नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2025: टाटाकैपिटल IPO 2025 से निवेशकों में बढ़ती उम्मीदें, जानिए GMP का पूरा हालऔर विश्लेषण टाटा समूह की प्रमुख वित्तीय सेवा कंपनी टाटा कैपिटल लिमिटेड (Tata Capital Ltd) ने अपना बहुप्रतीक्षित IPO (Initial Public Offering) जारी कर दिया है। यह वर्ष 2025 का अब तक का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है, और देशभर के निवेशकों की निगाहें इस पर टिकी हैं। खास बात यह है कि इसके GMP (Grey Market Premium) में भी दिलचस्प उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। आइए जानते हैं इसके हर पहलू को विस्तार से।
IPO की प्रमुख जानकारियाँ
| बिंदु | विवरण |
| IPO साइज | लगभग ₹15,512 करोड़ |
| प्राइस बैंड | ₹310 से ₹326 प्रति शेयर |
| लॉट साइज | 46 शेयर (₹14,996 न्यूनतम निवेश) |
| एंकर निवेशक निवेश | ₹4,641 करोड़ (LIC प्रमुख खरीदार) |
| IPO खुलने की तारीख | 6 अक्टूबर 2025 |
| बंद होने की तारीख | 8 अक्टूबर 2025 |
| अलॉटमेंट की तारीख | 9 अक्टूबर 2025 |
| लिस्टिंग की तारीख (अनुमानित) | 13 अक्टूबर 2025 |
टाटा कैपिटल के इस IPO में Fresh Issue और Offer For Sale (OFS) दोनों शामिल हैं। कंपनी का उद्देश्य जुटाई गई राशि से अपने पूंजी आधार को मजबूत करना और विभिन्न विस्तार परियोजनाओं को फंड करना है।
GMP क्या है और क्यों महत्वपूर्ण है?
GMP (Grey Market Premium) उस अतिरिक्त कीमत को कहते हैं जिस पर IPO शेयर अनौपचारिक बाजार में लिस्टिंग से पहले खरीदे-बेचे जाते हैं। यह किसी भी IPO के प्रति निवेशकों के उत्साह और भविष्य की मांग का संकेत देता है।
हालांकि, यह याद रखना जरूरी है कि GMP किसी भी सरकारी अथवा सेबी द्वारा नियंत्रित बाज़ार का हिस्सा नहीं होता। यह सिर्फ निवेशकों की धारणा और अनुमान को दर्शाता है।
टाटा कैपिटल IPO का मौजूदा GMP
6 अक्टूबर तक के आंकड़ों के अनुसार, टाटा कैपिटल IPO का GMP लगभग ₹7 से ₹10 प्रति शेयर के आसपास बना हुआ है। यह संकेत देता है कि लिस्टिंग के समय शेयर लगभग 2-3% प्रीमियम पर खुल सकता है।
हालांकि, कुछ दिनों पहले तक GMP ₹24 से ₹36 के स्तर पर देखा गया था, लेकिन बाजार भावना में बदलाव और ओवरसब्सक्रिप्शन की रफ्तार धीमी रहने से इसमें गिरावट आई है। मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह अभी भी एक “सकारात्मक लेकिन सावधान” माहौल को दर्शाता है — यानी निवेशक टाटा ग्रुप के भरोसे को देखते हुए दिलचस्पी दिखा रहे हैं, परंतु भारी प्रीमियम की उम्मीद नहीं कर रहे।
निवेशकों का रुझान और सब्सक्रिप्शन स्थिति
IPO के पहले दिन यानी 6 अक्टूबर को, टाटा कैपिटल का पब्लिक इश्यू करीब 38% सब्सक्राइब हुआ।
कर्मचारियों के कोटे में सबसे ज्यादा भागीदारी देखने को मिली, जबकि खुदरा निवेशकों का रुझान धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार स्थिर होता जाएगा, सब्सक्रिप्शन आंकड़े और मजबूत होंगे।
क्यों है यह IPO खास?
- टाटा ग्रुप का भरोसा: टाटा नाम अपने आप में स्थिरता और पारदर्शिता का प्रतीक है।
- वित्तीय मजबूती: टाटा कैपिटल की ऋण पुस्तक लगातार बढ़ रही है और कंपनी की क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत है।
- डिजिटल विस्तार: कंपनी तेजी से डिजिटल लेंडिंग और फिनटेक समाधानों की ओर बढ़ रही है, जिससे आने वाले वर्षों में ग्रोथ की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
- लाभांश और मुनाफा वृद्धि: पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी का मुनाफा 20% से अधिक बढ़ा है, जो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है।
संभावित जोखिम और चुनौतियाँ
- GMP की अस्थिरता: ग्रे मार्केट प्रीमियम किसी भी समय बदल सकता है।
- बाजार में प्रतिस्पर्धा: NBFC सेक्टर में बजाज फाइनेंस, HDFC फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कंपनियाँ पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं।
- NPA का जोखिम: ऋण वसूली में किसी भी तरह की कमजोरी कंपनी की बैलेंस शीट को प्रभावित कर सकती है।
- IPO मूल्यांकन: कुछ विश्लेषकों के अनुसार, प्राइस बैंड थोड़ा ऊँचा हो सकता है, जिससे लिस्टिंग गेन सीमित रह सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टाटा कैपिटल का यह IPO लॉन्ग टर्म निवेश के नजरिए से आकर्षक है।
हालांकि, शॉर्ट टर्म में GMP प्रीमियम बहुत अधिक न होने की संभावना है।
वहीं, टाटा ग्रुप की साख और कंपनी की ग्रोथ योजनाएँ इसे दीर्घकालिक पोर्टफोलियो में शामिल करने योग्य बनाती हैं।
निष्कर्ष: क्या निवेश करें?
- लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए: भरोसेमंद विकल्प। टाटा ग्रुप की स्थिरता और विकास की क्षमता इसे मजबूत बनाती है।
- शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए: सीमित लिस्टिंग गेन की संभावना। GMP ज्यादा ऊँचा नहीं है, इसलिए सावधानी आवश्यक।
- सलाह: किसी भी निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार की राय अवश्य लें और सिर्फ GMP के आधार पर निवेश न करें।