कुआलालंपुर / नई दिल्ली।
PM MODI का MALAYSIA का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा भारत की विदेश नीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दौरा केवल द्विपक्षीय बैठकों और औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए भारत दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने जा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति में अस्थिरता बढ़ रही है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा कई बड़े संकेत देती है। taazanews24x7.com
भारत और MALAYSIA के बीच संबंध केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी गहरे जुड़े हुए हैं। इस दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में एक “नई शुरुआत” के तौर पर देखा जा रहा है।

ऐतिहासिक रिश्तों की जड़ें: सदियों पुराना जुड़ाव
भारत और MALAYSIA के संबंध आधुनिक कूटनीति से कहीं पहले के हैं। प्राचीन काल में भारतीय व्यापारी, विद्वान और नाविक मलय प्रायद्वीप तक पहुंचते थे। भारतीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं का प्रभाव आज भी MALAYSIA में देखा जा सकता है। रामायण और महाभारत जैसी भारतीय कथाएँ MALAYSIAई संस्कृति में गहराई से रची-बसी हैं।
आधुनिक दौर में भारत और MALAYSIA ने 1957 में MALAYSIA की आज़ादी के बाद औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित किए। समय के साथ यह रिश्ता व्यापार, शिक्षा, रक्षा और प्रवासी भारतीय समुदाय के कारण और मजबूत होता गया।
प्रधानमंत्री मोदी का दौरा क्यों है खास?
PM MODI के नेतृत्व में भारत ने अपनी विदेश नीति को अधिक सक्रिय और परिणामोन्मुखी बनाया है। “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” इसी सोच का परिणाम है, जिसके तहत ASEAN देशों के साथ रिश्तों को नई प्राथमिकता दी गई है। MALAYSIA इस नीति का एक अहम स्तंभ है।
यह दौरा इसलिए भी खास है क्योंकि—
- वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में है
- सप्लाई चेन का पुनर्गठन हो रहा है
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है
- भारत खुद को एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित कर रहा है
इन सभी संदर्भों में प्रधानमंत्री मोदी की MALAYSIA यात्रा बेहद अहम हो जाती है।
द्विपक्षीय व्यापार: आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई
भारत और MALAYSIA के बीच व्यापारिक संबंध लगातार विस्तार कर रहे हैं। MALAYSIA भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार अरबों डॉलर के स्तर पर पहुंच चुका है।
MALAYSIA से भारत को क्या मिलता है?
- पाम ऑयल
- इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर कंपोनेंट
- पेट्रोकेमिकल उत्पाद
- रबर और प्राकृतिक संसाधन
भारत से MALAYSIA को क्या जाता है?
- फार्मास्यूटिकल्स
- ऑटोमोबाइल पार्ट्स
- आईटी और सॉफ्टवेयर सेवाएं
- कृषि और खाद्य उत्पाद
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान व्यापार संतुलन, निवेश बढ़ाने और नए क्षेत्रों में सहयोग पर गंभीर चर्चा होने की उम्मीद है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर पर फोकस किया जा सकता है।

निवेश और उद्योग: “मेक इन इंडिया” को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय समर्थन
भारत की “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” पहल को वैश्विक निवेश की जरूरत है। MALAYSIA की कई कंपनियां पहले से ही भारत में निवेश कर रही हैं। इस दौरे के दौरान—
- मैन्युफैक्चरिंग यूनिट
- लॉजिस्टिक्स
- स्मार्ट सिटी
- इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स
जैसे क्षेत्रों में नए समझौते होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के निवेशकों के लिए और आकर्षक बना सकता है।
रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा: रणनीतिक साझेदारी की रीढ़
भारत और MALAYSIA के रक्षा संबंध बीते वर्षों में मजबूत हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त अभ्यास करती रही हैं और रक्षा प्रशिक्षण में भी सहयोग है।
प्रमुख मुद्दे:
- समुद्री सुरक्षा
- आतंकवाद विरोधी सहयोग
- इंडो-पैसिफिक में स्थिरता
- नौसैनिक अभ्यास
दक्षिण चीन सागर के संदर्भ में भारत और MALAYSIA की साझा चिंताएं हैं। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा क्षेत्रीय सुरक्षा और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के समर्थन का मजबूत संदेश देता है।
डिजिटल इंडिया और टेक्नोलॉजी सहयोग
डिजिटल इंडिया भारत की सबसे सफल पहलों में से एक रही है। UPI, डिजिटल गवर्नेंस और फिनटेक के क्षेत्र में भारत का अनुभव दुनिया के लिए मॉडल बन चुका है।
MALAYSIA के साथ इस दौरे में—
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- साइबर सिक्योरिटी
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- स्टार्टअप इकोसिस्टम
पर सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।
ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन: ग्रीन पार्टनरशिप की ओर
भारत और MALAYSIA दोनों ही जलवायु परिवर्तन की चुनौती को गंभीरता से ले रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन फ्यूल भविष्य का रास्ता हैं।
इस दौरे में—
- सोलर एनर्जी
- ग्रीन हाइड्रोजन
- बायोफ्यूल
- कार्बन उत्सर्जन में कमी
जैसे मुद्दों पर सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
प्रवासी भारतीय: रिश्तों की सबसे मजबूत कड़ी
MALAYSIA में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। ये लोग शिक्षा, व्यापार, राजनीति और संस्कृति में अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान प्रवासी भारतीयों से संवाद कर सकते हैं, जिससे—
- भारत-MALAYSIA संबंधों को भावनात्मक मजबूती
- युवाओं में भारत के प्रति जुड़ाव
- सांस्कृतिक संबंधों का विस्तार
होता है।

शिक्षा, स्किल और युवा साझेदारी
दोनों देशों के बीच शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट में भी सहयोग बढ़ रहा है। भारतीय छात्र MALAYSIA को शिक्षा के एक अहम केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
इस दौरे में—
- छात्र विनिमय कार्यक्रम
- स्किल ट्रेनिंग
- टेक्निकल एजुकेशन
पर भी चर्चा संभव है।
इंडो-पैसिफिक रणनीति में MALAYSIA की भूमिका
भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करना है। MALAYSIA जैसे देशों के साथ मजबूत रिश्ते भारत को ASEAN में भरोसेमंद साझेदार बनाते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा।
वैश्विक राजनीति में संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा वैश्विक मंच पर साफ संदेश देता है कि—
- भारत सहयोग में विश्वास करता है
- भारत संतुलित विदेश नीति अपनाता है
- भारत एशिया की स्थिरता में अहम भूमिका निभा रहा है
निष्कर्ष: भविष्य की साझेदारी की मजबूत नींव
PM MODI का MALAYSIA का दो दिवसीय दौरा भारत-MALAYSIA संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करेगी, बल्कि भारत की “एक्ट ईस्ट पॉलिसी” और वैश्विक रणनीति को भी नई ऊर्जा देगी।
आने वाले समय में इस दौरे के फैसलों का असर व्यापार, सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और लोगों-से-लोगों के रिश्तों में साफ दिखाई देगा।
#WATCH | Kuala Lumpur, Malaysia | Prime Minister Narendra Modi, along with the Prime Minister of Malaysia, Anwar Ibrahim, arrive at the venue where PM Modi will address the members of the Indian diaspora shortly.
— Argus News (@ArgusNews_in) February 7, 2026
(ANI) pic.twitter.com/0DLSR779Ry