिवार से मिलकर जताया दुख
बुधवार को राहुल गांधी ने प्रदीप मेघवाल के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ एक छात्र की मौत नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की विफलता का प्रतीक है जिसने लाखों युवाओं के सपनों को असुरक्षित बना दिया है।
राहुल गांधी ने कहा,
“यह आत्महत्या नहीं, बल्कि भ्रष्ट सिस्टम की देन है। जब युवाओं को न्याय नहीं मिलता, जब परीक्षाओं पर भरोसा खत्म हो जाता है और जब मेहनत के बावजूद भविष्य अनिश्चित हो जाता है, तब ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती हैं।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
सरकार पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के करोड़ों युवा आज रोजगार और शिक्षा से जुड़े संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली गड़बड़ियों ने युवाओं का विश्वास तोड़ दिया है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर परीक्षा प्रणाली पारदर्शी और भरोसेमंद होती, तो शायद कई युवाओं को मानसिक तनाव और निराशा का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को केवल बयान देने के बजाय शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने चाहिए।

तीसरे दिन भी जारी रहा कैंडल मार्च
प्रदीप मेघवाल की मौत के विरोध में लगातार तीसरे दिन कैंडल मार्च निकाला गया। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, सामाजिक संगठन, शिक्षाविद और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में मोमबत्तियां और तख्तियां लेकर न्याय की मांग की। कई युवाओं ने कहा कि यह सिर्फ प्रदीप की लड़ाई नहीं, बल्कि उन लाखों छात्रों की आवाज है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपना सब कुछ दांव पर लगा देते हैं।
कैंडल मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मांग की:
- मामले की उच्च स्तरीय जांच हो।
- दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।
- परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाए।
- छात्रों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई जाए।
- प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई जाए।
छात्र संगठनों का क्या कहना है?
विभिन्न छात्र संगठनों ने प्रदीप मेघवाल की मौत को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि लाखों छात्र वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों की खबरें उनके मनोबल को तोड़ देती हैं।
छात्र नेताओं का कहना है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी अनियमितता का सबसे बड़ा असर उन युवाओं पर पड़ता है, जिन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष तैयारी में लगाए होते हैं।
शिक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
प्रदीप मेघवाल की मौत ने एक बार फिर भारत की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल परीक्षा आयोजित कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि छात्रों के लिए भरोसेमंद, पारदर्शी और तनाव-मुक्त वातावरण तैयार करना भी उतना ही जरूरी है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर अत्यधिक मानसिक दबाव रहता है। ऐसे में संस्थागत सहायता, काउंसलिंग और भावनात्मक समर्थन की व्यवस्था को मजबूत करना समय की जरूरत है।

राजनीतिक रंग भी पकड़ रहा मामला
राहुल गांधी की परिवार से मुलाकात के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस इसे शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के मुद्दे से जोड़ रही है, जबकि सरकार समर्थक पक्ष का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
फिलहाल, जांच एजेंसियां मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। परिवार और प्रदर्शनकारी संगठनों की मांग है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो ताकि प्रदीप मेघवाल की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां सामने आ सकें।
निष्कर्ष
NEET अभ्यर्थी प्रदीप मेघवाल की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। राहुल गांधी की परिवार से मुलाकात और उनके बयान के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ छात्र न्याय की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अब सबकी निगाहें जांच के नतीजों पर टिकी हैं। लेकिन इतना तय है कि प्रदीप मेघवाल की मौत ने प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिसका जवाब देश की व्यवस्था को देना होगा।
राजस्थान: सीकर के प्रदीप मेघवाल की मौत सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल है.
— News Capsule (@newscapsule_) May 27, 2026
NEET पेपर लीक से टूटे प्रदीप ने अपनी जान दे दी।. परिवार पहले ही उसकी पढ़ाई के लिए 11 लाख रुपये के कर्ज़ में डूब चुका था.
नेता विपक्ष राहुल गांधी ने परिवार से साथ निभाने का… pic.twitter.com/tFEHSXDqKW