बैंकिंग सेक्टर से आई एक बड़ी खबर ने सोमवार सुबह शेयर बाजार को झटका दे दिया। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंक IDFC First Bank के शेयरों में 15 से 18 प्रतिशत तक की तेज गिरावट दर्ज की गई। गिरावट की वजह है ₹590 करोड़ के कथित धोखाधड़ी (फ्रॉड) का मामला, जिसकी जानकारी बैंक ने खुद सार्वजनिक की है।
खबर सामने आते ही निवेशकों में घबराहट फैल गई और बाजार खुलते ही स्टॉक धड़ाम हो गया। ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में ही भारी बिकवाली देखी गई, जिससे बैंक का मार्केट कैप हजारों करोड़ रुपये तक घट गया। taazanews24x7.com

क्या है ₹590 करोड़ के फ्रॉड का मामला?
बैंक की ओर से जारी बयान में बताया गया कि हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों में अनियमित लेन-देन की जांच के दौरान करीब ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का अनुमान सामने आया है। फिलहाल यह एक प्रारंभिक आकलन है और विस्तृत फोरेंसिक ऑडिट के बाद आंकड़े में बदलाव संभव है।
बैंक प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार अधिकारियों को जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया है। साथ ही, नियामकीय संस्थाओं को भी इसकी सूचना दे दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला सरकारी फंड्स के प्रबंधन से जुड़ा है, जहां प्रक्रिया में संभावित चूक या मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
हरियाणा सरकार का बड़ा कदम
फ्रॉड की खबर सामने आते ही Haryana सरकार ने तुरंत प्रभाव से IDFC First Bank और AU Small Finance Bank को सरकारी कामकाज के लिए डी-एम्पेनल्ड (de-empanelled) कर दिया।
इसका मतलब है कि फिलहाल ये बैंक राज्य सरकार के किसी भी वित्तीय लेन-देन या सरकारी खातों के संचालन में शामिल नहीं होंगे। इस फैसले ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया, क्योंकि सरकारी बिजनेस किसी भी बैंक के लिए स्थिर आय का महत्वपूर्ण स्रोत होता है।
शेयर में कितनी गिरावट?
सोमवार सुबह जैसे ही बाजार खुला, IDFC First Bank के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई। शुरुआती कारोबार में ही स्टॉक 15-16% तक टूट गया और कुछ समय के लिए 18% तक की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशकों के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा है क्योंकि बैंक ने हाल के वर्षों में खुद को रिटेल-फोकस्ड, मजबूत बैलेंस शीट वाले बैंक के रूप में स्थापित करने की कोशिश की थी।

मार्केट कैप पर असर
तेज गिरावट के चलते बैंक का बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) हजारों करोड़ रुपये तक घट गया। जिन निवेशकों ने हाल ही में इस स्टॉक में एंट्री ली थी, उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रॉड का आकार बैंक के कुल एसेट बेस की तुलना में बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन भरोसे का संकट (Trust Deficit) बाजार के लिए अधिक चिंता का विषय है।
बैंक ने क्या कहा?
IDFC First Bank ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि:
- फ्रॉड की राशि फिलहाल ₹590 करोड़ आंकी गई है।
- विस्तृत जांच जारी है।
- संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
- आंतरिक नियंत्रण (Internal Controls) को और मजबूत किया जाएगा।
बैंक ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी कुल पूंजी पर्याप्त है और इस घटना का उसकी संचालन क्षमता पर कोई तात्कालिक असर नहीं पड़ेगा।
क्या जमाकर्ताओं के लिए खतरा?
हर बार जब किसी बैंक में धोखाधड़ी की खबर आती है, तो आम जमाकर्ताओं में चिंता बढ़ जाती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बैंक की समग्र वित्तीय स्थिति को तत्काल खतरे में डालने वाला नहीं है।
भारत में बैंकिंग सिस्टम कड़े नियामकीय ढांचे के तहत काम करता है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों की निगरानी करता है।
फिलहाल यह मामला एक आंतरिक जांच और सरकारी खातों से जुड़े लेन-देन तक सीमित बताया जा रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में घबराकर फैसला लेने के बजाय तथ्यों का इंतजार करना चाहिए।
ध्यान रखने योग्य बातें:
- फ्रॉड की राशि बैंक की कुल बैलेंस शीट की तुलना में सीमित है।
- बैंक ने स्वयं मामले का खुलासा किया है, जो पारदर्शिता का संकेत है।
- जांच पूरी होने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
- सरकारी डी-एम्पेनलमेंट अस्थायी है या स्थायी, यह आगे तय होगा।
लंबी अवधि के निवेशकों को बैंक के फंडामेंटल्स, कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो और भविष्य की गाइडेंस पर नजर रखनी चाहिए।
बैंकिंग सेक्टर पर असर
इस घटना का असर सिर्फ एक बैंक तक सीमित नहीं रहा। निजी बैंकों के अन्य शेयरों में भी हल्की बिकवाली देखने को मिली।
बाजार में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी खातों के संचालन में नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत है।
पहले भी सामने आए हैं ऐसे मामले
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में समय-समय पर धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहे हैं। हालांकि, नियामकीय निगरानी और डिजिटल ऑडिट सिस्टम के कारण अब ऐसे मामलों का जल्दी खुलासा हो जाता है।
इस केस में भी बैंक ने खुद जांच के दौरान अनियमितता पकड़ी, जो जोखिम प्रबंधन तंत्र के सक्रिय होने का संकेत देता है।

आगे क्या?
- फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का इंतजार।
- नियामकीय एजेंसियों की कार्रवाई।
- हरियाणा सरकार के फैसले की समीक्षा।
- बैंक की ओर से संभावित प्रावधान (Provisioning)।
यदि बैंक पर्याप्त प्रावधान कर लेता है और मामला सीमित दायरे में रहता है, तो स्टॉक में रिकवरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या यह खरीदारी का मौका है?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि तेज गिरावट के बाद वैल्यूएशन आकर्षक हो सकता है, लेकिन जोखिम अभी भी मौजूद है।
जो निवेशक उच्च जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं, वे चरणबद्ध तरीके से निवेश पर विचार कर सकते हैं, जबकि सतर्क निवेशकों को जांच रिपोर्ट आने तक इंतजार करना बेहतर हो सकता है।
निष्कर्ष
₹590 करोड़ की धोखाधड़ी की खबर ने IDFC First Bank के शेयरों को जोरदार झटका दिया है। 15-18% की गिरावट ने यह साफ कर दिया है कि बाजार में भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होता है।
हालांकि बैंक ने पारदर्शिता दिखाते हुए मामले का खुलासा किया और तत्काल कार्रवाई भी की है, लेकिन निवेशकों का विश्वास बहाल करना आसान नहीं होगा।
आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट, नियामकीय कदम और सरकारी निर्णय यह तय करेंगे कि यह गिरावट अस्थायी है या लंबी अवधि की चुनौती।
फिलहाल, बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या बैंक इस संकट से उबरकर अपनी विश्वसनीयता फिर से स्थापित कर पाएगा।
Probe underway; action will be taken against those found guilty, even if the bank is at fault.
— News Arena India (@NewsArenaIndia) February 23, 2026
– Haryana CM Nayab Saini on IDFC First Bank fraud pic.twitter.com/jzox0ChyoV