SP VENKATESH: साउथ इंडियन सिनेमा का साइलेंट म्यूज़िक मास्टर, जिसने सुरों से गढ़ी भावनाओं की पहचान

चेन्नई।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो पर्दे पर नहीं दिखते, लेकिन हर सीन में महसूस होते हैं। उनकी मौजूदगी शोर नहीं करती, बल्कि भावनाओं के भीतर उतर जाती है। SP VENKATESH (SP Venkatesh) ऐसा ही एक नाम है—साउथ इंडियन फिल्म इंडस्ट्री का वह संगीतकार, जिसने बैकग्राउंड स्कोर और भावनात्मक धुनों से फिल्मों को आत्मा दी। taazanews24x7.com

जब भी मलयालम और तमिल सिनेमा में सादगी, संवेदना और क्लासिकल टच की बात होती है, SP VENKATESH का नाम अपने आप सामने आ जाता है। उन्होंने कभी म्यूज़िक को ग्लैमर नहीं बनाया, बल्कि कहानी का हिस्सा बनाया। यही वजह है कि दशकों बाद भी उनका संगीत सुनते ही दृश्य आंखों के सामने जीवित हो उठते हैं।

शुरुआती जीवन: संगीत से जुड़ाव बचपन से

SP VENKATESH का संगीत सफर किसी अचानक मिली सफलता की कहानी नहीं है। यह सफर बचपन से ही रागों, सुरों और अभ्यास से होकर निकला। एक ऐसे माहौल में पले-बढ़े जहां शास्त्रीय संगीत का सम्मान था, वेंकटेश ने बहुत कम उम्र में यह समझ लिया था कि संगीत सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अनुशासन और साधना है।

उन्होंने शास्त्रीय संगीत की बुनियाद को मजबूत किया। रियाज़, धैर्य और सीखने की ललक—यही तीन चीजें उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनीं। यही वजह रही कि जब वह फिल्म इंडस्ट्री में आए, तो उनका संगीत भीड़ से अलग सुनाई दिया।

फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश: आसान नहीं था रास्ता

साउथ इंडियन सिनेमा में संगीतकार बनना कभी आसान नहीं रहा। यहां पहले से स्थापित दिग्गज मौजूद थे। ऐसे में नए संगीतकार के लिए जगह बनाना चुनौती से कम नहीं था। SP VENKATESH ने भी यह संघर्ष देखा।

शुरुआती दौर में उन्हें छोटे प्रोजेक्ट्स, सीमित बजट और कम पहचान वाले बैनर मिले। लेकिन उन्होंने कभी काम को छोटा नहीं समझा। हर फिल्म के साथ उन्होंने यही कोशिश की कि संगीत कहानी का बोझ न बने, बल्कि उसे आगे बढ़ाए।

धीरे-धीरे इंडस्ट्री ने महसूस किया कि यह संगीतकार अलग है—यह ट्रेंड नहीं, ट्रीटमेंट पर काम करता है।

मलयालम सिनेमा में SP VENKATESH की खास पहचान

SP VENKATESH का नाम खास तौर पर मलयालम सिनेमा में एक संवेदनशील संगीतकार के रूप में उभरा। यहां की फिल्मों में कहानी और अभिनय को प्राथमिकता दी जाती है, और संगीत से उम्मीद होती है कि वह भावनाओं को गहराई दे।

वेंकटेश इस कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरे।

  • पारिवारिक ड्रामा
  • सामाजिक विषय
  • रोमांटिक संवेदनाएं
  • आध्यात्मिक भाव

हर जॉनर में उनका संगीत सहज और असरदार रहा। उन्होंने कभी अनावश्यक शोर नहीं रचा। उनकी धुनें शांत होकर भी गहरी चोट करती हैं।

बैकग्राउंड स्कोर: जहां SP VENKATESH बने मास्टर

अगर SP VENKATESH को किसी एक चीज़ के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है, तो वह है बैकग्राउंड स्कोर। भारतीय सिनेमा में अक्सर गानों को ज्यादा महत्व दिया जाता है, लेकिन वेंकटेश ने यह साबित किया कि बैकग्राउंड म्यूज़िक फिल्म की रीढ़ होता है।

उनका स्कोर—

  • सीन को ओवरपावर नहीं करता
  • संवादों को दबाता नहीं
  • बल्कि भावनाओं को उभारता है

कई फिल्मों में उनके बैकग्राउंड स्कोर ने बिना एक भी शब्द बोले दर्शकों को रुलाया, डराया और सोचने पर मजबूर किया।

संगीत की शैली: सादगी में गहराई

SP VENKATESH की संगीत शैली की सबसे बड़ी पहचान है—सादगी
उन्होंने कभी जरूरत से ज्यादा वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल नहीं किया। उनकी धुनों में—

  • शास्त्रीय रागों की झलक
  • लोक संगीत की मिट्टी
  • और आधुनिक सिनेमा की समझ

तीनों का संतुलन देखने को मिलता है।

यही वजह है कि उनका संगीत समय के साथ पुराना नहीं पड़ता। आज भी जब उनकी रचनाएं सुनी जाती हैं, तो वे उतनी ही प्रासंगिक लगती हैं।

गीतों में भावनात्मक ईमानदारी

SP VENKATESH के गीतों की सबसे बड़ी ताकत है उनकी भावनात्मक ईमानदारी। उन्होंने कभी सिर्फ हिट बनाने के लिए गीत नहीं रचे। उनके लिए गीत कहानी का विस्तार होते थे।

  • प्रेम गीतों में शोर नहीं, ठहराव
  • दुख के गीतों में बनावटीपन नहीं
  • खुशी के गीतों में संयम

यही संतुलन उन्हें अलग बनाता है।

बदलते दौर में भी अपनी पहचान कायम

जब संगीत इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी, सिंथेसाइज़र और डिजिटल साउंड का दौर आया, तब कई संगीतकार पीछे छूट गए। लेकिन SP VENKATESH ने खुद को बदले बिना समय के साथ चलना सीखा। उन्होंने तकनीक को अपनाया, लेकिन संगीत की आत्मा से समझौता नहीं किया। यही वजह रही कि नई पीढ़ी के निर्देशक भी उनके साथ काम करना चाहते रहे।

कम चर्चा, ज्यादा असर

SP VENKATESH उन संगीतकारों में से हैं, जिन्होंने कभी खुद का प्रचार नहीं किया। न बड़े इंटरव्यू, न विवाद, न दिखावा। उनका मानना रहा कि—

“अगर संगीत ईमानदार है, तो वह खुद बोलेगा।”

यह सोच उन्हें मीडिया की चकाचौंध से दूर रखती है, लेकिन दर्शकों के दिलों के बेहद करीब ले जाती है।

इंडस्ट्री में सम्मान और प्रभाव

भले ही SP VENKATESH का नाम पॉप कल्चर में ज्यादा उछाला न गया हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के भीतर उनका सम्मान हमेशा रहा है। निर्देशक, अभिनेता और तकनीशियन उन्हें एक ऐसे संगीतकार के रूप में देखते हैं—

  • जो फिल्म को समझता है
  • जो टीम प्लेयर है
  • जो कहानी को प्राथमिकता देता है

यही गुण उन्हें लंबे समय तक प्रासंगिक बनाए रखते हैं।

युवा संगीतकारों के लिए प्रेरणा

आज के युवा संगीतकार जब SP VENKATESH के काम को देखते हैं, तो उन्हें यह समझ आता है कि—

  • हर हिट लाउड नहीं होता
  • हर पहचान ट्रेंड से नहीं बनती
  • स्थायित्व धैर्य से आता है

उनका करियर बताता है कि अगर बुनियाद मजबूत हो, तो शोर मचाने की जरूरत नहीं पड़ती।

आलोचना और चुनौतियां

हर लंबे करियर की तरह SP VENKATESH को भी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने उनके संगीत को “स्लो” कहा, तो कुछ ने “कमर्शियल नहीं”।

लेकिन उन्होंने कभी अपनी पहचान बदलने की कोशिश नहीं की। उनका मानना रहा कि—

हर फिल्म को एक जैसा संगीत नहीं चाहिए।

आज के दौर में SP VENKATESH की प्रासंगिकता

आज जब सिनेमा तेजी से बदल रहा है, तब भी SP VENKATESH का संगीत प्रासंगिक है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों के दौर में उनकी शैली और ज्यादा फिट बैठती है।

जहां कहानी को सांस लेने की जगह चाहिए, वहां उनका संगीत स्वाभाविक रूप से उभरता है।

निष्कर्ष: सुरों से गढ़ा गया सिनेमा

SP VENKATESH सिर्फ एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक सोच हैं। वह सोच जो मानती है कि संगीत फिल्म का हिस्सा है, न कि सिर्फ सजावट।

उनका योगदान यह याद दिलाता है कि—

  • सिनेमा में साइलेंस भी संगीत होता है
  • भावनाएं वॉल्यूम से नहीं, समझ से पैदा होती हैं
  • और असली कलाकार वही है, जो कहानी के आगे खुद को पीछे रख दे

भारतीय सिनेमा के इतिहास में SP VENKATESH का नाम हमेशा उन कलाकारों में लिया जाएगा, जिन्होंने शांति से, लेकिन गहराई से अपनी छाप छोड़ी।

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