Kerala का नाम अब ‘Keralam’: इतिहास, भाषा और पहचान से जुड़ा फैसला; जानिए क्यों बदला गया राज्य का नाम

भारत के संघीय ढांचे में राज्यों के नाम सिर्फ भौगोलिक पहचान नहीं होते, वे संस्कृति, भाषा और इतिहास की जीवित अभिव्यक्ति भी होते हैं। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने राज्य का आधिकारिक अंग्रेज़ी नाम Kerala बदलकर ‘Keralam’ (केरलम) करने को मंजूरी दी है। यह कदम लंबे समय से चली आ रही मांग, भाषाई शुद्धता और सांस्कृतिक अस्मिता से जुड़ा बताया जा रहा है। taazanews24x7.com

दक्षिण भारत का यह खूबसूरत राज्य, जिसे आज हम Kerala के नाम से जानते हैं, अब आधिकारिक रूप से ‘Keralam’ कहलाएगा। आइए विस्तार से समझते हैं—केरलम शब्द का अर्थ क्या है, यह मांग कब से उठ रही थी, और आखिर यह फैसला क्यों लिया गया?

‘Kerala’ से ‘Keralam’ क्यों?

1. भाषाई शुद्धता का सवाल

राज्य की आधिकारिक भाषा Malayalam है। मलयालम में राज्य का नाम “കേരളം” लिखा और बोला जाता है, जिसका उच्चारण ‘केरलम’ है।

अंग्रेज़ी में इसे ‘Kerala’ लिखा जाने लगा, जो उच्चारण और मूल शब्द से थोड़ा अलग है। राज्य सरकार और कई सांस्कृतिक संगठनों का मानना था कि आधिकारिक नाम वही होना चाहिए, जो स्थानीय भाषा में प्रचलित है।

2. सांस्कृतिक पहचान को मजबूती

Keralam’ शब्द स्थानीय इतिहास और परंपरा से गहराई से जुड़ा है। यह सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता को सम्मान देने का कदम माना जा रहा है।

3. विधानसभा का प्रस्ताव

राज्य की वामपंथी सरकार ने पहले विधानसभा में नाम बदलने का प्रस्ताव पारित किया था। बाद में इसे केंद्र सरकार को भेजा गया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

‘Keralam’ शब्द का अर्थ क्या है?

इतिहासकारों के अनुसार ‘Keralam’ शब्द की उत्पत्ति को लेकर कई मत हैं:

  • ‘केरा’ का अर्थ है नारियल का पेड़
  • ‘आलम’ का अर्थ है भूमि

इस तरह ‘Keralam’ का अर्थ हुआ—नारियल की भूमि
यह नाम राज्य की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाता है, क्योंकि यहां नारियल के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।

कुछ विद्वान इसे प्राचीन चेरा वंश से भी जोड़ते हैं, जिसने इस क्षेत्र पर शासन किया था।

Kerala भारत का राज्य कैसे बना?

आज का Kerala एक समय अलग-अलग रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था। इनमें प्रमुख थीं:

  • Travancore
  • Cochin
  • मालाबार क्षेत्र (जो मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा था)

भारत की आजादी के बाद भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठी। 1956 में States Reorganisation Act के तहत 1 नवंबर 1956 को Kerala राज्य का गठन हुआ।

तब त्रावणकोर और कोचीन की रियासतों को मिलाकर, साथ में मालाबार क्षेत्र को जोड़कर आधुनिक केरल बनाया गया।

क्या पहले भी बदले गए हैं राज्यों के नाम?

हाँ, भारत में पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं, ताकि स्थानीय भाषा और पहचान को प्राथमिकता दी जा सके।

उदाहरण के तौर पर:

  • Orissa का नाम बदलकर Odisha किया गया
  • Bombay का नाम Mumbai हुआ
  • Madras का नाम Chennai किया गया

इन सभी बदलावों का मकसद स्थानीय पहचान को सम्मान देना था।

केंद्र ने प्रस्ताव क्यों स्वीकार किया?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा राजनीतिक विवाद से अधिक सांस्कृतिक मांग का था। चूंकि ‘Keralam’ शब्द पहले से ही स्थानीय स्तर पर प्रचलित है और संविधान की अनुसूची में राज्यों के नाम अंग्रेज़ी व हिंदी दोनों में दर्ज होते हैं, इसलिए इसे बदलने में बड़ी संवैधानिक बाधा नहीं थी।

संविधान संशोधन के बाद आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी पत्राचार और मानचित्रों में नया नाम लागू होगा।

‘Keralam’ शब्द का अर्थ क्या है?

इतिहासकारों के अनुसार ‘केरलम’ शब्द की उत्पत्ति को लेकर कई मत हैं:

  • ‘केरा’ का अर्थ है नारियल का पेड़
  • ‘आलम’ का अर्थ है भूमि

इस तरह ‘Keralam’ का अर्थ हुआ—नारियल की भूमि
यह नाम राज्य की भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को दर्शाता है, क्योंकि यहां नारियल के पेड़ बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।

कुछ विद्वान इसे प्राचीन चेरा वंश से भी जोड़ते हैं, जिसने इस क्षेत्र पर शासन किया था।

Kerala भारत का राज्य कैसे बना?

आज का Kerala एक समय अलग-अलग रियासतों और प्रशासनिक इकाइयों में बंटा हुआ था। इनमें प्रमुख थीं:

  • Travancore
  • Cochin
  • मालाबार क्षेत्र (जो मद्रास प्रेसीडेंसी का हिस्सा था)

भारत की आजादी के बाद भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठी। 1956 में States Reorganisation Act के तहत 1 नवंबर 1956 को Kerala राज्य का गठन हुआ।

तब त्रावणकोर और कोचीन की रियासतों को मिलाकर, साथ में मालाबार क्षेत्र को जोड़कर आधुनिक केरल बनाया गया।

क्या पहले भी बदले गए हैं राज्यों के नाम?

हाँ, भारत में पहले भी कई राज्यों और शहरों के नाम बदले गए हैं, ताकि स्थानीय भाषा और पहचान को प्राथमिकता दी जा सके।

उदाहरण के तौर पर:

  • Orissa का नाम बदलकर Odisha किया गया
  • Bombay का नाम Mumbai हुआ
  • Madras का नाम Chennai किया गया

इन सभी बदलावों का मकसद स्थानीय पहचान को सम्मान देना था।

केंद्र ने प्रस्ताव क्यों स्वीकार किया?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा राजनीतिक विवाद से अधिक सांस्कृतिक मांग का था। चूंकि ‘Keralam’ शब्द पहले से ही स्थानीय स्तर पर प्रचलित है और संविधान की अनुसूची में राज्यों के नाम अंग्रेज़ी व हिंदी दोनों में दर्ज होते हैं, इसलिए इसे बदलने में बड़ी संवैधानिक बाधा नहीं थी।

संविधान संशोधन के बाद आधिकारिक दस्तावेजों, सरकारी पत्राचार और मानचित्रों में नया नाम लागू होगा।

क्या बदलेगा आम जनता के लिए?

व्यावहारिक रूप से आम लोगों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आएगा।

  • राज्य की सीमाएं वही रहेंगी
  • प्रशासनिक ढांचा वही रहेगा
  • सिर्फ आधिकारिक नाम में परिवर्तन होगा

पासपोर्ट, सरकारी वेबसाइट, केंद्रीय दस्तावेज और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अब ‘Keralam’ नाम का उपयोग किया जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

राज्य की सत्ताधारी वामपंथी सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया है। विपक्ष ने भी इसे बड़े विवाद का मुद्दा नहीं बनाया, क्योंकि यह लंबे समय से उठ रही सांस्कृतिक मांग थी।

हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि नाम बदलने के साथ-साथ राज्य को विकास, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर भी समान ध्यान देना चाहिए।

त्रावणकोर कहां गया?

अक्सर लोग पूछते हैं कि त्रावणकोर नाम क्यों गायब हो गया?

दरअसल, आजादी से पहले त्रावणकोर एक रियासत थी। 1949 में त्रावणकोर और कोचीन का विलय हुआ और ‘त्रावणकोर-कोचीन’ राज्य बना। 1956 में जब भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ, तब मालाबार क्षेत्र को जोड़कर ‘केरल’ राज्य का गठन हुआ।

इस तरह त्रावणकोर ऐतिहासिक नाम बनकर रह गया।

भाषा और पहचान की राजनीति

भारत जैसे बहुभाषी देश में भाषा सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान का आधार है।

केरलम नाम को आधिकारिक दर्जा मिलना इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को संवैधानिक मान्यता दी जा रही है।

क्या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असर पड़ेगा?

संभावना है कि कुछ समय तक पुराने नाम के साथ भ्रम की स्थिति बने, लेकिन धीरे-धीरे नया नाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रचलित हो जाएगा।

जैसे ‘ओडिशा’ को अपनाने में कुछ साल लगे, वैसे ही ‘Keralam’ भी वैश्विक मानचित्र पर अपनी जगह बना लेगा।

निष्कर्ष: नाम से आगे की पहचान

‘केरल’ से ‘Keralam’ का सफर सिर्फ अक्षरों का बदलाव नहीं है। यह भाषा, इतिहास और सांस्कृतिक आत्मसम्मान की कहानी है।

नारियल के पेड़ों, बैकवॉटर, कथकली, आयुर्वेद और उच्च साक्षरता दर के लिए प्रसिद्ध यह राज्य अब अपनी मूल भाषाई पहचान के साथ आगे बढ़ेगा।

आखिरकार, किसी भी समाज की असली ताकत उसकी जड़ों में होती है—और ‘Keralam’ उसी जड़ से जुड़ा नाम है।

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